शरीर 07 || मोटापा

जिद्दी वजन जाएगा
आजकल सभी लोग फिटनेस की बात करने लगे हैं। खासकर कोरोना ने यह अहसास दिला दिया है कि जान है तो जहान है। हमें खुद को सेहतमंद भी रखना होगा। बहुत-से लोग जो कोरोना के दौर से पहले जिम जाते थे, वे यह कहते दिखे कि जिम खुलेंगे तो फिर एक्सरसाइज शुरू करेंगे। लेकिन बहुत मेहनत से कम किया गया उनका वजन पहले से ज्यादा बढ़ चुका है। वहीं कुछ हैं जो डाइटिंग और एक्सरसाइज के बाद भी वजन घटाने के मामले में 99 के फेर में फंसे हैं। आखिर यह वजन कहां अटक जाता है? वजन घटाना और फिर उसे मेंटेन करना इतना मुश्किल क्यों है? एक्सपर्ट्स से बात करके इसी बारे में जानकारी दे रही हैं रजनी शर्मा

3 सबसे जरूरी बातें 
1. सेहतमंद खाना: यह देखें कि क्या खाने के बाद भी शरीर में हल्कापन है। हम ऊर्जा पाने के लिए खाना खाते हैं। खाते ही भारीपन लगता है तो ऐसा खाना वजन को घटने नहीं देगा। 
2. एक्सरसाइज: यह लाइफस्टाइल का हिस्सा होना चाहिए। कुछ महीने एक्सरसाइज करके छोड़ देंगे तो वजन भी वापस आ जाएगा। लेकिन लंबे वक्त तक एक्सरसाइज का एक ही पैटर्न फॉलो न करें।  
3. नींद: रोजाना 7-8 घंटे न सोएं तो वजन नहीं घटता है।

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मोटापा मापने के 4 पैमाने

सबसे पहले तो यही सवाल उठता है कि कैसे पता चले कि हमारा वजन ज्यादा है। दरअसल इसके लिए कुछ पैमाने हैं जिनसे हम पता लगा सकते हैं कि हमारा वजन बढ़ गया है।

BMI (Body Mass Index) 
यह हमें इशारा देता है कि हम वजन और हाइट के मुताबिक नॉर्मल रेंज में हैं या नहीं। BMI चेक करके टारगेट सेट कर सकते हैं कि हमें कितना वजन घटाना है। BMI जानने के लिए वजन और लंबाई का अनुपात निकालते हैं। BMI = kg/m2 यह 18.5 से कम न हो और 25 से ज्यादा न हो। अगर BMI 18.5 से कम तो अंडरवेट. 18.5 से 24.9 के बीच तो सामान्य, 25 से 29.9 के बीच तो ओवरवेट और 30 से 34.9 के बीच तो ओबेसिटी है। अगर हम ओवरवेट हैं और पेट के आसपास ज्यादा फैट जमा है तो हॉर्मोन से जुड़ी परेशानी, हाई बीपी, डायबीटिज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। (अपना BMI cdc.gov/healthyweight/assessing और smartbmicalculator.com जैसी कई वेबसाइट्स से चेक कर सकते हैं)
  
पेट या हिप्स पर फैट
कुछ लोगों के पेट या कमर पर चर्बी हो सकती है। महिलाओं के हिप्स हैवी हो सकते हैं। इसके लिए कमर और हिप्स का अनुपात देखें। दोनों पैर मिलाकर सीधे खड़े हों और सांस छोड़ दें। अब मेजरिंग टेप कमर के पीछे से लेते हुए आगे नाभि के ऊपर तक लाएं। इस नाप को नोट करें। अब हिप्स को भी ऐसे ही नाप लें। दोनों संख्याओं को आपस में भाग दे दें। कमर और हिप्स का अनुपात महिलाओं में 0.80 और पुरुषों में 0.85 या उससे कम होना चाहिए। महिलाओं की कमर 31.5 इंच से कम और पुरुषों की कमर 37 इंच से कम होनी चाहिए। आमतौर पर महिलाओं की शेप नाशपाती के आकार की पाई जाती है। फैट इतना हो कि चलने-फिरने में दिक्कत होने लगे तो वजन ज्यादा है। वहीं पुरुषों में सेब जैसी शेप हो जाती है जो टमी के रूप में दिखती है। इसे घटाएं।

