धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-3

धन्यवाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन बिजनेस पार्ट-3
ऑनलाइन बिजनेस में मनी मैनेजमेंट

अगर आप ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ी जानकारी से भरपूर पिछले दोनों संडे के पेज नहीं देख सके थे तो कोई बात नहीं। स्टोरी के तीनों पार्ट आप हमारे इसी फेसबुक पेज पर पढ़ सकते हैं। इन्हें पढ़ने के लिए फेसबुक पेज के सर्च बार में #OnlineBusiness टाइप करें। ये लेख मिल जाएंगे।

 
नई द‍िल्‍ली
'जस्ट ज़िंदगी' में पिछले दो अंकों में हमने इस पेज पर ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ी बहुत सारी बातें बताई हैं। इनमें बिजनेस शुरू करने से लेकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने के बारे में बताया गया। इस बार ऑनलाइन पेमंट और उससे जुड़े मुद्दों पर फोकस किया गया है। दरअसल, ऑनलाइन बिजनेस में पेमंट ऑनलाइन लेना भी बहुत जरूरी होता है। एक्सपर्ट्स से बात करके ऑनलाइन पेमंट और बिजनेस से जुड़ी पूरी जानकारी दे रहे हैं राजेश भारती
ऑनलाइन बिजनेस में मनी मैनेजमेंट

ऑनलाइन बिजनेस में मनी मैनेजमेंट

बिजनेस ऑनलाइन तो पेमंट भी ऑनलाइन जरूरी

जब आप ऑनलाइन बिजनेस करने की सोच रहे हैं तो पेमंट भी ऑनलाइन लें। हां, अगर कोई कैश देना चाहे तो वह बात अलग है। अब पेटीएम, फोन पे, गूगल पे आदि समेत कई कंपनियां UPI के जरिए पेमंट स्वीकार करती हैं। एक QR कोड के जरिए आप ग्राहक से तुरंत पेमंट ले सकते हैं। वहीं अगर आप अपना बिजनेस वेबसाइट की मदद से भी चला रहे हैं तो वेबसाइट में पेमंट गेटवे की सुविधा जरूर रखें। यहां पेमंट गेटवे से मतलब है कि अगर कोई कस्टमर आपकी वेबसाइट से कोई भी प्रॉडक्ट खरीदता है तो वेबसाइट पर ही डेबिट या क्रेडिट कार्ड से या इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई (पेटीएम, भीम ऐप, फोन पे आदि) के जरिए ऑनलाइन पेमंट कर सकता है।

पेमंट गेटवे ऐसे बनवाएं
वेबसाइट के लिए पेमंट गेटवे की सुविधा रखना बहुत आसान है। कई ऐसी कंपनियां हैं जो पेमंट गेटवे की सुविधा देती हैं। कुछ कंपनियां इस प्रकार हैं:
Paytm (paytm.com)
Razorpay (razorpay.com)
BillDesk (billdesk.com)
PayPal (paypal.com)
CCAvenue (ccavenue.com) आदि।
 

इतना आता है खर्च
ज्यादातर कंपनियां पेमंट गेटवे सेटअप की सुविधा फ्री में देती हैं। इसके बाद जो भी लेन-देन उस पेमंट गेटवे के माध्यम से होता है, उसका 2% तक ये कंपनियां मर्चेंट (दुकानदार) से चार्ज करती हैं। इसके अलावा न तो कोई सालाना चार्ज और न ही कोई मेंटिनेंस चार्ज।

ये डॉक्यूमेंट्स जरूरी
पेमंट गेटवे की सुविधा लेने का तरीका पूरी तरह ऑनलाइन है। यह सुविधा लेने के दौरान कैंसल चेक की स्कैन कॉपी, PAN और एड्रेस प्रूफ (आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड आदि) की कॉपी कंपनी को देनी पड़ती है।

