Posts

Showing posts from May, 2021

20. भगवान पर भरोसा

Image
भगवान पर भरोसा [दो शब्द – यह कहानी मेरी नहीं है। मेरे एक दोस्त ने बहुत पहले मुझे व्हाट्सएप पर भेजी थी। शायद उसकी भी न हो, यह कहानी किसकी है, मुझे नहीं मालूम परंतु जिसकी भी है मैं इस कहानी का श्रेय उसी व्यक्ति को देता हूं । जिसने इसे लिखा है।  मुझे मालूम है कि ऐसी घटनाएं बहुत कम घटित होती हैै। ] भगवान पर भरोसा एक पुरानी सी इमारत में था एक वैद्यजी का मकान था। मकान के पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के घर के लिए आवश्यक सामान को एक चिठ्ठी में लिख कर वैद्य जी को पकड़ा देती थी।  वैद्यजी गद्दी पर बैठकर,श पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते, "हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। दुनियादारी मुझे चलानी नहीं आती, बस तू ही संभाल लेना।"  वैद्यजी का एक नियम था कि वे कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, ...

19. (कविता) कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है,

Image
कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. भरा पूरा है परिवार, परंतु संग नहीं है आँख भी ढक लीजिये, संग मुँह के अपने, कहीं आंखों को रास न आए यह देखना कि अंत समय, कंधा देने वाला कोई नहीं है कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. धारती बिकी जल बिका और बिका आकाश रक्त बिका, अंग बिके और बिका विश्वास। हर कोई शामिल है इन गुनाहों में  क़ुसूर मेरा, आपका या किसी एक का नहीं है.. कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. आँसू जानते हैं कौन अपना है तभी तो अपनों के सामने ढलक जाते है। कमबख्त मुस्कुराहट का क्या है, वह तो ग़ैरों से भी वफ़ा कर लेती है..! यह दुनिया है 'जनाब' यहाँ 'मिट्टी' में मिलाने के लिए अपने ही "कन्धों" पर भी उठा लेते हैं ।          🙏 *सुप्रभात* 🙏 लेखक ॐ जितेंद्र सिंह तोमर 12/6/21/5/2021

18. ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।

Image
ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे। जून की कठोर तपती दोपहरी में, जब सड़कें अलाव की तरह तप रही थी। उसी दोपहरी में एक बच्चा नंगे पैर फूल बेच रहा था।  लोग मोलभाव कर रहे थे। वह अपने पैरों को गर्मी से बचाने के लिए कभी एक पैर के ऊपर रखता तो कभी दूसरे पैर के ऊपर। एक सज्जन ने उसके पैर देखे; उसे यह देख कर बहुत दु:ख हुआ। वह भागकर गया और पास ही की एक दुकान से जूते लेकर आया।  उसने उस बच्चे को बुलाया और कहा, "बेटा ! यह ले इन जूतों को पहन ले।"  लड़के ने फटाफट जूते पहने, वह बड़ा खुश हुआ और उस आदमी का हाथ पकड़कर कहने लगा, "अंकल, अंकल ! आप भगवान हो।" वह सज्जन घबराकर बोला, "नहीं..नहीं. बेटा ! मैं भगवान नहीं।"  लड़का फिर से बोला, "ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।"  "वह कैसे?" मैंने प्रश्नवाचक दृष्टि से देश को निहारा। "क्योंकि मैंने कल रात ही भगवान को अरदास की थी कि भगवानजी, मेरे पैर बहुत जलते हैं। मुझे जूते लेकर के दो।"  "तो हुए ना आप भगवान के दोस्त।" वह सज्जन आंखों में खुशी का पानी लिये, मुस्कुराता हुआ चला गया, पर वो जान गया था कि भगवान का...

17. जाति औरत की?

