भूखी माता और राजा विक्रमादित्य
भूखी माता और राजा विक्रमादित्य के बीच संबंध पूरी तरह लोक परंपरा, मान्यता और रहस्य से जुड़ा हुआ है। इतिहास में स्पष्ट साक्ष्य भले ही न हों, परंतु उज्जैन की जनश्रुति, साधु-संतों की वाणी और परंपरा में यह मान्यता गहराई से समाई हुई है कि: भूखी माता स्वयं विक्रमादित्य की कुलदेवी, नगर-पालिका शक्ति, या देवी-रूप में प्रकट हुई थीं, और राजा विक्रमादित्य ने उनकी सेवा व प्रतिष्ठा का प्रण किया था। आइए इसे क्रमशः समझते हैं — 🕉️ 1. भूखी माता: विक्रम की लोकदेवी राजा विक्रमादित्य , जो उज्जैन के महापराक्रमी सम्राट, न्यायशील और वीर राजा माने जाते हैं, उन्होंने ही उज्जैन को एक धार्मिक नगरी के रूप में प्रतिष्ठित किया। लोक मान्यता के अनुसार: विक्रमादित्य के समय नगर में सूखा , रोग , और संताप फैला। तब भूखी माता ने एक साध्वी रूप में प्रकट होकर नगर की परीक्षा ली। सभी दरबारियों, पुजारियों ने भोग चढ़ाया – पर माता संतुष्ट नहीं हुईं। तब स्वयं राजा विक्रमादित्य ने अपने राजभंडार का अन्न , स्वर्ण-पात्र , और राजभोग उनके चरणों में अर्पित किया। लेकिन माता ने कुछ नहीं लिया। राजा ने हाथ जोड़ कर कहा: ...