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Showing posts from November, 2022

Delhi sarkar ki karya

इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करते हुए देश की 130 करोड़ जनता जनता तक पहुंचाएं *केजरीवाल की पहचान* *केजरीवाल के काम*। 12 लाख नौकरियां, फ्री सारी दवाइयाँ, फ्री सारे टैस्ट, फ्री पानी, फ्री बिजली, फ्री व अच्छी शिक्षा,  फ्री महिला बस यात्रा , फ्री वाई-फाई, फ्री इलाज व आप्रेशन प्राo हस्पतालों में जरुरत पड़ने पर, फ्री इलाज एक्सीडेंट होने पर प्रा० हस्पतालों में भी, फ्री वृद्ध यात्रा- दिल्ली का श्रवण कुमार रोजगार बाजार, रोजगार एप/पोर्टल, अच्छी सड़क, चाँदनी चौंक कायाकल्प, सिग्नेचर ब्रिज, व्यापारियों पर रेड राज छापेमारी का खात्मा करना, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी सर्विस होम डिलीवरी , 1000 मोहल्ला क्लिनिक,  बाइक एम्बुलेंस योजना, फरिश्ते योजना, कोरोना प्लाजमा बैंक, बाईक एंबुलेंस, बढ़िया सरकारी परिवहन, 24 घंटे बिजली, बसों में कम किराया, बसों में मार्शल, बसों में CCTV, जगह-जगह सीसीटीवी, महिला सुरक्षा, लाखों स्ट्रीट लाइट, ड्राइविंग लाइसेंस आरसी ट्रांसफर की घर घर तक सुविधा पहुंचाना,  अंतरराष्ट्रीय स्तर की लो फ्लोर बसें, स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार फसलों के दाम, उचित पराली प्रबंधन, फसल मुआवजा 50 ...

हाड़ी रानी सहल कंवर -

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हाड़ी रानी सहल कंवर - नाम- बून्दी इतिहास में हाड़ी रानी का नाम सलेह कंवर या सहल कंवर मिलता है। कविराजा श्यामलदास द्वारा रचित वीर विनोद में हाड़ी रानी का नाम कुँवरा बाई का उल्लेख है। जबकि सलूम्बर में हाड़ी रानी का नाम इन्द्र कंवर होने का उल्लेख मिलता है। जन्म - बसन्त पंचमी पिता व वंश- हाड़ी रानी सहल कंवर का जन्म हाड़ा चौहान राजवंश में हुआ था,वे बून्दी नरेश राव राजा शत्रुशाल हाड़ा के पुत्र भूपति सिंह की पौत्री व संग्राम सिंह की पुत्री थी। भूपति सिंह,राव राजा भाव सिंह जी भ्राता थे।जिनका स्मारक क्षार बाग में स्थित है। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि हाड़ी रानी के पिता संग्राम सिंह खटकड़ के जागीरदार थे। बाल्यकाल- सहल कंवर का बचपन बून्दी में ही बिता। हाड़ी रानी को बचपन मे गुरा नामक रोग था।रोग के निदान के लिए शेरनी/बाघिन के दूध की आवश्यकता थी अतः बून्दी नरेश के आदेश पर शेरनी को पकड़ कर लाया गया व बून्दी के एक चौराहे पर बाँधा गया,उस स्थान को आज भी "नाहर का चोहट्टा" के नाम से जाना जाता है।शेरनी का दूध पीने के कारण हाड़ी रानी ,शेरनी की भांति ही निडर,वीरांगना बनी। वे शेरनी के शावकों के सा...

गौ, गंगा, गीता और गायत्री का सम्मान कीजिये

*एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे।* *रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा, मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया!* *अकबर ने पूछा कौन हे ये?* *बीरबल - मेरी माता हे!* *अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया* *और बोला - कितनी माता हैं तुम हिन्दू लोगो की...!* *बीरबल ने उसका जबाब देने की एक तरकीब सूझी!* *आगे एक बिच्छुपत्ती (खुजली वाला ) झाड़ मिला। बीरबल उसे दंडवत प्रणाम कर* *कहा - जय हो बाप मेरे!* *अकबर को गुस्सा आया... दोनों हाथो से झाड़ को उखाड़ने लगा।* *इतने में अकबर को भयंकर खुजली होने लगी तो बोला - बीरबल ये क्या हो गया?* *बीरबल ने कहा आप ने मेरी माँ को मारा इस लिए ये गुस्सा हो गए!* *अकबर जहाँ भी हाथ लगता खुजली होने लगती।* *बोला - बीरबल जल्दी कोई उपाय बतायो!* *बीरबल बोला - उपाय तो है लेकिन वो भी हमारी माँ है। उससे विनती करनी पड़ेगी!* *अकबर बोला - जल्दी करो!* *आगे गाय खड़ी थी बीरबल ने कहा गाय से विनती करो कि...* *हे माता दवाई दो...* *गाय ने गोबर कर दिया... अकबर के शरीर पर उसका लेप करने से फौरन खुजली से राहत मिल गई!* *अकबर बोला - बीरबल अब क्या राजमहल में ऐसे ही जायेंगे?* *बीरबल...

