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बैलेंसिंग रॉक जबलपुर मध्य प्रदेश

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  मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर अपने आप में कई रहस्यों को समेट हुए है। जहां, यहां पर नर्मदा नदी का सबसे विहंगम दृश्य देखने को मिलता है वहीं यहां हमें धरती की सबसे पुरानी चट्टानें भी देखने को मिल जाती हैं। जबलपुर में धरती की सबसे पुरानी चट्टानें  पर मदन महल नामक किला स्थित है इस कारण इन्हें मदन महल की पहाड़ियों के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं पहाड़ियों में स्थित एक नजारे को जो भी देखता है। वो दांतों तले अंगुली दबा लेता है। जब आप इसके पास जा रहे होंगे तो आपको लगेगा कि जरा संभलकर...कहीं चट्टान गिर ना जाए...  वह नजर कौन सा है। आइए हम दिखाते हैं।  वह नजारा यह है जहां एक चट्टान के ऊपर दूसरी चट्टान हजारों साल से अपने आपको बैलेंस करें हुए बैठी है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसी ही चट्टान है जो अपनी बनावट को लेकर चर्चा में बना रहती है। इसे बैलेंसिंग रॉक कहा जाता है। कई क्विंटल वजनी यह चट्टान महज कुछ इंच के बेस से अपनी जगह पर कैसे खड़ी है। यही सोचकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेता है। प्रकृति की इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक दौड़े चले आते है...

गंगा लहरी

गंगा लहरी लिरिक्स || Ganga Lahari lyrics .               गंगा लहरी स्तोत्र समृद्धं सौभाग्यं सकल वसुधायाः किमपि तत्- महैश्वर्यं लीला जनित जगतः खण्डपरशोः । श्रुतीनां सर्वस्वं सुकृतमथ मूर्तं सुमनसां सुधासौन्दर्यं ते सलिलमशिवं नः शमयतु॥१॥ (हे माँ!) महेश्वर शिव की लीला जनित इस सम्पूर्ण वसुधा की आप ही समृद्धि और सौभाग्य हो, वेदो का सर्वस्व सारतत्व भी आप ही हो. मूर्तिमान दिव्यता की सौंदर्य-सुधायुक्त आपका जल, हमारे सारे अमंगल का शमनकारी हो. दरिद्राणां दैन्यं दुरितमथ दुर्वासनहृदाम् द्रुतं दूरीकुर्वन् सकृदपि गतो दृष्टिसरणिम् । अपि द्रागाविद्याद्रुमदलन दीक्षागुरुरिह प्रवाहस्ते वारां श्रियमयमऽपारां दिशतु नः॥२॥ आपकी दृष्टि मात्र से ही ह्रदय की दुर्वासनाएं और दरिद्रों के दैन्य शीघ्र दूर हो जाते हैं. राग और अविद्या के गुल्म आपके गुरुसम अपार प्रवाह की दीक्षा से समूल नष्ट हो जाएँ और हमें अतुलनीय श्रेय की प्राप्ति हो. उदञ्चन्मार्तण्ड स्फुट कपट हेरम्ब जननी कटाक्ष व्याक्षेप क्षण जनितसंक्षोभनिवहाः। भवन्तु त्वंगंतो हरशिरसि गङ्गातनुभुवः तरङ्गाः प्रोत्तुङ्गा दुरितभव भङ्ग...