होलिका दहन तथा धुलैण्डी (होली)
होलिका दहन तथा धुलैण्डी (होली) *होलाष्टक-10.3.22, 2:56 am से 18 मार्च तक)* *होलिकादहन-17 मार्च,9:01 pm से 10:31 pm* *होली/धुलैण्डी- 18 मार्च* *होलिका दहन के नियम:-* होलिका दहन, धुलैण्डी की पूर्व सन्ध्या पर पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल में किया जाता है। होलिका दहन के नियमो का स्पष्ट रूप से उल्लेख शास्त्रों मे किया गया है, जोकि निम्नलिखित प्रकार से है 1. शास्त्रानुसार होलिका दहन के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। 2. सूर्यास्त के बाद अंधेरा होना चाहिए। इसके साथ ही पूर्णिमा का दिन भी होना चाहिए। 3. भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। 4. यदि ऐसा योग नहीं बैठ रहा हो तो भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन किया जा सकता है, और अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में रंग अर्थात धुलैण्डी का पर्व मनाया जाता है। 5. यदि भद्रा मध्य रात्रि तक हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन करने का विधान है। लेकिन भद्रा मुख में किसी भी सूरत में होलिका दहन नहीं किया जाता। धर्मसिंधु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया ह...