Image
जाति औरत की? [ लेकिन एक दिन कुछ लोगों को औरत की जाति पर चर्चा करते देखा तो दादी की बचपन की बातें याद आ गई जिसमें उन्होंने इसी विषय पर जो बातें बताई थी वे आज भी अक्षरशः याद हैं। ] एक आदमी ने दादी से पूछा, "स्त्री की जाति क्या है?" दादी ने उल्टा ही पूछ लिया, " एक मां की या एक महिला की।" उसने कहा, "चलो दोनों की बता दो।" और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरी। दादी ने भी पूरे धैर्य से बताया– एक महिला जब माँ बनती है, तो वो जाति-विहीन हो जाती है, उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा, "वो कैसे..?" जबाब मिला कि जब एक माँ अपने बच्चे का लालन पालन करती है, अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है, तो वह शूद्र  हो जाती है। शुद्र का कार्य सफाई करना होता है और एक मां वह सब करती है। वही बच्चा जब बड़ा होता है तो माँ नकारात्मक ताकतों और उस पर आने वाली समस्याओं से उसकी रक्षा करती है, तो वह * क्षत्रणी * हो जाती है क्योंकि एक क्षत्रिय का कार्य सुरक्षा करना होता है। जब बच्चा और बड़ा होता है, तो माँ उसे अच्छे बुरे ऊंच-नीच अभी का ज्ञान देकर उसे  शिक्षित करती है और शिक्षा देने का कार्य शि...

16. अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं ?

Image
16. अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं ? (मेरे एक मित्र ने यह कहानी सुनाई तो उसे लिखे बिना नहीं रह सका। शायद आपको भी पसंद आए।) एक पाँच छ: साल का मासूम वह बहुत ही प्यारा सा बच्चा, तीन साल की अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था। छोटी बहन इस सबसे बेफिक्र मंदिर में आने-जाने वालों को देख रही थी। बच्चों के कपड़े धुले हुए और साफ थे शायद साबुन ने मिलने के कारण उन कपड़े में मैल लगा हुआ था, मगर निहायत साफ दिखाई दे रहे थे।, उसके नन्हे नन्हे से गाल आँसूओं से भीग चुके थे। पास में बैठी बहन आपने इतना ने हाथों से उसके आंसू बार-बार पौछ देती थी। बहुत से लोग उनकी तरफ आकर्षित हुए परंतु वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था। इस वक्त कोई भी उनके मध्य नहीं था। मैं उन्हें देखकर वहीं रुक गया। जैसे ही वह उठा तो मैंने उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा, "क्या क्या मांगा भगवान से?" उसने कहा, "मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग।" मैं सन्न रह गया। "मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र।" मेरा दिल मुं...

15. दही का इन्तजाम

Image
15. दही का इन्तजाम जब हरीश लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी। पुत्र जब वयस्क हुआ तो हरीश ने अपना पूरा का पूरा कारोबार पुत्र के शोंप दिया और समय पड़ने पर बेटे की काम में हाथ बटाते। वह बचा हुआ समय स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। हरीश ने अपने पुत्र की शादी एक गरीब किंतु सुशील लड़की से कर दी । शादी के बाद हरीश और अधिक निश्चिंत हो गये। इसके बाद पूरा का पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया। पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद हरीश दोहपर में खाना खा रहे थे, इसी समय पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था। "बहू ! आज तुमने खाने के साथ दही नहीं दिया।" हरीश ने बहु से पूछा। "पिताजी! वह खत्म हो गया है।" बहू ने जवाब दिया। "चलो , कोई बात नहीं।" कहकर हरीश शाम खाना खाने लग गए। यह सब पुत्र ने भी सुना कि आज घर में द...

14. होम डिलीवरी

Image
*Tension ke माहौल में थोड़ी सी हंसी===*  😁😃😄😁😃😄😁😃😄 एक महिला ने किराने वाले को फोन लगाया।  बड़े विनम्र स्वर में बतलाया - "हेल्लो, किराने वाले भैया, मैने सुना है आप, *Home Delivery*  करवा रहे हो।" "कलेक्टर साहब का फरमान निभा रहे हैं।" "सचमुच आप महान हैं।" किराने वाला बोला -  जी हां, बहिन जी बताइए, क्या करूं सेवा।  हमारे यहां उपलब्ध है, हर तरह की मेवा। महिला बोली -  नहीं नहीं भाई साब, मेवे के लड्डू तो मै बहुत खा चुकी हूं।  अब तो दर्द की लहर, शुरु हो चुकी है।  लगता है कुछ होने वाला है, *'नया मेहमान'* आने वाला है। कृपा करके आप आ जाएं या टीम भिजवा दें ।। इस कॉर्फ्यू में, अस्पताल जाना तो झंझट का काम है।  अच्छा होगा आप घर पर ही *Delivery* करवा दें। ऑर्डर सुनकर किराने वाले को लगा *440 volt का झटका।*  दुकान के बाहर जो, बैनर बड़े जतन से था लटका।। जिस पर लिखा था -  *यहां होम डिलीवरी की जाती है।  था सुंदर और बड़े अक्षरों में था लिखवाया।*  उसने उसको, उचक- उचक कर, फाड़ दिया..~~ नया बैनर , शुद्ध हिंदी में लिखवाकर कर टांग दिया। यह...

