चुटकुले

* अधिकारी (उम्मीदवार से), "तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है ?"

उम्मीदवार, "जी उनका नाम है बिजलीदीन।"

अधिकारी (हैरान होंकर), "बिजलीदीन ? भला यह क्या नाम हुआ ?"

उम्मीदवार, " जी उनका नाम तो चिरागदीन था। अब विज्ञान का जमाना देख कर उन्होंने अपना नाम चिरागदौन से बिजलीदीन रख लिया है।"

* डाकू (कंजूस सेठ पर पिस्तौल तानते हुए), "जान देनी है या माल?"

कंजूस सेठ, "जान ही ले लो भाई। माल तो मैंने बुढ़ापे के लिए बचाकर रखा है।"

* सुरजीत ने कस्टमर केयर को फोन किया और बोला, "हैलो सर! मेरी भैंस है न... सिम खाकर भाग गई है।"

कस्टमर केयर आप्रेटर, "तो मैं क्या करूं?"

सुरजीत, "आप मुझे यह बताओ कि कहीं वहां रोमिग तो नहीं लग रही न ?"

* पति, " आज खाना तुम्हारी मां ने बनाया है क्या?"

चंचल, "लेकिन आपको कैसे मालूम 2" पति, "पहले तो रोज खाने में काले बाल मिलते थे, आज सफेद निकल रहे हैं।"

* सचिव ने नेता जी से पूछा, "सर, आपने जूता फैक्टरी का उद्घाटन करने का निमंत्रण स्वीकार क्यों नहीं किया?"

नेता जी बोले, "पिछले चुनाव का अनुभव है। जूता-चप्पल जितने कम बनें उतना ही अच्छा है।”

* दूधवाला (बेटे से), "पानी में दूध डाल दो।"

बेटा, "पानी में दूध डालने का क्या मतलब ?"

दूधवाला, "ताकि हम कसम खा कर कह सकें कि हमने दूध में पानी नहीं मिलाया।"

एक आदमी पैट्रोल की बढ़ती हुई कीमतों पर बहुत विचार कर रहा था। कुछ देर बाद ही उसके दोस्त ने उससे पूछा, "न तुम्हारे पास स्कूटर है, न कार है फिर तुमः पैट्रोल की कीमतों के बारे में क्यों चितित हो रहे हो ?"

उसके दोस्त ने जवाब दिया, "मेरे पास सिगरेट जलाने के लिए जो लाइटर है वह भी तो पैट्रोल से चलता है।"

* एक संपादक ने एक नए उपन्यास के लेखक से पूछा, "आपके इस उपन्यास में कहीं ढोल का जिक्र है?"

लेखक, "जी नहीं।"

संपादक, "नगाड़े का।"

लेखक, "जी नहीं।"

संपादक, "तो फिर तुम अपने नए उपन्यास का नाम रखिए "न ढोल न नगाड़ा।"

* अध्यापक (गिन्नी से), "बताओ लिग के कितने प्रकार होते हैं ?"

गिन्नी, "जी चार।"

अध्यापक, "कौन-कौन से?"

गिन्नी, "पुलिग, स्त्री लिग, डार्लिंग और दार्जीलिंग।"

* दो मूर्ख गिन्नी और लक्की एक नाव में बैठ कर नदी पार कर रहे थे। अचानक नाव में छेद हो गया और पानी अंदर आ गया।

गिन्नी बोला, "डरने की कोई बात नहीं हम एक छेद और कर देते हैं, जिससे एक छेद से पानी आए और दूसरे से निकल जाए।"

वह अपना प्याला अच्छी तरह पहचानती है।"

* अध्यापक (हनी से), "तुम अगले जन्म में क्या बनना चाहोगे ?"

हनी, "सर, जिराफ बनना चाहूंगा।" अध्यापक, "क्यों?" हनी, "ताकि आप मेरे कान न मरोड़

सकें।"

* सुरजीत (मजदूर से), "मैंने तुम्हारा पसीना सूखने से पहले ही मजदूरी दे दी है, फिर भी तुम खुश नहीं हो।"

• मजदूर, "लेकिन जनाब यह मजदूरी इतनी कम दी है कि मुझे फिर पसीना आ गया है।"

* मजदूर (कमल से), "गधे की तरह काम करवाया और मजदूरी सिर्फ 20 रुपए... कुछ तो न्याय कीजिए।"

कमल (मुनीम से), "ठीक है यह न्याय मांगता है तो इसके सामने घास डाल दो और रुपए वापस ले लो।"

* तीषू ने कवि से पूछा, "अंकल अभी मैंने देखा कि आप कविता सुनाते समय अपनी आंखें बंद किए हुए थे। ऐसा क्या ?"

