लाफिंग या हंसना

हंसिए मगर किसी और पर मत हंसिए

सच है कि चुटकुले जब भी सुने-सुनाए जाते हैं, वे उस वर्ग या समुदाय के बारे में नेगेटिव इंप्रेशन छोड़ जाते हैं।  ऐसा नहीं है कि यह इंप्रेशन चुटकुले बनाते हैं। इंप्रेशन तो पहले से बना होता है, चुटकुले उसे और पक्का बनाते हैं:

एक गांववाला पहली बार शहर गया। वहां ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें देख ही रहा था कि एक ठग उसके पास जाकर बोला, ‘बिल्डिंग देख रहे हो? निकालो पैसे।’ उसने कहा, ‘क्यों?’ ठग बोला, ‘यहां जितनी मंजिल देखो, उतने पैसे लगते हैं। कौन-सी मंजिल देख रहे थे?’ उसने कहा, ‘5 वीं।’। ठग बोला, ‘निकालो 500 रुपये।’ गांववाला 500 रुपये देकर गांव लौटा। साथियों ने पूछा, ‘कैसा रहा? सुना है, शहरी बहुत ठग होते हैं। किसी ने ठगा तो नहीं?’ उसने कहा, ‘मुझे कोई क्या ठगेगा? मैंने ही ठग लिया।’ फिर सारा किस्सा बताते हुए उसने कहा, ‘मैं तो 15वीं मंजिल देख रहा था, पर 5वीं बताकर 1000 रुपये बचा लिए।’हर जोक की तरह यह जोक भी सिर्फ हंसने का मासूम जरिया नहीं है। इसमें छुपी है भेदभाव की एक कहानी जिसमें एक पक्ष को सही या बेहतर ठहराया जाता है और दूसरे को गलत या बेवकूफ। यह चुटकुला शुरू से आखिर तक शहरवालों के पक्ष में और गांववालों के विरोध में है। बीच में हो सकता है कि सुननेवाले को गांववाले पर दया आ जाए कि देखो, एक शहरी उसे ठग रहा है, लेकिन जोक खत्म होते-होते उसके दिमाग में जो बात घर कर जाती है, वह यही कि कैसा गंवार है जो ठगा जाकर भी खुद को चालाक समझ रहा है।यही जोक का ठहाका पॉइंट है। वह ठग आपके दिमाग से गायब हो चुका होता है जिसने एक सीधे-सादे शख्स से 500 रुपये झटक लिए। अगर आप ध्यान देंगे तो पाएंगे कि हर चुटकुला किसी न किसी ग्रुप या क्लास का मजाक उड़ाता है। ये चुटकुले यह भी बताते हैं कि समाज के विभिन्न तबके एक दूसरे के बारे में क्या राय रखते हैं। इसी कारण आपको गांववालों के खिलाफ चुटकुले मिलेंगे ही, पढ़े-लिखों के खिलाफ भी मिलेंगे हालांकि कम संख्या में। इसके अलावा महिलाओं, कवियों, नेताओं, व्यापारियों के खिलाफ भी बड़ी संख्या में चुटकुले मिलेंगे। खास समुदायों और दुश्मन देश के लोगों के खिलाफ भी चुटकुले कॉमन होते हैं। 
एडल्ट चुटकुलों की तो एक खास सेक्स अपील है ही। चुटकुलों का एक बड़ा हिस्सा औरतों पर केंद्रित होता है – खासकर पत्नी और सास पर। हिंदी के एक शाम के अखबार में एक दिन सात चुटकुले छपे जिनमें से 6 पति-पत्नी और सास पर थे। इन चुटकुलों में उनकी गपबाजी, सजने-संवरने की आदत, फिजूलखर्ची आदि पर अटैक किया जाता है। जैसे बचपन में एक सिंगल लाइनर चुटकुला सुना था – रेल का महिला डिब्बा वह होता है जो इंजन से भी ज्यादा आवाज़ करे।इसी तरह एक पॉप्युलर जोक है जिसमें पत्नी पति से कहती है – मैं दो मिनट में पड़ोसन से मिलकर आ रही हूं, आप आधे घंटे के बाद पानी भर लीजिएगा। ऐसा नहीं है कि पुरुषों पर चुटकुले नहीं बनते। लेकिन उनका टोन भी ऐसा होता है कि आखिरकार उसमें महिला विरोध ही झलकने लगता है। आप पाएंगे कि ऐसे ज्यादातर चुटकुले ऐसे पुरुषों पर बनाए जाते हैं जो अपनी पत्नी से डरते हैं या ऐसे काम करते हैं जो महिलाओं के लिए तय हैं जैसे खाना बनाना, कपड़े धोना, बर्तन मांजना।ऐसे पुरुष ही चुटकुलों के पात्र क्यों होते हैं? इसलिए कि पुरुषों में बहुमत ऐसे लोगों का है जो ऐसे काम करना अपनी तौहीन समझते हैं। इसलिए वे ऐसे मर्दों को अपने मजाक का निशाना बनाते हैं। ऐसे चुटकुलों के सपोर्टर यह दलील दे सकते हैं कि चुटकुले तो हरदम असामान्य परिस्थितियों पर ही बनेंगे। जिस समाज में औरतें ही घर का कामकाज करती हैं, वहां घरेलू कामकाज करनेवाली महिलाओं पर लतीफे बन ही नहीं सकते। इसी तरह जहां तलाक आम बात नहीं है, उन देशों में इस मुद्दे से जुड़ा एक निर्दोष सत्य भी जोक बन जाता है।