17. जाति औरत की?
जाति औरत की?
[लेकिन एक दिन कुछ लोगों को औरत की जाति पर चर्चा करते देखा तो दादी की बचपन की बातें याद आ गई जिसमें उन्होंने इसी विषय पर जो बातें बताई थी वे आज भी अक्षरशः याद हैं।]
एक आदमी ने दादी से पूछा, "स्त्री की जाति क्या है?"
दादी ने उल्टा ही पूछ लिया, " एक मां की या एक महिला की।"
उसने कहा, "चलो दोनों की बता दो।" और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरी।
दादी ने भी पूरे धैर्य से बताया– एक महिला जब माँ बनती है, तो वो जाति-विहीन हो जाती है,
उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा, "वो कैसे..?"
जबाब मिला कि जब एक माँ अपने बच्चे का लालन पालन करती है, अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है, तो वह शूद्र हो जाती है। शुद्र का कार्य सफाई करना होता है और एक मां वह सब करती है।
वही बच्चा जब बड़ा होता है तो माँ नकारात्मक ताकतों और उस पर आने वाली समस्याओं से उसकी रक्षा करती है, तो वह *क्षत्रणी* हो जाती है क्योंकि एक क्षत्रिय का कार्य सुरक्षा करना होता है।
जब बच्चा और बड़ा होता है, तो माँ उसे अच्छे बुरे ऊंच-नीच अभी का ज्ञान देकर उसे शिक्षित करती है और शिक्षा देने का कार्य शिक्षा ब्राह्मण का होता है अतः तब वह *ब्राह्मणी* हो जाती है
और अंत में, जब बच्चा और बड़ा हो जाता है तो माँ उसके आय और व्यय में उसका उचित मार्गदर्शन कर अपना *वैश्य* धर्म निभाती है। तब वह एक वैश्याणी होती हैै।
तो अब बताओ कि महिला की जाति कौन सी है। हुई ना एक महिला या मां जाति विहीन।
पर मैंने तो सुना है कि औरत की जाति नहीं होती । वह जिस संग ब्याही जाती है। उसी जाति की हो जाती है।
ठीक सुना है शादी करने के उपरांत एक औरत इन सभी स्थितियों से नहीं गुजरती।
उत्तर सुनकर वह अवाक् रह गया।
उसकी आँखों में महिलाओं या माताओं के लिए सम्मान व आदर का भाव था, और उधर उस महिला को अपने माँ और महिला होने पर पर गर्व का अनुभव हो रहा था।
🙏🏻दादी मां को समर्पित🙏🏻

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