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अष्टमुख शिव - विराट स्वरूप

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अष्टमुख शिव - विराट स्वरूप 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏        निराकार ब्रह्म शिवजी के वेद , उपनिषद , पुराण सहित अनेक धर्म ग्रंथो में विविध स्वरूप के वर्णन आते है । निराकार से साकार पंचतत्व देवताओ में रुद्र ही शिवजी का प्रधान स्वरूप है । साकार के साथ निराकार के विराट प्राकृतिक रूपो को विविध नामसे आराध किय्या गया है । शिवके सहस्त्र नाम  , अष्टोत्तरशत नाम , द्वादश नाम आराध भी है पर उनमे प्रधान अष्ट स्वरूप है । इन अष्ट स्वरूप के वर्णन के साथ रचा स्तोत्र शिव अभिषेक स्तोत्र है । आदि शंकराचार्य महाराज ने शिवजी के साकार , निराकार , प्रकृताकार ओर ब्रह्माकार स्वरूप का अद्भुत वर्णन करते हुवे शिव स्तवन की रचना की है जो शिव तत्व का पूर्ण वर्णन है । शिवलिंग पर पंचोपचार पूजन के स्थान ये स्तवन , स्तोत्र , नाम स्मरण पाठ द्वारा शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त की जाती है । विविध कार्यो को ही विविध स्वरूप पूजा गया है । महामंत्र ॐ नमः शिवाय के जाप के साथ ये स्तुति , स्तोत्र , स्तवन शीघ्र फलदायी होते है । अपनी रुचि अनुसार कोई भी नित्य पाठ करने से सारी समस्या आ स्व मुक्ति पा...