लगते हैं इतने दिन
सारे डॉक्यूमेंट्स देने के बाद कंपनी मर्चेंट की डिटेल्स वेरिफाई करती है। साथ ही वह मर्चेंट की वेबसाइट और उसके बिजनेस से जुड़ी कुछ दूसरी डिटेल्स भी मांग सकती है। यह इसलिए कि कहीं पेमंट गेटवे का इस्तेमाल किसी गलत काम के लिए तो नहीं किया जा रहा। इसके लिए वह केवाईसी करा सकती है। सारी डिटेल्स वेरिफाई होने के बाद कंपनी 1 घंटे से लेकर 7 दिन तक में पेमंट गेटवे की सुविधा दे देती है।
मिलता है कोड
पेमंट गेटवे की सुविधा देने वाली कंपनी मर्चेंट को एक कोड देती है। यह कोड उस शख्स को देना पड़ता है जिसने वेबसाइट बनाई है। इस काम को वेब डिवेलपर भी बहुत अच्छे से कर देते हैं। इसके लिए वेब डिवेलपर 5 हजार रुपये से 10 हजार रुपये तक लेते हैं। इस कोड के जरिए पेमंट गेटवे की सुविधा वेबसाइट पर शुरू की जा सकती है। इसके बाद वेबसाइट पर पेमंट के ऑप्शन आने शुरू हो जाते हैं। फिर कस्टमर आपकी वेबसाइट पर ही प्रॉडक्ट सिलेक्ट करके उसकी पेमंट भी ऑनलाइन ही कर सकता है।

पेमंट को रखें सिक्योर
डिजिटल पेमंट के दौरान सावधानी रखना भी बहुत जरूरी है। अगर अपनी वेबसाइट पर पेमंट गेटवे की सुविधा ली है तो यह पक्का कर लें कि पेमंट गेटवे हैक न हो। वैसे तो पेमंट गेटवे को हैक करना लगभग नामुमकिन होता है, फिर भी वेब डिवेलपर से बात करें कि पेमंट गेटवे की सुरक्षा के लिए कौन-कौन-सी चीजें जरूरी हैं। वहीं अगर आप अपनी शॉप पर QR स्कैन कोड के जरिए पेमंट ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि QR कोड शॉप के अंदर ही हो।
दरअसल, हाल ही में QR कोड के जरिए धोखाधड़ी के कुछ मामले सामने आए थे। काफी दुकानदार ऐसे थे जिन्होंने पेटीएम, फोन पे या गूगल पे के QR स्कैनिंग कोड दुकान के बाहर चिपका रखे थे। इन QR कोड के ऊपर ही जालसाजों ने अपने अकाउंट से जुड़े QR कोड बड़ी चालाकी से चिपका दिए। जब कस्टमर दुकानदार को पेमंट करता तो वह रकम दुकानदार के अकाउंट में न जाकर जालसाज के अकाउंट में जा रही थी। मामला सामने आने पर ठगी का शिकार हुए दुकानदारों ने वे QR कोड हटा दिए और उन्हें दुकान के अंदर ही लगा लिया। दुकान के अंदर QR कोड लगे होने से उनके बदलने की गुंजाइश ही नहीं रहती। इससे बचने के लिए पेटीएम अब मर्चेंट को फ्री में साउंडबॉक्स भी देता है। जैसे ही कोई कस्टमर पेटीएम के जरिए दुकानदार को पेमंट करता है तो साउंडबॉक्स के जरिए आवाज आ जाती है कि कितने रुपये का पेमंट हो चुका है।

ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो जाएं तो यहां शिकायत करें
कॉल करें: 155260
(यह हेल्पलाइन हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे काम करती है। हालांकि कुछ राज्यों में यह सुबह 10 से शाम 6 बजे तक चालू रहती है।)
वेबसाइट: cybercrime.gov.in
ट्विटर हैंडल: @Cyberdost

सारी सावधानी बरतने के बाद भी अगर कोई हमारे अकाउंट में कोई सेंध लगा दे यानी ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार बना दे तो तुरंत ही 155260 नंबर पर कॉल करना चाहिए। साथ ही बैंक को भी इसकी जानकारी देनी होती है। केंद्र सरकार ने डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए यह साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन शुरू की है। इस नंबर से दिल्ली और यूपी समेत देशभर के 14 राज्य जुड़े हैं। बाकी राज्यों में भी यह सुविधा जल्द शुरू की जाएगी। इस हेल्पलाइन से ऐसे मिली है मदद:
  • अगर किसी के अकाउंट से कोई अनजान शख्स रकम निकाल ले या किसी दूसरे तरीके से ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो तुरंत 155260 नंबर पर कॉल करके इसकी जानकारी दें।
  • इसके बाद हेल्पलाइन डेस्क पर बैठे कर्मचारी अपराध से जुड़ी सभी डिटेल्स को एक फॉर्म में भरवाएंगे और फिर उस फॉर्म को संबंधित जिले के साइबर क्राइम सेल को भेज दिया जाएगा।
  • चंद मिनटों में संबंधित जिले के अधिकारी ट्रांजेक्शन का आधार बनने वाले बैंक में तैनात नोडल अधिकारी से संपर्क करके अपराधी के बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन की डिटेल निकालकर सीज करा देंगे।
  • इससे पीड़ित के बैंक खाते से होने वाला ट्रांजेक्शन वहीं रुक जाएगा और पीड़ित भारी नुकसान होने से खुद को बचा पाएगा।
  • इसके अलावा अपने बैंक को भी इस फ्रॉड की जानकारी दें।

