सिखों के लिए दोगुनी ख़ुशी का त्योहार है दिवाली:
सिखों के लिए दोगुनी ख़ुशी का त्योहार है दिवाली: भगवान श्रीराम की तरह लौटे थे छठे गुरु भी, 52 राजाओं को जहाँगीर की कैद से छुड़ाने के लिए अपनाई थी तरकीब सिखों के लिए दिवाली है दुगुने उत्साह का दिन, इसी दिन कैदमुक्त हुए थे गुरु हरगोबिंद बच्चे-बच्चे को पता है कि हम दीपावली अथवा दिवाली का त्योहार इसीलिए मनाते हैं, क्योंकि त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्रीराम लंका में रावण का वध कर के वापस अयोध्या लौटे थे। उन्हें 14 वर्ष का वनवास हुआ था, ये भी बताने की ज़रूरत नहीं है। अपने लोकप्रिय राजा का अयोध्या की जनता ने दीप जला कर और आतिशबाजी से स्वागत किया। लेकिन, क्या आपको पता है कि सिखों के लिए दिवाली दोगुने उत्साह का दिन है? ये दिन गुरु हरगोबिंद से जुड़ा हुआ है और ‘बन्दी छोड़ दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है? आइए, आपको सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी की कहानी सुनाते हैं। सिख समाज के पाँचवें गुरु अर्जन देव जी को जहाँगीर ने सिर्फ इसीलिए मरवा दिया था, क्योंकि उसे पवित्र गुरु ग्रन्थ साहिब के कुछ अंश मुस्लिम विरोध लगे थे और वो उसे हटाने के लिए तैयार यहीं हुए थे। इस तरह की क्रूर मुगलिया करतूतों के बाद सिख...