13. कालू बेटा (एक कहानी)
13. कालू बेटा (एक कहानी) ✍️लॉकडौउन में कुछ लोग पिछले कई दिनों से इस जगह पर खाना बाँट रहे थे। हैरानी की बात ये थी कि एक कुत्ता हर रोज आता था और किसी न किसी के हाथ से खाने का पैकेट छीनकर ले जाता था। आज उन्होने एक आदमी की ड्यूटी भी लगाई थी कि खाने को लेने के चक्कर में कुत्ता किसी आदमी को न काट ले। लगभग ग्यारह बजे का समय हो चुका था और भोजन वितरण शुरू हो चुका था। तभी वह कुत्ता तेजी से आया और एक आदमी के हाथ से खाने की थैली छीनकर भाग गया। ड्यूटी वाला लड़का डंडा लेकर, उस कुत्ते के पीछे भागा। कुत्ता भागता हुआ, थोड़ी दूर स्थित एक झोंपड़ी में घुस गया। वह लड़का भी उसका पीछा करता हुआ झोंपड़ी तक पहुंच गया। कुत्ता खाने की वह थैली झोंपड़ी में रख उसके पास बैठा था। उस लड़के ने झोंपड़ी में देखा कि गंदे से कपड़े पहने एक बड़ी सी दाढ़ी वाला आदमी अंदर लेटा हुआ था। उसने उस लड़की को देखा तो उठने की कोशिश की। तो लड़के ने देखा कि उसके एक पैर भी नहीं है वह लंगड़ा है। "ओ भैया! ये कुत्ता तुम्हारा है क्या?" लड़के ने उस व्यक्ति से पूछा। "यह मेरा कोई कुत्ता नहीं है। यह कालू है मेरा बेटा। इसे कुत्ता मत कहो भाई।...