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कलश की उत्पत्ति

कलश यात्रा  सैकड़ों महिलाओं को सिर पर कलश लेकर चलते देख लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उन्हें यह सब बे फालतू का काम लगता है। कलश का अपना एक आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्त्व है । जिसे समझना जरूरी हैं। सत्य सनातन परंपरा अर्थात हिन्दू धर्म की विशेषता है कि वह वैज्ञानिक ज्ञान को प्रतीकों में बाँधकर उसे धार्मिक आस्था में ओतप्रोत कर देता है।  विद्वानों का कहना है कि सिर पर कलश रखने वाले श्रद्धालु की आत्मा पवित्र व निर्मल हो जाती है। उसके तमाम रोग दोष विकारों का भगवान हरण कर देते है। वहीं कलश को धारण करने वाले जिस मार्ग से भी ग्राम का भ्रमण करता है वहां की धरा स्वयं सिद्व हो जाती है। जो अपने सिर पर कलश धारण करने वाली आत्मा को ईश्वर पवित्र और निर्मल करते हुए अपनी शरण में ले लेते हैं।  कलश की उत्पत्ति समुद्र मंथन की कथा बहुत प्रसिद्ध है। समुद्र जीवन और तमाम दिव्य रत्नों और उपलब्धियों का स्रोत है। देवी अर्थात्‌ रचनात्मक और दानवी अर्थात्‌ ध्वंसात्मक शक्तियाँ इस समुद्र का मंथन मंदराचल शिखर पर्वत की मथानी और वासुकी नाग की रस्सी बनाकर करती हैं। पहली दृष्टि में यह एक कपोल कल्पना अथवा गल्पक...

108. विक्रम बैताल || कहानी 08 || खाने का दाम ||

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108. विक्रम बैताल || कहानी 08 || खाने का दाम ||  उचित समय आने पर राजा अकेला योगी के मठ पर जा पहुँचा। योगी ने उसे अपने पास बिठा लिया। थोड़ी देर बैठकर राजा विक्रम ने पूछा, “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?” योगी ने कहा, “राजन्, यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर शमशान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा उल्टा लटका हुआ है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ पूजा करता हूँ।” यह सुनकर राजा विक्रम अपने वचन को पूरा करने के लिए शमशान की ओर चल दिया। बड़ी भयंकर रात थी। चारों ओर अँधेरा फैला था। पानी बरस रहा था। भूत-प्रेत शोर मचा रहे थे। साँप आ-आकर पैरों में लिपटते थे। लेकिन हर बाधा को दूर करते हुए निडर राजा विक्रम आगे बढ़ता गया।  जब वह शमशान में पहुँचा तो देखता क्या है कि शेर दहाड़ रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, भूत-प्रेत आदमियों को मार रहे हैं। राजा बेधड़क चलता गया और सिरस के पेड़ के पास पहुँच गया। पेड़ पर रस्सी से बँधा मुर्दा लटक रहा था। पेड़ जड़ से फुनगी तक आग से दहक रहा था। राजा ने सोचा, हो-न-हो, यह वही योगी है, जिसकी बात देव ने बतायी थी। राजा पेड़ पर चढ़ गया और तलवार से रस्सी काट ...

90 साल की उम्रदराज वृद्ध से एक 25 साल के युवक ने पूछा कि अब तबीयत कैसी है दादा! क्या हाल चाल है?

😄                          😄 *90 साल की उम्रदराज वृद्ध से एक 25 साल के युवक ने पूछा कि अब तबीयत कैसी है दादा! क्या हाल चाल है?* *तो संस्कृत का ज्ञाता होने के नाते उस युवक को मन्त्र वाले अंदाज में जवाब दिया कि वृद्धावस्था में क्या हालत होती है, क्या तकलीफ होती है, क्या कष्ट होता है, जरा ध्यान से पढ़ियेगा* आनंद आएगा..🙏 बुढ़ापे का सवाल है😁 ******************* *मुखे न दातं, माथे न बालं,* *बधिर कानं, पोपले गालं,* *दुखं अंगं, सिकुडं खालं* *न शेष सुरं, न शेष तालं,* *वैद्यम् बुलावं, पूछं हालं,* काया अकड़म, मकड़ीम जालं,* *वैद्यम् उवाचं, परहेज पालं,* *चटनी, अचारं सब त्याग डालं,* *अब रोटी ज्वारं च फीकी दालं,* *शांति गुजारं अब शेष सालं,* *भोजन थाली रूखीसूखी घालं,* *देखे बनावे मुख पीत, लालं,* *सब खावे पूड़ी हलवा थालं,* *मुखे टपके टप टप रालं,* *बहुएँ भी टोकं, पौत्रं भी टालं,* *पुत्रम भी अब तो गृहे निकालं,* *सम्मुख आवे जवानी ख़यालं,* *व्याधि तलवारं, बुढ़ापा ढालं* *अब कौन पूछे, ये प्रश्न विशालं,* *न बैंक बैलेंसं, न पास मालं,* *स्वास्थ्य गिरा...