कवि, "बेटे इसलिए क्योंकि मुझसे अपनी कविता सुनाते समय नहीं जाता।

* अध्यापक, "तुम्हें सबसे अच्छी आवाज किस साज की लगती है ?" मनी, "छुट्टी की घंटी की।"

* अश्विनी (कृष्ण से), "ये नेता लोग

वायदे करके पूरा क्यों नहीं करते ?" कृष्ण, "ताकि जब दोबारा इलैक्शन हों तो वे फिर से वही वायदे दोहरा सकें।"

* विक्की (सेठ जी से), "आपने अपनी दुकान को वातानुकूलित क्यों बनाया है?" सेठ, "ताकि वस्तुओं का मूल्य सुन कर ग्राहकों को पसीना न आए।

* भिखारी, "है कोई खुदा का बंदा जो मुझे सिनेमा दिखा दे?"

पप्पू, "अरे भई तुम तो अंधे हो ?" भिखारी, "दाता गाना ही सुन लूंगा।

* शिक्षक (छात्र से), "मेरे दांत सड़ गए हैं। इस वाक्य को भूतकाल में बदली।"

छात्र," आपने तंबाकू खाई थी।" शिक्षक (खीझते हुए), "चलो अब उसे

..

बाल बिइव्स शनिवार टाइम्स 23 जून 2018

भविष्यकाल में बदली।" छात्र (आंख मटकाते हुए), " आपको कैंसर होगा।"

* ग्राहक, "दूध और मिठाई पर कितनी मक्खियां बैठी हुई हैं। इन्हें हटाते क्यों नहीं?" हलवाई, "मेरे पास इन्हें हटाने का समय नाहीं है। वैसे भी मैंने कौन-सा इन्हें यहां बुलाया है।”

* कल रात सर्कस का एक शेर पिजरे से बाहर निकल गया। दर्शकों में अफरा-तफरी मच गई थी सिर्फ रिंग मास्टर शांत था।" अमित ने कहा।

"वह कैसे ?" हरविंद्र ने पूछा।

"रिंग मास्टर शेर के पिंजरे में जा घुसा था और उसने पिंजरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया था।" अमित ने कहा।

* पागल (डाक्टर से), "क्या रात को आप चौकीदारी की पार्ट टाइम जॉब करते हैं?" डाक्टर, "तुम्हें ऐसा क्यों लगा ?"

पागल, "क्योंकि आप रात 12 बजे इस बिल्डिग के चारों ओर, राऊंड लगाते नजर आते हैं।"

* डाक्टर (बुड़े मरीज से), "ऐसी दवा दूंगा कि तुम फिर से जवान हो जाओगे।" बुड़ा मरीज, "ऐसा मत कीजिएगा, मेरी पेंशन बंद हो जाएगी।"

* डाकुओं ने बैंक लूट कर कैशियर से भी अपने साथ चलने के लिए कहा तो वह बोला, "बैंक तो लूट ही लिया। अब मुझसे क्या काम है ?"

डाकुओं का सरदार बोला, "इतने नोटों को गिन कर सबके हिस्से के अलग-अलग बंडल बनाकर कौन देगा ?"

* पिता (बेटे से), "तुम्हारे सहपाठी कह रहे थे कि तुमने स्कूल में आज फिर बहुत शैतानी की।"

बेटा, "सब झूठ बोलते हैं, आज ती मैं शुरू से आखिर तक चुपचाप बैंच पर खड़ा रहा।"

* रोगी, , "डाक्टर साहब, मुझे हर चीज की दो चीजें दिखाई देती इलाज बताइए।" हैं। कोई

डाक्टर, "अच्छा ठीक है। तुम सब रख बारी बारी ?" ओ। चारों एक साथ क्यों यों आ गए?" से आओ। चारों

नवीन, "पापा। पानीपत की पहली लड़ाई

मेरे संग हंस लो

के बाल कभी सफेद ही न हों।" सोहन, "आप उस आदमी को गंजा कर दीजिए।"

* एक युवक ने अपने दोस्त से कहा, "मेरे दांतों में बहुत दर्द है।" मित्र ने उत्तर दिया, " यदि मेरा दांत होता, तो मैं फौरन निकलवा देता।"

युवक ने कहा, "हां, तुम्हारा दांत होता, तो मैं भी निकलवा देता।"

* एक लड़के ने पूछा, "कार और सरकार में क्या अंतर है?"