13. कालू बेटा (एक कहानी)

Image
13. कालू बेटा (एक कहानी) ✍️लॉकडौउन में कुछ लोग पिछले कई दिनों से इस जगह पर खाना बाँट रहे थे।  हैरानी की बात ये थी कि एक कुत्ता हर रोज आता था और किसी न किसी के हाथ से खाने का पैकेट छीनकर ले जाता था।  आज उन्होने एक आदमी की ड्यूटी भी लगाई थी कि खाने को लेने के चक्कर में कुत्ता किसी आदमी को न काट ले। लगभग ग्यारह बजे का समय हो चुका था और भोजन वितरण शुरू हो चुका था। तभी वह कुत्ता तेजी से आया और एक आदमी के हाथ से खाने की थैली छीनकर भाग गया। ड्यूटी वाला लड़का डंडा लेकर, उस कुत्ते के पीछे भागा। कुत्ता भागता हुआ, थोड़ी दूर स्थित एक झोंपड़ी में घुस गया। वह लड़का भी उसका पीछा करता हुआ झोंपड़ी तक पहुंच गया। कुत्ता खाने की वह थैली झोंपड़ी में रख उसके पास बैठा था। उस लड़के ने झोंपड़ी में देखा कि गंदे से कपड़े पहने एक बड़ी सी दाढ़ी वाला आदमी अंदर लेटा हुआ था। उसने उस लड़की को देखा तो उठने की कोशिश की। तो लड़के ने देखा कि उसके एक पैर भी नहीं है वह लंगड़ा है।  "ओ भैया! ये कुत्ता तुम्हारा है क्या?" लड़के ने उस व्यक्ति से पूछा। "यह मेरा कोई कुत्ता नहीं है। यह कालू है मेरा बेटा। इसे कुत्ता मत कहो भाई।...

चौका नं० 03 - मैं चल रहा हूं कि नहीं ? 2. सिर पर पल्लू 3. मास्क का सही उपयोग 4. *पत्नी की विडम्बना..!*

Image
01. मैं चल रहा हूं कि नहीं ? हमारे 50 साल के स्वास्थ्य को बहुत अच्छा पाकर लोग इसका रहस्य पूछ ही बैठते हैं।  "भैया जी ! आप दोनों के स्वास्थ्य का रहस्य क्या है?" "भैया जी, हमने शादी के बाद शर्त रखी कि जब भी झगड़ा होगा तो कुसूरवार को 5 किलोमीटर पैदल चलेगा।" औऱ.. आपकी भाभी जी क़ा कुसूर तो होता ही नहीं है.. इसीलिये मुझे रोज़ 5 किलोमीटर चलना ही पड जाता है।* तो फ़िर भाभी जी की स्वास्थ्य का रहस्य ? वो मेरी आदत से वाकिफ हैं कि मैं कहीं बैठ ना जाऊं इसलिए वो पीछे-पीछे देखने आती है कि मैं चल रहा हूं कि नहीं ? 02. सिर पर पल्लू  सरकारी हॉस्पिटल में 1 व्यक्ति खाँसता हुआ अंदर आया। सारा स्टाफ एकदम सतर्क हो गया. सभी ने उस व्यक्ति को पकड़ा और 1 ने मुँह पर कसकर मास्क बाँध दिया।  डॉक्टर उसका टेस्ट  करने लग गए वो व्यक्ति छटपटा कर उनकी पकड़ से निकलने की कोशिश करता रहा -- परन्तु उसकी कोशिश नाकाम रही, उसने कुछ बताना चाहा परन्तु किसी ने बोलने भी नही दिया। उसकी टेस्ट रिपोर्ट आई तो स्टॉफ ने राहत की साँस ली और उसने कहा की उसे कोरोना नहीं है।  डॉक्टर ने उससे पूछा कि तुम खाँसते हुए अंदर क्यों आये.....

चौका नं० 02 - मैडम का विशेष डाक्टरी ज्ञान TDS, BD और SOS* 02. बम्बई का नाम मुंबई कैसे हुआ?" 03. यह वैक्सीन का साइड इफेक्ट नहीं है, चश्मे का साइड इफेक्ट 04. आपके संपर्क में कौन-कौन आया था ?

