हमारे डाक्यूमेंट्स और फ्राड

हमारे डाक्यूमेंट्स और फ्राड

★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

                          Aadhar

★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

Aadhar  
ऐसे रोकें अपने आधार कार्ड का मिसयूज

PAN कार्ड की तरह आपके आधार कार्ड से भी जालसाज लोन लेकर या अकाउंट से रकम निकालकर आपको मुसीबत में डाल सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब किसी और शख्स के आधार पर किसी दूसरे ने लोन ले लिया या अकाउंट से रकम निकाल ली। क्या करें कि आपके साथ ऐसा फ्रॉड न हो या हो जाए तो क्या करें, इस बारे में एक्सपर्ट्स से जानकारी लेकर बता रहे हैं राजेश भारती

आधार कार्ड के जरिए फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कभी अकाउंट से रकम निकाल ली जाती है तो कहीं फर्जी तरीके से अकाउंट ही खुलवा लिया जाता है। इसके बाद इस अकाउंट में फर्जी तरीके से लाखों रुपये का लोन भी ले लिया जाता है। आपके साथ आधार फ्रॉड न हो, इससे बचने के लिए ये तरीके आजमाएं:

आधार के फ्रॉड से बचने के तरीके
1. लॉक करके रखें
आधार कार्ड को आप लॉक करके रखें ताकि डिजिटल तरीके से उसका कोई गलत इस्तेमाल न कर सके। कार्ड को लॉक करने के लिए आधार कार्ड के 12 डिजिट के नंबर की जरूरत पड़ती है जबकि अनलॉक करने के लिए 16 डिजिट की वर्चुअल आईडी (VID) की। वर्चुअल आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड में रजिस्टर मोबाइल नंबर से मेसेज भेजना होगा। मेसेज इस प्रकार भेजें:
- मेसेज बॉक्स में जाएं और GVID (SPACE) 1234 (आधार कार्ड के आखिरी 4 अंक) टाइप करें और इसे 1947 पर भेज दें।
- तुरंत 16 डिजिट का VID फोन पर आ जाएगा।
ऐसे करें आधार कार्ड लॉक
- ऑफिशल वेबसाइट uidai.gov.in पर जाएं।
- इसके बाद ऊपर नीले रंग की स्ट्रिप में लिखे My Aadhaar में जाएं। यहां Aadhaar Services सेक्शन में नीचे की ओर लिखे Aadhaar Lock and Unlock Service पर क्लिक करें।
- नया पेज खुलेगा। यहां नीले रंग की स्ट्रिप में लिखे Personal Details के ठीक नीचे Lock UID व Unlock UID ऑप्शन दिखाई देंगे। हमें आधार कार्ड लॉक करना है तो Lock UID पर क्लिक करें।
- इसके बाद 12 डिजिट का आधार कार्ड नंबर डालें।
- अब अपना नाम और पिनकोड दर्ज करें। पिन कोड वह दर्ज करना है जो आपके आधार कार्ड पर दर्ज है।
- इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे सिक्योरिटी कोड को डालें और नीचे दिए गए OTP या TOTP ऑप्शन में से किसी एक पर क्लिक करें।
- रजिस्टर मोबाइल पर OTP आएगा। OTP को डालकर Submit पर क्लिक करें। स्क्रीन पर लिखा नजर आएगा कि आधार नंबर लॉक कर दिया गया है।
ऐसे करें आधार कार्ड अनलॉक
- ऊपर वाले स्टेप्स को फॉलो करते हुए वहां तब जाएं जहां Lock UID और Unlock UID ऑप्शन दिखाई देंगे। चूंकि हमें अब आधार कार्ड अनलॉक करना है तो Unlock UID पर क्लिक करें।
- अब 16 डिजिट का VID नंबर टाइप करें।
- अब स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी कोड डालें और नीचे दिए OTP या TOTP एक पर क्लिक करें।
- रजिस्टर मोबाइल पर OTP आएगा। OTP को डालकर Submit पर क्लिक करें। स्क्रीन पर लिखा नजर आएगा कि आधार नंबर अनलॉक कर दिया गया है।

2. मकसद जरूर लिखें
जब देनी हो फोटोकॉपी...
जब भी आधार कार्ड या किसी दूसरे डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी अकाउंट खुलवाने या लोन लेने या किसी दूसरे काम के लिए दें तो उस पर साइन करने के साथ साइन के नीचे तारीख और डॉक्यूमेंट देने का मकसद लिख देना चाहिए। ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि आपके ये डॉक्यूमेंट किसी गलत हाथों में न जाएं या आपके साथ कोई धोखाधड़ी न कर पाए।
मान लीजिए आपका नाम ABC है और किसी बैंक XYZ में आपको सेविंग्स अकाउंट खुलवाना है। इस बैंक में आपको अकाउंट खुलवाने के लिए डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी बैंक को देनी पड़ेगी। ऐसे में डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी पर यह जरूर लिखें:
ABC (आपके साइन)
मकसद: बैंक XYZ में सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए
तारीख: 00/00/00
(ये बातें आप इंग्लिश में भी लिख सकते हैं, जैसा बराबर फोटो में लिखा है।)
जब भेजने हों फोटो...
अगर आप बैंक कर्मचारी या किसी और शख्स को वॉट्सऐप या ईमेल आदि के जरिए आधार कार्ड या किसी दूसरे डॉक्यूमेंट की फोटो भेज रहे हैं तो भी उस पर मकसद और तारीख जरूरी लिखें। इसके 2 तरीके हैं:
पहला तरीका: डॉक्यूमेंट का फोटो खींचें और फोटो एडिट में जाकर उस पर मकसद व तारीख टाइप करके भेज दें, जैसा लेफ्ट में फोटो में दिखाया गया है।
दूसरा तरीका: डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी पर साइन करें। फिर मकसद और तारीख लिखें। इसके बाद उस फोटोकॉपी की फोटो खींचें और जिसे भेजना चाहते हैं, भेज दें।