मेरा एक जर्नलिस्ट दोस्त शूटिंग के सिलसिले में आगरा गया हुआ था। वहां एक विदेशी जोड़ा मिल गया। उसने बताया कि वह तीसरी बार ताजमहल देखने आ रहा है। दोस्त को हैरत हुई – इतना अच्छा लगा हमारा ताज? विदेशी जेंटलमैन ने कहा, असल में मैंने जब-जब शादी की तो अपनी पत्नी को ताज दिखाने लाया। यह संवाद जोक का मजा क्यों देता है? क्योंकि ताजमहल जो शाहजहां और मुमताज के प्रेम का प्रतीक है, वहां एक बंदा तीन-तीन महिलाओं से प्यार, शादी और तलाक की बात करता है। इस चुटकुले से हम जोक का बेसिक प्रिंसिपल निकाल सकते हैं-1. जो बात हमें अपने समाज और मान्यता के अनुसार अटपटी लगती है, और2. समाज का जो वर्ग हमसे अलग-सा दिखता, रहता है, उन पर हम चुटकुला बना लेते हैं।जिन्हें कविता की समझ नहीं, वे कवियों को खब्ती और ख्याली दुनिया में रहनेवाला मानकर उन पर चुटकुले गढ़ते हैं। उनकी किसी को भी पकड़कर कविता सुनाने की इच्छा का मजाक उड़ाते हैं। 
इसी तरह नेता भी समाज में एक अलग किस्म का तबका है जिसे सभी नापसंद करते हैं लेकिन काम भी उन्हीं से पड़ता है। तो उनके झूठे आश्वासनों और भाषणबाजी पर छींटाकशी की जाती है। इसी तरह व्यापारियों के लालच और कंजूसी को निशाना बनाया जाता है। चुटकुलों का एक बड़ा हिस्सा नॉनवेज यानी सेक्स संबंधी चुटकुलों का है। चूंकि एक बंद समाज में शादी के बाहर के रिश्तों की अनुमति नहीं है, इसलिए सेक्स संबंधी अधिकतर चुटकुले फ्री सेक्स या एक्स्ट्रा मैरिटल संबंधों पर होते हैं। सबसे ज्यादा आक्रामक और घातक चुटकुले वे होते हैं जो किसी खास समुदाय को लक्ष्य करके बनाए जाते हैं। ऐसे कम्युनल चुटकुले विरोधी समुदाय में बहुत हिट होते हैं। इन लतीफों में ऐसी कोई बात होती है जिससे उन्हें मूर्ख, कायर, कमजोर, अनाड़ी साबित किया जा सके। इन चुटकुलों की खासियत यह होती है कि ये समुदाय और धर्मनिरपेक्ष होते हैं। जैसे कुछ दिनों पहले एक जोक पढ़ा। एक हिंदुस्तानी बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान गया। वहां उसने देखा कि दो पाकिस्तानी कुछ काम कर रहे हैं। एक जमीन से मिट्टी निकाल कर गड्ढा बना रहा था, दूसरा उस गड्ढे को मिट्टी से भर रहा था। हिंदुस्तानी को कुछ समझ नहीं आया। उसे पूछा, आप लोग क्या कर रहे हो? उन पाकिस्तानियों ने कहा, हम तीन लोग हैं जिनमें से एक का काम गड्ढा खोदना, दूसरे को पौधा लगाना और तीसरे का मिट्टी भरना है। पौधा लगानेवाला आज छुट्टी पर है लेकिन हम दोनों अपना काम कर रहे हैं। इस जोक पर हम हिंदुस्तानी खूब हंस सकते हैं कि पाकिस्तानी कितने मूर्ख होते हैं। लेकिन एक पल ठहर कर सोचिए। इस जोक में हिंदुस्तानी और पाकिस्तानी शब्दों को बदल दीजिए और तब यह जोक पाकिस्तानियों को भी खूब हंसाएगा। इसी तरह का एक और जोक पेश है। लल्लू ने बाप बनने पर दोस्तों को मिठाई बांटी। दोस्तों ने कहा, ‘लेकिन तू तो पिछले तीन सालों से घर नहीं गया।’ लल्लू बोला, ‘तो क्या हुआ? चिट्ठी तो लिखता था ना?’ यह चुटकुला लोकल लोग बाहरियों के बारे में सुनाते हैं। इसे शहरी बनाम गांववाला भी बना सकते हैं क्योंकि शहरी लोग आम तौर पर गांव से आनेवाले लोगों से चिढ़ते हैं। लेकिन क्या ये चुटकुले समाज के हित में हैं? ऐसा करके वे सामाजिक समरसता को कितना नुकसान पहुंचाते हैं, इस पर कभी विचार नहीं किया जाता। कभी किसी ने सवाल उठाया भी होगा तो वह चुटकुलेबाजों के ठहाकों में दब गया होगा। लेकिन बात हंसी में उड़ाने की नहीं है।