बॉडी कंपोजिशन एनालिलिस
शरीर में फैट कहां और कितना जमा है,इसके लिए बॉडी कंपोजिशन एनालिलिस (BCA) टेस्ट करवा सकते हैं। जिम में इसकी मशीन होती है। करीब 1000 रुपये टेस्ट की फीस हो सकती है। मशीन पर नंगे पांव खड़े होकर स्कैन होता है। इससे शरीर में फैट, मसल्स और हड्डियों का वजन पता चल जाता है। हम अपने फैट और मसल्स को बदल सकते हैं लेकिन हड्डियों के वजन को नहीं। 

शरीर पर वजन का बंटवारा 
ऐसा भी हो सकता है कि कोई BMI के मुताबिक ओवरवेट हो लेकिन मोटा न हो। रेसलर या कई खिलाड़ी इसी कैटिगरी में आते हैं। उनके शरीर में वजन का अनुपात हर बॉडी पार्ट में बिलकुल ठीक होता है। यह उनकी मसल्स का वजन हो सकता है।

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हेल्दी फूड की प्लेट में क्या हो
-हमारी प्लेट में आधा हिस्सा फ्रूट्स-सलाद और सब्जियां होनी चाहिए। एक चौथाई हिस्सा कार्बोहाइड्रेट यानी अनाज और एक चौथाई प्रोटीन। प्रोटीन के लिए पनीर, दालें, दही आदि लें। 
- रोटी और चावल ले रहे हैं तो भी प्लेट का चौथाई हिस्सा ही होगा। कच्ची सब्जियां या फल खाने से मेटाबॉलिजम और इम्यूनिटी तेज होती है।
-  खाने की प्लेट सबके लिए एक जैसी नहीं हो सकती। डाइटिशन उम्र और प्रफेशन के हिसाब से भी कैलरी बताते हैं।
-  आमतौर पर हम कच्चे से ज्यादा पके हुए खाने पर ध्यान देते हैं और उससे प्लेट भर लेते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादातर हम बीज खाते हैं जैसे चावल, दाल, अनाज आदि। इन्हें भिगोकर खाएं तो बीजों की पूरी एनर्जी मिल सकती है। जैसे स्प्राउट्स ज्यादा न्यूट्रिशन देते हैं।
-अगर पेट हमेशा फूला रहता है तो ग्लूटनयुक्त और डेयरी प्रॉडक्ट्स से परहेज करें। ज्यादा जानकारी के लिए Sundaynbt के फेसबुक पेज पर जाएं और Gluten टाइप करें। 