डिलिवरी का ऐसे बनाएं सिस्टम
अगर आप अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर प्रॉडक्ट बेचना चाहते हैं तो प्रॉडक्ट की डिलिवरी पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। अगर कस्टमर को समय पर प्रॉडक्ट न मिले या प्रॉडक्ट खराब क्वॉलिटी का मिले तो वह शायद ही दोबारा उस वेबसाइट पर जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि हमेशा ऐसी लॉजिस्टिक कंपनी चुनें जो बताए गए समय में ही प्रॉडक्ट को सही सलामत कस्टमर तक पहुंचा दे। कुछ लॉजिस्टिक कंपनियों के नाम यहां बताए गए हैं।
  • BlueDart (bluedart.com)
  • Delhivery (delhivery.com)
  • WareIQ (wareiq.com)
  • XpressBees (xpressbees.com)
  • Ekart (ekartlogistics.com)
  • India Post (indiapost.gov.in)

लॉजिस्टिक कंपनी चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
अपने प्रॉडक्ट की डिलिवरी के लिए किसी भी लॉजिस्टिक कंपनी का चुनाव आंख बंद करके न करें। इसके लिए इन बातों पर ध्यान रखें:

शिपिंग कॉस्ट: कोई भी लॉजिस्टिक कंपनी प्रॉडक्ट के साइज और वजन के अनुसार उसे पहुंचाने की कीमत लेती हैं। ऐसे में लॉजिस्टिक कंपनी से पहले डिलिवरी चार्ज जरूर पूछ लें। साथ ही उस कंपनी से यह भी मालूम कर लें कि कहीं वह 'कैश ऑन डिलिवरी' का एक्स्ट्रा चार्ज तो नहीं करती? यही नहीं, कंपनी से यह भी पूछें कि अगर कोई फास्ट डिलिवरी देनी है तो उसका कितना एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ेगा। उसकी कीमत में कोई छिपा हुआ चार्ज तो नहीं है यानी कोई टैक्स, बारिश आदि के मौसम में एक्स्ट्रा चार्ज लेना आदि। अगर कंपनी का वेयरहाउस है तो वेयरहाउस से जुड़ी सुविधाएं और उसका कितना अलग से चार्ज देना पड़ता है, यह भी मालूम कर लें।

ट्रैकिंग की सुविधा देना: किसी भी प्रॉडक्ट की डिलिवरी के साथ-साथ उसकी ट्रैकिंग भी जरूरी है ताकि कस्टमर को अपने प्रॉडक्ट की रीयल टाइम लोकेशन की जानकारी मिलती रहे। लॉजिस्टिक सर्विस की सुविधा लेते समय कंपनी से यह जरूर पूछ लें कि क्या वह प्रॉडक्ट ट्रैकिंग की सुविधा देती है या नहीं। अगर ट्रैकिंग की सुविधा न दे तो उसकी सर्विस न लें। अगर प्रॉडक्ट डिलिवर हो जाता है तो भी उसकी जानकारी मिल जानी चाहिए।