Image
चौका नं० 02 01. *मैडम का विशेष डाक्टरी ज्ञान TDS, BD और SOS* एक बार तबीयत खराब हुई तो डॉक्टर से दवाई लेने पहुंचे। डॉक्टर साहब ने पर्ची पर तीन दवाइयां लिखीं : पहली गोली को सामने लिखा TDS,  दूसरी गोली को लिखा BD और  तीसरी  लिखा SOS..!! डाक्टर साहब जब समझाने लगे कि दवाई कैसे लेनी है, तो मैडम बोली :  *डाक्टर साहब समझ गई, इन्हें दवाई मैं दे दूंगी अब जाएं ? हैरान डॉक्टर बोला : *क्या समझे, दवा कैसे दोगे ?*  हमारी मैडम बोली T तड़के D दुपहरे S सांझे *TDS* माने तीन बखत 🌈 *BD* माने भोरे और दुपहरे डॉक्टर बहुत हैरान फिर बोला, "और SOS माने ?"* "जी S सोच O और S समझ के याने जरूरत पड़े तभी ठीक है न ! " डॉक्टर साहब अभी भी... आश्चर्यचकित मुद्रा में, कभी हमारी ओर तो कभी किताबों की देख रहे थे।  😜😜🤣..😊😅🤣😆👍👍👍👇 02. बम्बई का नाम मुंबई कैसे हुआ?"  आजकल शहरों के नामकरण का चर्चा चारों ओर हो रहा था हमारे घर में भी हमारे दोस्त बैठे हुए थे और विभिन्न स्थानों के नामकरण की चर्चा कर रहे थे।  तभी मेरे एक दोस्त ने पूछा, " बम्बई का नाम मुंबई कैसे हुआ?"  कोई कुछ बता र...

चौका नं० 01 - आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का || दो खाओगे या चार ।

Image
चौका नं० 01 शादी के नाम पर दो दो शहरों में तो हमारा जुलूस निकाल दिया।  सारी रात जगा कर रखा और फेरे हुए अगले दिन क्योंकि उसके घर के सभी लोग घोड़े बेच कर सो गए और हम फेरों के इंतजार में बैठे बैठे आधे हो गए। अब तक हमारे समझ में नहीं आया कि सात फेरों के नाम पर जो लड़की हमारे साथ आई है। वह बला क्या है? वह कभी हमें जादूगरनी लगती है तो कभी झांसी की रानी। चलिए इसका प्रूफ भी दे देते हैं। 01. आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का। वही लड़की अब जब घर आई। कुछ समय तो सब कुछ ठीक-ठाक चला, पर एक दिन सुबह-सुबह वह पास आई और बोली, "आपका गोभी का पराठा बनाऊँ या आलू का"  मेरे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई । सांस थी कि जो न अंदर जा रही थी और बाहर। वह गले में ही अटक गई।  दिमाग घूम गया कि कहीं मैं गलती से आसाम या बंगाल की जादूगर्नियों के घर का दामाद तो नहीं बन गया।  बड़ी मुश्किल से मैं बोला पाया, "भाग्यवान ! अभी जिसका जो बना रही हो वही बना लो, मैं जरा एक फोन कर लूं। फिर बताता हूं।" फोन उठाया और अपनी सासू मां को लगाया पूछा, "माताजी ! आसाम या बंगाल में किसी को जानते हो क्या ? " वे ब...

12. दो गज की दूरी, पर पत्नी भी है जरूरी

Image
दो गज की दूरी, पर पत्नी भी है जरूरी भाई आजकल, फैली महामारी ने ऐसा कर दिया है कि लोगों के सोचने समझने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। चलो मैं अपना ही उदाहरण देता हूं। कल रात बिजली चली गई, तो मेने मोमबत्ती जलाई। थोड़ी देर बाद लाइट आई तो मैंने  मोमबत्ती को बुझाने के लिए फूंक मारी। कई बार फूंक मारने के बाद भी  मोमबत्ती बुझ ही नहीं रही थी, तो में बहुत टेंशन में आ गया मुझे लगा कि कहीं  ऑक्सीजन लेवल कम तो नहीं हो गया.. इस विचार से ही पसीना पसीना हो गया। तभी पत्नी जी आई और एक फूंक में मोमबत्ती को बुझा कर खड़ी हो गई। ..फिर बोली फूंक मारने से पहले मास्क तो हटा लेते...। हे भगवान, अब जाकर जान में जान आई.... 😂😂 दो गज की दूरी, पर पत्नी भी है जरूरीी लेखक ॐ जितेंद्र सिंह तोमर 10/6/15/5/2021

10. तो दो बातें हो जाएंगी!