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इन 3 कारणों से लौट आता है मोटापा
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1. एक्सरसाइज का गलत तरीका
1.  शरीर एक मशीन है, ऑयलिंग नहीं करेंगे तो काम करना बंद करेगी। यह ऑयलिंग एक्सरसाइज और सही डाइट से होती है। लेकिन लोग कुछ वक्त तक जिम जाकर या रनिंग करके छोड़ देते हैं। इससे शरीर में फैट की वापसी हो जाती है। अगर हम घटाया हुआ वजन कम से कम 18 महीने तक के लिए बरकरार नहीं रख पाते हैं तो वजन वापसी के आसार बेहद कम हो जाते हैं। 
2.  एरोबिक्स, कार्डियो के अलावा वेट ट्रेनिंग यानी डंबल आदि उठाकर भी एक्सरसाइज जरूर करें। इसके अलावा चेहरे की मसल्स की एक्सरसाइज के लिए हंसना और मुस्कुराना न भूलें। दिनभर में कुछ चबाने की आदत भी डालें। दिनभर में एक कटोरी भुने हुए चने खाएं या 5 बादाम ले सकते हैं।
3.  जिम में जाकर हमेशा एक जैसी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। शरीर की 7 मुख्य मांसपेशियां हैं। हर दिन किसी एक को टारगेट करें। चाहे एक्सरसाइज जिम में करें या घर पर। लोअर बैक, पैर, कंधे, अपर बैक, बाइसेप्स, ट्राइसेप्स पर ध्यान दें। पैरों की मजबूती के लिए स्कॉट्स कर सकते हैं, लोअर बैक के लिए डेड लिफ्ट, चेस्ट के लिए पुश अप या जिम में चेस्ट प्रेस, घर में लटकने की जगह है तो पुलअप करें। कंधों के लिए हैंड रेज़ करें। घर में पानी से भरी एक लीटर की बॉटल के साथ कर सकते हैं या जिम में डंबल से।
4.  अगर जिम में ज्यादा एक्सरसाइज करके या दौड़ लगाकर एक साथ 5-6 किलो या उससे ज्यादा वजन कम करें तो गलत है। इससे कमजोरी आ सकती है। हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं।
5.  सभी लोगों के लिए एक जैसी एक्सरसाइज नहीं हो सकती। ट्रेनर की मदद के बिना खुद ही जिम में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। शुरुआत में सभी एक्सरसाइज कम देर के लिए और हल्की करनी चाहिए। प्लैंक कर रहे हैं तो 1 मिनट नहीं 30 सेकेंड के लिए हो। जिम के बाद जंक फूड खा लिया तो मेहनत बेकार हो सकती है। आराम से महीने में 2 से 3 किलो तक ही वजन कम करें। इससे ज्यादा रफ्तार से नहीं।
6. सिर्फ कार्डियो एक्सरसाइज पर ध्यान देना और वेट ट्रेनिंग न करना भी गलत है। इससे मसल्स कमजोर ही रहती हैं। मसल्स बनाने के लिए 16 साल के बाद शुरुआत कर सकते हैं। उससे पहले भी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। पुश अप, स्कॉट्स जैसी बिना जिम मशीनों वाली एक्सरसाइज कर सकते हैं।   
7.  जिनको हार्ट की दिक्कत है, डायबीटीज या थायरॉइड है, वे पहले डॉक्टर की सलाह लें। जहां भी एक्सरसाइज कर रहे हैं वहां ट्रेनर को रिपोर्ट दिखाएं और ट्रेनर व डॉक्टर की देखरेख में ही कोई एक्सरसाइज करें। घर पर एक्सरसाइज करने से पहले भी अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
 8.  मसल्स बनाने के लिए प्रोटीन की जरूरत घर से ही पूरी हो जाए तो सप्लिमेंट की ओर न जाएं। उनमें प्रिजरवेटिव होते हैं। एक सामान्य शख्स को अपने वजन के मुताबिक .75 से लेकर 1 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो की जरूरत होती है। यह आसानी से घर पर दालें, पनीर और अंडे आदि से लिया जा सकता है।

सबकी अलग-अलग एक्सरसाइज
महिलाओं और पुरुषों के वजन घटाने का तरीका भी अलग होता है और उनका वर्कआउट भी। महिलाएं मल्टिटास्कर होती हैं, उन्हें रिलेक्सिंग कसरत की जरूरत होती है। ज्यादातर महिलाएं एरोबिक्स और पिलाटे (Pilates, इसमें मांसपेशियों से जुड़ी एक्सरसाइज होती है) पसंद करती हैं। पुरुष ज्यादातर वेट ट्रेनिंग करते हैं। वैसे महिलाओं को भी वेट ट्रेनिंग करनी चाहिए। महिलाओं की एक्सरसाइज की इंटेसिटी पुरुषों से कम होती है जैसे वेट लिफ्टिंग कम वजन साथ या कम देर के लिए। बच्चों को 8 साल की उम्र से ही ट्रेनर की गाइडेंस में एरोबिक्स और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करवा सकते हैं। एरोबिक्स में स्विमिंग, साइकलिंग, ब्रिक्स वॉक, जॉगिंग और ट्रेडमिल पर चलना शामिल है। 