थर्ड पार्टी पोर्टल से भी करें डिलिवरी की बात
अगर आप अपना प्रॉडक्ट ई-कॉमर्स कंपनियां जैसे Flipkart, Amazon आदि के जरिए बेचना चाहते हैं तो इन कंपनियों से भी डिलिवरी को लेकर पूरी बात कर लें। दरअसल, कई जगह ऐसी होती हैं जहां से ये कंपनियां प्रॉडक्ट पिक नहीं करवाती हैं। ऐसे में आपके पास ऑप्शन होता है कि या तो आप अपनी तरफ से कोई डिलिवरी कंपनी चुनें या आप अपने प्रॉडक्ट इन कंपनियों के वेयरहाउस में रखें। वेयरहाउस में प्रॉडक्ट रखने पर ये कंपनियां एक्स्ट्रा चार्ज लेती हैं। यह चार्ज 20 रुपये से 30 रुपये प्रति क्यूबिक फुट हर महीने का हो सकता है। हालांकि शुरुआती 2 से 3 महीने में ये कंपनियां वेयरहाउस की सुविधा फ्री भी दे देती हैं। चार्ज इस प्रकार होता है:

  • अपने प्रॉडक्ट की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई को सेंटीमीटर में नापिए और फिर तीनों की आपस में गुणा कर दीजिए।
  • इसके बाद जो जवाब मिले, उसे 28,316.84 से डिवाइड कर दीजिए। अब जो भी जवाब आएगा, वह क्यूबिक फुट में आएगा।

इसे उदाहरण से समझें
मान लें, आप ऐमजॉन पर जूते बेच रहे हैं। जूते के बॉक्स की लंबाई 34 सेमी, चौड़ाई 21 सेमी और ऊंचाई 12 सेमी है। अब इसका आकार आएगा-
(34X21X12)/28316.84= 0.30 (लगभग) क्यूबिक फुट
यानी अगर आप अपने जूते के एक बॉक्स को ऐमजॉन के वेयरहाउस में रखते हैं तो आपको करीब 6 रुपये महीने देने होंगे।
नोट: बॉक्स एक के ऊपर एक रखे जाते हैं। कुल बॉक्स जितनी जगह घेरेंगे, उसके क्षेत्रफल के हिसाब से चार्ज लिया जाएगा।

पैकिंग का झंझट खत्म
वेयरहाउस में प्रॉडक्ट रखने के बाद प्रॉडक्ट की डिलिवरी से लेकर पेमंट तक की जिम्मेदारी उसी ई-कॉमर्स वेबसाइट की होती है। इससे मर्चेंट को कुछ रकम ज्यादा तो खर्च करनी पड़ती है लेकिन उसे सुविधाएं लगभग सारी मिल जाती हैं। पैंकिंग के लिए किसी भी प्रकार का अलग से खर्चा मर्चेंट से नहीं लिया जाता। यह वेयरहाउस की फीस में शामिल होता है।
अगर आप अपना कोई बिजनेस करना चाहते हैं या छोटे-से बिजनेस को बड़ा करना चाहते हैं लेकिन बड़ी रकम की जरूरत है तो बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFC) मदद कर सकते हैं। बैंक और NBFC छोटे कारोबारियों (SMEs) को कई तरह से लोन देती हैं। कुछ लोन इन प्रकार हैं:

1. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
- केंद्र सरकार की इस योजना के तहत अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए कोई भी कारोबारी मुद्रा योजना के तहत लोन ले सकता है।
- इस योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं:
- पहला है शिशु लोन। इसके तहत कोई भी शख्स अपना बिजनेस शुरू करने के लिए 50,000 रुपये तक का लोन ले सकता है।
- तीसरा है तरुण लोन। इसके तहत 10 लाख रुपये तक का लोन लिया जा सकता है। यह लोन उन्हें मिलता है जिनका बिजनेस पूरी तरह से जम चुका है।
- लोन पर सालाना ब्याज दर करीब 8 फीसदी से शुरू होती है। यह लोन 7 साल तक के लिए मिल सकता है।
- इस लोन को लेने के लिए शर्त है कि बिजनेस से जुड़े कागज जरूर होने चाहिए। किसी भी बैंक की ब्रांच में जाकर इस लोन से जुड़ी पूरी जानकारी ली जा सकती है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशल वेबसाइट mudra.org.in पर जाएं।
- केंद्र सरकार की स्टैंड अप इंडिया स्कीम के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सभी वर्ग की महिलाओं को बिजनेस के लिए 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का बिजनेस लोन दिया जाता है। यह लोन नया बिजनेस शुरू करने या पुराने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए दिया जाता है।
- इस लोन पर बेस रेट के साथ 3 फीसदी की सालाना ब्याज दर लगती है। यह लोन 7 साल तक के लिए मिलता है।
- इस लोन स्कीम के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिशल वेबसाइट standupmitra.in पर जाएं।