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हंसी के हसीं ठिकाने

बॉस की डांट से मूड खराब हो गया हो या परिवार में किसी बात को लेकर, हंसी की एक डोज गुस्से पर भारी पड़ती है। हंसने के लिए न तो समय का इंतजार करें और ही जगह का। इंटरनेट की दुनिया में इतनी सारी चीजें हैं जिन्हें कभी भी देखकर या सुनकर हंसा जा सकता है। इंटरनेट पर मौजूद हंसी के कुछ ठिकानों के बारे में बता रहे हैं राजेश भारती

स्टैंड-अप कॉमिडी
निया में इन दिनों स्टैंड-अप कॉमिडी को काफी पसंद किया जा रहा है। इसी वजह से काफी स्टैंड-अप कमिडियंस के नाम सामने आ रहे हैं। भारत भी इसमें पीछे नहीं है। हमारे यहां के हर स्टैंड-अप कमिडियन का एक अलग अंदाज है और अपने इसी अंदाज की वजह से वे छाए हुए हैं। जानें, कुछ ऐसे स्टैंड-अप कमिडियंस के बारे में जिनके विडियो आप यू-ट्यूब समेत कई प्लैटफॉर्म पर कभी भी देखकर हंसी की डोज़ ले सकते हैं:

जाकिर खान
स्टैंड-अप कॉमिडी की दुनिया में जाकिर खान एक जाना-पहचाना नाम है। जाकिर को बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के लिए जाना जाता है। कमीडियन होने के साथ-साथ जाकिर खान ऐक्टर, लेखक, कवि, यूट्यूबर और म्यूजिशियन भी हैं। जाकिर ऐमजॉन प्राइम पर आई वेब सीरीज 'चाचा विधायक हैं हमारे' में काम कर चुके हैं। जाकिर 2012 में सेंट्रल इंडिया के बेस्ट स्टैंड-अप कमिडियन शो का खिताब जीत चुके हैं। जाकिर 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज शो' में भी आ चुके हैं। जाकिर अक्सर अपनी कॉमिडी में एक पंचलाइन 'सख्त लौंडा' का प्रयोग खुद के लिए करते हैं। इसलिए कॉमिडी की दुनिया में इन्हें 'सख्त लौंडा' भी कहा जाता है। यू-ट्यूब पर इनका Zakir Khan नाम से चैनल है।

वरुण ग्रोवर
वरुण ग्रोवर एक स्टैंड-अप कमिडियन के साथ-साथ लेखक और कवि भी हैं। किसी भी चीज से पंचलाइन निकालकर उसे कॉमिडी में बदलना वरुण की खासियत है। वरुण ने उड़ता पंजाब, दम लगा के हईशा, गैंग्स ऑफ वासेपुर समेत कई फिल्मों में गाने भी लिखे हैं। साल 2015-16 के नैशनल फिल्म अवार्ड्स में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का अवॉर्ड मिला था। वरुण ने 2003 में एक सॉफ्टवेयर कंसलटेंट के रूप में जॉब की शुरुआत की थी। कुछ ही समय में वह जॉब से बोर हो गए और जॉब छोड़कर कॉमिडी और लेखन की दुनिया में कदम रख दिया। यू-ट्यूब पर इनका Varun Grover नाम से चैनल है।

निशांत तंवर
स्टैंड-अप कमिडियन निशांत तंवर को 'जोक सिंह' और 'राइडर ओपी' के नाम से भी जाना जाता है। कॉमिडी के दौरान निशांत की ऑब्जर्वेशन दर्शकों को काफी पसंद आती है। इनके प्रमुख कॉमिडी शो में My London Trip, Shaadi Ka Nasha आदि काफी फेमस हैं। निशांत की कॉमिडी की कुछ लाइनें इतनी वायरल हो गई हैं कि लोगों के बीच अक्सर सुनने को मिल जाती हैं, जैसे- गाड़ी तेरा भाई चलाएगा। निशांत ने एनडीटीवी में काम करके अपने करियर की शुरुआत की थीं। उन्होंने साल 2009 में स्टैंड-अप कॉमिडी करना शुरू किया। इनका Nishant Tanwar नाम से यू-ट्यूब चैनल भी है।

मल्लिका दुआ
स्टैंड-अप कॉमिडी में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। इन्हीं में एक हैं मल्लिका दुआ। वह स्टैंड-अप कॉमिडी के साथ-साथ लेखिका और अभिनेत्री भी हैं। इन्होंने ऐमजॉन प्राइम के 'कॉमिकिस्तान' और नेटफ्लिक्स पर 'द कॉमिडी प्रीमियम लीग' जैसे शो किए हैं। वह हिंदी मीडियम, नमस्ते इंग्लैंड आदि फिल्मों में काम कर चुकी हैं। शुरुआत में उन्होंने कुछ फनी विडियो बनाए। इन्हीं में एक था दिल्ली की सरोजिनी नगर मार्केट पर बनाया गया विडियो। यह विडियो काफी हिट हुआ। इनका Mallika Dua नाम से यू-ट्यूब चैनल भी है।
नोट: इसके अलावा और भी स्टैंड-अप कमिडियंस हैं। इनमें मुनव्वर फारूकी, सुमुखी सुरेश, केनी सेबेस्टियन, कनन गिल, कुणाल कामरा आदि शामिल हैं।

ये यूट्यूबर भी कम नहीं
यू-ट्यूब पर ऐसे कई चैनल हैं जिनके विडियो जमकर हंसाते हैं। इनमें कई विडियो स्थानीय भाषा में होते हैं। इनमें कई चैनल ऐसे हैं जिनमें विडियो किसी खास थीम या सब्जेक्ट पर होते हैं। इनमें एक टीम होती है जो कंटेंट और ऐक्टिंग के दम पर लोगों को गुदगुदाने का काम करते हैं। जानें, ऐसे ही कुछ यू-ट्यूब चैनल के बारे में:

The MriDul
कॉमिडी के मामले में इस यू-ट्यूब चैनल की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी है। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में रहने वाले मृदुल तिवारी का यह यू-ट्यूब चैनल हंसी की फुल गारंटी है। किसी एक कहानी पर एक विडियो होता है जिसमें मृदुल के साथ उनके कई साथी शामिल होते हैं। इनमें नितिन और प्रगति प्रमुख हैं। सभी मिलकर दर्शकों को खूब हंसाते हैं। मृदुल ने अपने इस यू-ट्यूब चैनल की शुरुआत 2018 में की थी। उनका पहला विडियो 'सिस्टर बनाम गर्लफ्रेंड' था।सबस्क्राइबर: 1 करोड़ से ज्यादा

