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शिव-नारायण का विलक्षण प्रेम !

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🙏🙏🌹 !! शिव-नारायण का विलक्षण प्रेम !! 🌹🙏🙏 . ​प्राचीन काल मे सुरमुनिसेवित कैलाश शिखर पर महर्षि गौतम का एक आश्रम था।  . वहाँ एक बार पताल लोक से जगद्विजयी बाणासुर अपने कुलगुरु शुक्राचार्य तथा अपने पूर्वज भगवत शिरोमणि प्रह्लाद, दानवीर बलि एवं दैत्यराज बृषपर्वा के साथ आया और महर्षि गौतम के सम्मानित अतिथि के रूप में रहने लगा।  . एक दिन प्रात:काल वृषपर्वा शौच स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर भगवान् शंकर की पूजा कर रहा था।  . इतने में ही महर्षि गौतम का एक प्रिय शिष्य, जिसका अन्वर्थ नाम शंकरात्मा था और जो अवधूत के देश में उन्मत्त की भाँति विचरता था, विकराल रूप बनाये वहाँ आ पहुंचा और वृषपर्वा तथा उनके सामने रखी हुई शंकर की मूर्ति के बीच मे आकर खड़ा हो गया। . वृषपर्वा को उसका इस प्रकार का उद्धत सा व्यवहार देखकर बडा क्रोध आया। उसने जब देखा कि वह किसी प्रकार नहीं मानता तो चुपके से तलवार निकाल कर उसका सिर धड़से अलग कर दिया।  . जब महर्षि गौतम को यह संवाद मिला तो उनको बडा दुख हुआ, क्योकि शंकरात्मा उन्हें प्राणों से भी अधिक प्रिय था।  . उन्होंने उसके बिना जीवन व्यर्थ समझा...