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पुत्रों के प्रकार

महाराजा चित्रकेतु पुत्रहीन थे। महर्षि अंगिरा का उनके यहां आना-जाना होता था। जब भी आते राजा उनसे निवेदन करते, ‘‘महर्षि मैं पुत्रहीन हूं, इतना बड़ा राज्य कौन संभालेगा? कृपा करो एक पुत्र मिल जाए, एक पुत्र हो जाए।’’ ऋषि बहुत देर तक टालते रहे। कहते ‘‘राजन, पुत्र वाले भी उतने ही दुखी हैं जितने पुत्रहीन।’’ किन्तु पुत्र मोह बहुत प्रबल है। बहुत आग्रह किया, कहा, ‘‘ठीक है परमेश्वर कृपा करेंगे तेरे ऊपर, पुत्र पैदा होगा।’’ कुछ समय के बाद एक पुत्र पैदा हुआ। थोड़ा ही बड़ा हुआ होगा कि राजा की दूसरी रानी ने उसे जहर देकर मरवा दिया। राजा चित्रकेतु शोक में डूबे हुए हैं। बाहर नहीं निकल रहे, महर्षि को याद कर रहे हैं। महर्षि बहुत देर तक इसी होनी को टालते रहे लेकिन होनी भी उतनी प्रबल। संत महात्मा भी होनी को कब तक टालते। आखिर जो भाग्य में होना है, वह होकर रहता है। संत ही है जो टाल सकता है कि आज का दिन इसको न देखना पड़े, तो टालता रहा। आज पुन: आए हैं लेकिन देवर्षि नारद को साथ लेकर आए हैं। राजा बहुत परेशान है। देवर्षि राजा को समझाते हैं कि तेरा पुत्र जहां चला गया है, वहां से लौट कर नहीं आ सकता। शोक रहित हो जा। ते...

कानपुर का जगन्नाथ मंदिर ।

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👆#आपको_ताजमहल_अजूबा_लगता_है,तो यह पढ़िए बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर । क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य  यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट - ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है वैज्ञानिक भी नहीं...

तिरंगा यात्रा

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गणतंत्र दिवस आप सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई। हमारा देश आज 62वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 वो दिन है जब हमारा देश गणतंत्र घोषित हुआ था। पर आखिर गणतंत्र होने के मायने क्या हैं? क्या यह केवल परेड देखने और छुट्टी मनाने का एक और दिन है? नहीं। बिन्कुल नहीं। इसका मतलब है कि आप स्वतंत्र हैं अपनी खुद की सरकार चुनने के लिये। आपकी सरकार आपके लिये। संविधान बना, कानून बने। हमारे अधिकार और हमारे कर्त्तव्य हमें बताये गये। पर हम केवल एक ही बात का ध्यान रखते हैं। अधिकार!! पर हमारे कर्त्तव्यों का क्या? क्या आप और हम अपने कर्त्तव्यों के बारे में जानते हैं? चलिये आप को एक ऐसे देश में ले चलते हैं जहाँ राष्ट्रगीत पर पाबंदी लगाई जाती हो? क्या आप ऐसा देश जानते हैं जहाँ राष्ट्रध्वज को फ़हराने के लिये अनुमति लेनी होती है? एक ऐसा देश बतायें जहाँ दुश्मनों के झंडे तो आप आसानी से फ़हरा सकते हैं पर अपना खुद का झंडा लहराने के लिये आपको मनाही है।  जी हाँ आपने सही पहचाना यह हमारा अपना हिन्दुस्तान ही है। इस देश में आपको तिरंगा लहराने के लिये मना किया जाता है। भाजपा के तिरंगे मिशन को रोकने के लिये बहुत प...

दाल

तू दाल डाल 10 फरवरी को वर्ल्ड पल्सेस डे पर विशेष दाल में कुछ काला है'- इस बात का मतलब होता है कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है। लेकिन जहां तक दालें खाने की बात है तो इसमें कोई गड़बड़ नहीं है। सारी दालें ये चाहें काली हों, पीली हों या फिर हरी, हमारे लिए फायदेमंद होती हैं। लेकिन क्या हम रोजाना दोनों वक्त दाल खा सकते हैं, क्या दाल में तड़का लगाकर खाने से ज्यादा फायदा होता है, दाल के साथ क्या मिलाकर खाएं और क्या न मिलाएं? ऐसे कुछ सवाल कभी न कभी हम सबके मन में उठते रहते हैं। जाने-माने एक्सपर्ट्स से बात करके ऐसे ही सवालों के जवाब लाए हैं लोकेश के. भारती जिस दाल का आकार जितना छोटा होता है, वह शरीर के लिए उतनी ही ज्यादा फायदेमंद होती है। सामने दी गई दालों का क्रम उनके आकार के हिसाब से है। 1. मूंग 2. मसूर 3. अरहर 4. कुलथी 5. उड़द 6. काला चना 7. मटर 8. काबुली चना 9. सोयाबीन 10. राजमा कहते हैं कि 'दाल गल गई' यानी काम हो गया। वाकई दाल में गुण ही कुछ ऐसे हैं। दाल पकाते हुए कितनी भी गला दें, उसकी गुणवत्ता में ज्यादा फर्क नहीं आता। जब दाल अच्छी तरह पकी हो तो स्वाद भी बढ़ जाता है। वैसे दाल पकाना...