ब्रह्मांड का मूल - नवग्रह पंचतत्व

*_ब्रह्मांड का मूल - नवग्रह पंचतत्व_* 🚩🚩  निराकार ब्रह्म शिव ने जब एक से अनेक बनू की इच्छामात्र से पंचतत्व ओर तत्व देवता प्रगट किये । इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है. सृष्टि में इन पंचतत्वों का संतुलन बना हुआ है। यदि यह संतुलन बिगड़ गया तो यह प्रलयकारी हो सकता है. जैसे यदि प्राकृतिक रुप से जलतत्व की मात्रा अधिक हो जाती है तो पृथ्वी पर चारों ओर जल ही जल हो सकता है अथवा बाढ़ आदि का प्रकोप अत्यधिक हो सकता है. आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को पंचतत्व का नाम दिया गया है। मानव शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से मिलकर बना है।       वास्तविकता में यह पंचतत्व मानव की पांच इन्द्रियों से संबंधित है. जीभ, नाक, कान, त्वचा और आँखें हमारी पांच इन्द्रियों का काम करती है. इन पंचतत्वों को पंचमहाभूत भी कहा गया है. इन पांचो तत्वों के स्वामी ग्रह, कारकत्व, अधिकार क्षेत्र आदि भी निर्धारित किए गये हैं  (1) आकाश  आकाश तत्व का स्वामी ग्रह गुरु है. आकाश एक ऎसा क्षेत्र है जिसका कोई सीमा नहीं है. पृथ्वी के साथ्-साथ समूचा ब्रह्मांड इस तत्व का कारकत्व शब्द है. इसके अधिकार क...

नववर्ष 2024

[12/31/2022, 20:18] +91 96911 77553: *🌹2022 अलविदा*  साल निकल रहा है.. कुछ नया होता है..  कुछ पुराना पीछे रह जाता है... कुछ ख्वाईशैं दिल मैं रह जाती हैं..  कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ... कुछ छौड कर चले गये..  कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मैं ..  कुछ मुझसे खफा हैं..  कुछ मुझसे बहुत खुश हैं..  कुछ मुझे भूल गये...  कुछ मुझे याद करते हैं...  कुछ शायद अनजान हैं.. कुछ बहुत परेशान हैं.. कुछ को मेरा इंतजार हैं ..  कुछ का मुझे इंतजार है..  कुछ सही है.. कुछ गलत भी है.. कोई गलती तो माफ कीजिये.... और कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये.. *❤❤Happy Last Day Of Year 2022❤❤💐* [12/31/2022, 21:24] +91 97552 07484:  *हवा लगी पश्चिम की , सारे कुप्पा बनकर फूल गए ।* *ईस्वी सन तो याद रहा , पर अपना संवत्सर भूल गए ।।* *चारों तरफ नए साल का , ऐसा मचा है हो-हल्ला ।* *बेगानी शादी में नाचे , जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।* *धरती ठिठुर रही सर्दी से , घना कुहासा छाया है ।* *कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है ।।* *सूनी है पेड़ों की डालें , फूल नहीं हैं उपवन में ।*...

मांसाहार सभ्य मनुष्यों का भोजन नहीं।

मांसाहार सभ्य मनुष्यों का भोजन नहीं।  मासांहारी खाना खाने वाले मनुष्य कहलाने के लायक ही नहीँ है।  पहली बात तो यह है कि हर पशु-पक्षी में आत्मा का वास होता है। ईश्वर यह कदापि आज्ञा नहीं देता कि हम उसकी बनाई सृष्टि को नष्ट करें। हमारे बच्चों को काँटा भी चुभता है तो हम परेशान हो जाते हैं परन्तु उस परमपिता की जिन्दा संतानों को हम मारकर खा जाते हैं। एक मनुष्य यानि जीव को मारने पर आजीवन कारावास की सजा मिलती है तो उन निरीह मूक जीवों को मारने की सजा का क्या प्रावधान है? शायद उनका न्याय उस बड़ी अदालत में होता है। जो व्यक्ति मांसाहार का सेवन करता हैँ, वो तामसी अपवित्र और पापी व्यक्ति अधोगती अर्थात नरक को प्राप्त होता है।  भोजन के दो प्रकार  हैँ, शाकाहार और मांसाहार, शाकाहार मनुष्यो का आहार हैँ और मांसाहार राक्षस, पशु, हिंसक जानवर का आहार हैँ।  मनुष्य अगर मांसाहार का सेवन करेगा तो उसे भी राक्षस, कुत्ता ,कव्वा, गिधड़, सिंह, बाघ, लोमडी, सियार, बिल्ली भी कहना पडे़गा क्योंकी, मांसाहार उनका ही तो आहार हैँ मांसाहार मनुष्य का भोजन नही है क्योंकि माँसाहारी जीवों और मनुषय के शरीर की ...

गुड खाने के क्या फायदे

*गुड खाने के क्या फायदे होते हैं?*  गुड़ का आयुर्वेद में काफी महत्व बताया गया है।  गुड़ केवल एक खाद्य पदार्थ या चीनी का विकल्प भर ही नहीं है बल्कि इसमें सेहत का खजाना छिपा है।  यह एंटी टॉक्सिन का भी काम करता है। रात में गुड़ का सेवन करने से शरीर में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन बाहर निकल जाता है।  यानि यह खून को साफ करने का काम भी करता है।  वैसे तो गुड़ के सेवन के कई फायदे हैं लेकिन हम आपको यहां 7 चुनिंदा फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। 1. सूक्रोज़ (sucrose) का सबसे अच्छा संग्राहक गुड़ होता है।  भारतीय संस्कृति में भोजन करने के बाद मीठा खाने का प्रचलन सदियों पुराना है।  इस गतिविधि को आगे बढ़ाने के लिए गुड़ सबसे अच्छा माध्यम होता है।  गुड़ में बहुत ही पोष्टिक तत्व होते है।  इसमें फाइबर (Fiber) बिल्कुल भी नहीं होता।  यह पाचन प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद करता है साथ ही यह कब्ज को रोकने में असरदार होता है। 2.  इसमें उपस्थित पोषक तत्वोंे में लौह तत्व  और फोलेट अच्छी  मात्रा में होते है, ये तत्वक शरीर में लाल रक्तह कोशिकाओं की स...