*दिनांक 28 मार्च 2021 श्री बांके बिहारी जी का चमत्कार*
*दिनांक 28 मार्च 2021 श्री बांके बिहारी जी का चमत्कार*
होली पर हमारे प्रांतीय इष्ट देव सर्वे सर्वा प्राणाधार श्री बांके बिहारी जी महाराज की कृपा।
श्री बिहारी जी के मन्दिर में खचाखच भीड़, 10 बजे का समय आरती की तैयारी। गुलाल बंद, रंग बंद , कुछ समय की असीम शांती, केवल श्री बिहारी जी की आरती। संपूर्ण आरती के दौरान होली के रसिया की भव्य आरती के दर्शन सब को होते रहे थे। सामने न होने के कारण हम उनकी एक कोणीय है छवि ही देख पा रहे थे।
परंतु आज रंग और गुलाल के कारण उन्हें एक पॉलिथीन से ढका गया था । ताकि रंग और गुलाल से वे सुरक्षित रहें। सब भक्तों को उनके दर्शन उनके वास्तविक स्वरूप में होते रहें।
आरती समाप्त हुई और फिर से रंग और गुलाल की बौछारें शुरू हो गई । पुजारी जी ने बिहारी जी की दाएं खड़े हो पिचकारी से रंग चलाया। लेकिन पुजारियों के द्वारा चलाया गया तो हम तक नहीं पहुंचा और हम उससे वंचित रह गए।
बिहारी जी के दर्शनों के लिए बार-बार पर्दे उठा लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण ठीक से दर्शन नहीं हो पाए । जैसा कि हमने बताया था कि हम केवल एक कोने से ही उनके दर्शन पा रहे थे।
कुछ देर के उपरांत हम पांच लोग वीआईपी क्षेत्र में खड़े, बिहारी जी के पुजारियों के द्वारा अपने ऊपर रंग डालने का इंतजार कर रहे थे।
अचानक से हमारे शरीर पर गर्म गरम टेसू और केसर का बसंती रंग गिरा। हम तृप्त हो गए और इच्छा पूर्ण होने के उपरांत हमने अब वी आई पी अभी क्षेत्र से बाहर आने की शुरुआत कर दी। लेकिन मन में अभी भी बिहारी जी के दर्शन ठीक से ना होने की कसक बाकी थी।
खचाखच भीड़ में जब हम बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे तभी बहुत जोर से जयकारा लगा।
'बोल बांके बिहारी लाल की जय।'
'राधे राधे' मुड़कर देखा तो लगा कि बिहारी जी विदा करने के लिए हमें निहार रहे हैं।
ऐसा लगा जैसे किसी ने पीछे से आकर चौका दिया हो। उस वक्त बिहारी जी की वह पत्थर की मूर्ति पत्थर की नहीं सजीव लग रही थी। जो मुझे निहार रही थी और मैं अपलक उन्हें निहार रहा था। जैसे हम दोनों एक ही हो। हमारे और उनके बीच कोई नहीं था । थे तो हम दोनों । न बाहर की आवाज ना कुछ और। तभी फिर से जोरदार जयकारा लगा
राधे राधे
हमारी और बिहारी जी की बीच जो पॉलिथीन रूपी पर्दा उठा हुआ था । पुजारी ने अपने हाथ में छोड़ दिया और फिर से हम दोनों हम दोनों हो गए।
मुझे लगा कि जैसे कह रहे हैं बाय बाय खुशी खुशी घर वालों के साथ में होली मनाईएगा।
यह सच है कि बांके बिहारी जी मन्दिर में आने वाले हर भगत के मन की बात को सुनते हैं, और बिना कहे भी जान जाते हैं ।
जैसे ठाकुर जी ने हमारे मन की बात सुनकर आरती का दर्शन दिया और रंग डलवाया ऐसे ही ठाकुर सभी को दर्शन देकर अपने चरणों में दें।
हम सब तो माया में भूले पड़े थे बिहारी जी को।
अपने रंग में रंगने के लिए वृंदावन बुला लिया।
राधे राधे जय श्री कृष्णा।
एक सेवक

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