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2. खानपान से जुड़ी गलतियां

सेहतमंद खाने से मतलब सलाद और फ्रूट्स ही नहीं है। इसका मतलब है कि हमारा खाना ऐसा हो जिसे खाते ही हमें नींद न आए। हमारी एनर्जी बनी रहे और भारीपन महसूस न हो। डाइट जैसी होगी शरीर भी वैसी ही होता जाता है। अक्सर हम अपनी प्यास को भूख समझ लेते हैं। इसलिए दिनभर में 7-8 गिलास पानी पीना जरूरी है। खाने से 30 मिनट पहले एक गिलास पानी ले, ओवरईटिंग नहीं होगी। 
1.  डाइटिंग का मतलब खाना छोड़ना नहीं है। ब्रेकफस्ट जरूर लें क्योंकि हमें रात से भूखे शरीर को एनर्जी देनी है ताकि वह काम पर चल सके। 
2.   रोटी के एक टुकड़े को 32 बार चबाना चाहिए । एक रोटी खाने में 15 से 20 मिनट का वक्त लगना चाहिए, तब शरीर इस बात को समझ पाता है कि भूख मिट गई। 
3.  डिनर 7 से 8 बजे के बीच कर लेना चाहिए। खाने और सोने के बीच 2 से 3 घंटे का गैप होना चाहिए। रात को देर से खाना पड़े तो चपाती की जगह फ्रूट्स या सब्जियां खाएं। योग कहता है कि शाम 5 के बाद मेटाबॉलिजम धीमा हो जाता है। सूर्य उदय और सूर्य अस्त से इसका संबंध होता है। सुबह का नाश्ता राजा की तरह करना चाहिए, दिन का खाना रानी की तरह और रात का खाना भिखारी की तरह लें।
4.   खाने के बाद बैठें तो वज्रासन में। जिन्हें घुटनों में दर्द की परेशानी है, वे न करें। वे सूर्य क्रिया कर सकते हैं। अपनी नाक के लेफ्ट साइड को उंगली से बंद कर लें और राइट से ही सांस लें और राइट से ही छोड़ें। इससे पाचक रस जल्दी बनते हैं। पूरे दिन में 10 मिनट करना भी काफी है। 
 5.  हम खाना कम खाते हैं, पर स्नैक्स खाना चाहते हैं। अगर ऐसा करें तो वह हेल्दी होना चाहिए।  
6.  जब कई लोग एक साथ खाते हैं तो पता नहीं चलता कि कितना खा लिया। इसलिए हमेशा अपनी प्लेट और अलग कटोरी लें। हो सके तो किचन में मेजरिंग कप से नापकर खाना बनाएं। 
7.  मीठी चीजों, कोल्ड ड्रिंक्स आदि से दूरी बनानी चाहिए। दूध भी ले रहे हैं तो लो फैट लें, टोंड मिल्क पी सकते हैं। हफ्ते में एक बार बाहर खा सकते हैं लेकिन कम-तला भुना लें। किसी पार्टी में हैं तो पनीर टिक्का के साथ सलाद और आधा कटोरी चावल ले सकते हैं। सप्ताह में एक बार जंक फूड खा सकते हैं, चाहे वेजिटेरियन हों या नॉन वेजिटेरियन। ऐसे नियम रखें जिन्हें पूरी ज़िंदगी निभा सकें। 
8.  खुद को डस्टबिन न समझें। महिलाएं अक्सर बचा हुआ खाना खाती हैं, ये आदत तुरंत बदल डालें। 
9. खाना ऐसे खाएं जैसे पानी पी रहे हैं यानी इतना चबा लें कि मुंह में घुल जाए। पानी ऐसे पीएं जैसे खाना खा रहे हैं। इसका मतलब है कि पानी को बैठकर आराम से घूंट-घूंट लेकर पीना चाहिए।
10. अगर चाय की आदत है तो बिना शुगर लें। ब्लैक टी, ब्लैक कॉफी या ग्रीन टी दिनभर में दो कप से ज्यादा न लें। 

