कहानी| परमात्मा का निवास-स्थान yt

आपका प्यारा मित्र 🌹जितेंद्र सिंह तोमर 🌹लेकर के आया है एक प्यारी सी कहानी आपके लिए । इसका शीर्षक है ->

🌺 परमात्मा का निवास-स्थान 🌺

एक बार एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये । दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे रखे हुए थे, वह संन्यासी दुकान पर रुके और एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए संन्यासी ने दुकानदार से पूछा,
 "इसमें क्या है?"

दूकानदार ने कहा-, 'इसमे नमक है!"

 संन्यासी ने फिर पूछा, "इसके पास वाले मे क्या है?"

 दुकानदार ने कहा, "इसमें हल्दी है! "

इसी प्रकार संन्यासी पूछते गए और दुकानदार बतलाता रहा, सबसे अंत मे सबसे पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया। 

संन्यासी ने पूछा, "उस अंतिम डिब्बे में क्या है? " 

दुकानदार बोला, "उसमे राम-राम है!"

संन्यासी ने पूछा, "यह राम-राम किस वस्तु का नाम है! "

दुकानदार ने कहा, " महात्मन ! और डिब्बे में तो भिन्न-भिन्न वस्तुए है, पर यह डिब्बा खाली है, हम खाली को खाली नहीं कहकर राम-राम कहते है! "

संन्यासी की आखें खुली की खुली रह गई , "ओह ! तो खाली में राम रहता है! भरे हुए में राम को स्थान कहा?"

"लोभ, लालच, ईर्षा, द्वेष और भली-बुरी बातों से जब दिल और दिमाग भरा रहेगा तो उसमे ईश्वर का वास कैसे होगा?

राम यानी ईश्वर तो खाली याने साफ-सुथरे मन में ही निवास करता है।

आपको यह कहानी कैसी लगी हमें अवश्य बताइएगा आपका प्यारा मित्र 

जितेन्द्र सिंह तोमर 

Comments

Popular posts from this blog

संपूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा।

कैसा दिखाई देता था शताब्दियों पहले दिल्ली शहर; अनदेखी तस्वीरों में देख लीजिये

पर काया प्रवेश