Posts

Showing posts with the label नर्मदातट में किया गया

नर्मदातट में किया गया ,वेदपाठ,दान, पुण्य अक्षय हो जाता है।

*नर्मदातट में किया गया ,वेदपाठ,दान, पुण्य अक्षय हो जाता है।*     *नारदीय पुराण के उत्तरखण्ड के 77 वें अध्याय के 29 वें श्लोक में ब्रह्मापुत्र सनक जी ने नारद जी से कहा कि -*   *स्नानं करोति शुद्धात्मा स लभेदुत्तमां गतिम्।*   *स्नानं दानं जपो होमो वेदाध्ययनमर्चनम्।*   *सर्वमक्षयतां याति नर्मदायास्तटे कृतम्।।*   ब्रह्मापुत्र सनक जी ने कहा कि हे देवर्षि नारद ! इस भारतवर्ष में सभी स्त्री पुरुष, कहीं न कहीं,कोई न कोई पुण्य करते ही रहते हैं।  पुण्य और पाप तो मन, वाणी,बुद्धि और शरीर इन  से ही होते हैं। पुण्य कर्म और पापकर्म दोनों सदा ही करनेवाले के साथ ही रहते हैं। जब भी पुण्य और पाप कर्मों के भोगने का समय आ जाता है तो वह स्त्री पुरुष, किसी भी स्थान में हो,उसको वहां ही उसी जन्म में ही,उसी काल में ही,उस पुण्य का फल और पाप का फल प्राप्त होता है,यही इस संसार के कर्ता धर्ता,विधाता का विधान है। किन्तु पुण्य क्या है, और पाप क्या है,इसका निर्णय तो शास्त्रों से ही होता है।   *शास्त्रों में कहा गया कर्मविधान ही विधाता का संविधान ...