आधार कार्ड कहां हुआ इस्तेमाल, जानने का तरीका
पिछले 6 महीने में आपके आधार कार्ड का कहां-कहां इस्तेमाल हुआ है, इस बारे में ऐसे जानें:
- ऑफिशल वेबसाइट uidai.gov.in खोलें। नीले रंग की स्ट्रिप में लिखे My Aadhaar में जाएं। यहां Aadhaar Services सेक्शन में लिखे Aadhaar Authentication History पर क्लिक करें।
- नया पेज खुलेगा। यहां आपको अपना आधार नंबर और सिक्योरिटी कोड टाइप करना होगा। नीचे दिए गए OTP या TOTP ऑप्शन में से किसी एक पर क्लिक करें। रजिस्टर मोबाइल पर OTP आएगा। 
- अब आपको डेट रेंज सेलेक्ट करनी होगी, जो 6 महीने से पुरानी नहीं होनी चाहिए। फिर OTP टाइप करें और Verify OTP/TOTP पर क्लिक करें। आधार कार्ड कहां-कहां इस्तेमाल हुआ है, पता चल जाएगा।

फ्रॉड का पता चले तो पुलिस में दर्ज कराएं शिकायत
अगर आपके डॉक्यूमेंट्स से किसी ने फर्जी तरीके से कोई अकाउंट खोल लिया है या लेन-देन किया है तो आप इसकी शिकायत करा सकते हैं। इसकी शिकायत इस प्रकार करें:
- पहले आपको साबित करना होगा कि आपके डॉक्यूमेंट्स फर्जी तरीके से दूसरे शख्स ने इस्तेमाल करके अकाउंट खोला है या पैसों का लेन-देन किया है। यह बात आप अपने साइन या लेन-देन से जुड़े ट्रांजेक्शन के जरिए भी साबित कर सकते हैं।
- अब अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर FIR दर्ज कराएं। इस दौरान वे सबूत भी पेश करें जिनके जरिए आपको धोखाधड़ी का पता चला है। अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो किसी ऐडवोकेट की मदद से जिला कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। कोर्ट पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश देगी। साथ ही जिस बैंक या वित्तीय संस्था में फ्रॉड हुआ है, वहां जाकर भी पूरे मामले की जानकारी दें। अगर बैंक आनाकानी करे तो बैंक के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अगर आप ब्रांच नहीं जाना चाहते तो उस बैंक या वित्तीय संस्थान की ऑफिशल ईमेल आईडी पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- मामले का समाधान 5 से 50 कार्य दिवस (वर्किंग-डे) में हो जाता है। अगर समय पर समाधान नहीं होता है तो उस बैंक या वित्तीय संस्थान के नोडल ऑफिसर की ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज कराएं। नोडल अफसर का ईमेल आईडी बैंक या वित्तीय संस्थान की ऑफिशल वेबसाइट के Customer Care या Contact Us में होता है। बैंक या वित्तीय संस्था के नोडल अफसर की जगह रिजर्व बैंक के ऑम्बुड्मैन को भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट cms.rbi.org.in पर जाएं।
- UIDAI भारत सरकार की वह संस्था है जो आधार कार्ड जारी करती है। इसकी ऑफिशल वेबसाइट uidai.gov.in पर जाएं। ऊपर नीले रंग की स्ट्रिप में लिखे Contact & Support में जाकर Grievance Redressal Mechanism सेक्शन में लिखे File a Complaint पर क्लिक करें। जरूरी जानकारी दें और अपनी शिकायत लिखकर Submit पर क्लिक कर दें।

...तो जिम्मेदारी बैंक या वित्तीय संस्था की होगी
अकाउंट खोलने को लेकर बैंक या वित्तीय संस्था की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि अकाउंट खोलने के लिए जो डॉक्यूमेंट्स दिए गए हैं, वे सही व्यक्ति ने दिए हैं। इसके लिए बैंक आधार का बायोमैट्रिक तरीके से सत्यापन भी कर सकता है। वहीं अगर लोन दिया जा रहा है तो इसमें भी बैंक या वित्तीय संस्था की जिम्मेदारी है।
अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्था में आपके आधार कार्ड समेत दूसरे डॉक्यूमेंट्स के जरिए फर्जी तरीके से अकाउंट खोलकर लोन ले लिया जाता है या आपके अकाउंट से रकम उड़ा दी जाती है तो इसमें पूरी गलती उस बैंक या वित्तीय संस्था की होगी। शख्स को चाहिए कि वह इस मामले की शिकायत दर्ज कराए। ऐसे में उस रकम की भरपाई वह बैंक या वित्तीय संस्था करेगा।

ये बातें ध्यान रखकर भी बच सकते हैं फ्रॉड से
- ध्यान रखें कि अगर कोई आपको कॉल करके कहे कि केवाईसी या ई-केवाईसी या किसी भी दूसरी चीज के लिए आपका आधार नंबर मांगे तो बिलकुल न दें। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था जैसे पेटीएम, गूगल पे, फोन पे आदि आपसे ऐसी जानकारी कॉल पर नहीं मांग सकती।
- अपना आधार कार्ड संभालकर रखें और किसी को भी न दें।

अगर आपका आधार कार्ड चोरी या गुम हो जाए तो...
अगर आपका आधार कार्ड चोरी हो जाए या गुम हो जाए और वह किसी गलत हाथ में लग जाए तो इससे आप साइबर अपराध का शिकार हो सकते हैं यानी आपके अकाउंट से रकम उड़ाई जा सकती है। आधार कार्ड चोरी या गुम होने पर सबसे पहले किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाएं और शिकायत दर्ज कराएं। इसकी एक कॉपी अपने पास रख लें। यह भविष्य में किसी तरह की परेशानी होने पर सबूत की तरह काम आएगा। अब आप नए आधार कार्ड के लिए नजदीकी आधार सेवा केंद्र में जाकर अप्लाई कर सकते हैं। अगर किसी काम के लिए तुरंत आधार कार्ड की जरूरत पड़े तो ऑफिशल वेबसाइट uidai.gov.in पर जाकर आधार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