इमोशनल ईटिंग करना 
लोग खुशी में ही ओवर ईटिंग नहीं करते। कई बार स्ट्रेस में भी ज्यादा खाना खाते हैं। वहीं डिप्रेशन के दौरान शरीर ऐसे हार्मोन बढ़ा देता है जो हमें खाने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे वक्त में चॉकलेट्स और जंक फूड खाते हैं या कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। स्ट्रेस में शरीर खाना ठीक से पचा नहीं पाता। ऐसे में नींद में भी कमी आ जाती है तो वजन घटता नहीं है बढ़ता है।

जब हो बिंज ईटिंग...
अगर खाना खाने के कुछ घंटों बाद हमें भूख लगने लगती है तो दरअसल वह प्यास हो सकती है। तब एक गिलास पानी पी लेना चाहिए। शरीर को कार्बोहाइड्रेट यानी मीठे की आदत होती है इसलिए हम कुछ मीठा खोजने लगते हैं। इससे बचने के लिए हेल्दी स्नैक्स पास में रखें। चाय के साथ नमकीन या बिस्किट न खाकर ड्राइ फ्रूट्स लें। कोई फल खाएं या भुने हुए चने खा सकते हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग करना
योग में भी कहा गया है कि कम खाएं और दिन में दो बार सूर्य उदय के बाद और सूर्य अस्त से पहले खाना खाएं। ऐसा ही इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग में किया जाता है। 16-18 घंटे के गैप पर खाना खाया जाता है। इसके अलावा बीच में एक गिलास छाछ, नीबू पानी या पानी में एक चम्मच सत्तेू मिलाकर ले सकते हैं। ज्यादा भूख लगे तो सूख मेवे भी खा सकते हैं। इससे भी वजन काबू में रहता है। जिनका बीपी कम रहता है या डायबीटिज है वे अपने डॉक्टर की सलाह से कर सकते हैं। 

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3. गलत लाइफस्टाइल

सोने का पैटर्न ठीक न होना:  इसका मतलब सिर्फ 7 से 8 घंटे की नींद लेना नहीं, सही वक्त पर सोना और सही वक्त पर उठना भी है क्योंकि इससे शरीर के अंगों का कामकाज सही रहता है। रात 10 बजे से लेकर सुबह 5-6 बजे तक का वक्त सोने के लिए सबसे अच्छा रहता है। जो लोग 5 घंटे से भी कम और 8 घंटे से ज्यादा की नींद लेते हैं, उनका भी वजन बढ़ने लगता है या वजन कम नहीं होता।

एक्सरसाइज को जरूरी न समझना: हम भारतीय इसे आमतौर पर जरूरी नहीं समझते हैं। हर हफ्ते कम से कम 6 दिन हमें 30-45 मिनट तक रोजाना एक्सरसाइज की जरूरत होती है। इसके अलावा फिजिकल फिटनेस के लिए हम किसी भी एक खेल को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं। ऐसा खेल जिसे दो या उससे ज्यादा लोग खेलें और छत पर या पार्क में खेल सकें।
   
टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर से चिपके रहना: आमतौर पर हमारी लाइफस्टाइल काफी आरामदायक हो गई है। दिन के 16-18 घंटे सिर्फ बैठे-बैठे गुजर जाते हैं। टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बैठे रहने की आदत गलत है। जब तक ऐक्टिव नहीं होंगे, खाना ठीक से हजम नहीं होगा और फैट पेट पर ही स्टोर होता रहेगा। 35-40 की उम्र तक टमी बाहर आ जाती है।