Thari Bijli
टिक-टॉक स्टार रह चुकीं क्षमा त्रिवेदी का यू-टयूब पर थारी बिजली के नाम से चैनल है। इस पर वह अपने कुछ साथियों के साथ कॉमिडी विडियो बनाकर पोस्ट करती हैं। इनके विडियो में हल्के-फुल्के मजाक शामिल होते हैं। इनके विडियो को हर वर्ग के लोग देख सकते हैं। क्षमा अपने विडियो में 2 किरदार निभाती हैं। एक किरदार खुद का और एक दादी अम्मा का। क्षमा The Mridul में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने अपना यू-ट्यूब चैनल 2021 में शुरू किया था।सबस्क्राइबर: 3.50 लाख से ज्यादा

KHANDESHI MOVIES
खानदेशी मूवीज का यह यू-ट्यूब चैनल हंसी की फुल डोज है। ऐक्टिंग और विडियो के कंटेंट के दम पर इनके चैनल को काफी पसंद किया जाता है। इसमें छोटू दादा (शफीक छोटू) की ऐक्टिंग काफी पसंद की जाती है। शफीक छोटू छोटे कद के ऐक्टर हैं। शफीक छोटू की सबसे बड़ी ताकत इनकी दमदार कॉमिक टाइमिंग है। इनके विडियो में कॉमिडी इतनी शानदार होती है कि आप इनके विडियो को देखते रह जाएंगे। यह यू-ट्यूब चैनल 2013 में शुरू हुआ था।सबस्क्राइबर: 3 करोड़ से ज्यादा

Salonayyy
मिमिक्री आर्टिस्ट सलोनी गौर के इस यू-ट्यूब चैनल पर आपको सिर्फ और सिर्फ हंसी की डोज ही मिलेगी। इनके विडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल होते हैं। सलोनी अपने ज्यादातर विडियो में सेलिब्रिटीज की मिमिक्री करती नजर आती हैं। हालांकि कई विडियो इससे अलग भी हैं। इनके नजमा आपी और नानू जैसे किरदार खूब लोकप्रिय हैं। विडियो का कंटेंट काफी दमदार होता है। सलोनी ने साल 2019 में अपने यू-ट्यूब चैनल की शुरुआत की थी।सबस्क्राइबर: 33 लाख से ज्यादा
नोट: इनके अलावा और भी यू-ट्यूब चैनल हैं।

यहां भी हंसी की फुल गारंटी
स्टैंड-अप कॉमिडी और यू-ट्यूब चैनल से अलग मूवी या सीरियल या वेब सीरीज देखकर भी खूब हंस सकते हैं। जानें, ऐसी ही कुछ मूवी, सीरियल और वेब सीरीज के बारे में:
मूवी: अंदाज अपना-अपना, हेरा फेरी, गोलमाल, चुपके-चुपके, हंगामा, मुन्नाभाई एमबीबीएस, पड़ोसन, थ्री इडियट्स, धमाल, ऑल द बेस्ट आदि।
सीरियल: तारक मेहता का उलटा चश्मा, भाभी जी घर पर हैं, हप्पू की उलटन-पलटन आदि।
वेब सीरीज: पिचर्स (MX Player), बैंग बाजा बारात (Amazon Prime), चाचा विधायक हैं हमारे (Amazon Prime), ट्रिपलिंग (TVF), बेक्ड (YouTube) आदि।

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हेल्थ के लिए हंसें

हंसने से हस्ती बनती है। हंसने से हेल्दी होते हैं। हंसने से क्या-क्या नहीं होता। दरअसल हंसना एक ऐसी संक्रामक क्रिया है जो अक्सर दूसरे शख्स तक भी आसानी से पहुंच जाती है। इसके बाद आसपास मौजूद लोग सामूहिक हंसी में शामिल हो जाते हैं। कहते हैं कि सुबह की 10 मिनट की हंसी आपका पूरा दिन बना देती है। पर सवाल है कि क्या ऐसा सचमुच कर पाते हैं? क्या हंसने से बीमारियां दूर हो सकती हैं? अगर कोई हम पर हंसे तो हम क्या करें, हंसने से क्या कोई केमिकल बदलाव भी होता है? ऐसी ही बातों को देश के बेहतरीन एक्सपर्ट्स से जानने की कोशिश की लोकेश के. भारती ने:

किस उम्र में हो कितनी हंसी एक दिन में
5 साल से कम
औसतन हंसते हैं:
350 से 400 बार
हंसना चाहिए:
400 बार से ज्यादा, एक बार में कम से कम 2 से 5 सेकंड के लिए

5 साल से ज्यादा
औसतन हंसते हैं:
30 से 40 बार 3 से 7 सेकंड के लिए
हंसना चाहिए:
50 बार से ज्यादा, एक बार में कम से कम 5 से 7 सेकंड के लिए

हंसते-हंसते कट जाए रस्ते, ज़िंदगी यूं ही चलती रहे...