                          KYC

★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

KYC: फर्ज को हां, फर्जी को ना

अगर आप बैंक या बैंक/फाइनैंस से जुड़ी कंपनी या संस्था के जरिए कोई लेन-देन करते हैं तो आपने KYC का नाम जरूर सुना होगा। KYC का इस्तेमाल ग्राहक की पहचान और उसके पते की सही और पूरी जानकारी लेने के लिए किया जाता है। KYC के बारे में एक्सपर्ट्स से बात करके जानकारी दे रहे हैं राजेश भारती

जब भी आप किसी बैंक में अकाउंट खुलवाते हैं, एफडी करवाते हैं, कोई बीमा लेते हैं या म्यूचुअल फंड खरीदते हैं तो वह बैंक या वित्तीय संस्था आपसे KYC फॉर्म भरवाती है। KYC का मतलब है Know Your Customer है यानी अपने उपभोक्ता को जानें। इसके जरिए बैंकिंग कंपनी अपने ग्राहक की पहचान की पुष्टि करती है जिससे कोई शख्स नकली पहचान और नकली पते की सहायता से अकांउट न खोल सके। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंकों के लिए ग्राहकों से केवाईसी भरवाना जरूरी किया गया है।

कहां होती है जरूरत
वह बैंक या वित्तीय संस्था जहां से आप पैसों का लेन-देन करते हैं, वहां KYC की जरूरत पड़ती है। जैसे:
- बैंक में अकाउंट या म्यूचुअल फंड अकाउंट खुलवाने में
- बैंक लॉकर्स
- सोने में निवेश
- क्रेडिट कार्ड या लोन लेने में
- डीमैट अकाउंट खुलवाने
- इंश्योरेंस लेने में
- एफडी करवाने में
- सरकार की स्कीम का लाभ लेने में
- पेमंट वॉलेट जैसे Paytm, Mobikwik, Phone Pe आदि का इस्तेमाल करने में
- अगर आप नॉमिनी है तो खाताधारक की रकम लेने में या किसी क्लेम की रकम लेने में
- सिम कार्ड या गैस कनेक्शन आदि लेने में भी जरूरी

क्यों है जरूरी
- KYC के जरिए बैंक या वित्तीय संस्थान ग्राहक के आवेदन और उसकी पहचान को तय करते हैं और इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं कि जो भी दस्तावेज दिए गए हैं वे असली हैं।
- ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें बदमाशा लोग जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक अकाउंट आदि खुलवा लेते हैं। भोले लोगों से पैसे उस अकाउंट में जमा करवा लेते हैं और फिर पैसे निकालकर गायब हो जाते हैं। अगर ग्राहक की KYC पूरी है तो धोखाधड़ी की आशंका न के बराबर रह जाती है।
- कई बार मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए भी पैसे का लेन-देन किया जाता है। ऐसे में KYC होने पर ग्राहक कितने पैसे का लेन-देन कर रहा है इसकी पूरी जानकारी रहती है।

कैसे होती है KYC
KYC कराने के लिए कुछ डॉक्युमेंट्स की जरूरत पड़ती है। इसके लिए ये डॉक्युमेंट्स काम आते हैं:
पहचानपत्र के रूप में (इनमें से कोई एक)
- आधार कार्ड
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- मतदाता पहचानपत्र
- पैनकार्ड या फॉर्म 60
- मनरेगा कार्ड
पते के लिए (इनमें से कोई एक)
- आधार कार्ड
- पासपोर्ट
- मनरेगा कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस
नोट: वित्तीय संस्थानों में पहचान के लिए पैन कार्ड या फॉर्म 60 जरूरी होता है। बाकी सर्टिफिकेट में से कोई एक काफी है।

मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी
बैंक या वित्तीय संस्था आपसे मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी भी मांगती है। बेहतर होगा कि आप वही नंबर दें जो आधार कार्ड से जुड़ा हो क्योंकि कई बार बैंक या वित्तीय कंपनियां आधार कार्ड डाउनलोड करवाती हैं और यह रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल के जरिए ही संभव है। साथ ही ऑनलाइन या किसी ऐप के माध्यम से पैसा भेजने या किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन के लिए OTP (One Time Password) की जरूरत होती है जिसे मोबाइल या ईमेल आईडी या दोनों पर भेजा जाता है।

पासपोर्ट साइज फोटो
KYC के लिए आपका पासपोर्ट साइज फोटो भी काफी जरूरी होता है। बैंकिंग या वित्तीय संस्था आपसे 1 या 2 फोटो मांग सकती है। हालांकि अब कई बार बैंककर्मी फोन में ही आपका फोटो खींच लेते हैं। ऐसे में फोटो ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

(नोट: बैंक या वित्तीय संस्थाएं आपके पहचान पत्र और पते से जुड़े डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी पर आपसे आपके साइन करवाकर यानी सेल्फ अटेस्टेड भी मांग सकती हैं।)

CKYC का भी है नियम
सरकार ने CKYC यानी सेंट्रल KYC का ऑप्शन भी दे रखा है। दरअसल इसका मकसद CKYC के माध्यम से सभी वित्तीय सेक्टरों की KYC को सिंगल विंडो में लाना है। एक बार CKYC कराने के बाद बार-बार KYC नहीं करानी पड़ती।
CKYC कराने के लिए एक फॉर्म भरना पड़ता है जिसे किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान से डाउनलोड किया जा सकता है। पूरी तरह भरकर और साइन करने के बाद यह फॉर्म सेल्फ अटेस्टेड कागजात के साथ एक फोटो लगाकर उसी बैंक या वित्तीय संस्थान में जमा कराना होता है। एक बार फॉर्म जमा करने के बाद सारी जानकारी को वेरिफाई किया जाता है और एक यूनिक KIN (केवाईसी आइडेंटिफिकेशन नंबर) जनरेट किया जाता है। यह ग्राहक को मेसेज या इमेल के जरिए बताया जाता है। अब जहां भी KYC की जरूरत पड़ती है वहां KIN दिया जा सकता है। हालांकि KIN को अभी कुछ ही बैंक या वित्तीय संस्था अपना रहे हैं।

