नववर्ष 2024

[12/31/2022, 20:18] +91 96911 77553: *🌹2022 अलविदा* 
साल निकल रहा है..
कुछ नया होता है.. 
कुछ पुराना पीछे रह जाता है...
कुछ ख्वाईशैं दिल मैं रह जाती हैं.. 
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ...
कुछ छौड कर चले गये.. 
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मैं .. 
कुछ मुझसे खफा हैं.. 
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं.. 
कुछ मुझे भूल गये... 
कुछ मुझे याद करते हैं... 
कुछ शायद अनजान हैं..
कुछ बहुत परेशान हैं..
कुछ को मेरा इंतजार हैं .. 
कुछ का मुझे इंतजार है.. 
कुछ सही है..
कुछ गलत भी है..
कोई गलती तो माफ कीजिये....
और कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये..
*❤❤Happy Last Day Of Year 2022❤❤💐*
[12/31/2022, 21:24] +91 97552 07484: 

*हवा लगी पश्चिम की , सारे कुप्पा बनकर फूल गए ।*
*ईस्वी सन तो याद रहा , पर अपना संवत्सर भूल गए ।।*
*चारों तरफ नए साल का , ऐसा मचा है हो-हल्ला ।*
*बेगानी शादी में नाचे , जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।*
*धरती ठिठुर रही सर्दी से , घना कुहासा छाया है ।*
*कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है ।।*
*सूनी है पेड़ों की डालें , फूल नहीं हैं उपवन में ।*
*पर्वत ढके बर्फ से सारे , रंग कहां है जीवन में ।।*
*बाट जोह रही सारी प्रकृति , आतुरता से फागुन का ।*
*जैसे रस्ता देख रही हो , सजनी अपने साजन का ।।*
*अभी ना उल्लासित हो इतने , आई अभी बहार नहीं ।*
*हम अपना नववर्ष मनाएंगे , न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं ।।*
*लिए बहारें आँचल में , जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।*
*फूलों का श्रृंगार करके , धरती दुल्हन बन जाएगी ।।*
*मौसम बड़ा सुहाना होगा , दिल सबके खिल जाएँगे ।*
*झूमेंगी फसलें खेतों में , हम गीत खुशी के गाएँगे ।।*
*उठो खुद को पहचानो , यूँ कबतक सोते रहोगे तुम ।*
*चिन्ह गुलामी के कंधों पर , कबतक ढोते रहोगे तुम ।।*
*अपनी समृद्ध परंपराओं का , आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।*
*आर्यावर्त के वासी हैं हम , अब चैत्र प्रतिपदा को अपना नववर्ष मनाएंगे ।।*🙏🙏

Comments

Popular posts from this blog

संपूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा।

कैसा दिखाई देता था शताब्दियों पहले दिल्ली शहर; अनदेखी तस्वीरों में देख लीजिये

पर काया प्रवेश