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Showing posts from July, 2021

35. दोस्तों की सलाह (एक कहानी)

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35. दोस्तों की सलाह (एक कहानी) यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है जो दिल्ली के पटपड़गंज के वैस्ट विनोद नगर में घटित हुई। इसके पात्रों के नाम काल्पनिक है। मेरे दोस्त ने जयपुर में अपने पड़ोस में घटी एक घटना को मुझे बताया। तो मुझे भी कुछ वर्ष पूर्व घठित एक घटना याद आ गई जो एक बुजुर्ग ने पार्क में सुनाई थी। उनकी आपबीती ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया था। आइए बताते हैं कि वह घटना क्या थी? भारत में घूमना जहां स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है वही मानसिक ताकत दे प्रदान करता है वहां हमें प्रकृति का सानिध्य नहीं अपने जैसे अनेक दोस्त भी मिलते हैं ऐसा ही हुआ था राम सिंह के साथ। वह अपने दोस्तों के साथ बैठा हंसी ठट्ठा कर रहा था कि तभी एक बुजुर्ग ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया। "क्या हरिया ? तुझस भी" कहकर रामसिंह एकदम शांत हो गया । साथ में बैठे बुजुर्ग लोग भी शांत हो गए। अचानक आए इस परिवर्तन ने वही पास बैठे मुझे और मेरी पत्नी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। हम दोनों उनकी बात बड़े ध्यान से सुनने लगे। "बुढ़े ! बाल बच्चे कहां हैं?" उसने गढ़वाली भाषा में पूछा था। (मैं यहां उनके शब्दों ...

धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-3

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धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-3 ऑनलाइन बिजनेस में मनी मैनेजमेंट अगर आप ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ी जानकारी से भरपूर पिछले दोनों संडे के पेज नहीं देख सके थे तो कोई बात नहीं। स्टोरी के तीनों पार्ट आप हमारे इसी फेसबुक पेज पर पढ़ सकते हैं। इन्हें पढ़ने के लिए फेसबुक पेज के सर्च बार में #OnlineBusiness टाइप करें। ये लेख मिल जाएंगे।   नई द‍िल्‍ली 'जस्ट ज़िंदगी' में  पिछले दो अंकों  में हमने इस पेज पर ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ी बहुत सारी बातें बताई हैं। इनमें बिजनेस शुरू करने से लेकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने के बारे में बताया गया। इस बार ऑनलाइन पेमंट और उससे जुड़े मुद्दों पर फोकस किया गया है। दरअसल, ऑनलाइन बिजनेस में पेमंट ऑनलाइन लेना भी बहुत जरूरी होता है। एक्सपर्ट्स से बात करके ऑनलाइन पेमंट और बिजनेस से जुड़ी पूरी जानकारी दे रहे हैं राजेश भारती ऑनलाइन बिजनेस में मनी मैनेजमेंट बिजनेस ऑनलाइन तो पेमंट भी ऑनलाइन जरूरी जब आप ऑनलाइन बिजनेस करने की सोच रहे हैं तो पेमंट भी ऑनलाइन लें। हां, अगर कोई कैश देना चाहे तो वह बात अलग है। अब पेटीएम, फोन पे, गूगल ...

धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-1

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ऑनलाइन बिजनेस का मतलब है कि इंटरनेट के जरिए लोगों को घर बैठे चीजें और सेवाएं खरीदने की सुविधा देना। मान लीजिए, अगर किसी को कोई शर्ट या जींस चाहिए, तो वह ई-कॉमर्स वेबसाइट जैसे Flipkart, Amazon आदि से ऑर्डर करता है और कुछ ही दिनों में वह शर्ट या जींस उसके घर डिलिवर हो जाती है। कोरोना की वजह से काफी लोगों की जॉब चली गई है। वहीं जिनकी कोई शॉप आदि है, लॉकडाउन में वह भी बंद रही जिसका असर आमदनी पर पड़ा। हालांकि इस मुश्किल में काफी बिजनेस ऐसे भी रहे जिन पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। ये बिजनेस ऑनलाइन चले और अब काफी ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। अब काफी लोग ऐसे हैं जो अपना बिजनेस ऑनलाइन करना चाहते हैं। छोटे स्तर पर ऑनलाइन बिजनेस कैसे करें या अपने ऑफलाइन बिजनेस को ऑनलाइन कैसे लाएं, इस बारे में एक्सपर्ट्स से जानकारी लेकर बता रहे हैं  राजेश भारती क्या है ऑनलाइन बिजनेस ऑनलाइन बिजनेस का मतलब है कि इंटरनेट के जरिए लोगों को घर बैठे चीजें और सेवाएं खरीदने की सुविधा देना। मान लीजिए, अगर किसी को कोई शर्ट या जींस चाहिए, तो वह ई-कॉमर्स वेबसाइट जैसे Flipkart, Amazon आदि से ऑर्डर करता है और कुछ ...

धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-2

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धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-2: ऐसे पाएं नए ग्राहक आपकी कोई दुकान है। वह ऑनलाइन भी है यानी वेबसाइट से मिले ऑर्डर भी आप डिलिवर करते हैं। अगर वेबसाइट नहीं है तब भी कोई बात नहीं। गूगल पर आप Google My Business के जरिए अपने बिजनेस को प्रमोट कर सकते हैं। हमने पिछले संडे जस्ट ज़िंदगी में बताया था कि ऑनलाइन बिजनेस कैसे शुरू करें। इस बार बातें ऑनलाइन बिजनेस को प्रमोट करने की। बिजनेस ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, उसका प्रमोशन करने की बहुत जरूरत पड़ती है। ऑनलाइन बिजनेस को रफ्तार कैसे दें, इसके बारे में एक्सपर्ट्स से जानकारी लेकर बता रहे हैं राजेश भारती अपने ऑफलाइन बिजनेस को ऑनलाइन प्रमोट करना मान लीजिए, आपकी कोई दुकान है। वह ऑनलाइन भी है यानी वेबसाइट से मिले ऑर्डर भी आप डिलिवर करते हैं। अगर वेबसाइट नहीं है तब भी कोई बात नहीं। गूगल पर आप Google My Business के जरिए अपने बिजनेस को प्रमोट कर सकते हैं। गूगल की यह सुविधा पूरी तरह फ्री है। पहले जानिए Google My Business के फायदे क्या हैं: इस इस प्लैटफॉर्म पर आकर आप अपने बिजनेस को गूगल पर लिस्ट कर सकते हैं यानी कोई ग्राहक जब उस बिजनेस से ज...

34. अब जैसे मर्जी हो वैसे पत्नी रखो। (एक कहानी)

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34. अब जैसे मर्जी हो वैसे पत्नी रखो। मेरे दोस्त ने जयपुर में अपने पड़ोस में घटी एक घटना को मुझे बताया । तो मैं उसे बिना लिखी नहीं रह सका। जितनी उत्सुकता मुझे इस घटना को लिखने में है शायद उतनी ही उत्सुकता आपको इस घटना को पढ़ने में जागेगी। कहते हैं कि एक बात अपनी कितनी भी संताने हो उन्हें पा लेता है और उनकी संता ने मिलकर एक बाप को नहीं पाल पाती यह घटना उसी से संबंधित है। इसे हम क्या कहें ? समझ नहीं आता। इसे हम आजकल की नालायक व संस्कारहीन संतान कहें या केवल अवसरवादी संतान जो केवल अपने माता-पिता के लाभ लेकर बाद में उन्हें दूध में गिरी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर देते हैं। हुआ यह था कि मेरे दोस्त के पड़ोस में एक बुजुर्ग दंपत्ति रहते थे। जिनमें बुजुर्ग का नाम राम तथा उनकी पत्नी का नाम रमा था। राम के उनके दो पुत्र थे और दोनों के एक एक पुत्र यानी उन दंपत्ति को दो बेटे और दो पोते भी थे।  उन्होंने अपनी मेहनत से और पूरे उम्र की कमाई से एक मकान बनाया था, जिसकी कीमत करीब ₹3 करोड़ थी। अब तक सब कुछ बिल्कुल ठीक-ठाक चल रहा था।  पोते हर वक्त दादा-दादा, दादी-दादी कहकर उन दंपतियों के चारों ओर घ...