3. बैंक ऑफ बड़ौदा की 'प्रथम' योजना
- बैंक ऑफ बड़ौदा ने यूजीआरओ कैपिटल के साथ मिलकर हाल ही में SMEs को सस्ती दर पर कर्ज देने के लिए 'प्रथम' नाम से योजना शुरू की है।
- इस लोन के लिए शुरुआती ब्याज दर 8 फीसदी है। लोन चुकाने की अधिकतम अवधि 10 साल है।

नोट:
- इनके अलावा और भी कई बैंक व NBFC जैसे Bajaj Finserv, ZipLoan, Mahindra Finance, Tata Capital आदि भी छोटे कारोबारियों को अलग-अलग ब्याज दर पर बिजनेस लोन मुहैया कराते हैं।
- किसी भी बैंक या NBFC से लोन लेते समय लोन लेने और चुकाने की पूरी जानकारी ले लें।

बिजनेस लोन के लिए ये डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी
अगर अपना बिजनेस शुरू करने के लिए लोन लेने का प्लान बना रहे हैं या बिजनेस बढ़ाने के लिए लोन लेने का। ऐसे में कुछ डॉक्यूेंट्स जरूरी हैं। समय बचाने के लिए इन डॉक्यूमेंट्स को पहले ही तैयार कर लें।
आयकर रिटर्न: यह इनकम प्रूफ के तौर पर काम करता है। इसलिए कम से कम 2 साल का इनकम टैक्स रिटर्न होना जरूरी है।
घर का ऐड्रेस प्रूफ: जहां रहते हैं, उसका प्रूफ होना जरूरी है। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि में से कोई एक भी होना जरूरी है।
बिजनेस ऐड्रेस प्रूफ: जिस जगह बिजनेस करना चाहते हैं या कर रहे हैं, वहां का ऐड्रेस प्रूफ देना जरूरी है। अगर घर से ही बिजनेस कर रहे हैं तो घर का पता दे सकते हैं।
बैंक स्टेटमेंट: आपकी कमाई कितनी है, कितना खर्च करते हैं और अगर कोई किस्त है तो वह कितनी और कब जाती है। इन बातों की जानकारी बैंक स्टेटमेंट से मिलती है। अच्छा क्रेडिट बैलेंस होने से लोन देने वाला बैंक या NBFC यह जान लेता है कि आप लोन को चुका पाने में सक्षम हैं या नहीं।

यहां से मिलेगी तकनीकी मदद
हमारी स्टोरी पढ़ने के बाद अगर आप भी ऑनलाइन बिजनेस शुरू करना चाहते हैं लेकिन तकनीकी रूप से कमजोर हैं तो चिंता न करें। ऐसे कई प्लैटफॉर्म (Decentro, Quickwork, Rupifi आदि) हैं जो ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने जा रहे लोगों को या जो पहले से बिजनेस कर रहे हैं उन्हें भी तकनीकी सहायता मुहैया कराते हैं। ये इस प्रकार से मदद करते हैं:
ऑनलाइन बिजनेस के लिए पेमंट गेटवे से जुड़ी पूरी सहायता करना।
किसी भी बैंक से लोन दिलवाने के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स तैयार करने होंगे और वे कैसे तैयार होंगे, इन सभी में मदद करना।
लेते हैं कुछ रकम: ये प्लैटफॉर्म इस प्रकार की मदद के लिए कुछ चार्ज करते हैं। यह चार्ज इस पर निर्भर करता है कि ऑनलाइन बिजनेस के लिए तकनीकी सहायता किस प्रकार की है। यह चार्ज 5 हजार रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये तक हो सकता है।

एक्सपर्ट पैनल
- रिपुंजय गौड़, चीफ बिजनेस ऑफिसर, Paytm
- अजय श्रीवास्तव, साइबर एक्सपर्ट और फाउंडर, GetLgalAdvisor
- विनोद कुमार, प्रेजिडेंट, India SME Forum
- हर्ष वैद्य, फाउंडर और CEO, WareIQ
- रोहित तनेजा, फाउंडर और CEO, Decentro


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