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Showing posts from October, 2021

पंचपर्व में प्रथम पर्व धनतेरस पूजा, मुहूर्त व खरीदारी ?

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धनतेरस पूजा, मुहूर्त  व खरीदारी  ? धनतेरस हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व के बारे में मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था इसीलिए इसे धन्वंतरि जयंती के नाम भी जाना जाता है।  धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त इस बार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 2 नवम्बर सुबह 11:31am से लगेगी जो 3 नवम्बर 9:02 am तक रहेगी। अतः धनतेरस 2 नवम्बर 2021 को ही मनाई जानी चाहिए। धनतेरस का पूजन एवं यम दीप दान 2 नवम्बर 2021 को 6:16 pm से 8:11 pm के मध्य रखना उत्तम रहेगा। प्रदोष काल:-  सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है. प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है। स्थिर लग्न  :- वृषभ काल रहेगा। मुहुर्त समय में होने के कारण घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। उपरोक्त समय में पूजन, शुभ काल मुहूर्त की शुभता से धन, स्वास्थ्य व आयु में शुभता आती है।  धनतेरस क्यों मनाया जाता है? बहुत समय पूर्व जब देव और दानवों के द्वारा  समुद्र मंथन हो ...

करवा चौथ स्पेशल; समस्त नारी शक्ति को नमन (एक कविता)

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*समस्त नारी शक्ति को नमन एवं करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं ।* हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा ना आती मेरे पिता के जीवन में  तब कैसे अस्तित्व होता मेरा। न मुझे धारण करती अपने शरीर में न 9 महीने सुरक्षित रखती कोख में तो कैसे आज गुणगान कर रहा होता तेरा। जन्म दे दुनिया में न कभी लाती मुझको  प्रथम गुरु बन मेरी न कुछ सिखाती मुझको तो न जाने कैसा परिचय होता मेरा। हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा न आती मेरे पिता के जीवन में  तब कैसे अस्तित्व होता मेरा। पुत्र दिए पुत्रियां दी और दिए अनेकों रिश्ते  फिर रिश्तो से ही पहचान बनाती  मां बन अहोई अष्टमी, पत्नी बन करवा चौथ और बहन बन राखी दूज का त्यौहार उठाती। हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा न आती मेरे पिता के जीवन में  तब कैसे अस्तित्व होता मेरा। सोचता था कि बहने कितनी स्वार्थी होती हैं  अपनी सुरक्षा के लिए धागा मेरे हाथ रखती हैं उस धागे की शक्ति ताकत और तेरी कामना से जिंदा हूं सलामत हूं और आज अस्तित्व है मेरा हे बहन रूपी मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा ना आती मेरी बहन बनकर जीवन में मेरे तब कैसे अस्तित्व होता मेरा। सोचत...

फिरोज शाह कोटला किला

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फिरोज शाह कोटला किला   Firoz Shah Kotla Fort फिरोज शाह कोटला किले का स्थान पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली के बीच है.  फिरोज शाह तुगलक  ने 1351 से 1384 तक शहर पर शासन किया. उसे अपने चाचा  मुहम्मद बिन तुगलक  से गद्दी मिली.  किले का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने 1354 में किया था. उसी वर्ष, उन्होंने  फिरोजाबाद  नामक एक शहर की भी स्थापना की. यह शहर  पीर ग़ैब  से  पुराने किले  तक फैला हुआ है और इसकी आबादी लगभग 1,50,000 है. यमुना   नदी  के तट पर शहर और किले की स्थापना की गई थी. किले में मस्जिदों, महलों और मदरसों जैसे कई अन्य स्मारकों का निर्माण किया गया था. बाग़ भी बनाए गए जो बहुत ही ख़ूबसूरत थे.  फ़िरोज़ शाह ने किले और शहर का निर्माण इसलिए किया क्योंकि उनकी पिछली राजधानी  तुगलकाबाद  में पानी की आपूर्ति में समस्या थी. किले में जिन्न फ़िरोज़ शाह कोटला किला  लोगों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले जिन्नों की उपस्थिति के लिए भी जाना जाता है.  इस्लाम ी पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज...