प्रदोष व्रत (सन् 2025-26 ई.)

प्रदोष व्रत (सन् 2025-26 ई.)

प्रदोष व्रत भगवान् शिव की प्रसन्नता और प्रभुत्व की प्राप्ति हेतु किया जाता है। वैसे तो सभी प्रदोष व्रत अत्यन्त कल्याणप्रद होते हैं, परन्तु शनिप्रदोष सन्तान प्राप्ति के लिए, भौम प्रदोष ऋणमोचन हेतु; सोमप्रदोष मनःशान्ति एवं सुरक्षा हेतु, रवि-प्रदोष व्रत आरोग्य प्राप्ति एवं आयुवृद्धि के लिए विशेष अधिक फलदायी होता है। -व्रती को चाहिए कि व्रत वाले दिन सूर्यास्त के समय पुनः स्नान करके शिवपूजन एवं कथा करें और तत्पश्चात् 
"भवाय भवनाशाय, महादेवाय धीमते। 
रूद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशि मौलिने। 
उग्रायोग्राघनाशाय भीमाय भय हारिणे। 
ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नमः ।।" 
से प्रार्थना करके भोजन करें।

पौष शुक्ल.          11 जन. शनि
माघ कृष्ण (सोम)          27 जन. सोम
माघ शुक्ल (सोम)          10 फर. सोम
फाल्गुन कृष्ण (भौम )          25 फर. मंग
फाल्गुन शुक्ल (भौम)          11 मार्च मंग
चैत्र कृष्ण          27 मार्च गुरु
चैत्र शुक्ल          10 अप्रै. गुरु
वैशाख कृष्ण          25 अप्रै. शुक्र
वैशाख शुक्ल          9 मई शुक्र
ज्येष्ठ कृष्ण (शनि)          24 मई शनि
ज्येष्ठ शुक्ल          8 जून रवि
आषाढ़ कृष्ण (सोम)          23 जून सोम
आषाढ़ शुक्ल (भौम)          8 जुला. मंग
श्रावण कृष्ण (भौम)          22 जुला. मंग
श्रावण शुक्ल          6 अग. बुध
भाद्रपद कृष्ण          20 अग. बुध
भाद्रपद शुक्ल          5 सितं. शुक्र
आश्विन कृष्ण          19 सितं. शुक्र
आश्विन शुक्ल (शनि)          4 अक्तू. शनि
कार्तिक कृष्ण (शनि)          18 अक्तू. शनि
कार्तिक शुक्ल (सोम)          3 नवं. सोम
मार्गशीर्ष कृष्ण (सोम)          17 नवं. सोम
मार्गशीर्ष शुक्ल (भौम)          2 दिसं. मंग
पौष कृष्ण          17 दिसं. बुध
पौष शुक्ल          1 जन. गुरु
माघ कृष्ण          16 जन. शुक्र
माघ शुक्ल          30 जन. शुक्र
फाल्गुन कृष्ण (शनि)          14 फर. शनि
फाल्गुन शुक्ल          1 मार्च रवि
चैत्र कृष्ण (सोम)          16 मार्च सोम

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