अगर KYC नहीं तो...
बैंक और वित्तीय संस्थान से जुड़े किसी भी ग्राहक के लिए KYC करानी जरूरी है। KYC न होने की स्थिति में वह बैंक या वित्तीय संस्था उस ग्राहक को मेसेज और ईमेल भेजता है। इसमें ग्राहक को बताया जाता है कि वह निश्चित समय में KYC पूरी करा लें। यह निश्चित समय एक हफ्ता या इससे ज्यादा भी हो सकता है। निश्चित समय में KYC न कराने पर बैंक या वित्तीय संस्थान उस ग्राहक के अकाउंट पर अस्थायी बैन लगा देता है और अकाउंट से जुड़े सारे लेन-देन रोक देता है। हालांकि बाद में KYC कराने पर अकाउंट को फिर से ऐक्टिव कर दिया जाता है। अस्थायी बैन 6 महीने तक रहता है। अगर ग्राहक 6 महीने में KYC नहीं कराता है तो उस अकाउंट को डिऐक्टिवेट यानी बंद कर दिया जाता है।

e-KYC से भी बन सकता है काम
जरूरी नहीं कि आपको आपको KYC कराने के लिए बैंक या वित्तीय संस्था के ऑफिस में जाना पड़े और वहां डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी जमा करानी पड़े। आज काफी बैंक और वित्तीय संस्थाएं ऑनलाइन डिजिटल तरीके से KYC कर रहे हैं। यही प्रक्रिया e-KYC कहलाती है।

दो तरह से होती है e-KYC
1. आधार के जरिए: आधार के जरिए e-KYC इन दो तरीकों से की जाती है:

OTP e-KYC: इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करके घर बैठे e-KYC कराई जा सकती है। आप जिस बैंक या वित्तीय संस्थान के लिए अपनी पहचान प्रमाणित करना चाह रहे हैं, उसे अपना आधार नंबर देना होता है। फिर आपके मोबाइल पर OTP आता है। ध्यान रहे, यह OTP उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है जो आपके आधार कार्ड से जुड़ा होता है। जैसे ही आप OTP को तय जगह पर टाइप करते हैं, आपकी पहचान का सत्यापन पूरा हो जाता है।

बायोमीट्रिक तरीके से: बायोमीट्रिक तरीके से KYC कराने के लिए आपको बैंक, वित्तीय संस्था आदि में मौजूद रहना होगा। जब भी हम बायोमीट्रिक डिवाइस पर अपना अंगूठा या कोई उंगली लगाते हैं तो आधार कार्ड पर लिखी हमारी पूरी जानकारी सामने आ जाती है। इसी के आधार पर पूरी जानकारी को वेरिफाई कर लिया जाता है।

2. विडियो के जरिए: विडियो के जरिए भी e-KYC की जाती है। इसे विडियो KYC भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में लोगों को KYC के लिए बैंक या दूसरे संस्थानों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बैंक या वित्तीय संस्था के अधिकारी विडियो कॉल के जरिए ग्राहक के पैन या आधार कार्ड की पहचान करते हैं। विडियो कॉल का विकल्प संबंधित बैंक या संस्था के डोमेन (वेबसाइट) पर ही मिलता है।

e-KYC के फायदे
- डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी पर साइन नहीं करने पड़ते।
- e-KYC के दौरान फॉर्म में नाम, पता, जन्मतिथि आदि जैसी सारी जानकारी अपनेआप भर जाती है।
- डॉक्युमेंट्स गलत हाथों में नहीं जाते। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें किसी ओर के डॉक्युमेंट्स पर कोई ओर फायदा उठाता रहा है। e-KYC से ऐसी जानकारी होने की गुंजाइश नहीं रहती।

पेमंट वॉलेट के लिए भी अलग हैं नियम
पेमंट वॉलेट कंपनी जैसे Paytm, Mobikwik, Phone Pe आदि के लिए KYC के नियम कुछ अलग हैं। अगर हम Paytm का उदाहरण लें तो Paytm ऐप के जरिए लेनदेन के लिए e-KYC कराना जरूरी है। Paytm पर KYC इस प्रकार होती है:

मिनी KYC
इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं। इसे आप खुद अपने मोबाइल पर इसका ऐप खोलकर कर सकते हैं। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:
- Paytm ऐप डाउनलोड करने के बाद पहली बार में मिनी KYC करानी पड़ती है।
- इसके लिए पासपोर्ट, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या NREGA जॉब कार्ड के नंबर की जरूरत पड़ती है।
- मिनी KYC पूरी होने के बाद आप Paytm वॉलेट में हर महीने 10 हजार रुपये तक डाल सकते हैं।
- इस दौरान आप सिर्फ किसी दुकानदार को पेमंट और किसी ऐप या वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन पेमंट कर सकते हैं।  
- यह KYC सिर्फ 18 महीने तक ही वैलिड रहती है।

फुल KYC
- मिनी KYC के बाद फुल KYC कराना जरूरी है। हर महीने 10 हजार रुपये से ज्यादा ट्रांजेक्शनके लिए फुल KYC कराना जरूरी होता है।
- इसके लिए नजदीकी Paytm सेंटर या आउटलेट पर पैन कार्ड और आधार लेकर जाना पड़ता है। वहां पर फुल e-KYC कर दी जाती है। नजदीकी Paytm सेंटर या आउटलेट की जानकारी गूगल से ले सकते हैं।
- इसके बाद आप महीने में 1 लाख रुपये तक का लेन-देन कर सकते हैं। अगर आप फुल KYC के लिए आधार कार्ड लेकर नहीं जाना चाहते तो पैन कार्ड के साथ ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट या वोटर आईडी कार्ड या NREGA जॉब कार्ड लेकर जा सकते हैं।