जैसा खाए अन्न, वैसा बनता मन।'

(((( पाप कहां जाते हैं )))) . एक बार एक ऋषि ने सोचा की लोग पाप धोने के लिए सभी लोग गंगा जाते हैं। ऐसे में सारे पार गंगा में ही समा जाते हैं। इस तरह तो गंगा भी पापी हो जाएगी।  . उस ऋषि ने यह जानने के लिए आखिर पाप जाता कहां है, तपस्या की। . तपस्या करने के फलस्वरूप देवगण प्रकट हुए। तब ऋषि ने उनसे पूछा कि गंगा में जो पापा धोया जाता है वह कहां जाता है।  . तब भगवान ने कहा कि चलो गंगा जी से ही पूछते हैं इस बारे में।  . ऋषि और भगवान दोनों ने ही गंगा जी से पूछा कि हे गंगे! सब लोग तुम्हारे यहां पाप धोते हैं तो इसका मतलब क्या आप भी पापी हुईं? . तब गंगा ने कहा कि मैं कैसे पापी हो गई। मैं तो सभी पाप लेकर समुद्र को अर्पित कर देती हूं।  . इसके बाद ऋषि और भगवान समुद्र के पास गए और उनसे पूछा कि हे सागर! गंगा सभी पाप आपको अर्पित कर देती है तो क्या आप पापी हो गए? . तब समुद्र ने कहा कि वो कैसे पापी हुआ। वो सभी सभी पाप को भाप बनाकर बादल बना देता है।  . अब ऋषि और भगवान दोनों ही बादल के पास गए। उनसे पूछा कि हे बादल! समुद्र पापों को भाप बनाकर बादल बना देते हैं तो क्या आप पापी हुए? . बा...

माँ मुझे थोडा आराम करना है..

*😍 "माँ मुझे थोडा आराम करना है..* *"स्कूल, क्लास, पढ़ाई से थक कर बेटी ने माँ से कहा".. 😔* *"अरी बिटिया अच्छी पढ़ाई कर, बाद मे  आराम ही तो करना है".. 😒* *"बिटिया उठी , पढ़ने बैठी और फिर आराम करना तो रह ही गया".. ☺️* *"माँ मुझे थोडा समय दो.. दो घडी आराम कर लू" ऑफिस से थक कर आयी बिटिया ने कहा.." मैं थक गई हू".... 😊* *अरी शादी कर ले और सेटल हो जा.. फिर आराम ही करना है ..* *"बिटिया शादी के लिए तैयार हो गई और.. आराम करना तो रह ही गया".. 😅* *"अरे इतनी क्या जल्दी है.. एकाध साल रुकते है ना".. 🤗* *"अरी समय के साथ बच्चे हो जाए तो टेंशन नहीं , फिर आराम ही आराम है"... 😇* *"बिटिया माँ बन गई और आराम करना तो रह ही गया" ☺️* *"तुम माँ हो.. तुम्हें ही बच्चे के साथ जागना पड़ेगा.. मुझे सुबह ऑफिस जाना है ..बस थोडे दिन.. बच्चे बड़े हो जाए फिर आराम ही आराम है"..... 😊* *"वो बच्चों के लिए कई रातें जागी और आराम करना तो रह ही गया" 😳* *"सुनो जी.. बच्चे अब स्कूल जाने लगे है.. अब तो दो घडी...

रानी सती मंदिर

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रानी सती मंदिर राजस्थान के झुनझुनू शहर के बीचोबीच स्थित रानी सती मंदिर देश के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के अलावा भारत के सबसे अमीर मंदिरों में स्थान रखता है। मंदिर के कई भागों को कांच के द्वारा सजाया गया है वो आज भी देखा जा सकता है। भारत के राजस्थान 13 वीं और 17 वीं शताब्दी के बीच और राजस्थानी महिला रानी सती को समर्पित है। रानी सती को नारायणी देवी भी कहा जाता है । आज इन्हें दादीजी (दादी सती) कहा जाता है। यह मंदिर झुंझुनू की पहाड़ियों पर स्थित है जो पूरे शहर का मनोरम दृश्य भी प्रस्तुत करता है जो मंदिर के आकर्षण में चार चाँद लगाने का कार्य करते है। बाहर से देखने पर यह मंदिर किसी राजमहल जैसा दिखाई देता है। पूरा मंदिर संगमरमर से बना है। इसकी बाहरी दीवारों पर शानदार रंगीन चित्रकारी की गई है। मंदिर में शनिवार और रविवार पर खासतौर पर श्रद्धांलुओं की भीड़ उमड़ती है। रानी सती को समर्पित यह मंदिर 400 साल पुराना है। रानी सती का यह मंदिर सम्मान और शक्ति का प्रतीक है। देश भर से भक्त रानी सती मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। यहां विशेष प्रार्थना करने के साथ ही भाद्रपद माह की अमावस्...