Posts

Showing posts from June, 2025

भजन => मेरो तो आधार श्रीवल्लभ के चरणारविंद..।

Image
मेरो तो आधार श्रीवल्लभ के चरणारविंद..। 👣मेरो तो आधार श्रीवल्लभ के चरणारविंद..। 👣श्रीवल्लभ के चरणारविंद 👣श्रीविठ्ठल के चरणारविंद। 👣मेरे माथे को सिंगार श्रीवल्लभ के चरणारविंद मेरी अखिंयन को सिंगार श्रीवल्लभ के चरणारविन्द हों समरों वारंवार श्रीवल्लभ के चरणारविंद हों ध्याउं वारंवार श्रीवल्लभ के चरणारविंद अरे जामे व्रज को विहार श्रीवल्लभ के चरणारविंद अरे जामे यमुना की धार श्रीवल्लभ के चरणारविन्द अरे कौउ ना पामे पार श्रीवल्लभ के चरणारविंद अरे जाकी लीला अपार श्रीवल्लभ के चरणारविंद अरे जाकी करुणा अपार श्रीवल्लभ के चरणारविंद अरे सब सारन को सार श्रीवल्लभ के चरणारविंद हों जांउं बलिहार श्री वल्लभ के चरणारविंद हों गाऊं वारंवार श्रीविठ्ठल के चरणारविंद मेरे तो आधार श्रीवल्लभ के चरणारविंद.। जशवंतभाई शाह, पूणे। 🙏

उज्जैन के "चार धाम मंदिर"

उज्जैन के "चार धाम मंदिर"  के बारे में विस्तार से जानकारी इस प्रकार है: 🔱  परिचय: उज्जैन का चार धाम मंदिर उज्जैन स्थित  चार धाम मंदिर  एक भव्य धार्मिक स्थल है, जो भारत के चार प्रमुख धामों —  बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम  — की प्रतिकृति के रूप में निर्मित किया गया है। यह मंदिर श्रद्धालुओं को बिना चारों धामों की लंबी यात्राओं के, एक ही स्थान पर दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। 📍  स्थान यह मंदिर  उज्जैन-इंदौर रोड  पर स्थित है,  नानाखेड़ा क्षेत्र  के पास या  हरसिद्धि क्षेत्र  से कुछ किलोमीटर दूर। स्थानीय लोग इसे "मिनी चारधाम" भी कहते हैं। 🕉️  चार धामों की प्रतिकृति बद्रीनाथ धाम (उत्तराखंड) भगवान विष्णु का स्वरूप, जो हिमालय की छाया में स्थित वास्तविक बद्रीनाथ का प्रतीक है। यहाँ शंख, चक्र, गदा धारण किए विष्णु की मूर्ति स्थापित है। द्वारकाधीश धाम (गुजरात) भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश स्वरूप की प्रतिकृति। मंदिर की रचना पश्चिमी भारतीय शैली में की गई है। जगन्नाथ पुरी धाम (ओडिशा) भगव...

२४ खंभा मंदिर" उज्जैन

Image
चौबीस खंबा मंदिर, उज्जैन अवलोकन उज्जैन के  '24 खंभा मंदिर"  इसे " चतुर्विंशतिखंभा मंदिर " या " चौबीस खंभों वाला मंदिर " भी कहा जाता है। मंदिर में दुर्गा सप्तशती, शक्ति उपासना और तांत्रिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि ये 24 खंभे चौबीस मातृकाओं (देवी रूपों) के प्रतीक हैं। खंभों में से निकलती कंपन ऊर्जा: कुछ लोग मानते हैं कि इन खंभों से एक विशेष प्रकार की  ध्वनि तरंगें  या  ऊर्जा कंपन  निकलती हैं, जो ध्यान, तंत्र और मंत्रों के लिए उपयुक्त हैं। मातृशक्ति की गुप्त उपासना: २४ खंभे  २४ मातृकाओं (देवी रूपों)  के प्रतीक माने जाते हैं। भैरव साधना और गुप्त मार्ग: इस मंदिर से जुड़े कुछ स्थानों को  काल भैरव साधना ,  अघोरी परंपरा , और  गुप्त सुरंगों  से भी जोड़ा जाता है। श्री चौबीस खंबा माता मंदिर उज्जैन में स्थित एक पूजनीय आध्यात्मिक स्थल है, जो इस क्षेत्र के धार्मिक परिदृश्य में अपने अनूठे और गहन महत्व के लिए जाना जाता है।  इस शहर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक चौबीस खंभा मंदिर है जो पौराणिक महाकालवन शहर का मूल...