Image
10. तो दो बातें हो जाएंगी जब मैं छोटा था तब जब एक जुमला बहुत चाहता था चलिए आज हम आपको वही जुमला सुनाते हैं । बहुत आनंद आएगा। पिताजी ने अपने बच्चे से कहा, "बेटा ! चल स्कूल।"  "पिताजी ! वहां क्या करेंगे?"  "बेटा वहां पढ़ाई करनी है।"  "उससे क्या होगा ? " "तुम एक बहुत बड़े आदमी बन जाओगे ।" "पर मैं तो स्कूल जाना ही नहीं चाहता।"  "क्यों ?"  "क्योंकि यदि स्कूल गया तो दो बात हो जाएंगी। या  तो मैं नहीं पढ़ुंगा या बहुत पढ़ जाऊंगा।  यदि मैं नहीं पढ़ा तो कोई बात नहीं, यदि मैं बहुत पड़ गया तो दो बातें हो जाएंगी।  या तो मैं कुछ नहीं बनुंगा या मैं कोई बड़ा आदमी बन जाऊंगा। यदि मैं कुछ नहीं बना तो कोई बात नहीं। यदि मैं बड़ा आदमी बन जाऊंगा तो दो बात हो जाएंगी। या तो मैं नौकरी करने वाला बनूंगा या नौकरी देने वाला बनूंगा। यदि में नौकरी करने वाला बना तो कोई बात नहीं । यदि मैं नौकरी देने वाले बना तो दो बातें हो जाएंगी। या तो मैं धन नहीं कमा पाऊंगा या फिर बहुत धन कमाऊंगा। यदि धन नहीं कमा पाया तो कोई बात नहीं। यदि बहुत धनवान हो गया तो द...

11. स्त्रियो का अंतर सौंदर्य

Image
*स्त्रियो  का अंतर सौंदर्य* [बहुत समय पहले बुजुर्गों के बीच बैठे हुए एक बात सुनने का मिली थी। आज लॉकडाउन में याद आई तो वह डायरी खोज कर, मैं वह विचार आपके सामने रखने का प्रयास कर रहा हूं। इसमें एक स्त्री की मन के सौंदर्य का बहुत ही सुंदर वर्णन है। वैसे तो मैंने हर प्रकार से स्त्री सम्मान का प्रयास किया है। फिर भी अगर गलती हो गई होगी तो माफी चाहूंगा। ] आज दिल्ली में रहते 25 साल से भी अधिक का समय बीत गया। मैं लॉक डॉउन में बच्चों के लिए दूध देने के लिए जैसे ही दूध की डेरी पर पहुंचा तो डेयरी वाले ने मुझसे दूध के साथ साथ उसके आन्य उत्पाद जैसी दही, छाछ, मक्खन वह घी आदि की रिक्वायरमेंट पूछी। तभी वहां खड़ी एक सुंदर सी बच्ची के किरिया कलाप को देख कर अचानक मेरे दिमाग में बहुत पहले की घटना याद आ गई । जब मैं बहुत छोटा था । बुजुर्गों के साथ चौपाल पर बैठा हुआ था। इसी समय यह बातें प्रारंभ हुई थी। वास्तव में यह बुजुर्ग कोई और नहीं हमारे राय जी थे जो हमारे कुली अर्थात वंशावली तैयार करते थे। यह उनका ही लेखा जोखा है, आइए उनकी बातों को मैं आपके सामने रखने का प्रयास करता हूं। दूध की डेयरी अर्थात दूध ...

तुम्हारे लिए पत्नी क्या है?