बैंक में ये हैं KYC के नियम
बैंक में KYC के नियम इस तरह हैं:
1. रिस्क कैटगरी के अनुसार
रिजर्व बैंक ने बैंक कस्टमर के लिए रिस्क कैटिगरी तैयार की है, जिसके आधार पर बैंक अपने ग्राहक से फिर से KYC कराने के लिए कह सकता है। रिस्क कैटगरी तीन तरह की होती हैं: कम, मध्य और अधिक। इन रिस्क कैटगरी में बैंक अपने ग्राहकों (कोई शख्स, कंपनी, संस्था आदि) को रखते हैं। कोई भी बैंक अपने ग्राहक को यह नहीं बताता कि उसे कौन-सी रिस्क कैटगरी में रखा गया है। रिस्क कैटगरी का पता पैन कार्ड से चल जाता है। इन कैटगरी को ऐसे समझें:
लो रिस्क कैटगरी: इस कैटगरी में उन ग्राहकों को रखा जाता है जिनका पैसों के लेन-देन का रिकॉर्ड बहुत अच्छा होता है। इस कैटगरी के ग्राहकों से हर 10 साल में KYC कराई जाती है।
मीडियम रिस्क कैटगरी: इस कैटगरी में वे ग्राहक आते हैं जिनके लेन-देन का रिकॉर्ड न तो बहुत अच्छा है और न ही बहुत खराब। इस कैटगरी के ग्राहकों को हर 8 साल में KYC करानी पड़ती है।
हाई रिस्क कैटगरी: जिन ग्राहकों के पैसों के लेन-देन का रिकॉर्ड बहुत खराब होता है, उन्हें हाई रिस्क कैटगरी में रखा जाता है। ऐसे ग्राहकों से बैंक हर 2 साल में KYC कराने के लिए कह सकता है।

2. ट्रांजेक्शन के आधार पर
अगर कोई शख्स अकाउंट में 3 महीने तक कोई ट्रांजेक्शन नहीं करता है तो उसका अकाउंट अस्थायी रूप से डिऐक्टिवेट यानी बंद कर दिया जाता है। ऐसे में अकाउंट को फिर से ऐक्टिव कराने के लिए उसे KYC करानी पड़ती है। हालांकि कुछ बैंकों में यह समय सीमा 24 महीने है।
यह कारण भी है फिर से KYC कराने का
कई बार बैंक इसलिए भी ग्राहक से फिर KYC कराने के लिए कह सकता है क्योंकि जॉब करने वाले अधिकतर लोग जॉब के सिलसिले में शहर या मकान बदल लेते हैं। ऐसे में बैंक के पास नया पता नहीं होता। इसलिए दो-तीन साल बाद बैंक फिर से KYC करवाता है।

दुरुपयोग से बचने के लिए डॉक्युमेंट पर साइन करने के बाद उसके नीचे तारीख और उद्देश्य जरूर लिखें

अगर आप किसी किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के ग्राहक हैं तो फिजिकल (डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी देना) या e-KYC के दौरान बहुत सारी बातों का ध्यान रखा जरूरी है।

जब दें दस्तावेज की फोटोकॉपी
फिजिकल KYC में आपको डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी देनी पड़ती है। फोटोकॉपी पर साइन भी करने पड़ते हैं। इस दौरान ध्यान रखें कि डॉक्युमेंट पर साइन के नीचे तारीख और साइन करने का मकसद लिख देना चाहिए। ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि आपके ये डॉक्युमेंट किसी गलत हाथों में न जाएं या आपके साथ कोई धोखाधड़ी न कर पाए।

मान लीजिए आपका नाम ABC है और किसी बैंक XYZ में आपको सेविंग्स अकाउंट खुलवाना है। इस बैंक में आपको अकाउंट खुलवाने के लिए डॉक्युमेंट्स की फोटोकॉपी बैंक को देनी पड़ेगी। ऐसे में डॉक्युमेंट की फोटोकॉपी पर यह जरूर लिखें:
ABC (आपके साइन)
मकसद: बैंक XYZ में सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए
तारीख: 00/00/00
(ये बातें आप इंग्लिश में भी लिख सकते हैं, जैसा बराबर फोटो में लिखा है।)

जब भेजने हों दस्तावेज के फोटो
अगर आप CA या किसी और शख्स को वॉट्सऐप या ईमेल आदि के जरिए डॉक्युमेंट की फोटो भेज रहे हैं तो भी उस पर मकसद और तारीख जरूरी लिखें। इसके 2 तरीके हैं:
पहला तरीका: डॉक्युमेंट का फोटो खींचें और फोटो एडिट में जाकर उस पर मकसद व तारीख टाइप करे भेज दें, जैसा लेफ्ट में फोटो में दिखाया गया है।
दूसरा तरीका: डॉक्युमेंट की फोटोकॉपी पर साइन करें। फिर मकसद और तारीख लिखें। इसके बाद उस फोटोकॉपी की फोटो खींचें और जिसे भेजना चाहते हैं, भेज दें, जैसा दस्तावेज की फोटोकॉपी में बताया गया है।

e-KYC के दौरान
e-KYC कराने के दौरान भी आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से कोई एम्प्लॉई आपके घर या ऑफिस e-KYC करने के लिए आ रहा है तो आप उससे उसकी कंपनी का आईडी मांग कर उसे देख सकते हैं। साथ ही बायोमीट्रिक आइडेंटिफिशेन (मशीन पर अंगूठा लगवाना आदि) के दौरान इस बात को भी जांच लें कि उस एम्प्लॉई के पास क्या उसी कंपनी का सॉफ्टवेयर है, जिसके लिए आपने e-KYC की रिक्वेस्ट डाली थी। अगर आप इन बातों की अनदेखी करते हैं तो हो सकता है कि कोई जालसाज किसी दूसरी सुविधा के लिए आपसे बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन ले रहा हो। अगर ऐसा होता है तो यह बात आपको बाद में परेशानी में डाल सकती है।

