चौका नं० 01 - आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का || दो खाओगे या चार ।

चौका नं० 01

शादी के नाम पर दो दो शहरों में तो हमारा जुलूस निकाल दिया। 

सारी रात जगा कर रखा और फेरे हुए अगले दिन क्योंकि उसके घर के सभी लोग घोड़े बेच कर सो गए और हम फेरों के इंतजार में बैठे बैठे आधे हो गए।

अब तक हमारे समझ में नहीं आया कि सात फेरों के नाम पर जो लड़की हमारे साथ आई है। वह बला क्या है?

वह कभी हमें जादूगरनी लगती है तो कभी झांसी की रानी। चलिए इसका प्रूफ भी दे देते हैं।

01. आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का।

वही लड़की अब जब घर आई। कुछ समय तो सब कुछ ठीक-ठाक चला, पर एक दिन सुबह-सुबह वह पास आई और बोली, "आपका गोभी का पराठा बनाऊँ या आलू का" 

मेरे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई । सांस थी कि जो न अंदर जा रही थी और बाहर। वह गले में ही अटक गई। 

दिमाग घूम गया कि कहीं मैं गलती से आसाम या बंगाल की जादूगर्नियों के घर का दामाद तो नहीं बन गया। 

बड़ी मुश्किल से मैं बोला पाया, "भाग्यवान ! अभी जिसका जो बना रही हो वही बना लो, मैं जरा एक फोन कर लूं। फिर बताता हूं।"

फोन उठाया और अपनी सासू मां को लगाया पूछा, "माताजी ! आसाम या बंगाल में किसी को जानते हो क्या ? "

वे बोली, "नहीं।" 

"घर परिवार का कोई बंदा कोई वहां रहता है क्या ?"

उन्होंने फिर कहा, "नहीं।" 

"कभी गए थे क्या ?"

उन्होंने फिर कहा, "नहीं।" 

"तो फिर यह जादूगरनी कहां से पकड़ लाए?"

" क्यों ? क्या हुआ बेटा?" 

"कह रही है आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का।"


02. दो खाओगे या चार

कल बीवी ने बताया कि पड़ोस में झगड़ा हो गया और उसकी बीवी ने अपने आदमी का सिर फोड़ दिया।

मैंने उससे कहा, "तो मुझे क्यों बता रहे हो ?"

"ताकि तुम मुझे कमजोर ना समझो।"

मैं अपने काम में लग गया तभी थोड़ी देर बाद मैडम जी आए और बेलन लेकर मेरे सामने खड़ी हो गई। 

"दो खाओगे या चार"

"भाग्यवान ! मुझे फ़ोन पर बात तो करने दे, थोड़ी देर में बताता हूं।" 

मेरा दोस्त जो फोन पर था ठहाके मारकर हंसने लगा मैंने। फोन काटा और तुरंत अपनी सासू मां को लगाया पूछा, "माताजी ! झांसी में किसी को जानते हो क्या ? "

वे बोली, "नहीं।" 

"घर परिवार का कोई बंदा कोई वहां रहता है क्या ?"

उन्होंने फिर कहा, "नहीं।" 

"कभी गए थे क्या ?"

उन्होंने फिर कहा, "नहीं।" 

"तो फिर यह झांसी की रानी कहां से उठा लाए?"

" क्यों ? क्या हुआ बेटा?" 

"झांसी की रानी, बेलन लेकर सिर पर खड़ी हुई है और पूछ रही है तो दो खाओगे या चार।"


03. मेरा बाहर वाले ने क्या बिगाड़ा है

मैने पत्नी को बोला, "भाग्यवान ! कोरोना काल है और अब तो work-from-home हो गया है।"
"तो !"
"हम दोनो साथ मिलकर करोना से लड़ेगे, उसे हराएंगे। आप बस में नहीं।"

"बाहर वाली से डरकर घर में दुबक कर आप काम कर सकते हैं मैं नहीं। मेरा बाहर वाले ने क्या बिगाड़ा है, जो मैं उसके साथ लड़ूं।" 
याने [मैं आपके (घरवाले) साथ ही लड़ूँगी।]😂😂


04. मास्टरनी हूं मास्टरनी वह भी बिना पढ़े।

"अरे महारानी इसीलिए तो कहता हूं कुछ पढ़ लिख लिया होता। तुम्हें तो वर्क फ्रॉम होम का मतलब ही नहीं मालूम।"

"तो क्या होता? तुम डॉक्टर बन जाते?"

"अरे भाग्यवान में डॉक्टर नहीं। मास्टर हूँ मास्टर।"

"और आपको भी पता होना चाहिए कि मैं पूरे मोहल्ले में मास्टरनी हूं मास्टरनी। वह भी बिना पढ़े।"


चौका नं० 01
01. आपका आलू का पराठा बनाऊँ या गोभी का।
02. दो खाओगे या चार।
03. मेरा बाहर वाले ने क्या बिगाड़ा है।
04. मास्टरनी हूं मास्टरनी वह भी बिना पढ़े।

लेखक (चौका नं० 01)
ॐ जितेंद्र सिंह तोमर
12/6/15/5/2021

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