Image
तुम्हारे लिए पत्नी क्या है? कल हरिया ने अपनी पत्नी को दारू पीकर बहुत मारा। उसका कसूर इतना था कि उसनेे बच्चों के लिए केवल खाना मांगा था। आज वह शेर बनकर अपने दोस्तों के बीच बैठा हुआ था वहीं पर रामलाल जी बैठा हुआ था बातों बातों में बात बड़ी तो रामलाल पर आकर अटक गई। उस भीड़ में मैं भी मूक बनकर बैठा था। भीड़ में से एक नहीं रामलाल से पूछा "रामलाल तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो? "मैं नहीं जानता तुम्हारे लिए पत्नी किया है लेकिन मेरे लिए तो है ह सब कुछ है। भाई, मै डरता नही भाई उसकी कद्र करता हूँ । उसका सम्मान करता हूँ। जानना चाहोगे। क्यों?" रामलाल ने जवाब दिया जबाव दिया और पलट प्रश्न किया। वह हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें, ना सुरत,न सीरत है और ना पढी लिखी।" जबाव मिला-" मुझे कोई फरक नही पडता भाई कि वो कैसी है, पर मुझे उसका रिश्ता दुनिया में सबसे प्यारा लगता है।" "जोरू का गुलाम।" उसके मुँह से निकला। और सभी ठहाका लगाकर हंस पड़े। "और सारे रिश्ते कोई मायने नही रखते तेरे लिये। न मां, न बाप, न भाई, न बहन और न दोस्त।" उसने फिर से रामलाल को ...

तू है, ना!

Image
कोरोना महामारी का समय पीक पर था अप्रैल 2021 के अंत की बात है । टीवी समाचारों में लगातार बुरी तरह से केवल और केवल कोरोना की खबरें चल रही थी।  *कहीं लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही थी  *कहीं अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे थे  *लोग जमीन पर इलाज करा रहे थे।  *सैकड़ों की संख्या में मौतें हो रही थी।  *उनके परिवार के लोगों और बच्चों का रोना-धोना देख दख कर। लोगों के दिमाग खराब हो रहा था।  समाचार पत्रों की सुर्खियों में भी केवल और केवल कोरोना और मौत का साया नजर आता था। लोगों ने अखबार पढ़ने बंद कर दिए। टीवी पर ख़बरें देखनी बंद कर दी ।  परंतु हमारे पड़ोसी शिवराम सिंह को बिना टीवी देखें नींद ही नहीं आती थी। कल उनको लगने लगा की उनकी भी तबीयत खराब होती जा रही है। उन्होंने बाजार से करीब ₹2000 का ऑक्सीमीटर खरीदा परंतु भूल गए कि उसने सेल भी पड़ता है। उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया कि अब उनकी जेब बिल्कुल खाली हो चुकी है। वे इतना हड़बड़ा रहे थे कि पड़ोस की दुकान पर पहुंचे और बोले एक छोटा सेल दे दो । वे जबान से साफ-साफ बोले भी नहीं जा रहे थे। दुकानदार ने उन्हें वह सेल दे दिया।...

गब्बर ने ठीक ही कहा था "जो डर गया वो मर गया "

Image
गब्बर ने ठीक ही कहा था  "जो डर गया वो मर गया "  अजीब डर का माहौल है। सर्दी का कोई भी लक्षण दिखे बस महामारी के होने का डर दिल में बैठ जाता है। लेकिन कोरोना नामक महामारी का एक प्रमुख लक्षण स्वाद का चले जाना है जो अक्सर नजला जुकाम में हो जाता है। लेकिन यह घटना मेरे एक दोस्त के साथ करीब एक माह पहले घटित हुई थी। उसी को मैं आपके सामने रखने का प्रयास कर रहा हूं। आज घर का खर्चा ने चलने के कारण शुभम और शोभा में खटपट हो गई। शोभा, शुभम की बीबी आज खाने में नमक डालना भूल गई और उधर पति टेंशन में आ गया कि खाने में स्वाद नहीं आ रहा। वह डर गया और बिना कुछ कहे आफिस निकल लिए, इधर शोभा टेंशन में आ गयी कि बिना पूरा खाना खाये ही ऑफिस के लिए निकल गए ।  जब सुबह खाना खाने लगे तो उसे पता चला कि खाने में नमक डालना ही भूल गई। शोभा डर गई की कही गुस्से में तो नही चले गए।  आफिस उधर शुभम का पूरा दिन टेंशन में गुजर गया । शाम में घर आया और खुद को बिना बोले रिजर्व अर्थात कोरनटाइन कर लिया और शोभा को लगा है कि शायद ऑफिस से कोरोना पॉजिटिव हो गए है।  शोभा भी डर गई । उसने शुभम से पूछा कहीं नाराज तो नह...

