अंतिम पत्र

माता पिता और मृत्यु पर विशेष पत्र

हमारे भारतीय समाज के अंदर आजकल अक्सर यह देखा जा रहा है कि जो अभिभावक अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए अपना कीमती समय के साथ साथ तन मन धन सब न्योछावर कर पूरा जीवन लगा देते हैं लेकिन जब वही बच्चे माता पिता की मृत्यु के समय भी नहीं पहुंचते तो फिर उनकी उच्च शिक्षा पाने और अच्छी सर्विस होने के बावजूद यदि सामाजिक सरोकारों से उनका कोई लेना देना नहीं है तो फिर इस शिक्षा से से बदतर और कोई शिक्षा नहीं हो सकती है?
 यह घटना पिछले वर्ष लखनऊ में घटी थी और यह घटनाएं मुझे बार-बार इसलिए याद आती है क्योंकि यह घटना  हमारे भारतीय सैन्य अधिकारी सेवानिवृत्त एक कर्नल साहब के परिवार से संबंधित है !
पूरा घटना का विवरण आप स्वयं आगे पढ़ें?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक उच्चवर्गीय बूढ़े पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक चिट्ठी लिखकर खुद को गोली मार ली। 
चिट्टी क्यों लिखी और क्या लिखा। यह जानने से पहले संक्षेप में चिट्टी लिखने की पृष्ठभूमि जान लेना जरूरी है।

पिता सेना में कर्नल के पद से रिटार्यड हुए । वे लखनऊ के एक पॉश कॉलोनी में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनके दो बेटे थे। जो सुदूर अमेरिका में रहते थे। यहां यह बताने की जरूरत नहीं है कि माता-पिता ने अपने लाड़लों को पालने में कोई कोर कसर नहीं रखी। बच्चे सफलता की सीढ़िंया चढते गए। पढ़-लिखकर इतने योग्य हो गए कि दुनिया की सबसे नामी-गिरामी कार्पोरेट कंपनी में उनको नौकरी मिल गई। संयोग से दोनों भाई एक ही देश में,लेकिन अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते थे। 

एक दिन अचानक पिता ने रूंआसे गले से बेटों को खबर दी। बेटे! तुम्हारी मां अब इस दुनिया में नहीं रही । पिता अपनी पत्नी की मिट्टी के साथ बेटों के आने का इंतजार करते रहे। एक दिन बाद छोटा बेटा आया, जिसका घर का नाम चिंटू था। 

पिता ने पूछा चिंटू! मुन्ना क्यों नहीं आया। मुन्ना यानी बड़ा बेटा।पिता ने कहा कि उसे फोन मिला, पहली उडान से आये?

धर्मानुसार बडे बेटे का आना सोच कर्नल साहब ने जिद सी पकड़ ली। 

छोटे बेटे के मुंह से एक सच निकल पड़ा। उसने पिता से कहा कि मुन्ना भईया ने कहा कि, "मां की मौत में तुम चले जाओ। पिता जी मरेंगे, तो मैं चला जाऊंगा।"xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx?????

कर्नल साहब (पिता) कमरे के अंदर गए। खुद को कई बार संभाला फिर उन्होंने  चंद पंक्तियो का एक पत्र लिखा। जो इस प्रकार था- 

प्रिय बेटो

          मैंने और तुम्हारी मां ने बहुत सारे अरमानों के साथ तुम लोगों को पाला-पोसा। दुनिया के सारे सुख दिए। देश-दुनिया के बेहतरीन जगहों पर शिक्षा दी। जब तुम्हारी मां अंतिम सांस ले रही थी, तो मैं उसके पास था।वह मरते समय तुम दोनों का चेहरा एक बार देखना चाहती थी और तुम दोनों को बाहों में भर कर चूमना चाहती थी। तुम लोग उसके लिए वही मासूम मुन्ना और चिंटू थे। उसकी मौत के बात उसकी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने लिए मैं था। मेरा मन कर रहा था कि काश तुम लोग मुझे ढांढस बधाने के लिए मेरे पास होते। मेरी मौत के बाद मेरी लाश के पास तुम लोगों का इंतजार करने के लिए कोई नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह कि मैं नहीं चाहता कि मेरी लाश निपटाने के लिए तुम्हारे बड़े भाई को आना पड़े। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि अपनी मां के साथ मुझे भी निपटाकर ही जाओ। मुझे जीने का कोई हक नहीं क्योंकि जिस समाज ने मुझे जीवन भर धन के साथ सम्मान भी दिया, मैंने समाज को असभ्य नागरिक दिये?????????????
हाँ अच्छा रहा कि हम अमरीका जाकर नहीं बसे, अन्यथा सच्चाई दब जाती ?

मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे मैडल तथा फोटो बटालियन को लौटाए जाए तथा घर का पैसा नौकरों में बाटा जाऐ। 
जमापूँजी आधी वृद्ध सेवा केन्द्र में तथा आधी सैनिक कल्याण में दी जाऐ।
                                                                                    तुम्हारा पिता                               

कमरे से ठांय की आवाज आई। कर्नल साहब ने खुद को गोली मार ली।

यह क्यों हुआ, किस कारण हुआ? यह आप हम स्वयं समझ रहे हैं समाज के अंदर देख रहे हैं इतनी बड़ी उच्च  शिक्षा इतनी बड़ी पैकेज की सर्विस लेकिन माता पिता की मृत्यु के बाद भी यदि बच्चे इस प्रकार से हरकत करेंगे तो आप हम सब अपने समाज को किस प्रकार से सामाजिक समरसता से ओतप्रोत कर पाएंगे यह बहुत बड़ी विडंबना है कि जब माता-पिता के साथ बच्चे इस प्रकार से हरकत करेंगे तो इस समाज के अंदर कितना दुष्प्रभाव पड़ता है हम अपने समाज में यह भी देख रहे हैं कि जो उच्च श्रेणी का परिवार अथवा मध्यम श्रेणी का परिवार अथवा मिडिल क्लास फैमिली है वहां भी हम देख रहे हैं कि अपने माता पिता के साथ बेटे और बहू कैसे उनकी परवरिश करते हैं किस प्रकार से उनके साथ व्यवहार करते हैं सबकी नजर माता-पिता के जमीन जायदाद के ऊपर रहती है लेकिन इस वृद्धावस्था में उनकी सेवाएं किस प्रकार से करते हैं यह भी हम अपने आंखों से कभी कभी देखते हैं जब हम अक्सर अचानक किसी के घर में पहुंच जाते हैं तो उनकी दुर्दशा देखी नहीं जाती कई माता-पिता काल कोठरी की तरह कैद में रहते हैं उस जगह केवल 12 घंटे में एक हैवानियत की तौर पर देखने जाता है शायद ऐसी जगहों पर कैदी भी नहीं रहते होंगे यही आज हमारे समाज में हो रहा है क्या हम अपने माता पिता को दुश्मन समझ रहे हैं अथवा एक फॉर्मेलिटी कर रहे हैं अथवा उनके जमीन जायदाद पर नजर है याद रखना जब आप अपनी कमाई से आपका पेट नहीं भरेगा तो फिर लालच से केवल आपका और आपकी आने वाली पीढ़ी का ही नुकसान होगा उनका कुछ नहीं होने वाला है आप अपने कमाई पर संतुष्ट रहो और अपनी ही कमाई से माता-पिता की सेवा करो उनका दिया हुआ अनमोल रत्न आप हैं और यदि आप जैसे पुत्र रत्न  उस माता-पिता के नहीं होंगे जिन्होंने गरीबी और अमीरी को एक तरफ करते हुए केवल आपको एक अच्छा इंसान बनाया और इसलिए बनाया कि आप एक अच्छे समाज के अंदर देश के अंदर अपने आप को स्थापित कर सको और सामाजिक समरसता के साथ अपना जीवन निर्वाह करो लेकिन अफसोस होता है कि जब वही बच्चे उसी माता-पिता के दुश्मन बन जाते हैं और सीधे मुंह बात नहीं करते तो वह वृद्धावस्था में एक दृढ़ इच्छाशक्ति से श्राप देने के अलावा कुछ भी नहीं करता है इसलिए यदि माता पिता के श्राप  से बचना हो और अपने आने वाली पीढ़ी को अच्छा देखना चाहते हो तो अपने घर में वृद्ध माता-पिता के प्रति दुर्व्यवहार बिल्कुल नहीं करो उनकी सेवा में कोई कमी न करो वह आज जिस कंडीशन में है उस से भी बदतर कंडीशन से जिंदगी जिएंगे ? मुझे कहीं कहीं ऐसे भी परिवार देखने को मिलते हैं जो अपने माता पिता को भगवान से भी ज्यादा पूजा करते हैं धन्य है ऐसे सपूत धन्य है सपरिवार जहां माता-पिता और वृद्ध जनों की सेवा बड़े प्रेम से होती है लेकिन जहां नहीं होती है वहां हर हालत में होनी चाहिए अन्यथा पछताने के अलावा कुछ नहीं मिलेगा ?
काश कर्नल साहब जिंदा होते ऐसे दिलेर ऐसे माता-पिता जिन्होंने दुश्मन को बर्बाद करने में अपना पूरा सर्वोच्च नौ छावर करने के लिए तैयार रहते थे लेकिन सेवानिवृत्त के बाद उन्होंने अपनी जन्मभूमि नहीं छोड़ा और उन कलयूगी बच्चों के साथ अमेरिका नहीं गए उन्होंने अपनी बीवी के साथ लखनऊ में रहते थे और अंत में अपनी बीवी के साथ परलोक सिधार गए? इससे बड़ा मार्मिक दृश्य आपको कहीं न सुनाई दे यही हमारी भगवान से प्रार्थना है कि भोले नाथ सभी बच्चों को सद्बुद्धि दे और अपने भारतीय संस्कृति को आधार बनाकर आप सभी बालक भविष्य में चले और अपने माता-पिता की इज्जत  सम्मान करें !!
रामचरितमानस में बाबा तुलसीदास जी ने अपने चौपाई में कहा है कि भगवान श्री राम स्वयं सुबह उठकर माता पिता के चरण स्पर्श करते थे ! प्रात काल उठ के रघुनाथा !मात पिता गुरु नायहुं माथा !
बहुत-बहुत साधुवाद धन्यवाद जय जय परशुराम कैप्टन पंडित राज द्विवेदी प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय परशुराम परिषद मध्य प्रदेश🙏🏻💐🙏🏻

Comments