करवा चौथ स्पेशल; समस्त नारी शक्ति को नमन (एक कविता)
*समस्त नारी शक्ति को नमन एवं करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं ।*
हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
ना आती मेरे पिता के जीवन में
तब कैसे अस्तित्व होता मेरा।
न मुझे धारण करती अपने शरीर में
न 9 महीने सुरक्षित रखती कोख में
तो कैसे आज गुणगान कर रहा होता तेरा।
जन्म दे दुनिया में न कभी लाती मुझको
प्रथम गुरु बन मेरी न कुछ सिखाती मुझको
तो न जाने कैसा परिचय होता मेरा।
हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
न आती मेरे पिता के जीवन में
तब कैसे अस्तित्व होता मेरा।
पुत्र दिए पुत्रियां दी और दिए अनेकों रिश्ते
फिर रिश्तो से ही पहचान बनाती
मां बन अहोई अष्टमी, पत्नी बन करवा चौथ
और बहन बन राखी दूज का त्यौहार उठाती।
हे मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
न आती मेरे पिता के जीवन में
तब कैसे अस्तित्व होता मेरा।
सोचता था कि बहने कितनी स्वार्थी होती हैं
अपनी सुरक्षा के लिए धागा मेरे हाथ रखती हैं
उस धागे की शक्ति ताकत और तेरी कामना से
जिंदा हूं सलामत हूं और आज अस्तित्व है मेरा
हे बहन रूपी मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
ना आती मेरी बहन बनकर जीवन में मेरे
तब कैसे अस्तित्व होता मेरा।
सोचता था पत्नी का जीवन में महत्व ही क्या है
आश्रित है वह खाने पीने और वस्त्र के लिए।
अनभिज्ञ था तेरे करवे के व्रत की शक्ति से
शायद जिंदा हूं सलामत हूं उस दिन की भूख-प्यासे से
हे पत्नी रूपी मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
न आती मेरी अर्धांगिनी बनकर जीवन में मेरे
तब कैसे अस्तित्व होता मेरा।
सोचता था बेटी का जीवन में महत्व ही क्या है
वह भी आश्रित है खाने पीने और वस्त्र के लिए।
पुत्र और पुत्री लिखा तो पाया पुत्री बड़ी होती है
जब बेटे साथ छोड़ दें तो है बेटी ही खड़ी होती है।
हे पुत्री रूपी मातृशक्ति सदा ऋणी रहूंगा तेरा
बिन पुत्री कितना अभागा जीवन होता मेरा
हे नारीशक्ति हम पर उपकार है तेरा
सहस्रों नमन, समाज ऋणी रहेगा तेरा
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
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