दूसरे लड़के का जवाब था, "सरकार आंख बंद करके चलाई जा सकती है, पर कार नहीं।"

- कमल लुणिया (इंदौर)

* मुन्नी, "पिता जी, दरवाजे पर कोई आया है।"

पिता जी, "देखो, कौन है ?"

मुन्त्री, "एक मूंछवाला है। पिता जी, "कह दो, हमें नहीं चाहिए।"

* पति, "यहां एक पुस्तक पड़ी थी, पता नहीं कहां चली गई।" पत्नी, "कौन-सी पुस्तक?"

पति. "सौ साल तक जीवित रहने का रहस्य।" पत्नी, "वह तो मैंने जला दी।" पति, "क्यों ?"

पत्नी, "कल तुम्हारी मम्मी जी आ रही हैं उनके हाथ लग जाती तो...?"

भिखारी, "साहब, इस लाचार की मदद करें।"

बांकेलाल, "तुम्हारे हाथ, पैर, कान, आंखें सभी ठीक हैं। तुम कैसे लाचार हो ?" भिखारी, "जी मैं काम न करने की आदत से लाचार हूं।"

कहां पर हुई थी ?"

पापा, "इतना भी नहीं पता, स्कूल में क्या करने जाता है। कल पूछ कर आना अपने टीचर से।"

एक महिला, "हाय-हाय। इस गली में गंदे गंदे बच्चे कीचड़ में खेलते हैं। दूसरी महिला, "कल चार बच्चों का मुंह धोया तब जाकर मैं अपना बच्चा पहचान पाई।"

* राजेश (सुरेश से), "नजर इंसान की तेज होती है या जानवर की।" सुरेश, "जानवर की।"

राजेश, "तुम कैसे कह सकते हो ?" सुरेश, "जानवर कभी ऐनक नहीं लगाते।"

* तीन मूर्ख पहली बार शहर जाते हैं। जाते ही एक सुंदर इमारत देखकर खुश होते हैं और इमारत को घसीट कर गांव ले जाने का प्रोग्राम बनाते हैं। तीनों इमारत को धक्का लगाना शुरू करते हैं। काफी थक जाने के बाद पसीना आ जाता है तो कपड़े उत्तार कर रख देते हैं और फिर धक्का लगाना शुरू

कर देते हैं। पीछे से चोर कपड़े उठाकर भाग जाता है। थोड़ी देर बाद तीनों मूर्ख कपड़े न देख कर खुश होकर उछलते हैं, देखो हम तीनों इमारत की कितना आगे ले आए। कपड़े हमारे पीछे रह गए। हा-हा।" हा-हा-

3 अध्यापक, "सोहन, कोई ऐसा उपाय बताओ कि आदमी

* शिक्षक (छात्र से), "मेरे दांत सड़ गए हैं। इस वाक्य को भूतकाल में बदली।"

छात्र," आपने तंबाकू खाई थी।" शिक्षक (खीझते हुए), "चलो अब उसे

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बाल बिइव्स शनिवार टाइम्स 23 जून 2018

भविष्यकाल में बदली।" छात्र (आंख मटकाते हुए), " आपको कैंसर होगा।"

* ग्राहक, "दूध और मिठाई पर कितनी मक्खियां बैठी हुई हैं। इन्हें हटाते क्यों नहीं?" हलवाई, "मेरे पास इन्हें हटाने का समय नाहीं है। वैसे भी मैंने कौन-सा इन्हें यहां बुलाया है।”

* कल रात सर्कस का एक शेर पिजरे से बाहर निकल गया। दर्शकों में अफरा-तफरी मच गई थी सिर्फ रिंग मास्टर शांत था।" अमित ने कहा।

"वह कैसे ?" हरविंद्र ने पूछा।

"रिंग मास्टर शेर के पिंजरे में जा घुसा था और उसने पिंजरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया था।" अमित ने कहा।

* पागल (डाक्टर से), "क्या रात को आप चौकीदारी की पार्ट टाइम जॉब करते हैं?" डाक्टर, "तुम्हें ऐसा क्यों लगा ?"

