जम्बू द्वीप से हिन्दुस्थान बनने की कहानी
जम्बू द्वीप से हिन्दुस्थान बनने की कहानी 🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶🔹🔶 सनातन काल में जंबूद्वीप में स्थित था आर्यावर्त । “आर्य” का अर्थ है “ज्ञानी” और “वर्त” क अर्थ है “निवास स्थान” यानी परम ज्ञानी जहाँ निवास करते थे उस प्रदेश को आर्यावर्त कहते थे। आर्यावर्त उप महाद्वीप को ‘भरतखंड’ या ‘भरत भूमी’ भी कहा जाता है। इस उप महाद्वीप के पहले चर्क्रवर्ती थे भरत महाराज। भरत चर्क्रवर्ती के नाम से इस उपखंड का नाम पड़ा भारत। सनातन भारत आज जितना छॊटा नहीं अपितु बहुत बड़ा भूभाग था। पुराणों और वेदों के अनुसार धरती के सात द्वीप थे- जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर। इसमें से जम्बू द्वीप सभी द्वीपों के बीचोबीच स्थित है। जम्बू द्वीप को बाहर से लाख योजन वाले खारे पानी के वलयाकार समुद्र ने चारों ओर से घेरा हुआ है। जम्बू द्वीप का विस्तार एक लाख योजन है। जम्बू (जामुन) वृक्ष के इस द्वीप पर अधिक मात्रा में पाए जाने के कारण इस द्वीप का नाम जम्बू द्वीप रखा गया था। जम्बू द्वीप से छोटा है भारतवर्ष। भारतवर्ष में ही आर्यावर्त स्थित था। आज न जम्बू द्वीप है न भारतवर्ष और न आर्यावर्त। आज सिर्फ ह...