माँ गढ़कालिका

माँ गढ़कालिका 12 शिवा स्वरूपों में एक माँ गढ़कालिका कांचीपुरे तू कामाक्षी, मलये भ्रामरी तथा केरले तु कुमारी सा, अम्बा नर्तेषु संस्थीता, करवीरे महालक्ष्मी कालिका मालवेषुसा, प्रयागे ललितादेवी, विन्ध्ये विन्ध्य निवासिनी, वाराणस्यां विशालाक्षी, गया यां मंगलावती, बंगेषु सुन्दरी देवी, नेपाले गुह्यकेश्वरी, इति द्वादश रुपेण, संस्थीता, भारते शिवा। एतासां दर्शना देव, सर्व पापः प्रमुच्यते ।। अशक्तो दर्शने नित्यं स्मरेत प्रातः समाहितः । तथाप्युपासकः सर्वेरपराधेर्वि मुच्यते ।। वात्सल्यमयी जगत् जननी भगवती महीशक्ति कांचीपुरं अर्थात शिवकांची में श्री कामाक्षी रुप में, मलय प्रदेश में भ्रामरी रूपमे केरल में श्री कुमारी अर्थात कन्याकुमारी, आनर्त अर्थात गुजरात में श्री अम्बाजी गिरनार पर्वत पर रुप में प्रतिष्ठित है । करवीर अर्थात कोल्हापुर में श्री महालक्ष्मी रुप में, मालवा अर्थात उज्जैन में श्री गढ़कालिका शक्तिपीठ रुप में, प्रयाग में श्री ललितादेवी, विन्ध्यगिरि में विंध्यवासिनी, वाराणसी में श्री विशालाक्षी,  गया में मंगलागौरी, बंगाल में श्री सुन्दरीदेवी रुप में, नेपाल में श्री बागमती नदी के तट पर गुह्...
संदीपनी आश्रम  सांदीपनि आश्रम प्राचीन उज्जैन अपने धार्मिक और राजनैतिक वैभव के साथ ही पौराणिक मतानुसार महाभारत काल से ही शिक्षा का केंद्र भी रही है। यहाँ सांदीपनि ऋषि का आश्रम था जहाँ देश देशान्तर से आकर विद्यार्थी विद्योपार्जन किया करते थे। यहीं पर कृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरू सांदीपनि के सानिध्य में विद्यार्जन किया था।  यह आश्रम अंकपात क्षेत्र में विद्यमान है। यहाँ भगवान श्री कृष्ण लिखने की पटिट्याँ घो कर अंक मिटाते थ। अतः इस स्थान का नाम अंकपात पड़ा, महाभारत, श्रीमद भागवत, ब्रम्ह पुराण, अग्नि पुराण, तथा ब्रम्ह वैवर्त पुराण में सांदीपनि आश्रम का उल्लेख मिलता है। पुरातात्विक प्रमाण के रूप में चित्रित धूसर पात्र मिले हैं। जिनका संबंध महाभारत काल से माना जाता है। सान्दीपनि आश्रम पौराणिक परम्परा के अनुसार कुलगुरू संदीपनि के आश्रम में कृष्ण एवं उनके मित्र सुदामा ने विद्यार्जन किया था। महाभारत, श्रीग‌द्भागवत, बह्मपुराण, अग्निपुराण तथा बह्मवैवर्तपुराण में सान्दीपनि आश्रम का उल्लेख मिलता है। इस क्षेत्र में पुरातात्विक प्रमाण के रूप में तीन हजार वर्ष पुराने चित्रित धूसर पात्र मिले ह...

सांदीपनि आश्रम पर आधारित एक सुंदर, भावनात्मक और ऐतिहासिक गहराई से भरी वीडियो स्क्रिप्ट।

यह रही उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम पर आधारित एक सुंदर, भावनात्मक और ऐतिहासिक गहराई से भरी वीडियो स्क्रिप्ट । यह स्क्रिप्ट लगभग 5000 शब्दों की है और इसे आप डॉक्यूमेंट्री-स्टाइल वीडियो, कथा-वाचन या विजुअल यात्रा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। 🎬 वीडियो स्क्रिप्ट शीर्षक: "सांदीपनि आश्रम: श्रीकृष्ण की विद्या यात्रा और भारत की गुरुकुल परंपरा का गौरव" ⏳ परिचय (0:00 – 1:30) (संगीत और मंत्रों के कोमल सुरों के साथ) Narrator (Voiceover): "कभी किसी ने सोचा है कि जिस धरती पर ईश्वर ने स्वयं जन्म लिया… उसी धरती पर वे बालक के रूप में विद्या भी सीखने गए थे? उज्जयिनी की तपोभूमि… जहाँ गूंजती थी वेदों की स्वर-लहरियाँ… जहाँ प्रभु श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरुकुल की परंपरा को पुनः जीवित किया… वह स्थान था – सांदीपनि आश्रम । यह केवल एक आश्रम नहीं… यह एक दिव्य यज्ञस्थली है – जहाँ सच्चा ज्ञान, विनम्रता और ब्रह्मविद्या के बीज बोए जाते थे। आज हम चलें उस दिव्य भूमि की ओर… जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने मानवता के लिए विद्या की नींव रखी।" 🕉️ प्राचीन भारत की शिक्षा परंपरा (1:30 – ...

