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ढाणी की कथा कहानी

ढाणी की कथा कहानी ढाणी राजस्थान से लेकर पंजाब व हरियाणा सहित अनेक राज्यों की बसावट का अभिन्न हिस्सा रही है। खेत में रहने के लिए बनाए घर को ही ढाणी कहा जाता है। यह राजस्‍थान और कई राज्‍यों की बसावट की विशेषता है जिसके बारे में ज्‍यादातर लोग जानते नहीं। लोगों ने ढाणी के बारे में सुना है तो लेकिन वे नहीं जानते कि इसका मतलब क्या होता है। उदाहरण के लिए राजस्‍थान को ही लें। रेत, ऊंट, दुर्जेय दुर्ग और बड़े-बड़े महल.. राजस्‍थान की बात करते समय आमतौर पर यही पांच दस शब्‍द हैं जो कहे या सुने जाते हैं। वहां के गांवों, चकों और ढाणियों की बात कोई नहीं करता। ढाणी तक तो बात पहुंचती ही नहीं। जबकि सचाई यही है कि राजस्थान के ग्रामीण जीवन की चर्चा ढाणी के जिक्र के बिना पूरी हो ही नहीं सकती।  ढाणी केवल राजस्‍थान नहीं, समूचे थार और आसपास के इलाके की अनूठी विशेषता है। यहां के लोकजीवन में ढाणी का ऐतिहासिक व सांस्‍कृतिक महत्‍व है। तो सवाल  कि ढाणी क्या है?  दरअसल ढाणी को मानवीय बसावट की सबसे छोटी इकाई माना जाता है। घर, आंगन और ढाणी।  ढाणी शब्द संभवत: धानी से आया है जिसका अर्थ बसावट...

स्पेशल प्रश्नोत्तरी 02

प्रश्न : एक औरत अपने पति को वह कौनसी चीज़ है जिसको वो अपने पति को नहीं दे सकती है ? उत्तर  : कुलनाम प्रश्न- तलाक होने का मूल कारण क्या है? उत्तर - तलाक शब्द को सुनते ही सभी के मन में इसका मुख्य कारण झगड़ा होना आता है, लेकिन यह तलाक का मूल कारण नहीं है। मूल कारण शादी होना है। अगर शादी नहीं हो तो तलाक भी नहीं होगा। प्रश्न - साड़ी किस तरह की पहनी है और उनकी साड़ी पर बनी बॉर्डर क्या दर्शाती है। उत्तर- यह प्रश्न यूपीएससी 2020 में 9वां स्थान हासिल करने वाली अपाला मिश्रा से पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस साड़ी की बॉर्डर पर वर्ली पेंटिंग की गई है। यह महाराष्ट्र के सह्याद्री से आती है। बॉर्डर पर किया गया आर्ट वर्क सामान्य जन जीवन को दर्शाता है। प्रश्न- ऐसी कौनसी चीज है जो पुरुष एक बार करता है और महिला बार बार करती है ? उत्तर- मांग में सिंदूर प्रश्न - तुमने सलवार के नीचे क्या पहना हुआ है ? उत्तर -  लड़की ने जवाब दिया ‘सर मैंने सलवार के नीचे पजेब और सैंडल पहनी हुई है। प्रश्न – ऐसा कौन सा काम है जो समाज में कुंवारी लड़की कर ले तो बदनाम होती है? उत्तर : मांग में सिंदूर प्र...
👉🏻गर्मियों में घर मे स्लीपर पहनना छोड़ दें...  जिन लोगों को पूरे साल (गरमी में भी) घर में स्लीपर पहनने की आदत है, उनसे मेरी सलाह है कि कम से कम गरमी के मौसम में घरों मे स्लीपर छोड़ दें और अपने पैरों को ज्यादा से ज्यादा जमीन को छूने दें। *एक तो* पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। *दूसरे* वह चुम्बकीय शक्ति हमारे शरीर के सारे दर्द भी खींच लेने में समर्थ है। *तीसरे* हमारे शरीर की स्वःउत्पादित बिजली की  अर्थिंग भी हो जाती है। *चार* ...और तो और ये भी जान लीजिये की हमारे शरीर की करीब 7000 नसों का एंड पॉइंट भी पगथली अर्थात पैर के निचले भाग अपर ही आकर ख़त्म होता है...  तो नंगे पैर पैदल चलने से उनसब पर प्रेशर पड़ता है और एक्युप्रेशर का लाभ स्वतः मिल जाता है. *शरीर है आपका, निर्णय भी आपका*

कुभलगढ़ किला

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*कुभलगढ़ किला* घूमने के लिए बेहतरीन जगह भारत में ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। यहां एक से बढ़कर एक महल और किले हैं, जो देखने लायक है। यदि आप इतिहास में रूचि रखते हैं और किलों और महलों को देखने का शौक है, तो आपको राजस्थान जरूर जाना चाहिए। इस राज्य में कई पहाड़ी किले हैं, जिनमें से एक है कुम्भलगढ़ किला | करीब 3,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं। इस किले से आप थार रेगिस्तान के सुंदर दृश्यों का आनंद उठा सकते हैं। जब भी आपको मौका मिले, एक बार इस किले की जरूर सैर कर आएं। आइए आपको बताते है इस किले की कुछ खास बाते कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के ढ़लवाये जिन पर दुर्ग और उसका नाम अंकित था। वास्तुशास्त्र के अनुसार बने इस दुर्ग में प्रवेश द्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए संकटकालीन द्वार, महल, मंदिर, आवासीय इमारतें, यज्ञ वेदी, स्तम्भ, छत्रियां आदि बने है। निर्माणकर्ता इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुंभा ने सन 13 मई 1459 वार शनिवार को कराया था।...

