गांव का नालायक बेटा
आज अब्दुल फिर से अपने काम को बंद किए हुए हैं । उसे याद आ रहे हैं पिछले साल के वे दिन जो उसने काले दिनों के रूप में बिताए थे। गांव के बुजुर्ग जिन्हें वो दादा कहता था, चाचा कहता थाा, काका कहता था, अम्मा कहता था, दादी क्या करता, वे सब उससे मुंह मोड़ रहे थे और आज उसे मसीहा कहते हुए थक नहीं रहे। कहानी पिछले वर्ष 2020 मैं शुरू हुई जिसमें उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहने वाले अब्दुल को बुरी तरह से जलील किया गया था। 2020 में फैली महामारी में उसके धर्म विशेष के कुछ लोग अनेक देशों से अपनी आस्था को लिए भारत की राजधानी दिल्ली में आए हुए थे कि अचानक महामारी को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया। वे दिल्ली में एक विशेष स्थान पर रुक गए जिसे मरकज़ कहा जाता था। हम भी अनेक बड़े मेलों पर अनेक स्थानों पर जाते हैं तो वहां किसी धर्मशाला, मंदिर या किसी सुरक्षित जगह को खोजते हैं । यहीं उन्होंने किया और वे सभी मरकज में रुक गए। अचानक मरकज में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और उसमें ठहरे सभी लोगों के सिर महामारी फैलाने का दोष मढ़ दिया गया। और एक पूरा धर्म इसका दोषी हो गया और पूरे देश में उस धर्म के प्रति घृणा फैल ग...