श्रीकृष्ण ने वहाँ 14 प्रमुख विद्याएं

संदीपनी आश्रम  सांदीपनि आश्रम उज्जैन में मंगलनाथ मंदिर वाले रोड पर स्थित है विद्या स्थली जहां पर श्री कृष्णा बलराम और सुदामा ने विद्या प्राप्त की थी। आज हम आपको इसी स्थान के दर्शन कर रहे हैं। प्राचीन उज्जैन अपने धार्मिक और राजनैतिक वैभव के साथ ही पौराणिक मतानुसार महाभारत काल से ही शिक्षा का केंद्र भी रही है। यहाँ सांदीपनि ऋषि का आश्रम था जहाँ देश देशान्तर से आकर विद्यार्थी विद्योपार्जन किया करते थे। यहीं पर कृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरू सांदीपनि के सानिध्य में विद्यार्जन किया था।  यह आश्रम अंकपात क्षेत्र में विद्यमान है। यहाँ भगवान श्री कृष्ण लिखने की पटिट्याँ घो कर अंक मिटाते थ। अतः इस स्थान का नाम अंकपात पड़ा, महाभारत, श्रीमद भागवत, ब्रम्ह पुराण, अग्नि पुराण, तथा ब्रम्ह वैवर्त पुराण में सांदीपनि आश्रम का उल्लेख मिलता है। पुरातात्विक प्रमाण के रूप में चित्रित धूसर पात्र मिले हैं। जिनका संबंध महाभारत काल से माना जाता है। सान्दीपनि आश्रम पौराणिक परम्परा के अनुसार कुलगुरू संदीपनि के आश्रम में कृष्ण एवं उनके मित्र सुदामा ने विद्यार्जन किया था। महाभारत, श्रीग‌द्भागवत, बह्मपुराण, ...

पर काया प्रवेश भाग 2

आपका प्रश्न अत्यंत गूढ़ और दिव्य साधना-मार्ग से जुड़ा है। परकाय प्रवेश (Parakaya Pravesh) कोई सामान्य योग क्रिया नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत गोपनीय योगिक सिद्धि है — जिसे केवल कुछ महान सिद्धयोगी ही प्राप्त कर पाते हैं। यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई योगी अपने सूक्ष्म शरीर द्वारा किसी दूसरे शरीर में प्रवेश कर लेता है , और उस देह को नियंत्रित करता है। 🔱 भाग 1: परकाय प्रवेश की मूल संकल्पना – "देहातीत अस्तित्व की चाबी" परिभाषा: “परकाय प्रवेश” = पर (दूसरा) + काय (शरीर) + प्रवेश (प्रवेश करना) अर्थात, अपनी आत्म-चेतना को एक अन्य शरीर में प्रवेश कराकर उसे नियंत्रित करना। 🧘‍♂️ भाग 2: योगियों की गोपनीय साधनाएँ: 6 प्रमुख स्तरों में विश्लेषण 🌑 1. शरीर त्याग योग (Deha-Tyaga Yoga) तात्त्विक उद्देश्य स्थूल देह से अलग होना साधनाएँ शवासन समाधि कालाग्नि ध्यान (आत्मा को आग की तरह अनुभव करना) निर्माण चक्र (visualization of death of own body) | अभ्यास | शरीर को निर्जीव-सा बनाकर चेतना को ऊपर उठाना | 👉 इस स्तर पर योगी को लगता है कि वह शरीर नहीं है। 🔥 ...

वर्तमान में परकाय प्रवेश

आपका प्रश्न अत्यंत गूढ़ और रोचक है। आइए इसे दो दृष्टिकोणों से समझते हैं: ✅ प्रश्न 1: क्या वर्तमान में परकाय प्रवेश संभव है? संक्षिप्त उत्तर: परकाय प्रवेश जैसी घटनाएँ आधुनिक काल में अत्यंत दुर्लभ और अदृश्य रूप में ही सामने आती हैं। इसका अभ्यास अत्यंत उच्च कोटि के योगियों द्वारा ही संभव माना जाता है। सामान्य व्यक्ति के लिए यह सिद्धि प्राप्त करना लगभग असंभव है। 🔱 पारंपरिक योगिक मान्यता के अनुसार: आज भी हिमालय या कुछ अत्यंत गोपनीय सिद्धाश्रमों में रहने वाले योगियों के विषय में कहा जाता है कि वे परकाय प्रवेश जैसी शक्तियों में सिद्ध हैं। परंतु वे अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करते । उनका उद्देश्य केवल धर्म, सत्य और करुणा की सेवा होता है। उदाहरण: कुछ कथाएं बाबा त्रैलंग स्वामी , भैरवनाथ योगी और महावतार बाबाजी से जुड़ी हैं, जिनमें परकाय प्रवेश जैसे अनुभवों का संकेत मिलता है, लेकिन कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ✅ प्रश्न 2: आधुनिक विज्ञान परकाय प्रवेश के बारे में क्या कहता है? 🔬 विज्ञान का दृष्टिकोण: वर्तमान आधुनिक विज्ञान (Modern Science) परकाय प्रवेश को न...