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23. अब कब आओगे ? (कहानी)

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अब कब आओगे? राम सिंह बिस्तर पर से उठा, तो अचानक से छाती में दर्द महसूस होने लगा । उसे लगा शायद गैस ज्यादा हो गई है जिसके कारण उसका दबाव हार्ट की तरफ बढ़ गया है। उसने सोचा कि मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसा सोचते हुए वह साथ में आगे वाले कमरे में गया जिसे वे आमतौर पर बैठक कहकर पुकारते थे। उसने देखा कि उसका पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त हैं। उसने अपनी पत्नी को देखकर कहा, "स्नेहा! मेरी छाती में आज कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, बर्दाश्त नहीं हो रहा ‌‌। डाॅक्टरर को दिखा कर आता हूँ।" "ठीक है, मगर सँभलकर जाना, जरूरत पड़े तो फोन करना।"  मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं, उसने राम सिंह की तरफ निगाह उठाकर भी नहीं देखी। राम सिंह एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, उसे बहुत पसीना आ रहा था, उसने एक्टिवा स्टार्ट करने का कई बार असफल प्रयास किया परंतु ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं कर पाया। इसी समय उनके घर का काम करने वाला हरी साईकिल पर वहां आ गया। यह हरि के काम पर आने का समय था। हरी राम सिंह के घर में पोछा लगाने बरतन तथा कपड़े धोने का काम करता था। साईकिल को ताला लगाते लगाते ही, उ...

22. यमी मिल्क चपाती!!!!!

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22.  यमी मिल्क चपाती!!!!! 🤔🤔🤔🤔🤔 बीवी ने रात में खाने को दूध-रोटी दी, तो मैंने, रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े कर दूध में  डाले.. .,*  और  उसकी फोटो खींचकर  फेसबुक पर अपलोड कर दिया..  और टाईटल दिया!! * यमी मिल्क चपाती!!!!!! * मैने सपने में भी नहीं सोचा था कि लोग उसकी भी रेसिपी पूछेंगे।  मैंने रेसिपी लिखी एक गिस दूध और दो रोटी, अब रोटियों को दूध में तोड़कर डालना है। मीठा स्वादानुसार। उस पोस्ट पर आये कमेंट्स पढ़ने के बाद, तो मेरी आंखो मेंं अंधेरा ही छा गया!! 🤦🏻‍♂️🤦‍♂️🙇🏿‍♂️🙇🏿‍♂️🙆‍♂️🙆‍♂️ 👇🏼👇👇👇 1) दूध *गाय* का लेना है  या *भैंस* का.? या बकरी का? 2) रोटी *हाथ से* तोड़कर या हाथ से मसलकर घोलनी हैं  या *Grinder* से..? 3) एक *रोटी* के लिए  कितना मात्रा में दूध लेना है ? 4) दूध नाप कर लेना है या तोल कर 5) दूध में मिठास के लिए क्या डार्लिंग बुरा शक्कर गुड़ या चीनी। 6) *शक्कर* की  जगह *गुड़* डाल सकते हैं क्या..?? 7) एक रोटी के लिए *शक्कर* कितनी चम्मच  डालनी है.?  8) क्या चीनी की जगह शुगर फ्री डाल सकते हैं? 9) दूध ...

21. गीता कितनी बार पढ़ें? और क्यों पढ़ें?

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गीता कितनी बार पढ़ें? और क्यों पढ़ें? नीचे दी गई जानकारी गीता पर विशेष है अगर आप आजमाना चाहते हैं तो ध्यान से और अच्छी प्रकार से गीता के 100 अध्याय में लग जाइए। * गीता पहली बार पढ़ने पर समझ नहीं आती। * गीता दूसरी बार पढ़ने पर कुछ कुछ समझ आती है। * गीता तीसरी बार पढ़ने पर समझ आने लगती है। * गीता चौथी बार पढ़ने पर पूरी समझ आने लगती है। * गीता पांचवी बार पढने पर ज्ञान देने लगती है। * गीता छठी बार पढ़ने पर कर्म के महत्व को समझाती है। * गीता सातवीं बार पड़ने पर घर के सारे क्लेश दूर कर देती है। * गीता आठवीं बार पढ़ने पर सारे विघ्न दूर कर देती है। * गीता नौवीं बार पढ़ने पर पूरे घर को समृद्ध बना देती है। * गीता दसवीं बार पढ़ने पर आपको पूर्ण ज्ञानी बना देती है। * गीता 11 बार पढ़ने पर आपको बहुत बड़ा व्यवसायी बना देती है। * गीता 12वीं बार पढने पर आपको कृष्ण के समान चतुर बना देती है। * गीता 13वीं बार पढ़ने पर आपको एक कुशल वक्ता बना देती है। * गीता 14वीं बार पढ़ने पर आपको ब्राह्मण शूद्र और वैश्य और छत्रिय से ऊपर उठा देती है। * गीता 15 वीं बार पढ़नें पर आपको कृष्ण बना देती है। * गीता 16 ...

