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बद्रीनाथ या बद्रीनारायण मंदिर

बद्रीनाथ या बद्रीनारायण मंदिर एक हिन्दू मंदिर है |  ( बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और मान्यताये ! ) यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है , ये मंदिर भारत में उत्तराखंड में बद्रीनाथ शहर में स्थित है | बद्रीनाथ मंदिर , चारधाम और छोटा चारधाम तीर्थ स्थलों में से एक है  यह अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है । ये पंच-बदरी में से एक बद्री हैं। उत्तराखंड में पंच बदरी, पंच केदार तथा पंच प्रयाग पौराणिक दृष्टि से तथा हिन्दू धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं | यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है | ऋषिकेश से यह 214 किलोमीटर की दुरी पर उत्तर दिशा में स्थित है | बद्रीनाथ मंदिर शहर में मुख्य आकर्षण है | प्राचीन शैली में बना भगवान विष्णु का यह मंदिर बेहद विशाल है | इसकी ऊँचाई करीब 15 मीटर है | पौराणिक कथा के अनुसार , भगवान शंकर ने बद्रीनारायण की छवि एक काले पत्थर पर शालिग्राम के पत्थर के ऊपर अलकनंदा नदी में खोजी थी | वह मूल रूप से तप्त कुंड हॉट स्प्रिंग्स के पास एक गुफा में बना हुआ था | बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण (Establishment of Badrinath t...

माता पार्वती के रहस्य

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*माता पार्वती के रहस्य* 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ पार्वती, उमा या गौरी मातृत्व, शक्ति, प्रेम, सौंदर्य, सद्भाव, विवाह, संतान की देवी हैं। देवी पार्वती कई अन्य नामों से जानी जाती है, वह सर्वोच्च हिंदू देवी परमेश्वरी आदि पराशक्ति (शिवशक्ति) की पूर्ण साकार रूप या अवतार है और शाक्त सम्प्रदाय या हिन्दू धर्म मे एक उच्चकोटि या प्रमुख देवी है और उनके कई गुण और पहलू हैं। उनके प्रत्येक पहलुओं को एक अलग नाम के साथ व्यक्त किया जाता है, जिससे उनके भारत की क्षेत्रीय हिंदू कहानियों में 10000 से अधिक नाम मिलते हैं।  लक्ष्मी और सरस्वती के साथ, वह हिंदू देवी-देवताओं (त्रिदेवी) की त्रिमूर्ति का निर्माण करती हैं। माता पार्वती हिंदू भगवान शिव की पत्नी हैं । वह पर्वत राजा हिमवान और रानी मैना की बेटी हैं। पार्वती हिंदू देवताओं गणेश, कार्तिकेय, अशोकसुंदरी की मां हैं। पुराणों में उन्हें श्री विष्णु की बहन कहाँ गया है। शिव विश्व के चेतना है तो पार्वती विश्व की ऊर्जा हैं। अन्य नाम 👉 शक्ति, सती, शिवानी, शाकम्भरी , शताक्षी, दुर्गा। निवासस्थान 👉 जब अविवाहित हिमालय, अन्यथा कैलाश। मंत्र 👉 ॥ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्च...

महादेव और शनि की कथा

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*महादेव और शनि की कथा* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ हिन्दू धर्म गर्न्थो और शास्त्रों में भगवान् शिवजी को शनिदेव का गुरु बताया गया है, तथा शनिदेव को न्याय करने और किसी को दण्डित करने की शक्ति भगवान् शिवजी के आशीर्वाद द्वारा ही प्राप्त हुई है, अर्थात शनिदेव किसी को भी उनके कर्मो के अनुसार उनके साथ न्याय कर सकते है और उन्हें दण्डित कर सकते है, चाहे वे देवता हो या असुर, मनुष्य हो या कोई जानवर। शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव एवम् देवी छाया के पुत्र शनिदेव को क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गयी है, शनिदेव बचपन में बहुत ही उद्ण्डत थे तथा पिता सूर्य देव ने उनकी इस उदंडता से परेशान होकर भगवान् शिवजी को अपने पुत्र शनि को सही मार्ग दिखाने को कहा, भगवान् शिवजी के लाख समझाने पर भी जब शनिदेव की उदंडता में कोई परिवर्तन नहीं आया। एक दिन भगवान् शिवजी ने शनिदेव को सबक सिखाने के लिए उन पर प्रहार किया जिससे शनिदेव मूर्छित हो गये, पिता सूर्यदेव के कहने पर भगवान् शिवजी ने शनिदेव की मूर्छा तोड़ी तथा शनिदेव को अपना शिष्य बना लिया और उन्हें दण्डाधिकारी का आशीर्वाद दिया, इस प्रकार शनिदेव न्यायधीश के समान न्याय एवं दण्ड के कार्य में भ...

एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो

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*जगत-जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया। वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं- ”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम-से-कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।” महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उदरपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?” श्रीशिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।” भगवान शंकर के आदेश को देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाक...

महाकाल महात्म्य (उज्जैन्)

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महाकाल महात्म्य (उज्जैन्)  〰️ 〰️ 🔸 〰️ 〰️ 🔸 〰️ 〰️ महाकाल मंदिर परिसर में प्रमुख 42 देवताओं के मंदिर है इस मन्दिर का लगभग साढ़े सात एकड़ में फैला विशाल परिसर संभवत भारत के किसी अन्य ज्योतिर्लिंग का नहीं है । देश के 12 ज्योर्तिलिंगो में एक श्री महाकाल पृथ्वी लोक के अधिपति है। उज्जैन पूरी दुनिया से इस अर्थ में अलग है कि आकाश में उज्जैन को जो मध्य स्थान प्राप्त है, वहीं धरती पर भी प्राप्त है। आकाश व धरती दोनेां के केन्द्र बिन्दु पर उज्जैन स्थित है। महाकाल का अर्थ समय और मृत्यु के देवता दोनों रूपों में लिया जाता है। इसी स्थान से पूरी पृथ्वी की काल गणना होती रही है। प्राचीन श्री महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण 11 वी शताब्दी में हुआ। श्री महाकाल पृथ्वी के नाभी केन्द्र पर स्थित दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो दुनिया का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है। तंत्र मन्त्र की दृष्टि से भी इस दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग का बडा महत्व है। विश्व में अकेले श्री महाकाल है जो विविध रूपों में भक्तों को दर्शन देते है। कभी प्राकृतिक रूप में तो कभी राजसी रूप में आभूषण धारण कर। कभी भांग, कभी चंदन और सूखे मेवे से तो कभी फल...

भगवान गणेश-तुलसी और दूर्वा की कथा*

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*🌻भगवान गणेश-तुलसी और दूर्वा की कथा* *🕉️🚩हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान गणेश को भगवान  श्री कृष्ण का अवतार बताया गया है और भगवान श्री कृष्ण स्वयं भगवान विष्णु के अवतार है। लेकिन जो तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इतनी प्रिय की भगवान विष्णु के ही एक रूप शालिग्राम का विवाह तक तुलसी से होता है वही तुलसी भगवान गणेश को अप्रिय है, इतनी अप्रिय की भगवान गणेश के पूजन में इसका प्रयोग वर्जित है।  पर ऐसा क्यों है इसके सम्बन्ध में एक पौराणिक कथा है* *🌹🔱एक बार श्री गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। इसी कालावधि में धर्मात्मज की नवयौवना कन्या तुलसी ने विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर प्रस्थान किया। देवी तुलसी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पंहुची। गंगा तट पर देवी तुलसी ने युवा तरुण गणेश जी को देखा जो तपस्या में विलीन थे। शास्त्रों के अनुसार तपस्या में विलीन गणेश जी रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे। उनके समस्त अंगों पर चंदन लगा हुआ था। उनके गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के अनेक हार पड़े थे। उनके कमर में अत्यन्त कोमल रेशम का पीताम्बर लिपटा हुआ...

शिवलिंग से जुड़े ये रहस्य

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*शिवलिंग से जुड़े ये रहस्य?* हर शिवालयों या भगवान शिव के मंदिर में आप ने देखा होगा की उनकी आरधना एक गोलाकर पत्थर के रूप में लोगो द्वारा की जाती है जो पूजास्थल के गर्भ गृह में पाया जाता है.। महादेव शिव को सिर्फ भारत और श्रीलंका में ही नहीं पूजा जाता बल्कि विश्व में अनेको देश ऐसे है जहाँ भगवान शिव की प्रतिमा या उनके प्रतीक शिवलिंग की पूजा का प्रचलन है . पहले दुनियाभर में भगवान शिव हर जगह पूजनीय थे, इस बात के हजारो सबूत आज भी वर्तमान में हमे देखने को मिल सकते है. *रोम में शिवलिंग*   प्राचीन काल में यूरोपीय देशो में भी शिव और उनके प्रतीक शिवलिंग की पूजा का प्रचलन था. इटली का शहर रोम दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है. रोम में प्राचीन समय में वहां के निवासियों द्वारा शिवलिंग की पूजा ''प्रयापस'' के रूप में की जाती थी. रोम के वेटिकन शहर में खुदाई के दौरान भी एक शिवलिंग प्राप्त किया गया जिसे ग्रिगोरीअन एट्रुस्कैन म्यूजियम में रखा गया है। इटली के रोम शहर में स्थित वेटिकन शहर का आकार भगवान शिव के आदि-अनादि स्वरूप शिवलिंग की तरह ही है, जो की एक आश्चर्य प्रतीत होता है. हाल ही मे...