बैलेंसिंग रॉक जबलपुर मध्य प्रदेश

 

मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर अपने आप में कई रहस्यों को समेट हुए है। जहां, यहां पर नर्मदा नदी का सबसे विहंगम दृश्य देखने को मिलता है वहीं यहां हमें धरती की सबसे पुरानी चट्टानें भी देखने को मिल जाती हैं।

जबलपुर में धरती की सबसे पुरानी चट्टानें  पर मदन महल नामक किला स्थित है इस कारण इन्हें मदन महल की पहाड़ियों के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं पहाड़ियों में स्थित एक नजारे को जो भी देखता है। वो दांतों तले अंगुली दबा लेता है। जब आप इसके पास जा रहे होंगे तो आपको लगेगा कि जरा संभलकर...कहीं चट्टान गिर ना जाए...

 वह नजर कौन सा है।

आइए हम दिखाते हैं। 

वह नजारा यह है जहां एक चट्टान के ऊपर दूसरी चट्टान हजारों साल से अपने आपको बैलेंस करें हुए बैठी है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसी ही चट्टान है जो अपनी बनावट को लेकर चर्चा में बना रहती है। इसे बैलेंसिंग रॉक कहा जाता है। कई क्विंटल वजनी यह चट्टान महज कुछ इंच के बेस से अपनी जगह पर कैसे खड़ी है। यही सोचकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेता है। प्रकृति की इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक दौड़े चले आते हैं।

22 मई, 1997 में को तीव्रता 6.2 भूकंप ने जबलपुर में भारी तबाही मचाई इस दौरान कई इमारत भूकंप के झटकों से जमींदोज हो गईं। लेकिन पूरे शहर में एक बैलेंसिंग रॉक ही थी, जिस पर भूकंप के झटकों का कोई असर नहीं पड़ा था। ये पत्थर अपने स्थान से हिला तक नहीं था। यही वजह है कि इसे बैलेंसिंग रॉक कहा जाता है जो लोगों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है। 

पुरातत्वविदों का मानना है कि ये चट्टानें मैग्मा के धीरे-धीरे ठंढा होकर ठोस बनने से निर्मित हुई होंगी। कहीं इन चट्टानों का निर्माण ग्रैनाइट मैग्मा से तो कहीं बैसाल्टीय मैग्मा से हुआ हैं। विज्ञान के भाषा में इन बड़ी चट्टानों को ग्रेनाइट बॉक्स भी कहा जाता है। जबलपुर में धरती की सबसे पुरानी ग्रेनाइट चट्टान मौजूद है।

कुछ विशेषज्ञों ने भी इसके रहस्य को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन उनका जवाब यही होता है कि ये पत्थर अपने गुरुत्व केन्द्र के कारण गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा एक दूसरे के ऊपर टिके हुए हैं।


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