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108. विक्रम बैताल || कहानी 08 || खाने का दाम ||

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108. विक्रम बैताल || कहानी 08 || खाने का दाम ||  उचित समय आने पर राजा अकेला योगी के मठ पर जा पहुँचा। योगी ने उसे अपने पास बिठा लिया। थोड़ी देर बैठकर राजा विक्रम ने पूछा, “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?” योगी ने कहा, “राजन्, यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर शमशान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा उल्टा लटका हुआ है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ पूजा करता हूँ।” यह सुनकर राजा विक्रम अपने वचन को पूरा करने के लिए शमशान की ओर चल दिया। बड़ी भयंकर रात थी। चारों ओर अँधेरा फैला था। पानी बरस रहा था। भूत-प्रेत शोर मचा रहे थे। साँप आ-आकर पैरों में लिपटते थे। लेकिन हर बाधा को दूर करते हुए निडर राजा विक्रम आगे बढ़ता गया।  जब वह शमशान में पहुँचा तो देखता क्या है कि शेर दहाड़ रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, भूत-प्रेत आदमियों को मार रहे हैं। राजा बेधड़क चलता गया और सिरस के पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ पर रस्सी से बँधा मुर्दा लटक रहा था। पेड़ जड़ से फुनगी तक आग से दहक रहा था। राजा ने सोचा, हो-न-हो, यह वही योगी है, जिसकी बात देव ने बतायी थी। राजा पेड़ पर चढ़ गया और तलवार से रस्सी काट ...

90 साल की उम्रदराज वृद्ध से एक 25 साल के युवक ने पूछा कि अब तबीयत कैसी है दादा! क्या हाल चाल है?

😄                          😄 *90 साल की उम्रदराज वृद्ध से एक 25 साल के युवक ने पूछा कि अब तबीयत कैसी है दादा! क्या हाल चाल है?* *तो संस्कृत का ज्ञाता होने के नाते उस युवक को मन्त्र वाले अंदाज में जवाब दिया कि वृद्धावस्था में क्या हालत होती है, क्या तकलीफ होती है, क्या कष्ट होता है, जरा ध्यान से पढ़ियेगा* आनंद आएगा..🙏 बुढ़ापे का सवाल है😁 ******************* *मुखे न दातं, माथे न बालं,* *बधिर कानं, पोपले गालं,* *दुखं अंगं, सिकुडं खालं* *न शेष सुरं, न शेष तालं,* *वैद्यम् बुलावं, पूछं हालं,* काया अकड़म, मकड़ीम जालं,* *वैद्यम् उवाचं, परहेज पालं,* *चटनी, अचारं सब त्याग डालं,* *अब रोटी ज्वारं च फीकी दालं,* *शांति गुजारं अब शेष सालं,* *भोजन थाली रूखीसूखी घालं,* *देखे बनावे मुख पीत, लालं,* *सब खावे पूड़ी हलवा थालं,* *मुखे टपके टप टप रालं,* *बहुएँ भी टोकं, पौत्रं भी टालं,* *पुत्रम भी अब तो गृहे निकालं,* *सम्मुख आवे जवानी ख़यालं,* *व्याधि तलवारं, बुढ़ापा ढालं* *अब कौन पूछे, ये प्रश्न विशालं,* *न बैंक बैलेंसं, न पास मालं,* *स्वास्थ्य गिरा...