20. भगवान पर भरोसा

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भगवान पर भरोसा [दो शब्द – यह कहानी मेरी नहीं है। मेरे एक दोस्त ने बहुत पहले मुझे व्हाट्सएप पर भेजी थी। शायद उसकी भी न हो, यह कहानी किसकी है, मुझे नहीं मालूम परंतु जिसकी भी है मैं इस कहानी का श्रेय उसी व्यक्ति को देता हूं । जिसने इसे लिखा है।  मुझे मालूम है कि ऐसी घटनाएं बहुत कम घटित होती हैै। ] भगवान पर भरोसा एक पुरानी सी इमारत में था एक वैद्यजी का मकान था। मकान के पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के घर के लिए आवश्यक सामान को एक चिठ्ठी में लिख कर वैद्य जी को पकड़ा देती थी।  वैद्यजी गद्दी पर बैठकर,श पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते, "हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। दुनियादारी मुझे चलानी नहीं आती, बस तू ही संभाल लेना।"  वैद्यजी का एक नियम था कि वे कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, ...

19. (कविता) कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है,

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कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. भरा पूरा है परिवार, परंतु संग नहीं है आँख भी ढक लीजिये, संग मुँह के अपने, कहीं आंखों को रास न आए यह देखना कि अंत समय, कंधा देने वाला कोई नहीं है कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. धारती बिकी जल बिका और बिका आकाश रक्त बिका, अंग बिके और बिका विश्वास। हर कोई शामिल है इन गुनाहों में  क़ुसूर मेरा, आपका या किसी एक का नहीं है.. कोई तो किश्त है जो शायद अदा नहीं है, साँस बाक़ी है परन्तु बाकी हवा नहीं है.. आँसू जानते हैं कौन अपना है तभी तो अपनों के सामने ढलक जाते है। कमबख्त मुस्कुराहट का क्या है, वह तो ग़ैरों से भी वफ़ा कर लेती है..! यह दुनिया है 'जनाब' यहाँ 'मिट्टी' में मिलाने के लिए अपने ही "कन्धों" पर भी उठा लेते हैं ।          🙏 *सुप्रभात* 🙏 लेखक ॐ जितेंद्र सिंह तोमर 12/6/21/5/2021

18. ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।

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ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे। जून की कठोर तपती दोपहरी में, जब सड़कें अलाव की तरह तप रही थी। उसी दोपहरी में एक बच्चा नंगे पैर फूल बेच रहा था।  लोग मोलभाव कर रहे थे। वह अपने पैरों को गर्मी से बचाने के लिए कभी एक पैर के ऊपर रखता तो कभी दूसरे पैर के ऊपर। एक सज्जन ने उसके पैर देखे; उसे यह देख कर बहुत दु:ख हुआ। वह भागकर गया और पास ही की एक दुकान से जूते लेकर आया।  उसने उस बच्चे को बुलाया और कहा, "बेटा ! यह ले इन जूतों को पहन ले।"  लड़के ने फटाफट जूते पहने, वह बड़ा खुश हुआ और उस आदमी का हाथ पकड़कर कहने लगा, "अंकल, अंकल ! आप भगवान हो।" वह सज्जन घबराकर बोला, "नहीं..नहीं. बेटा ! मैं भगवान नहीं।"  लड़का फिर से बोला, "ज़रूर.. आप भगवान के दोस्त होंगे।"  "वह कैसे?" मैंने प्रश्नवाचक दृष्टि से देश को निहारा। "क्योंकि मैंने कल रात ही भगवान को अरदास की थी कि भगवानजी, मेरे पैर बहुत जलते हैं। मुझे जूते लेकर के दो।"  "तो हुए ना आप भगवान के दोस्त।" वह सज्जन आंखों में खुशी का पानी लिये, मुस्कुराता हुआ चला गया, पर वो जान गया था कि भगवान का...

17. जाति औरत की?

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जाति औरत की? [ लेकिन एक दिन कुछ लोगों को औरत की जाति पर चर्चा करते देखा तो दादी की बचपन की बातें याद आ गई जिसमें उन्होंने इसी विषय पर जो बातें बताई थी वे आज भी अक्षरशः याद हैं। ] एक आदमी ने दादी से पूछा, "स्त्री की जाति क्या है?" दादी ने उल्टा ही पूछ लिया, " एक मां की या एक महिला की।" उसने कहा, "चलो दोनों की बता दो।" और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरी। दादी ने भी पूरे धैर्य से बताया– एक महिला जब माँ बनती है, तो वो जाति-विहीन हो जाती है, उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा, "वो कैसे..?" जबाब मिला कि जब एक माँ अपने बच्चे का लालन पालन करती है, अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है, तो वह शूद्र  हो जाती है। शुद्र का कार्य सफाई करना होता है और एक मां वह सब करती है। वही बच्चा जब बड़ा होता है तो माँ नकारात्मक ताकतों और उस पर आने वाली समस्याओं से उसकी रक्षा करती है, तो वह * क्षत्रणी * हो जाती है क्योंकि एक क्षत्रिय का कार्य सुरक्षा करना होता है। जब बच्चा और बड़ा होता है, तो माँ उसे अच्छे बुरे ऊंच-नीच अभी का ज्ञान देकर उसे  शिक्षित करती है और शिक्षा देने का कार्य शि...