चक्रवर्ती सम्राट भर्तृहरि
चक्रवर्ती सम्राट भर्तृहरि योगीराज भर्तृहरिनाथ के पिता उज्जयनी नरेश महाराजा गन्धर्वसेन थे। महाराजा गन्धर्वसेन की चार सन्तानें थी, भर्तृहरि, विक्रमादित्य, सुभटवीर्य और मैनावती। मैनावती गौड़ बंगाल के शासक राजा माणिकचन्द्र की रानी और योगीराज गोपीचन्द की माता थी। भर्तृहरि विक्रमादित्य के बड़े भाई थे। राजा भर्तृहरि, पराक्रमी सामर्थ्यवान, धैर्यवान, ज्ञान, नीति, विवेक, साम दाम दण्ड भेद से परिपूर्ण न्याय प्रिय चक्रवर्ती राजा थे। एक सौ आठ राजा और अधिराजा उनके चरणदेश में नतमस्तक थे। त्रिलोक सुन्दरी रानी पिंगला उनकी अतिप्रिया भार्या थी। नित्य प्रति महाराज भर्तृहरि की आसक्ति रानी पिंगला में बढ़ती ही गयी। यौवन के वसन्त का विहार होता ही रहा। कभी-कभी उनका मन चिन्तित हो उठता था कि संसार नश्वर है, दुःखालय है इसके समस्त पदार्थ मोह बन्धन में जकड़ने वाले है। निः सन्देह संसार और उसके पदार्थों के परे भी किसी की सत्ता है जो शाश्वत शान्ति और परमानन्द की विधि है। यही जीव का परम लक्ष्य है। आखेट और गुरू गोरक्षनाथ जी से भेंट 2600 वर्ष पूर्व, सम्राट भतृहरि आखेट करने तोरणमाल पर्वत श्रृंखलाओं के घने वन में गये। वहां ...