1. वर्ल्ड लाफ्टर रिपोर्ट 2022 के अनुसार 146 देशों की सूची में भारत का स्थान 136वां है। हमें ज्यादा हंसने की जरूरत है।

2. हंसने से सांसें तेज, दिल की धड़कनें तेज, खून का बहाव तेज और हम सेक्शुअली भी ज्यादा ऐक्टिव होते हैं। एक बार हंसने के दौरान अमूमन 10 से 12 मांसपेशियां शामिल होती हैं।

3. हंसी की छोटी डोज़ हो या बड़ी, सेहत के लिए फायदेमंद है। लोग आपस की बातचीत में अमूमन हंसी का सहारा लेते हैं। हंसना-मुस्कुराना सभी के लिए जरूरी है।

4. हम जन्म के 3 महीने के बाद से ही हंसना शुरू कर देते हैं। हंसने की क्रिया में हमारा चेहरा, छाती, फेफड़े, दिल जैसे अंग शामिल होते हैं।

5. हंसी लोगों से जुड़ने का एक बेहतरीन जरिया है। रोमन साम्राज्य में 'हिलेरिया' फेस्टिवल मनाने की शुरुआत हुई थी। हंसना-हंसाना ही इस दिन का मकसद था।

 6. हंसने से शरीर में एंडॉर्फिन केमिकल बनता है जो दूसरे जरूरी हॉर्मोन को ज्यादा ऐक्टिव रखने का काम करता है। इससे शरर के बाकाी काम सही तरीके से पूरे होते हैं।

7. कोई शख्स 10 मिनट की सामान्य बातों के दौरान अमूमन 7 से 10 बार हंसता है। अहम बात यह कि उसे इस बात का पता भी नहीं चलता।

8. एक स्टडी के मुताबिक महिलाएं पुरुषों की तुलना में 25 से 30 फीसदी ज्यादा हंसती हैं। इससे उन्हें तनाव भी कम होता है। वह अपने काम ज्यादा बेहतर तरीके से कर पाती हैं। 

कभी हंस भी लिया करो- एक हिंदी फिल्म में यह संवाद कई बार बोला गया। यह काफी हिट भी रहा। मैं तो कहता हूं कभी क्यों, दिनभर में इतनी बार हंसें कि हाफ सेंचुरी लग जाए। हंसने से सिर्फ माहौल अच्छा नहीं होता बल्कि यह शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। हंसने से पॉजिटिव हॉर्मोन भी लगातार निकलते हैं। इससे बीपी भी कम होता है। इतना ही नहीं, जिन लोगों की जिंदगी में हंसी ज्यादा होती है, उनकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है। हंसने से शरीर के सभी रिलैक्सेशन पॉइंट ऐक्टिवेट होते हैं।  

हंसी की हस्ती

सिग्नल है हंसी
हंसी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसके जरिये से हम अपने ग्रुप, समाज और आसपास के लोगों को संदेश देते हैं कि हम आपकी बातों से सहमत हैं। सीधे कहें तो यह उनसे जुड़ने का सिग्नल भी हो सकता है। खासकर जब हम किसी अजनबी शख्स की बातों पर हंसते हैं तो एक तरह से यह इशारा भी हो सकता है कि आपस में आगे भी बात हो सकती है।

पॉजिटिव इंफेक्शन है हंसी
हंसी के साथ अच्छी बात है कि यह संक्रामक होती है। एक ने हंसना शुरू किया तो उसे देखकर वजह जाने या बिना जाने दूसरा शख्स भी हंसने लगता है। फिर दूसरे से तीसरा और चौथा, इस तरह यह फैलती जाती है। अगर हम इस संक्रमण की शुरुआत घर से करें। परिवार के सदस्यों में इसे फैलाएं तो घर-परिवार में सकारात्मक माहौल बनता है। हंसी के अलावा उबासी भी संक्रामक मानी जाती है। किसी को देखने के बाद हमारी उबासी भी अक्सर शुरू हो जाती है।

नहीं होती असली या नकली हंसी
यह नकली होती ही नहीं। हंसी एक व्यायाम है जो हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत को दुरुस्त करने में काफी मददगार है और इसे व्यायाम की तरह ही लेना चाहिए। यह ठीक उसी तरह है जैसे कोई शख्स चाहे मन मारकर वॉक करे या गाना सुनते हुए वॉक करे। उसकी कैलरी बर्न तो होगी ही। हंसी के साथ भी ऐसा ही है। शुरुआत भले ही मन मारकर की हो, असर उतना ही पड़ता है। जिस तरह योग असली या नकली नहीं होता, टहलना या व्यायाम करना असली या नकली नहीं होता, उसी तरह हंसी भी असली या नकली नहीं होती। हां, कई बार इसकी शुरुआत की वजह बनावटी हो सकती है, लेकिन हंसने के दौरान जो क्रियाएं होती हैं: चाहे वह सांस तेज होना, दिल की धड़कनों का तेज होना, मूड फ्रेशनर के रूप में काम करना, ये सब नकली हंसी में भी होती है।

बोली न हो, पर होती है हंसी
पैदा होने के 3 महीने के बाद से ही बच्चा हंसना शुरू कर देता है। जब कोई शख्स मूक और बधिर होता है तो वह भले ही बात न कर सके, लेकिन हंसना वह भी जानता है। यहां तक कि अगर दुर्घटना की वजह से किसी शख्स की बोलने या सुनने की शक्ति चली जाए तो भी उसका हंसना जारी रहता है।

हंसने के तरीके अलग-अलग
हर शख्स का हंसने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। कोई जोर-जोर से हंसता है तो कोई धीमे से। हंसने के दौरान किसी का पूरा शरीर हिलता है तो किसी की आंखें बंद हो जाती हैं। पर हंसने के दौरान एक बात सभी तरह की हंसी पर लागू होती है, वह है सांस छोड़ने की क्रिया। जब हम हंसते हैं तो हम तेजी से सांस बाहर की ओर फेंकते हैं जैसा कि हम प्राणायाम के दौरान भी करते हैं। इसलिए कई एक्सपर्ट हंसने की क्रिया को हास्य योग भी कहते हैं। सुबह-सुबह कई पार्कों से ठहाकों की आवाजें अक्सर सुनाई देती हैं। ये हास्य योग कर रहे होते हैं। इनकी शुरुआत बिना वजह की हंसी से होती है, लेकिन चंद सेकंडों के बाद यह कुदरती रूप ले लेती है।