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कुछ वजहें ये भी हैं

थायरॉइड की परेशानी 

-थायरॉइड ग्लैंड ठीक से काम न कर रहा हो तो भी वजन आसानी से कम नहीं होता। महिलाओं में इसकी शिकायत ज्यादा होती है। थायरॉइड के मरीजों को हर 3 महीने पर टेस्ट करवाना चाहिए और दवा जरूर लेनी चाहिए। जब तक थायरॉइड कंट्रोल में नहीं आता, तब तक वजन बढ़ता रहता है। जैसे ही यह कंट्रोल में आ जाता है, वजन भी घटने लगता है। ऐसे में ब्रोकली, गोभी, पत्ता गोभी नहीं खाएं। अगर खानी है तो अच्छी तरह पकाकर खाएं। अगर हाइपोथाइरॉइडिजम है तो वजन घटाने के लिए कीटो डाइट न करें। ड्राइ फ्रूट्स, सीड्स और मिलेट्स यानी मिलेजुले अनाज का इस्तेमाल करें। लेकिन हेल्दी डाइट और सही एक्सरसाइज के बैलंस से ही वजन कम हो सकता है। 
- योग में थायरॉइड पर कंट्रोल के लिए कई आसन हैं जैसे - भुजंगासन, उष्ट्रासन, शलभासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा, पादहस्त आसन, ऐसे आसन जिसमें गले पर जोर पड़ता है। कपालभाति क्रिया, उज्जायी, भ्रामरी प्राणायाम। इससे भी थायरॉइड ग्लैंड एक्टिवेट हो जाता है।

महिलाओं में मेनोपॉज का दौर
मेनोपॉज के दौरान भी वजन तेजी से बढ़ सकता है। उस समय महिलाओं के हार्मोन में तेजी से बदलाव आता है, लेकिन वे इसे समझ नहीं पातीं और डिप्रेशन व टेंशन में रहती हैं। इस वजह से शरीर का वजन बढ़ने लगता है। मेटाबॉलिजम धीमा हो जाता है। उन्हें एक्सरसाइज और सही डाइट लेते रहना चाहिए। इससे वजन काबू में रहेगा। 

कम उम्र में PCOD
वजन बढ़ने पर लड़कियां को पॉलिसिस्टिक ओवरियन डिजीज हो जाती है। हार्मोन असंतुलित होने  से शरीर तनाव में रहता है। जिम जाने पर भी वजन कम नहीं होता। इसलिए ब्रीथिंग, लाफ्टर और वॉकिंग विद म्यूजिक जैसी एक्सरसाइज करें। वे योग भी कर सकती हैं, लेकिन लाइट योग करें। पावर योग नहीं।  

विटामिन D की कमी
अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है तो धूप से पूरा कर सकते हैं। 5-7 मिनट में प्री विटामिन-डी बनने लगता है। इसे शरीर 15 दिन तक ही स्टोर कर सकता है। इसलिए हर हफ्ते में 2 घंटे की धूप जरूर लेनी चाहिए। सबसे अच्छा वक्त 11 बजे से 1 बजे तक का है। धूप सहने लायक लगे। गर्मी में कम से कम 15 मिनट धूप में जरूर बैठें, सर्दी में 30 मिनट या ज्यादा देर धूप में बैठ सकते हैं। हमें रोजाना 2000IU की जरूरत होती है। सप्लिमेंट के तौर पर सैशे ले सकते हैं। इसे दूध के साथ लेना चाहिए, यह फैट में घुलकर शरीर में जज्ब होता है। दूध न हो तो मुंह में ही रखें और विटामिन-Dअपनी लार में घुलने दें और गटक लें। लार में भी फैट होता है।

जब इंसुलिन रेजिस्टेंस हो: आजकल 10 साल के बच्चों को भी इंसुलिन रेजिस्टेंस हो रहा है। फैट की वजह से इंसुलिन रिलीज नहीं हो पाता। वजन बढ़ने लगता है। प्री-डायबिटीज लोगों को भी पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है। कोलेस्ट्रॉल भी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। अगर इंसुलिन बढ़ा हुआ है तो कीटो डाइट से भी वजन कम कर सकते हैं। डायबीटिक हैं तो खाने से 5 मिनट पहले और 30 मिनट बाद 10 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें।