धोखाधड़ी से बचें, नहीं तो खाली हो जाएगा अकाउंट
KYC के नाम पर आजकल बहुत सारे फ्रॉड हो रहे हैं। जालसाज ऐसे में बैंकों या Paytm जैसी पेमंट वॉलेट कंपनी के ग्राहक को कॉल करके खुद को बैंक का एम्प्लॉई या वॉलेट कंपनी की कस्टमर केयर टीम का सदस्य बताते हैं। वे ग्राहक से कहते हैं कि उनकी KYC पूरी न होने के कारण अकाउंट या वॉलेट बंद हो जाएगा। ऐसा कहकर वे ग्राहकों को डराते हैं। वे KYC ऐक्टिव कराने और सर्विस जारी रखने के नाम पर उनसे ATM या क्रेडिट कार्ड की जानकारी ले लेते हैं या एक लिंक भेजकर उसके जरिए मोबाइल में ग्राहक से ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं। ऐसा करके जालसाज अकाउंट हैक कर लेते हैं और उसमें से रकम उड़ा देते हैं। इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- कोई भी बैंक या वॉलेट कंपनी ग्राहक को कभी भी कॉल करके उसकी KYC की जानकारी नहीं मांगती। अगर ऐसी कोई कॉल आए तो उसकी अनदेखी करें।
- KYC पूरी कराने से जुड़ा अगर कोई मेसेज आया है तो देख लें कि क्या वह उसी बैंक या वॉलेट कंपनी के नंबर से आया है जिससे आपको उस बैंक या वॉलेट से जुड़े दूसरे मेसेज मिलते हैं। अगर नहीं है तो ऐसे मेसेज को इग्नोर कर दें।
- अगर कोई KYC से जुड़ी ऐप इंस्टॉल कराने को कहता है तो ऐसा बिलकुल भी न करें।
- कोई भी OTP या कोड किसी दूसरे शख्स को न बताएं। OTP हमेशा आपके खुद के इस्तेमाल के लिए होता है।
- किसी भी बैंक या वॉलेट कंपनी का फोन नंबर गूगल पर सर्च करने के बजाय हमेशा ऑफिशल वेबसाइट से लें। 

ऑफिशल वेबसाइट के नाम के आगे हमेशा https:// लिखा होता है। अगर https की जगह http है तो वह वेबसाइट सुरक्षित नहीं मानी जाती। साथ ही https:// से पहले एक बंद ताले का लोगो और उसके आगे Secure लिखा होता है।

...तो आपकी मानी जाएगी गलती
कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जब जालसाज धोखाधड़ी करके अकाउंट से रकम उड़ा देते हैं। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज की जाती है। बाद में बैंक मामले की जांच करता है। अगर जांच में पाया जाता है कि ग्राहक ने जानबूझकर गलती नहीं की बल्कि गड़बड़ी सिस्टम की कमी से हुई है तो बैंक या वित्तीय संस्थान की जिम्मेदारी बनती है कि वह ग्राहक के नुकसान की भरपाई करे। वहीं अगर ग्राहक खुद गलती करता है तो उसके नुकसान की जिम्मेदारी बैंक या वित्तीय संस्था की नहीं होती। 
इन मामलों में ग्राहक की गलती मानी जाती है:
- किसी भी प्रकार का ऐप डाउनलोड करने पर
- कोई OTP बताने या ट्रांजेक्शन से जुड़ा मेसेज फॉरवर्ड करने पर
- फोन पर किसी को आधार या पैन नंबर या अकाउंट से जुड़ी जानकारी देने पर
- अपना ATM या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल के लिए किसी और शख्स को देने पर
- बैंकिंग या वित्तीय संस्थान से जुड़ी ऐप का पासवर्ड किसी और शख्स को बताने पर।

यहां और ऐसे करें शिकायत
अगर आपके डॉक्यूमेंट्स से किसी ने फर्जी तरीके से कोई अकाउंट खोल लिया है या लेन-देन किया है तो आप इसकी शिकायत करा सकते हैं। इसकी शिकायत इस प्रकार करें:
- सबसे पहले आपको साबित करना होगा कि आपके डॉक्युमेंट्स फर्जी तरीके से किसी दूसरे शख्स ने इस्तेमाल करके अकाउंट खोला है या पैसों का लेन-देन किया है। यह बात आप अपने साइन या लेन-देन से जुड़े ट्रांजेक्शन के जरिए भी साबित कर सकते हैं।
- अब अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस दौरान वे सबूत भी पेश करें जिनके जरिए आपको धोखाधड़ी का पता चला है। जैसे मेसेज, ई-मेल या बैंकिंग या वित्तीय संस्था की ओर से मिला कोई लेटर।
- शिकायत वाली कॉपी की फोटोकॉपी कराएं। इसे लेकर अपने नजदीक की उस बैंक या वित्तीय संस्था की ब्रांच में जाएं जिस बैंक या वित्तीय संस्था में फ्रॉड हुआ है। वहां जाकर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत दर्ज कराने के बाद बैंक या वित्तीय संस्था से रिसिविंग स्लिप जरूर ले लें। अगर आप ब्रांच नहीं जाना चाहते तो उस बैंक या वित्तीय संस्थान की ऑफिशल ईमेल आईडी पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऑफिशल ईमेल आईडी बैंक या वित्तीय संस्था की ऑफिशल वेबसाइट के Customer Care या Contact Us के ऑप्शन दी गई होती है।
- मामले का समाधान 5 से 50 कार्य दिवस (वर्किंग-डे) में कर दिया जाता है। अगर 50 दिनों में समस्या का समाधान नहीं होता है तो उस बैंक या वित्तीय संस्थान के नोडल ऑफिसर की ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज कराएं। नोडल अफसर का ईमेल आईडी बैंक या वित्तीय संस्थान की ऑफिशल वेबसाइट के Customer Care या Contact Us के ऑप्शन दिया गया होता है। नोडल ऑफिसर से शिकायत करने के दौरान फ्रॉड का सबूत, पुलिस में दर्ज शिकायत की कॉपी और बैंक या वित्तीय संस्था में की गई शिकायत की रिसिविंग कॉपी ईमेल में जरूर अटैच करें।
- आप चाहें तो बैंक या वित्तीय संस्था के नोडल अफसर की जगह रिजर्व बैंक के ऑम्बुड्मैन के पास भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट cms.rbi.org.in पर जाएं। यहां आपको शिकायत दर्ज करने से संबंधित पूरी जानकारी भी दी गई है।