हंसते समय कुछ भी न रखें ध्यान
हंसने में कंजूसी कभी न करें। जितनी जोर से हंसी आए, उतने ही जोर से हंस लें। यह न सोचें कि सामने वाला क्या सोचेगा। ठहाका लगाना कई बार जिंदादिली की निशानी होती है। हां, आपकी हंसी से अगर कोई डिस्टर्ब हो रहा हो तो उसे भी शामिल कर लें। अगर किसी जरूरी मीटिंग में हों और इससे आपका नुकसान हो सकता है तो फिर कुछ समय के लिए टाल दें, पर खत्म न करें। मीटिंग से बाहर आने के बाद उन बातों को याद कर जरूर हंसें। हंसने का कोई मौका जाने नहीं देना चाहिए।

हंसी और हॉर्मोन का संबंध
हंसने से हमारे शरीर में एंडॉर्फिंस केमिकल और ऑक्सिटोसिन हॉर्मोन ज्यादा मात्रा में बनता है। इन्हें फील-गुड हॉर्मोंस भी कहा जाता है। ये मूड को बेहतर बनाने का काम करते हैं। एंडॉर्फिंस केमिकल निकलने की वजह से, घबराहट वाले हॉर्मोन एड्रिनलिन आदि की मात्रा कम हो जाती है। इससे कई बार परेशानी में होने के बाद भी दिल की धड़कनें असामान्य नहीं होतीं। हम समस्याओं को सही तरीके से सुलझा पाते हैं। हमारे फील-गुड हॉर्मोंस इन्हें बैलेंस कर देते हैं।

लाफ्टर के फायदे ही फायदे
हंसने की आदत कह लें या फिर खासियत, यह इंसानों के अलावा चिंपांजी, लंगूर और चूहों को ही मिली है। हमारे लिए हंसी के फायदे कई तरह के और कई रूपों में सामने आते हैं:

मानसिक सेहत में फायदा
दिमाग पर तनाव कम हो, इसमें हंसी अहम भूमिका निभा सकती है। जो हंसते हैं, उनपर समस्याओं का दबाव ज्यादा नहीं पड़ता।

हंसी से बढ़ता है खुद पर यकीं
जब कोई शख्स हंसता है तो वह पॉजिटिविटी की तरफ बढ़ता है। पॉजिटिव होने से हम हर तरह के काम में ज्यादा लॉजिकल होते हैं, चाहे वह घर का काम हो या फिर ऑफिस का। हम किसी भी काम को बेहतर तरीके से कर पाते हैं। दिमाग शांत और तनाव-रहित होता है तो हमारा खुद पर यकीन भी ज्यादा होता है। ऑफिस में भी इसका पॉजिटिव असर जरूर दिखता है।

डिप्रेशन के मामले कम
एक गजल है- 'तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छिपा रहे हो'। मुस्कुराकर भले ही अपने गम को कुछ समय के लिए छुपाया जा सकता हो या टाला जा सकता हो, पर मुस्कुराने या हंसने की आदत है तो डिप्रेशन अमूमन दूर ही रहता है। गम भी ज्यादा कुछ बिगाड़ नहीं पाता। जिस शख्स को हंसने या मुस्कुराने की आदत है, उसे भले ही टेंशन या फिर डिप्रेशन कुछ समय के लिए जकड़ ले, लेकिन अपनी पॉजिटिव आदतों की वजह से वह आसानी से इससे बाहर भी निकल जाता है।

रिश्ते भी मजबूत
कहते हैं कि ज़िंदगी में हंसी को शामिल करें, देखिए दोस्तों की कोई कमी नहीं होगी। हकीकत यह है कि आज तनाव की चीजें ज्यादा हैं और तनाव कम करने वाली कम। ऐसे में जब कोई शख्स हंसते और मुस्कुराते हुए कोई बात कहता है तो ज्यादातर लोग ऐसे शख्स को पसंद करते हैं। उनसे बातें करना चाहते हैं। अमूमन ऐसा शख्स जो पॉजिटिव बातें करता है, हंसने और हंसाने वाली बातें करता है तो उसके ग्रुप के लोग या रिश्तेदार उससे खुश रहते हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि ऐसे शख्स से बार-बार मिला जाए। बिना किसी कोशिश के ऐसे शख्स के रिश्ते बेहतर हो जाते हैं।

ऐसे बुजुर्ग ज्यादा ऐक्टिव
अमूमन ऐसा देखा जाता है कि जब किसी शख्स की आदत में हंसना शामिल होता है तो वह बुढ़ापे में भी काफी ऐक्टिव रहता है। इसकी वजह भी उसके शरीर में तुलनात्मक रूप से ज्यादा एंडॉर्फिन बनना होता है। यह हॉर्मोन उम्र के उस पड़ाव पर भी शरीर में बनने वाले दूसरे हॉर्मोन को भी ऐक्टिव रखता है।

