मांसाहार सभ्य मनुष्यों का भोजन नहीं।

मांसाहार सभ्य मनुष्यों का भोजन नहीं। 

मासांहारी खाना खाने वाले मनुष्य कहलाने के लायक ही नहीँ है। 
पहली बात तो यह है कि हर पशु-पक्षी में आत्मा का वास होता है। ईश्वर यह कदापि आज्ञा नहीं देता कि हम उसकी बनाई सृष्टि को नष्ट करें। हमारे बच्चों को काँटा भी चुभता है तो हम परेशान हो जाते हैं परन्तु उस परमपिता की जिन्दा संतानों को हम मारकर खा जाते हैं। एक मनुष्य यानि जीव को मारने पर आजीवन कारावास की सजा मिलती है तो उन निरीह मूक जीवों को मारने की सजा का क्या प्रावधान है? शायद उनका न्याय उस बड़ी अदालत में होता है।

जो व्यक्ति मांसाहार का सेवन करता हैँ, वो तामसी अपवित्र और पापी व्यक्ति अधोगती अर्थात नरक को प्राप्त होता है। 
भोजन के दो प्रकार  हैँ, शाकाहार और मांसाहार, शाकाहार मनुष्यो का आहार हैँ और मांसाहार राक्षस, पशु, हिंसक जानवर का आहार हैँ। 
मनुष्य अगर मांसाहार का सेवन करेगा तो उसे भी राक्षस, कुत्ता ,कव्वा, गिधड़, सिंह, बाघ, लोमडी, सियार, बिल्ली भी कहना पडे़गा क्योंकी, मांसाहार उनका ही तो आहार हैँ
मांसाहार मनुष्य का भोजन नही है क्योंकि माँसाहारी जीवों और मनुषय के शरीर की रचना अलग अलग होती है। 

1- माँसाहारी जीवों की उत्पन्न होने के समय आँखें बन्द होती हैं और मनुषय के बच्चे की आँखें खुली रहती है। 
2-माँसाहारी प्राणियों को पसीना नही आता शाकाहारियों को पसीना आता है। 
 3- माँसाहारी प्राणियों के दाँत नकुले व पंजे तीखे नोकदार होते है जो माँस को चीरने काटने के काम आते है। लेकिन शाकाहारियों के शरीर की रचाना ऐसी नही होती। 
4-माँसाहारी प्राणी पैदा होते ही आपने स्वभाव से कच्चा माँस खाना अरम्भ कर देते है लेकिन मनुष्य का बच्चा पैदा होने पर दुध पीता है और उसे माँस पका कर खिलाना सिखाया जाता है वे आपनी रूचि से माँस कभी नही खायेगा। 
5- माँसाहारी प्राणियों को दूर से ही माँस की गंध आ जाती है और आपने शिकार को ढूँढ लेते है। लेकिन मनुष्य को फल सब्ज़ी शाकाहार की गंध तो आती है लेकिन कच्चे माँस की गंध नही आती अगर माँस की दुर्गंध आती है तो वे उससे मुँह फेर लेता है। 
6- माँसाहारी ज़ुबान से चाट कर पानी पीते है लेकिन शाकाहारी घूंट लेकर। 
7-मांसाहारी प्राणीयो की भोजन नलिका साडे तीन फ़ुट होती है तभी तो वे हड्डी खाने पर भी नही मरते। मनुष्य की भोजन नलिका बाईस फ़ुट और मनुष्य के पेट में गया माँस लम्बी प्रक्रिया से गुज़रने के कारण सड़ान करता है और रोग पैदा करता है। 
8- मांस में तुरन्त सड़ने ख़राब होने की प्रक्रिया अरम्भ हो जाती है शाक सब्ज़ियाँ कई दिन तक सुरक्षित रहती है। 
        
          ईश्वर ने अपनी सृष्टि को बैलेंस करने के लिए खुद ही विधान बनाया है कुछ जीव उसने शाकाहारी बनाए हैं और कुछ मांसाहारी जीव बनाए हैं। समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं के माध्यम से जीवों का सामंजस्य बिठा देता है।हमें ईशवर के विधान में दख़लंदाज़ी  का कोई अधिकार नही। 
शाकाहार हमें अधिक स्वस्थ रखता है। मांसाहार खाने वाले अपेक्षाकृत अधिक रोगी बनते हैं। इस मांसाहार से तामसिक वृत्तियाँ बढ़ती हैं। क्रोध, हिंसा, असहिष्णुता आदि की वृद्धि होती है।
         अब विज्ञान ने भी मांसाहार के नुकसान सिद्ध किए हैं।
1. मांसाहारीयो को दिल के दौरे का खतरा 23 गुणा अधिक
2. मालाहार कैलोस्ट्रोल की मात्रा खतरनाक स्तर तक ले जाता है 
3. कैंसर के 80 % रोगी मांसाहारी हैं।
4. दुनिया के 95% वैज्ञानिक शाकाहारी हैं
5. दुनिया के 98 % समाजसेवी शाकाहारी हैं।
6. मनुष्य के दाँत शाकाहारी जीवों जैसे हैं।
7. मनुष्य के पेट आंत और लीवर की कार्य प्रणाली शाकाहारी जीवों जैसी है।
8. हर बिमारी के आसार मांसाहार में अधिक पाए जाते हैं।
9. हत्या के समय पशु की चीख पुकार मानसिक रोगो का कारण। 
मांस को सुरक्षित रखना ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण है।
10. मांसाहार शाकाहार से 1000 गुणा अधिक पानी बरबाद करता है।
11. मांसाहार हिंसक और स्वार्थी विचार बढ़ाता है।
12. अमेरिका में हर साल 20% लोग शाकाहारी बन रहे हैं।
13. दुनिया में भूख से मरने वाले 35000 लोगों को शाकाहार बचा सकता है।
14. धर्म न सही विज्ञान की मानें और शाकाहार अपनाकर स्वस्थ रहें।
         अब आप सुधीजन अपनी तर्क की कसौटी पर परखें। रोगों के आ जाने पर तो डाक्टरों के परामर्श से शाकाहार अपनाना ही पड़ता है।मांसाहारी  जवाब दें क्या ज़रा सा जुबान तक के स्वाद के लिए वे पापों की सजा व रोगों को भोगने को तैयार हैं ?

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