महामृत्युंजय मंत्र पौराणिक महात्म्य एवं विधि
महामृत्युंजय मंत्र पौराणिक महात्म्य एवं विधि 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 महामृत्युंजय मंत्र के जप व उपासना कई तरीके से होती है। काम्य उपासना के रूप में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। जप के लिए अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता है। मंत्र में दिए अक्षरों की संख्या से इनमें विविधता आती है। मंत्र निम्न प्रकार से है 〰〰〰〰〰〰 एकाक्षरी👉 मंत्र- ‘हौं’ । त्र्यक्षरी👉 मंत्र- ‘ॐ जूं सः’। चतुराक्षरी👉 मंत्र- ‘ॐ वं जूं सः’। नवाक्षरी👉 मंत्र- ‘ॐ जूं सः पालय पालय’। दशाक्षरी👉 मंत्र- ‘ॐ जूं सः मां पालय पालय’। (स्वयं के लिए इस मंत्र का जप इसी तरह होगा जबकि किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह जप किया जा रहा हो तो ‘मां’ के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम लेना होगा) वेदोक्त मंत्र👉 महामृत्युंजय का वेदोक्त मंत्र निम्नलिखित है- त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥ इस मंत्र में 32 शब्दों का प्रयोग हुआ है और इसी मंत्र में ॐ’ लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे ‘त्रयस्त्रिशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। श्री वशिष्ठजी ने इन 33 शब्दों के 33 देवत...