बरसाने का "मोती कुंड
🚩🕉️बरसाने का "मोती कुंड🕉️🚩
मथुरा में बरसाना और नंदगांव के बीच में मोती कुंड मौजूद है। यह कुंड तीन तरफ से पीलू के पेड़ों से घिरा हुआ है। इस पेड़ में मोती जैसे फूल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन पेड़ों को कान्हा ने नंदबाबा के कीमती मोतियों को बो कर उगाया था।
बरसाना के विरक्त संत साधु बाबा बताते हैं कि गर्ग संहिता, गौतमी तंत्र समेत कई ग्रंथों में इस महान कुंड और राधा-कृष्ण की सगाई का वर्णन है। गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला के बाद दोनों की सगाई हुई थी। सगाई के दौरान राधा जी के पिता वृषभानु जी ने नंदबाबा जी को उपहार में मोती दिए। तब नंद बाबाजी चिंता में पड़ गए कि इतने कीमती मोती कैसे रखें।
श्रीकृष्ण जी चिंता समझ गए। उन्होंने मां यशोदा जी से लड़कर मोती ले लिए। घर से बाहर निकलकर कुंड के पास जमीन में मोती बो दिए। जब यशोदा जी ने कृष्ण जी से पूछा कि मोती कहां है। तब उन्होंने इसके बारे में बताया।
बहुत समय पश्चात जब नंद बाबा जी को मोतियों के बारे में पता चला तो
नंद बाबाजी भगवान श्रीकृष्णजी के कार्य से नाराज हुए और मोती जमीन से निकालकर लाने को लोगों को भेजा। जब लोग यहां पहुंचे तो देखा कि यहां पेड़ उग आए हैं और पेड़ों पर मोती लटके हुए हैं। तब बैलगाड़ी भरकर मोती घर भेजे गए। तभी से कुंड का नाम मोती कुंड पड़ गया। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी और राधा रानी जी के बीच सांसारिक रिश्ते नहीं थे, लेकिन नंदगाव का यह मोती कुंड आज भी दोनों की सगाई की गवाही देता है।
आज भी ब्रज 84 कोस यात्रा के दौरान लोग यहां पर मोती इकट्ठे कर ले जाते हैं। मोती जैसे फल सिर्फ मोती कुंड के पास मौजूद पेड़ में ही मिलते हैं।।
||🚩"जय जय श्री राधेकृष्णा"🚩ll
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