18. ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।

ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।

जून की कठोर तपती दोपहरी में, जब सड़कें अलाव की तरह तप रही थी। उसी दोपहरी में एक बच्चा नंगे पैर फूल बेच रहा था। 

लोग मोलभाव कर रहे थे। वह अपने पैरों को गर्मी से बचाने के लिए कभी एक पैर के ऊपर रखता तो कभी दूसरे पैर के ऊपर।

एक सज्जन ने उसके पैर देखे; उसे यह देख कर बहुत दु:ख हुआ। वह भागकर गया और पास ही की एक दुकान से जूते लेकर आया। 

उसने उस बच्चे को बुलाया और कहा, "बेटा ! यह ले इन जूतों को पहन ले।" 

लड़के ने फटाफट जूते पहने, वह बड़ा खुश हुआ और उस आदमी का हाथ पकड़कर कहने लगा, "अंकल, अंकल ! आप भगवान हो।"

वह सज्जन घबराकर बोला, "नहीं..नहीं. बेटा ! मैं भगवान नहीं।" 

लड़का फिर से बोला, "ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।" 

"वह कैसे?" मैंने प्रश्नवाचक दृष्टि से देश को निहारा।

"क्योंकि मैंने कल रात ही भगवान को अरदास की थी कि भगवानजी, मेरे पैर बहुत जलते हैं। मुझे जूते लेकर के दो।" 

"तो हुए ना आप भगवान के दोस्त।"

वह सज्जन आंखों में खुशी का पानी लिये, मुस्कुराता हुआ चला गया, पर वो जान गया था कि भगवान का दोस्त बनना ज्यादा मुश्किल नहीं है। 

क्योंकि कुदरत ने कमाई के लिए दो नियम बनाए हैं – 1) देकर जाओ या 2) छोड़कर जाओ। 

साथ लेकर के जाने की कोई व्यवस्था नहीं क्योंकि कफन में जेब नहीं होती। 


लेखक

ॐ जितेंद्र सिंह तोमर
21/3/19/5/2021

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