भाग्यहीन अमीर

Image
*" भाग्यहीन अमीर " * 100 नम्बर की एक गाड़ी मेन रोड पर एक दो मंजिले मकान के बाहर आकर रुकी। कांस्टेबल को फ़ोन पर यही पता लिखाया गया था।पर यहां तो सभी मकान थे। यहां पर खाना किसने मंगवाया होगा? यही सोचते हुए कांस्टेबल ने उसी नम्बर पर कॉल बैक की। "अभी दस मिनट पहले इस नम्बर से भोजन के लिए फोन किया गया था। आप जीत सिंह जी बोल रहे हैं क्या? हम मकान न० 112 के सामने खड़े हैं, कहाँ आना है।" दूसरी तरफ से जबाब आया, "आप वहीं रुकिए, मैं आ रहा हूं।" एक मिनट बाद 112 न० मकान का गेट खुला और करीब पैंसठ वर्षीय सज्जन बाहर आए। उन्हें देखते ही कांस्टेबल गुस्से में बोले, "आप लोगों को शर्म नही आई, इस तरह से फोन करके खाना मंगवाते हुए, गरीबों के हक का जब आप जैसे अमीर  खाएंगे तो गरीब तक खाना कैसे पहुंचेगा? मेरा यहां तक आना ही बेकार हो गया।" "साहब !  ये शर्म ही है, जो हमें हाथ फैलाने तक ले आयी। सर्विस लगते ही शर्म के मारे लोन लेकर घर बनवा लिया। आधे से ज्यादा सेलरी क़िस्त में कटती रही और आधी बच्चों की परवरिश में जाती रही। अब रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन नही थी तो मकान का एक हिस...

गुमशुदा की तलाश

Image
गुमशुदा की तलाश सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम,   रामपाल एक सेवानिवृत अध्यापक हैं।  अब तक का उसका समय बहुत ही अच्छी तरह से कटा , उसे अच्छी खासी टेंशन में मिलती है। 20 अप्रैल 2020, सुबह दस बजे तक वह एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे। शाम के सात बजते- बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे, जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं। परिवार के सभी सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई देने लगा था । इसी ख़ोफ में उसकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी, जिसमें उसके द्वारा लाए गए पालतू कुत्ते "प्लूटो" का बसेरा है। यह प्लूटो कौन था ?  वास्तव में रामपाल कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और उसे अपने बच्चे की तरह पालपोसकर इसको नाम दिया "प्लूटो"। इस कमरे में अब  रामपाल, उसकी चारपाई और उनका प्यारा प्लूटो का बसेरा हो गया हैं। दोनों बेटों -बहुओं ने उससे दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के शख्त निर्देश दे दिए गए। सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन कर के सूचना दे दी गयी। खबर मुहल्ले भर में आग की तरह फै...

*दिनांक 28 मार्च 2021 श्री बांके बिहारी जी का चमत्कार*

Image
*दिनांक 28 मार्च 2021 श्री बांके बिहारी जी का चमत्कार* होली पर हमारे प्रांतीय इष्ट देव सर्वे सर्वा प्राणाधार श्री बांके बिहारी जी महाराज की कृपा। श्री बिहारी जी के मन्दिर में खचाखच भीड़, 10 बजे का समय आरती की तैयारी। गुलाल बंद, रंग बंद , कुछ समय की असीम शांती, केवल श्री बिहारी जी की आरती। संपूर्ण आरती के दौरान होली के रसिया की भव्य आरती के दर्शन सब को होते रहे थे। सामने न होने के कारण हम उनकी एक कोणीय है छवि ही देख पा रहे थे। परंतु आज रंग और गुलाल के कारण उन्हें एक पॉलिथीन से ढका गया था । ताकि रंग और गुलाल से वे सुरक्षित रहें। सब भक्तों को उनके दर्शन उनके वास्तविक स्वरूप में होते रहें। आरती समाप्त हुई और फिर से रंग और गुलाल की बौछारें शुरू हो गई । पुजारी जी ने बिहारी जी की दाएं खड़े हो पिचकारी से रंग चलाया। लेकिन पुजारियों के द्वारा चलाया गया तो हम तक नहीं पहुंचा और हम उससे वंचित रह गए।  बिहारी जी के दर्शनों के लिए बार-बार पर्दे उठा लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण ठीक से दर्शन नहीं हो पाए । जैसा कि हमने बताया था कि हम केवल एक कोने से ही उनके दर्शन पा रहे थे।  कुछ देर के उपरांत हम...