तकनीकी 05 || मेटा या मेटावर्स
मेटा: मनचाही दुनिया में रहने की आजादी बचपन में आपने भी 'एलिस इन वंडरलैंड' की कहानी पढ़ी होगी। इसमें एलिस नाम की लड़की किसी अनूठी दुनिया में पहुंच जाती है। कुछ दशक पहले जब मोबाइल इंटरनेट आया तो किसी को अंदाजा नहीं था कि इसके सहारे हम भी किसी अनूठी दुनिया में पहुंच सकते हैं। यह दुनिया है मेटावर्स। वर्चुअल रिएलिटी हमें इससे जोड़कर रखेगी। फेसबुक ने पिछले दिनों कंपनी का नाम बदलते हुए इसका खुलासा किया। लेकिन क्या फेसबुक अकेले ही मेटावर्स तैयार कर रही है? मेटावर्स से हमारी ज़िंदगी किस तरह बदल जाएगी? इस बारे में जानकारी दे रही हैं रजनी शर्मा हम सबको कल्पना की दुनिया अच्छी लगती है। कोई सुपर पावर मिल जाए तो पलक झपकते ही एक जगह से गायब हुए और दूसरी जगह प्रकट हो गए। साइंस-फिक्शन मूवीज़ में भी ऐसा ही दिखाया जाता है। अब कल्पना करें कि हाथ में फोन पकड़ना न पड़े, हवा में हाथ लहरा दें तो हमारे सामने स्क्रीन प्रकट हो जाए। कंप्यूटर हो लेकिन टाइप न करना पड़े, हमारे सोचते ही सब कुछ लिखा हुआ दिखने लगे। घर बैठे-बैठे ही दुनिया के किसी भी मॉल में घूमकर शॉपिंग कर लें। क्या यह सच हो सकता है? इस सवाल का ...