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कुछ जरूरी सवाल

ग्रीन टी से वजन कम होता है? या गर्म पानी पीने से?
ग्रीन टी सिर्फ हमारे खाने को पचाने में मदद करती है। दो कप से ज्यादा ग्रीन टी एक दिन में नहीं पीनी चाहिए। यह टॉक्सिंस को शरीर से बाहर करती है तो एंटी-एजिंग जैसे फायदे भी हैं। सुबह गुनगुना पानी पी सकते हैं जो शरीर के लिए अच्छा है लेकिन इससे मोटापा जल्दी घटेगा ऐसा नहीं कह सकते। खाना खाने के 1 घंटे बाद भी गुनगुना पानी ले सकते हैं।

क्या तरह-तरह की गोलियां, क्रैश डाइट या बेल्ट मोटापा घटाती हैं?  
कभी भी ज़िंदगी में इतना उतावलापन नहीं दिखाना चाहिए कि वजन घटाने के लिए गोलियां लेने लगें। इनसे हार्ट और किडनी के काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए तरह-तरह की गोलियों के झांसे में नहीं आना चाहिए। वजन घटने का प्रोसेस धीरे-धीरे होता है। जैसे पहली क्लास के बाद सीधे ग्रैजुएशन नहीं होता, वैसे ही वजन घटाने के लिए क्रैश कोर्स नहीं किया जा सकता। 

जब चर्बी सिर्फ पेट-कमर पर ही हो तब 
क्या करें?
अगर पेट पर ज्यादा चर्बी है तो भी सिर्फ पेट या कमर के लिए ही एक्सरसाइज नहीं करनी होती। पूरी बॉडी की फिटनेस पर ध्यान देना होगा। लेकिन ट्विस्टिंग, पिलाटे और डंबल के साथ साइड्स ज्यादा करनी होंगी। महिलाओं और पुरुषों की कसरत में तीव्रता का फर्क आ सकता है। हर दिन कसरतों में बदलाव करना चाहिए। 

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40 पार की बात 

-  जिन लोगों के शरीर में फैट जमा होने की आदत हो जाती है उनका वजन 40 के बाद तेजी से बढ़ता है। 40 के बाद मसल्स ज्यादा देर में मजबूत होती है। शरीर में टिशू लॉस होने लगता है। इसलिए वेट ट्रेनिंग जरूर करें। 
-  25 साल की उम्र में किसी को वजन घटाने में जितनी मेहनत करनी पड़ी हो, 40 की उम्र में उससे कहीं ज्यादा करनी होती है। साथ ही उन्हें कैलरी कम कर देनी चाहिए। 
-  वैसे तो मेटाबॉलिक रेट 35 साल के आसपास ही कम होने लगता है। अगर एक्सरसाइज नहीं करते तो 35 से पहले भी हो सकता है। लेकिन डाइट पर काबू पा रखा है तो वजन पर भी कंट्रोल हो सकता है। 
-  40 साल के बाद महिलाओं का वजन पुरुषों से भी ज्यादा तेजी से बढ़ता है। उन्हें भी वेट ट्रेनिंग करनी चाहिए। मसल्स बनी रहेंगी तो शरीर में मजबूती रहती है। वजन कम करने से भी मसल्स लटक जाती हैं। इसलिए चेहरे से लेकर शरीर की सभी मसल्स के लिए एक्सरसाइज करनी चाहिए। 
- महिलाओं में 40 से 50 साल की उम्र मेनोपॉज की होती है। फिजिकल ऐक्टिविटी घटते ही कमर और पेट पर फैट जमा हो जाता है। इसके अलावा वे प्रेग्नेंसी से लेकर बच्चों को फीड कराने के दौरान भी दूध नहीं पीतीं तो उनकी हड्डियां जल्दी कमजोर होने लगती हैं। इसलिए उन्हें डेयरी प्रॉडक्ट लेने चाहिए। मूंगफली, चना, दालें जरूर लें। नॉन वेजिटेरियन हैं तो फिश ले सकते हैं, रेड मीट यानी मटन न लें। उसमें भी तेज मसाले नहीं लें।


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