शारीरिक सेहत मजबूत

खून के बहाव में इजाफा
जब हम एक्सरसाइज, वॉक या योग करते हैं तो हमारे शरीर में खून का बहाव तेज होता है। इससे शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सिजन की ज्यादा मात्रा पहुंचती है। इससे कोशिकाएं ज्यादा ऐक्टिव होती हैं। उनमें ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा होता है। इसका फायदा हमारे सभी टिशू और अंगों को होता है। वे बेहतर तरीके से और पूरी क्षमता से काम कर पाती हैं क्योंकि सभी टिशू और अंग अरबों कोशिकाओं के मिलने से ही बने हैं। हम ऊर्जावान महसूस करते हैं। हंसी यानी लाफ्टर भी एक तरह का योग या एक्सरसाइज है। हंसी के दौरान खून का बहाव 20 फीसदी तक तेज होता है, हमारी सांसें तेज होती हैं, धड़कनें बढ़ती हैं, ऊर्जा की खपत होती है।

बीपी नॉर्मल और दिल मजबूत
हंसने से हमारा बीपी नॉर्मल होता है। खासकर सिस्टॉलिक (सामान्य बीपी 120/80) बीपी। ध्यान रहे कि सामान्य बीपी की रीडिंग में 120 की रीडिंग सिस्टॉलिक और 80 को डायस्टॉलिक कहते हैं। चूंकि हंसने से खून का बहाव तेज होता है तो हार्ट को पंप करने में भी यह मदद करता है। जब बीपी सामान्य रहेगा तो यह स्वाभाविक है कि दिल के लिए हंसी ही दोस्ती निभाएगी।

इम्यूनिटी बेहतर और गहरी नींद
जब हम हंसते हैं तो पॉजिटिव हॉर्मोन बढ़ते हैं। ऑक्सिजन ज्यादा मात्रा में और ज्यादा देर के लिए शरीर में ठहरती है। इससे शरीर में बनने वाले और मौजूद ऐंटिबॉडी (वाइट ब्लड सेल्स जो शरीर में इम्यूनिटी के लिए काम करते हैं) को ज्यादा मात्रा में ऑक्सिजन उपलब्ध रहती है। इससे इनकी संख्या में कमी नहीं आती। अगर किसी को देर रात स्क्रीन देखने की लत नहीं है तो सिर्फ 10 मिनट की हंसी से 2 घंटे की गहरी नींद मिलती है।

मोटापा कुछ कम
कोई हर दिन 30 से 40 मिनट हंसता है तो वह अमूमन 50 से 100 कैलरी बर्न करता है। यह कैलरी 15 से 20 मिनट वॉक के बराबर है। इसलिए हंसते रहने से भी मोटापा कम होता है।

स्किन ग्लो
चूंकि हंसी की वजह से शरीर में ऑक्सिजन की मात्रा में इजाफा होता है तो इसका सकारात्मक असर हमारी स्किन पर भी पड़ता है। यह असर एक दिन या एक महीने में नहीं होता। ऐसा देखा जाता है कि जो लोग हंसमुख होते हैं, उनकी स्किन ऐसे लोगों की तुलना में कुछ ज्यादा दमकती है जो हंसने में कंजूसी करते हैं।

सेक्स हॉर्मोन ऐक्टिव
हंसने से शरीर में कई हॉर्मोंस ज्यादा ऐक्टिव होते हैं। उनमें सेक्स हॉर्मोंस भी शमिल हैं। मसलन: टेस्टास्टरोन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन आदि। इसका पॉजिटिव असर यह होता है कि लोगों की परफॉर्मेंस बेहतर हो जाती है। हंसी है यानी तनाव कम है। जब तनाव कम होता है तो सहवास के समय ध्यान नहीं भटकता।

घर में ऐसे बनाएं हंसी का माहौल
1. डाइनिंग टेबल पर पहुंचें जल्दी
परिवार के सदस्यों के बीच हंसी की डोज कम न हो इसके लिए यह जरूरी है कि बातचीत में भी कमी न हो। हालांकि आजकल लोगों के पास वक्त कम होता है फिर भी डाइनिंग टेबल पर 10 से 15 मिनट पहले पहुंचें। हर दिन किसी एक सदस्य की जोक सुनाने की ड्यूटी लगा दें। किसी दिन अंत्याक्षरी खेल लें। इससे परिवार में करीबी भी बढ़ेगी और लोग हंसेंगे भी। हालांकि सिर्फ जोक्स पर चंद सेकंड के लिए हंसने से उतना फायदा नहीं होता, जितना लंबी हंसी से होता है। लेकिन शुरुआत तो कर ही सकते हैं।

2. ऑफिस की बातें ऑफिस में
घर पर ऑफिस की बातों की चर्चा कम ही करें तो बेहतर है। इतना ही नहीं, नेगेटिव विषयों से दूर रहने की कोशिश करें। हालांकि, यह कुछ मुश्किल होता है, फिर भी कोशिश करें। परिवार के हर शख्स का कोई न कोई पसंदीदा विषय होता है।

3. बच्चों को अभी से लगाएं आदत
वैसे तो बच्चों में हंसने की स्वाभाविक आदत होती है, लेकिन आजकल कोरोना के नेगेटिव माहौल ने उनकी हंसी कम कर दी है। इसलिए यह बड़ों की जिम्मेदारी है कि उन्हें यह आदत डालें कि वे हंसी खोज सकें। बच्चों को अपने बचपन की कोई हंसी वाली बातें बताएं। अपनी मूर्खता वाली कोई घटना सुनाकर खुद भी हंसें और उन्हें भी हंसाएं। उनसे भी कोई ऐसी घटना शेयर करने के लिए कहें। इससे उनमें खुद पर हंसने की आदत भी विकसित होगी। वह गलती करने पर तनाव में नहीं आएगा बल्कि हंसेगा।