पागल, "क्योंकि आप रात 12 बजे इस बिल्डिग के चारों ओर, राऊंड लगाते नजर आते हैं।"

* डाक्टर (बुड़े मरीज से), "ऐसी दवा दूंगा कि तुम फिर से जवान हो जाओगे।" बुड़ा मरीज, "ऐसा मत कीजिएगा, मेरी पेंशन बंद हो जाएगी।"

* डाकुओं ने बैंक लूट कर कैशियर से भी अपने साथ चलने के लिए कहा तो वह बोला, "बैंक तो लूट ही लिया। अब मुझसे क्या काम है ?"

डाकुओं का सरदार बोला, "इतने नोटों को गिन कर सबके हिस्से के अलग-अलग बंडल बनाकर कौन देगा ?"

* पिता (बेटे से), "तुम्हारे सहपाठी कह रहे थे कि तुमने स्कूल में आज फिर बहुत शैतानी की।"

बेटा, "सब झूठ बोलते हैं, आज ती मैं शुरू से आखिर तक चुपचाप बैंच पर खड़ा रहा।"

* रोगी, , "डाक्टर साहब, मुझे हर चीज की दो चीजें दिखाई देती इलाज बताइए।" हैं। कोई

डाक्टर, "अच्छा ठीक है। तुम सब रख बारी बारी ?" ओ। चारों एक साथ क्यों यों आ गए?" से आओ। चारों

नवीन, "पापा। पानीपत की पहली कहां पर हुई थी ?"

पापा, "इतना भी नहीं पता, स्कूल में क्या करने जाता है। कल पूछ कर आना अपने टीचर से।"

एक महिला, "हाय-हाय। इस गली में गंदे गंदे बच्चे कीचड़ में खेलते हैं। दूसरी महिला, "कल चार बच्चों का मुंह धोया तब जाकर मैं अपना बच्चा पहचान पाई।"

* राजेश (सुरेश से), "नजर इंसान की तेज होती है या जानवर की।" सुरेश, "जानवर की।"

राजेश, "तुम कैसे कह सकते हो ?" सुरेश, "जानवर कभी ऐनक नहीं लगाते।"

* तीन मूर्ख पहली बार शहर जाते हैं। जाते ही एक सुंदर इमारत देखकर खुश होते हैं और इमारत को घसीट कर गांव ले जाने का प्रोग्राम बनाते हैं। तीनों इमारत को धक्का लगाना शुरू करते हैं। काफी थक जाने के बाद पसीना आ जाता है तो कपड़े उत्तार कर रख देते हैं और फिर धक्का लगाना शुरू

कर देते हैं। पीछे से चोर कपड़े उठाकर भाग जाता है। थोड़ी देर बाद तीनों मूर्ख कपड़े न देख कर खुश होकर उछलते हैं, देखो हम तीनों इमारत की कितना आगे ले आए। कपड़े हमारे पीछे रह गए। हा-हा।" हा-हा-

3 अध्यापक, "सोहन, कोई ऐसा उपाय बताओ कि के बाल कभी सफेद ही न हों।" सोहन, "आप उस आदमी को गंजा कर दीजिए।"

* एक युवक ने अपने दोस्त से कहा, "मेरे दांतों में बहुत दर्द है।" मित्र ने उत्तर दिया, " यदि मेरा दांत होता, तो मैं फौरन निकलवा देता।"

युवक ने कहा, "हां, तुम्हारा दांत होता, तो मैं भी निकलवा देता।"

* एक लड़के ने पूछा, "कार और सरकार में क्या अंतर है?"

दूसरे लड़के का जवाब था, "सरकार आंख बंद करके चलाई जा सकती है, पर कार नहीं।"

- कमल लुणिया (इंदौर)

* मुन्नी, "पिता जी, दरवाजे पर कोई आया है।"

पिता जी, "देखो, कौन है ?"

मुन्त्री, "एक मूंछवाला है। पिता जी, "कह दो, हमें नहीं चाहिए।"

* पति, "यहां एक पुस्तक पड़ी थी, पता नहीं कहां चली गई।" पत्नी, "कौन-सी पुस्तक?"

पति. "सौ साल तक जीवित रहने का रहस्य।" पत्नी, "वह तो मैंने जला दी।" पति, "क्यों ?"

पत्नी, "कल तुम्हारी मम्मी जी आ रही हैं उनके हाथ लग जाती तो...?"

भिखारी, "साहब, इस लाचार की मदद करें।"

बांकेलाल, "तुम्हारे हाथ, पैर, कान, आंखें सभी ठीक हैं। तुम कैसे लाचार हो ?" भिखारी, "जी मैं काम न करने की आदत से लाचार हूं।"

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