39. वाह रे बाबा तेरी पुंजी। (एक लघु कथा संस्मरण)

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39 .  *वाह रे बाबा तेरी पुंजी।* (एक लघु कथा संस्मरण) परिक्रमा मार्ग पर अचानक तेज बारिश होने लगी। मैंने बारिश से बचने के लिए आसपास देखा तो बरसते आसमान और टपकते वृक्षों के सिवा ऐसा कोई स्थान नहीं मिला जहाँ मैं खुद को भीगने से बचा सकूँ। तभी मेरी नजर एक संत की कुटिया या चल-घर पर गई। यह चल-घर क्या है ? तो हम आपको बता दें कि आपने परिक्रमा मार्ग पर अधिकतर देखा होगा कि कुछ संतों ने अपने रहने के लिए लोहे की चादर से कुटिया या घर बनवा रखा होता है।जिसके नीचे पहिये भी लगें होते हैं। पहियों पर चलने के कारण ही इन्हें चल-घर नाम दिया गया है। बस ऐसी ही एक कुटिया या चल-घर के आगें तिरपाल लगी थी। मैं भीगने से बचने के लिए उसी के नीचे जाकर खड़ा हो गया। मेरी नजर कुटिया में विराजमान संत पर गई। वो ठाकुर जी के लिए प्रशाद आदि की व्यवस्था के लिए आटा गूंथ रहे थे। मैंने देखा की एक छोटे से स्थान पर एक सिंहसन रखा है। उसी के पास ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के नोटों से भरी एक थाली तथा एक प्लेट में कुछ फल फ्रूट और मिठाइयां रखी है। उनकी नजर मुझ पर पडी तो मैंने उन्हें राधे श्याम की तो उन्होंने भी मुसकुरा कर मुझे राधे राधे कहा...

डॉ. सुरेशचंद्र गौतम उच्चतम् न्यायालयके न्यायाधीश, जो पारिवारिक झगडे सुलझाने वाले न्यायालय से सम्बंधित थे, उन की 10 सलाहें।

डॉ. सुरेशचंद्र गौतम उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश, जो पारिवारिक झगडे सुलझाने वाले न्यायालय से सम्बंधित थे, उन की 10 सलाहें। 1. अपने बेटे और पुत्र वधु को विवाह उपरांत अपने साथ रहने के लिए उत्साहित न करें, उत्तम है उन्हें अलग, यहां तक कि किराये के मकान में भी रहने को कहें, अलग घर ढूढना उनकी परेशानी है। आपका और बच्चों के‌ घरों की अधिक दूरी आप के सम्बंधों को बेहतर बनायेगी। 2. अपनी पुत्र वधु से अपने पुत्र की पत्नी कि तरह व्यवहार करें, न की अपनी बेटी की तरह, आप मित्रवत् हो सकते हैं। आप का पुत्र सदैव आप से छोटा रहेगा, किन्तु उस की पत्नी नहीं, अगर एक बार भी उसे डांट देंगें तो वह सदैव याद रखेगी वास्तविकता में केवल उस की माँ ही उसे डाँटने या सुधारने का एकाधिकार रखती है आप नहीं। 3. आपकी पुत्रवधु की कोई भी आदत या उस का चरित्र किसी भी अवस्था मैं आप की नहीं, आप के पुत्र की परेशानी है, क्योंकि पुत्र व्यस्क है। 4. ईकट्ठे रहते हुए भी अपनी अपनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रखें, उनके कपड़े न धोयें, खाना न पकायें या आया का काम न करें, जब तक पुत्रवधू उसके लिए आप से प्रार्थना न करे, और अगर आप ये करने में सक्षम हैं,...

106. विक्रम बैताल || कहानी 06 || परहित का चिंतन

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          106. विक्रम बैताल                 || कहानी 06 ||               * परहित का चिंतन * उचित समय आने पर राजा अकेला योगी के मठ पर जा पहुँचा। योगी ने उसे अपने पास बिठा लिया। थोड़ी देर बैठकर राजा विक्रम ने पूछा, “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?” योगी ने कहा, “राजन्, यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर शमशान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा उल्टा लटका हुआ है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ पूजा करता हूँ।” यह सुनकर राजा विक्रम अपने वचन को पूरा करने के लिए शमशान की ओर चल दिया। बड़ी भयंकर रात थी। चारों ओर अँधेरा फैला था। पानी बरस रहा था। भूत-प्रेत शोर मचा रहे थे। साँप आ-आकर पैरों में लिपटते थे। लेकिन हर बाधा को दूर करते हुए निडर राजा विक्रम आगे बढ़ता गया।  जब वह शमशान में पहुँचा तो देखता क्या है कि शेर दहाड़ रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, भूत-प्रेत आदमियों को मार रहे हैं। राजा बेधड़क चलता गया और सिरस के पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ पर रस्सी से बँधा मुर्दा लटक रहा था। ...