4. बसपन के यार को भूल ना जाना
जितने खुले हुए हम अपने दोस्तों, खासकर बचपन के दोस्तों के साथ होते हैं, उतने तो शायद हम अपने जीवनसाथी के साथ भी नहीं होते। इसलिए ऐसे दोस्तों के संपर्क में रहें। जब आप ऐसे दोस्तों के साथ बातें करेंगे तो मन हल्का होगा। जब मन हल्का होगा तो परिवार का माहौल भी हल्का ही रहेगा।

5. नेगेटिव बातों और खबरों से दूरी
जो खबरें तनाव देती हैं, ऐसी खबरों से दूरी बना लें। घर-परिवार में गॉसिप बहुत होती है। हम सभी इसमें शामिल होते हैं, लेकिन जब ये तनाव देने लगे तो खुद को अलग कर लें। वहीं जिन खबरों से आप दुखी होते हैं, ऐसी खबरों से भी दूरी बना लें।

6. पसंद का करें काम
जो भी काम अच्छा लगता हो, जो भी शौक हो, उनके लिए हर दिन थोड़ा-सा वक्त जरूर निकालें। इससे आंतरिक खुशी मिलती है। भले ही उस समय आप ठहाका न लगा रहे हों, लेकिन अंदर की खुशी जरूर मिलती है। ये म्यूजिक सुनना, डांस करना, पसंदीदा टीवी शो देखना आदि हो सकते हैं। इन सभी के अलावा अगर आप किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं तो उसके चेहरे पर आने वाली खुशी आपको कई दिनों तक फील-गुड कराती है।

7. छोटी खुशियां बड़े काम की
बड़ी खुशियों के इंतजार में छोटी-छोटी खुशियों को बेकार न करें। जब भी मौका मिले हंस दें, हंसा दें। छोटी-छोटी खुशियों को भी अगर 5 लोगों से शेयर करेंगे तो 5 बार हंसने का मौका मिलेगा।

8. अकेले हैं तो क्या गम है...
अगर अकेले रहते हैं तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं या आपके साथ हंसी में कोई शामिल नहीं हो रहा तो भी क्या गम है। आईने के सामने खड़े हो जाएं और खुद को देखकर हंसना शुरू कर दें। सीधे-सीधे हंसी न आए तो मुंह-नाक को टेढ़ा-मेढ़ा बनाना शुरू कर दें और देखकर खूब हंसें।

9. कॉमेडी शो कॉमेडी
शो को अगर देखकर हंसी छूटे तो उसे भी देख सकते हैं। अलग-अलग चैनलों पर ऐसे तमाम शो चलते रहते हैं। उन्हें देखकर ठहाके लगा सकते हैं। सीधे कहें तो हंसने की आदत लगा लें, बहुत काम की है।

...सिर्फ हंसना नहीं
सिर्फ हंसी से नहीं स्लिम
यह ध्यान रहे कि सिर्फ हंसने से कोई स्लिम नहीं हो जाता। रेग्युलर एक्सरसाइज, ब्रिस्क वॉक और डाइट कंट्रोल करना ही पड़ता है। हां, हंसी इसमें कुछ मददगार हो सकती है। सीधे कहें तो एक गुलाब जामुन मिठाई की कैलरी को बर्न करने के लिए कम से कम 3 से साढ़े तीन घंटे तक ठहाके लगाने पड़ेंगे। अमूमन यह मुमकिन नहीं होता।

इससे ज्यादा हंसना होगा
जोक्स या कॉमेडी सीन देखकर मुस्कुराने से मूड बेहतर हो सकता है, लेकिन इससे खून के बहाव आदि में बहुत ही हल्का इजाफा होगा। इसके लिए एक बार में चाहिए 7 सेकंड से ज्यादा और दिनभर में 1 घंटे से ज्यादा की असली या नकली हंसी चाहिए।

हंसी से न हो परेशानी
अगर किसी की हंसी से कोई चिढ़ रहा है तो उस समय अपनी हंसी को रोक दें। जब कोई दुखी हो, परेशान हो तो उस समय किसी का हंसना उल्टा भी पड़ सकता है। इस बात को समझना चाहिए कि किसी दूसरे पर हंसना तभी स्वीकार्य है जब तक उसे बुरा नहीं लग रहा। खुद को भी इस बात के लिए तैयार करना चाहिए कि अगर आप किसी पर हंसते हैं तो कोई आप पर भी हंस सकता है।

हंसी और अट्टहास में होता है फर्क
हंसी भी कई तरह की होती है। एक अट्टहास होता है। इसे नकारात्मक माना गया है। इससे किसी के अहंकारी होने अंदेशा होता है। इस तरह की हंसी तब नकारात्मक हंसी हो जाती है जब यह किसी की बेबसी या दुख पर आती है। फिल्मों में विलन की हंसी पर हंसी नहीं आती, गुस्सा आता है क्योंकि वह हंसता नहीं, अट्टहास कर रहा होता है। दूसरे का मजाक बना रहा होता।

बिना वजह कोई आप पर हंसे तो...
अगर कोई शख्स या आपके दोस्तों का ग्रुप आपका मजाक उड़ाने के लिए आप पर हंस रहा है तो सामान्य व्यवहार यह है कि आप भी उसके साथ शामिल हो जाएं। अमूमन इस तरह की बातें दोस्तों के बीच ही होती हैं। फिर जब किसी दूसरे की बारी आए तो आप भी ठहाके लगा लें। पर जब यह बार-बार हो और आप इससे असहज होते हों तो तनाव न रखें। ऐसे शख्स को साफ-साफ बता दें कि मुझे आपकी यह हंसी जंच नहीं रही। आप मेरा मजाक उड़ा रहे हैं। अगर वह बदल जाए तो ठीक, नहीं तो दूरी बना लें।


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