ऑक्सिजान है तो

ऑक्सिजान है तो जहान है जब हवा में ऑक्सिजन है तो सिलिंडर क्यों? इन दिनों हर तरफ कोरोना की ही बातें होती हैं। अब ऑक्सिजन सिलिंडर की भी चर्चा हो रही है। ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल आ रहा होगा कि हम जिस हवा में सांस लेते हैं उसमें ऑक्सिजन है तो अलग से ऑक्सिजन सिलिंडर की क्या जरूरत है? यह सिलिंडर कैसा होता है और इसमें कैसी ऑक्सिजन गैस भरी जाती है, आज यही जानते हैं: सिलिंडर में होती है 98% ऑक्सिजन यह तो आप जानते ही होंगे कि हमारे एनवायरमेंट में 21% ऑक्सिजन, 78% नाइट्रोजन और बाकी दूसरी गैसें हैं। अगर सिलिंडर वाली ऑक्सिजन की बात की जाए तो एक मशीन से हवा में मौजूद नाइट्रोजन और दूसरी हानिकारक गैसों को अलग कर देते हैं और बहुत ज्यादा शुद्ध ऑक्सिजन को सिलिंडर में भर दिया जाता है। सिलिंडर में 98% तक ऑक्सिजन ही होती है। सिलिंडर इसलिए जरूरी हमें जितनी ऑक्सिजन की जरूरत है, उतनी आसपास की हवा से मिल जाती है। लेकिन जब कोई बीमार पड़ता है और उसके फेफड़े धीरे-धीरे काम करते हैं तो 21% ऑक्सिजन काम नहीं आती। ऐसे में मरीज को ज्यादा पर्सेंटेज वाली ऑक्सिजन की जरूरत होती है। इसलिए ऐसे मरीजों को ऑक्सिजन सिलिंडर क...

वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे

खाने के बाद ये खा ना 7 June: World Food Safety Day Special दोस्तो, कल यानी मंडे को वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे है। यह दिन इसलिए मनाया जाता है ताकि दुनियाभर के लोगों यह जानकारी दी जा सके कि सेहत के लिहाज से खाने-पीने की गलत चीजें क्या होती हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है। यह खराब खाना बीमार भी कर देता है। इसलिए हमेशा ऐसा खाना खाएं जो सेहत के लिए अच्छा हो और जिसे खाकर हमारा शरीर  एनर्जी से भरपूर रहे। इस बारे में एक्सपर्ट्स से जानकारी लेकर बता रहे हैं राजेश भारती अगर हम सही खाना खाते हैं तो इससे न केवल भरपूर न्यूट्रिशन मिलता है बल्कि हम पूरे दिन एनर्जी से भरे रहते हैं। इसके अलावा शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ जाती है जो कोरोना जैसे वायरस को खत्म करने में मदद करती है। साथ ही बीमार होने की आशंका बहुत कम हो जाती है या जल्दी-जल्दी हम बीमार नहीं पड़ते। इन आदतों को अपनाएं 1. पैक्ड फूड से रहें दूर  हो सकता है कि हमें पैक्ड फूड आइटम अच्छे लगते हों, लेकिन ये सेहत के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। इसलिए मम्मी या पापा से कहें कि वे फ्रेश चीजें घर पर तैयार करके खाने के लिए दें। अगर चिप्स खाने हैं तो बाजार स...

शरीर 08 || कान या ईयर

जरा कान दें... हमारे कान चेहरे के दोनों साइड पर होते हैं इसलिए हम आईने में जब चेहरा देखते हैं तो इन पर ध्यान भी कम जाता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कानों को नजरअंदाज कर दें। हालांकि अक्सर होता यही है कि हम कानों की परेशानियों को हल्के में ले लेते हैं। कई बार परेशानी बढ़ने पर जब असहनीय हो जाती है तब हम डॉक्टर के पास भागते हैं। सच तो यह है कि कान न सिर्फ सुनने में मदद करते हैं बल्कि ये चलते-फिरते समय बैलेंस बनाने का काम भी करता है। कान से जुड़ी हर छोटी-बड़ी परेशानी और उनके समाधान के बारे में एक्सपर्ट्स से बात करके जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती कानों की सेहत के लिए इन 7 बातों को जरूर सुनें 1. कान सुनने के लिए जरूरी हैं तो सही तरीके से चलने में भी इनकी अहम भूमिका होती है। 2. कान में होने वाली छोटी-छोटी परेशानी पर भी ध्यान देना जरूरी है, जैसे लगातार खुजली होना, कान बहना आदि। इसलिए सभी को हर 6 महीने पर कान का टेस्ट जरूर कराना चाहिए। 3. अगर कान में खुजली हो रही है तो पिन्ना को सहलाना सही विकल्प होगा, न कि उंगली घुसाकर खुजली करना। इससे खुजली बढ़ जाती है क्योंकि वैक्स की लाइनिंग कान की ...