प्रसाद का महत्त्व
🙏प्रसाद का महत्त्व 🙏 एक सेठजी जोकि बड़े कंजूस थे एक दिन दुकान पर् बेटे को बैठा दिया और बोले:- बिना पैसा लिए किसी को कुछ मत देना,मुझे कुछ जरूरी काम है मैं बस यूं गया और यूं आया.. अकस्मात सेठजी के जाने के पश्चात दुकान पर एक संत आए जो अलग अलग जगह से एक समय की भोजन सामग्री लेते थे, लड़के से कहा:- बेटा जरा नमक दे दो... लड़के ने संत को डिब्बा खोल कर एक चम्मच नमक दे दिया..... सेठ जी आए तो देखा कि एक डिब्बा खुला पड़ा था....... सेठजी ने कहा:- क्या बेचा, बेटा बोला वो जो तालाब के पास संत रहते हैं उनको एक चम्मच नमक दिया था...... डिब्बा देखकर सेठ का माथा ठनका और बोले:- अरे मूर्ख इसमें तो जहरीला पदार्थ है... अब सेठजी भाग कर संतजी के पास गए.... संतजी भगवान के भोग लगाकर थाली लिए भोजन करने बैठे ही थे कि सेठजी दूर से ही बोले:- महाराज जी रुकिए आप जो नमक लाए थे वो जहरीला पदार्थ था,आप भोजन नहीं करें... संतजी बोले:- भाई हम तो प्रसाद लेंगे ही क्योंकि भोग लगा दिया है और भोग लगा भोजन छोड़ नहीं सकते ..... हां, अगर भोग नहीं लगता तो भोजन नहीं करते और भोजन शुरू कर दिया... सेठजी के होश उड़ ...