चौसठ योगिनी मंदिर के बारे में 25 अद्भुत जानकारियां
- Get link
- X
- Other Apps
3. गोलकीमठ नाम से प्रसिद्धि
और उस समय यह काल गणना अर्थात खगोल विद्या का बहुत बड़ा केंद्र हुआ करता था। यहां खुले आसमान के नीचे ग्रह और नक्षत्रों की गणना के साथ आयुर्वेद की शिक्षा भी दी जाती थी।
वर्तमान में केवल 64 योगिनी मंदिर को छोड़कर बाकी शाखाओं को संचालित करने वाले भवन अस्तित्व में नहीं हैं।
5. कितना प्राचीन है यह मंदिर ?
इसमें दो प्रवेश द्वार थे जिनमें से एक को बाद में बंद कर दिया गया। बलुआ एवं ग्रेनाईट पत्थरों से निर्मित इस मंदिर की योजना और बनावट बहुत ही अनूठी है।
यहाँ पर बलुआ पत्थर की एक प्रतिमा है जिसे कुषाणकाल दूसरी शती ई. की प्रतिमा माना जाता है। जिससे ऐसा आभास होता है, कि यहाँ इससे भी प्राचीन मंदिर रहे होंगे।
लगभग आठवीं शती ई. की भी चौसठ योगिनियों के आँगन में स्थित गौरीशंकर के मंदिर का निर्माण चेदी महारानी अल्हणा देवी ने अपने पुत्र नरसिंह देव के राज्यकाल में 1155 ई. में करवाया था।
64 योगिनियों की प्रतिमाओं पर 10 वीं शती ई. की लिपि में देवियों के नाम खुदे हैं। जो संस्कृत ग्रंथों से प्रायः भिन्न भिन्न नाम है। प्रतीत होता है कि 10 वीं शती ई. में यह खुली छत का मंदिर था तथा बाद में इस मंदिर की छत बनाई। गर्भगृह की बाहरी दीवार पर लगा शिलालेख बताता है कि महाराजा विजय सिंह जिनका कार्यकाल 1180 से 1195 ई था। विजय सिंह की माता महारानी गोसल देवी यहां नित्य पूजा पाठ करने के लिए आया करती थीं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शैव परंपरा में पारंगत गुजरात की रानी गोसलदेवी ने चौसठ योगिनी मंदिर में गौरी-शंकर मंदिर का निर्माण कराया।
6. 64 योगिनियों के अलावा अन्य देव भी स्थापित है इस मंदिर में?
64 योगिनियों के इस मंदिर के अंदर भगवान शिव, पार्वती ही नहीं और भी देवी देवता भी स्थापित हैं। जो अद्भुत नक्काशी के नमूने है, इनके बाएं हाथ पर या आगे की ओर अष्टभुज गणेश, लक्ष्मी नारायण, वामन देव, नाग देवता व नाग माता दूसरी तरफ या दाएं हाथ पर या पीछे की ओर सूर्य भगवान, तारा देवी, दत्तात्रेय देव और चतुर्भुज गणेश जी विराजमान है।
मंदिर परिसर में चौसठ योगिनियां 64 कक्षों में विराजमान है और कुल मिलाकर यहां 85 मूर्तियां हैं। इस मंदिर के अंदर की मूर्ति को मिलाकर के 95 मूर्तियां हो जाती हैं।
7. चुंबकीय शिवलिंग और घंटा
शिव मंदिर के सामने बिल्कुल बाहर खुले आकाश के नीचे दो शिवलिंग रखे हुए देखे जा सकते हैं। यही पर एक 4 मुखी शिवलिंग भी है जिसे चुंबकीय शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। उन्हीं के साथ 2 घंटे भी आप देख सकते हैं। इनमें से एक घंटा सैकड़ों साल से पुराना व 150 किलो वजनी है। घंटा जो नंदी के ऊपर देख सकते हैं और कहते हैं कि जब इसे बजाया जाता था तो इसकी गूंज लगभग 5 से 10 किलोमीटर के बीच सुनी जा सकती थी।
8. क्या है इस सुरंग का रहस्य
यहां एक सुरंग भी है जो चौंसठ योगिनी मंदिर को गोंड रानी दुर्गावती के महल से जोड़ती है। वर्तमान में यह बंद पड़ी है और दरवाजे पर घुसने से पहले ही ऊंची छतरी के नीचे बनी हुई है।
9. तंत्र मंत्र, इंद्रजाल, जादू सीखने का स्थान
कैसे पहुँचे?
जबलपुर, मध्य प्रदेश के चार प्रमुख नगरों में से एक है ऐसे में यहाँ पहुँचने के लिए यातायात के साधन और शहर के अंदर परिवहन व्यवस्था दोनों ही बेहतर है। मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर डुमना एयरपोर्ट ही है जो मंदिर से लगभग 34 किमी दूर है। इसके अलावा इंदौर का देवी अहिल्याबाई एयरपोर्ट, जबलपुर लगभग 534 किमी की दूरी पर है। जबलपुर मध्य भारत का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है। जंक्शन से चौसठ योगिनी मंदिर की दूरी 22 किमी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों समेत देश के प्रमुख नगरों से सड़क मार्ग के जरिए जबलपुर पहुँचना काफी आसान है।
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment