यादें पुरानी २
पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये उसमें *ENO* डालिये फिर *भटूरे* से फूले पेट को पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये *जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य आप कभी नहीं समझ पायेंगे* *पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को *जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी *लेकिन* इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️ *पढ़ाई* का *तनाव* हमने *पेन्सिल* का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था ...!!!😀 *पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती* और *मोरपंख* रखने से हम *होशियार* हो जाएंगे ... ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था😀 *कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां* जमाने का *विन्यास* हमारा *रचनात्मक कौशल* होता था ...!!!☺️🙏🏻 हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते* तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना हम जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️ *माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई* उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕 *सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के *कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀 एक *दोस्त* को *साईकिल* के बीच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को *पीछे कैरियर* पर *बिठ...