सामान्य प्रश्न उत्तर भाग 1

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प्रश्न : 1 मनुष्य द्वारा धरती पर सबसे पहले किस धातु का इस्तेमाल किया गया? उत्तर : पृथ्वी पर अब तक 114 से ज्यादा तत्व ज्ञात हैं। जिनमे "तांबा" एक ऐसा तत्व है। जिसे इंसानों ने सबसे पहले इस्तेमाल किया था। प्रश्न : 2 किस देश में ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या करना भारी पड़ सकता है? उत्तर : जहां हमारे देश भारत में रोज ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या करने की घटना सामने आती है। वहीं "जापान” दुनिया का एक ऐसा देश है, जहां के नागरिक ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। क्योंकि ऐसा करने वाले को नुकसान सहते हुए उसके परिवार को अच्छा खासा जुर्माना देना पड़ता है। प्रश्न : 3 जलेबी को इंग्लिश में क्या कहते है? उत्तर : जलेबी का इंग्लिश Funnel Cake, Rounded Sweet और syrup filled ring होता है। प्रश्न : 4 अगर इस दुनिया से 5 सेकंड के लिए ऑक्सीजन गायब हो जाये तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा ? उत्तर: हमारे पैरों के नीचे से जमीन खिसक कर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी। धातुओं के सिरे बिना वेल्डिंग के अपने आप जुड़ जाएंगे। धरती बहुत ज्यादा ठंडी हो जाएगी और हर जीवित कोशिका फूलकर फट जाएगी।...

आप भी एक सफल राइटर बन सकते हैं

आप भी एक सफल राइटर बन सकते हैं  देश-दुनिया में सदियों से राइटर्स और पोएट्स ने लोगों के साथ-साथ मानव समाज और सभ्यता पर सतत प्रभाव डाला है। हमारे देश भारत में संत कबीर, रविदास, गुरु नानक देव ने जहां ईश्वर भक्ति के प्रचार के लिए कई नए राइटिंग स्टाइल्स का इस्तेमाल किया है तो वही, मिर्जा गालिब, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु जैसे अनेक राइटर्स ने भी शानदार लेखन किया है इसी तरह, शेक्सपियर, जेके रोलिंग, मार्क ट्वेन, लियो टॉलस्टॉय, जेन ऑस्टिन और चार्ल्स डेकिन्स और होमर ने भी पूरी दुनिया के ज्ञान और जानकारी को करें। अपनी राइटिंग्स से समृद्ध किया है। वैसे तो राइटिंग टैलेंट और रिकल्स के लिए किसी खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती है लेकिन, इस स्पेशलाइजेशन के युग में यदि आप एक सफल राइटर बनना चाहते हैं तो आपको अपने लैंग्वेज स्किल्स को हमेशा सुधारना होगा और इसके साथ ही आपको क्रिएटिव राइटिंग स्किल्स में भी पेशेवर ट्रेनिंग अवश्य लेनी चाहिए। इसलिए, इस आर्टिकल में हम आपके लिए एक सफल राइटर आपको राइटिंग फील्ड में खास पहचान मिल ही जाती है। बनने के कुछ टिप्स की जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं। राइटिंग क...

जलियांवाला बाग, अमृतसर, पंजाब भारत

जलियांवाला बाग, अमृतसर, पंजाब भारत जलियांवाला वाग हत्याकांड भारत के स्वाधीनता आंदोलन की सबसे त्रासद घटना थी। साहित्य के आइने में इस घटना का सजीव और मार्मिक चित्रण द्रवित कर देता है। जलियांवाला वाग के प्रतिबंधित साहित्य पर केंद्रित आलेख... अंग्रेजों के भारत में काबिज होते मूल्यों पर पाश्चात्य असर दृष्टिगोचर होने लगा था। सभ्यताओं के बीच की खाई से जागरूक लोग भारतीय जनता के एक हिस्से के उदीयमान राष्ट्रीय प्रतीक बन रहे थे। परंपरागत चिंतन और पाश्चात्य प्रभाव से राष्ट्रीय चेतना का ढांचा गुना बना जाने लगा था जिसको साहित्य, कला, राजनीतिक, सामाजिक सुधार आंदोलनों और बौद्धिक-साहित्यिक संगठनों के माध्यम से अभिव्यक्ति मिली।  अनेक भाषाओं में भारतीय साहित्यकारों ने अंग्रेजों के अन्यायकारी कुकृत्यों को उजागर करने और जनचेतना जगाने का बीड़ा उठाया। यह साहित्य ब्रितानो हुकूमत के लिए भयभीत करने वाला और असहनीय था। अतः उन्होंने उन कृतियाँ / रचनाओं को सीआईडी तथा सन् 1860 में बने आईपीसी कानून की धारा 124 ए के तहत प्रतिबंधित / जब्त कर लिया कलमकारों, प्रकाशकों व मुद्रको को यातनाएं दी गई, मुद्रणालयों पर छापे पड...