★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

                          PAN 

★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*★*

PAN हमारा, LOAN तुम्हारा
नहीं चलेगा, नहीं चलेगा

PAN कार्ड हर शख्स का एक जरूरी और गोपनीय डॉक्यूमेंट होता है। इसके गलत इस्तेमाल से न केवल आप आर्थिक संकट में फंस सकते हैं बल्कि आपके सिबिल स्कोर पर भी असर पड़ सकता है। हाल ही में ऐक्टर राजकुमार राव और सनी लियाेनी के साथ ऐसा हो चुका है। पैन कार्ड का मिसयूज कैसे रोकें, बता रहे हैं हैं राजेश भारती

ऐसे होता है फर्जीवाड़ा
इन दिनों लोन देने वाले मोबाइल ऐप की बाढ़ आई हुई है। इनमें ऐसे बहुत सारे ऐप हैं जो कुछ ही मिनटों में 5 लाख रुपये तक का लोन दे देते हैं। वहीं ऐसे भी मोबाइल ऐप हैं जो सिर्फ पैन नंबर और मोबाइल नंबर के आधार पर छोटा-मोटा (5 हजार रुपये तक) लोन दे देते हैं। इसी का फायदा उठाकर जालसाज किसी दूसरे शख्स के पैन कार्ड के जरिए लोन ले लेते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इस बारे में उस शख्स को पता भी नहीं चलता जिसके पैन कार्ड पर लोन लिया गया है। ऐसे में वह शख्स कर्जदार बन जाता है।

चेक करें, किसने और कितना लिया है लोन
समय-समय पर अपना पैन कार्ड पैन कार्ड नंबर से जुड़ा रेकॉर्ड चेक करते रहें ताकि आपके पैन कार्ड के गलत इस्तेमाल के बारे में पता चल सके। सबसे अच्छा तरीका है कि आप पैन का सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर) और क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें। इससे पता चल जाता है कि किसने और कितना लोन लिया है। क्रेडिट स्कोर तीन अंकों की एक संख्या होती है जो 300 से 900 के बीच होती है। यह संख्या जितनी ज्यादा होगी, क्रेडिट स्कोर उतना ही अच्छा माना जाएगा। वहीं बैंक से किसी भी तरह के लोन के लेन-देन और क्रेडिट कार्ड के पेमेंट से जुड़े रेकॉर्ड की रिपोर्ट क्रेडिट रिपोर्ट कहलाती है।

फ्री में ऐसे चेक करें अपना क्रेडिट स्कोर, क्रेडिट रिपोर्ट
- सबसे पहले CIBIL की आधिकारिक वेबसाइट cibil.com पर जाएं।
- पेज पर थोड़ा नीचे की ओर आपको Self Service नाम का ऑप्शन दिखाई देगा। इसमें To get your Free Annual CIBIL Score & Report लिखा दिखाई देगा और इसके आगे लिखे click here पर क्लिक करें।
- इसके बाद एक पेज खुल जाएगा। यहां अपनी जानकारी जैसे- ईमेल एड्रेस, नाम, आईडी (पैन नंबर), जन्मतिथि, फोन नंबर आदि भरनी होगी और इसके बाद नीचे नारंगी रंग के बॉक्स में लिखे ACCEPT & CONTINUE पर क्लिक कर दें।
- इसके बाद आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा। इसे भरें और जहां OTP भरेंगे, उसके ठीक नीचे नारंगी बॉक्स में लिखे CONTINUE पर क्लिक करें। इसके बाद आपसे पूछा जाएगा कि क्या आप अपनी डिवाइस को पेयर करना चाहते हैं। अगर आप अपना पर्सनल कंप्यूटर या स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं तो Yes पर क्लिक कर दें। अगर इंटरनेट कैफे आदि का कंप्यूटर इस्तेमाल कर रहे हैं तो No पर क्लिक करके नीचे नारंगी बॉक्स में लिखे CONTINUE पर क्लिक कर दें।
- अब आपके सामने आपका सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट आ जाएगी। क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें और देखें कि उसमें उन्हीं क्रेडिट कार्ड और लोन की जानकारी है जो आपने लिए हैं। अगर कुछ गड़बड़ है तो इसकी शिकायत करें।
- मान लीजिए कि आपके नाम पर किसी ने लोन ले रखा है और लोन को चुकाया नहीं गया है तो ऐसे में आपका क्रेडिट स्कोर खराब होगा। क्रेडिट स्कोर खराब होने पर आपको आगे कोई लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में दिक्कत आती है।
नोट: cibil.com पर आप अपना क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट सीमित समय के लिए ही देख सकते हैं। अगर आपको हर दिन क्रेडिट स्कोर देखना है तो आपको इसके लिए महीने के कम से कम 550 रुपये देने होंगे। cibil.com के अलावा कुछ और प्लैटफॉर्म जैसे Paytm, Paisabazaar, Bankbazaar, Bajajfinserv, Experian आदि भी फ्री में क्रेडिट स्कोर बता देती हैं, लेकिन इन ज्यादातर वेबसाइट्स पर आपकी दी हुई निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहती। बाद में कई बैंकों या दूसरे वित्तीय संस्थानों की ओर से आपको फोन आने शुरू हो जाते हैं।

आपके पैन कार्ड पर कोई लोन ले ले तो घबराएं नहीं, यहां करें शिकायत
1. बैंक या वित्तीय संस्था में शिकायत
- जिस बैंक या वित्तीय संस्था (जैसे बजाज, मुथूट फाइनेंस आदि) ने लोन या क्रेडिट कार्ड दिया है, उसे ईमेल के जरिए पूरी जानकारी दें। ईमेल में यह बात साफ-साफ लिखें कि आपके डॉक्यूमेंट पर किसी दूसरे ने गलत तरीके से लोन या क्रेडिट कार्ड लिया है और इस लोन या क्रेडिट कार्ड को बंद कर दिया जाए। जब बैंक उस लोन या क्रेडिट कार्ड को बंद कर देगा तो आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में उस लोन या क्रेडिट कार्ड के बाद Closed लिखा आएगा। ईमेल में क्रेडिट रिपोर्ट की कॉपी भी अटैच करें।
- अगर बैंक से 15 दिनों में कोई जवाब न आए तो आप उस बैंक या वित्तीय संस्था के नोडल ऑफिसर की मेल आईडी पर शिकायत दर्ज कराएं। नोडल ऑफिसर की मेल आईडी बैंक या वित्तीय संस्था की ऑफिशल वेबसाइट के Customer Care या Contact Us के ऑप्शन में होती है। शिकायत करने के दौरान आपके साथ हुए फ्रॉड का सबूत बैंक या वित्तीय संस्था में की गई शिकायत की ईमेल इस नई ईमेल में जरूर अटैच करें।
- आप चाहें तो बैंक या वित्तीय संस्था के नोडल ऑफिसर की जगह रिजर्व बैंक के ऑम्बुड्मैन में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट cms.rbi.org.in पर जाएं। यहां आपको शिकायत दर्ज करने से संबंधित जानकारी मिल जाएगी।

2. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में शिकायत
- इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ऑफिशल वेबसाइट eportal.incometax.gov.in पर जाएं।
- अगर आपने वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर रखा है तो वेबसाइट ID और पासवर्ड डालकर लॉइगन करें। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं किया है तो वेबसाइट खोलें और यहां सबसे ऊपर राइट साइड में नीले रंग के बॉक्स में लिखे Register पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें। रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया जानने के लिए facebook.com/SundayNBT पर जाएं। यहां आपको सबसे ऊपर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया मिल जाएगी। अगर न मिले तो फेसबुक में दिए सर्च ऑप्शन में #PANRegister टाइप करें।
- वेबसाइट को लॉगइन करने के बाद ऊपर नीले रंग की पट्टी में राइट साइड में लिखे Grievances पर जाएं। यहां आपको 2 ऑप्शन दिखाई देंगे। पहला Submit Grievance का और दूसरा View Grievance Status का। पहले ऑप्शन Submit Grievance पर क्लिक करें।
- एक नया पेज खुलेगा। यहां आपको कुछ जानकारी देनी होगी। सबसे पहले Search for your issue here के नीचे बने बॉक्स में आपको लिखना होगा कि आपके पैन का मिसयूज हुआ है।
- इसके बाद Please select the relevant Department में संबंधित डिपार्टमेंट का चयन करना होगा। यहां हमें कई ऑप्शन दिखाई देंगे। चूंकि हम शिकायत पैन कार्ड से संबंधित कर रहे हैं, ऐसे में हमें UTIITSL या NSDL में से किसी एक को चुनना होगा। दरअसल, हमारे पास जो पैन कार्ड है, उसे UTIITSL और NSDL नाम की दो कंपनियां बनाती हैं। आप अपने पैन कार्ड के पीछे का हिस्सा देखें। यहां एड्रेस में UTIITSL या NSDL में से कोई एक लिखा होगा। इनमें से जो भी लिखा है, आपका पैन कार्ड उसी कंपनी ने जारी किया है। मान लीजिए, आपके पैन कार्ड के पीछे NSDL लिखा है, तो आपको NSDL पर क्लिक करना होगा।
- इसके बाद नया पेज खुलेगा। यहां ऊपर कुछ ऑप्शन मिलेंगे, जिन्हें आपको सेलेक्ट करना है। Select Department में हम NSDL सेलेक्ट कर चुके हैं। इसलिए यहां NSDL लिखा दिखाई देगा। इसके बाद Select Category में Others सेलेक्ट कर लें। इसके बाद Select Sub-Category में भी Others सेलेक्ट कर लें। इसके बाद नीचे नीले रंग के बॉक्स में लिखे Continue पर क्लिक करें।
- अब आपको Grievance Description लिखा दिखेगा। इसके नीचे बने बॉक्स में अपनी समस्या लिखें। यहां लिखना होगा कि आपके पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसमें यह बात साफ-साफ लिखें कि आपके डॉक्यूमेंट पर किसी और ने गलत तरीके से लोन या क्रेडिट कार्ड लिया है। क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करके उसे नीचे की ओर लिखे Other documents के ठीक बराबर में लिखे Upload Attachment में जाकर अटैच करें। अब नीचे नीले रंग के बॉक्स में लिखे Submit Grievance पर क्लिक कर दें। आपकी शिकायत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को चली जाएगी।

डॉक्यूमेंट्स भेजते समय तारीख और उद्देश्य लिखें
अगर आपको किसी भी डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी देनी पड़े तो उस पर साइन करें और साइन करने के बाद साइन के ठीक नीचे तारीख और डॉक्यूमेंट्स देने का मकसद (Purpose) भी जरूर लिखें। ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि आपके ये डॉक्यूमेंट किसी गलत हाथों में न जाएं और इनका गलत इस्तेमाल न हो सके। मान लीजिए, आपका नाम ABC है और किसी बैंक XYZ से लोन लेना है। लोन लेने के दौरान आप जिन डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी बैंक को देंगे, उन डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी पर यह जरूर लिखें:
1. ABC (आपके साइन)  
2. तारीख: 00/00/00
3. उद्देश्य: बैंक XYZ से लोन लेने के लिए
(ये बातें आप इंग्लिश में भी लिख सकते हैं।)
नोट: कई जगह डॉक्यूमेंट्स पर साइन करना जरूरी नहीं होता। ऐसे में इन डॉक्यूमेंट्स के बीच में 2 क्रॉस लाइन डॉक्यूमेंट्स को काटते हुए खींचे और इनके बीच में पहले उद्देश्य और फिर तारीख लिख दें। अगर वाॅट्सऐप पर पैन शेयर करना हो तो सीधे उसका फोटो खींचकर न भेजें। पहले फोटाेकॉपी लें। उस पर ऊपर बताए गए तरीके से लिखें। फिर उसका फोटो शेयर करें या फिर पैन का फोटो खींचने के बाद एडिट में जाकर फोटो के बीच में 2 क्रॉस लाइन खींच लें और उस पर तारीख और उद्देश्य लिख दें। फिर उस फोटो को शेयर कर दें।

इसलिए जरूरी है PAN
पैन कार्ड इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जारी किया जाता है। सभी करदाता या दूसरे यूजर्स जिन्हें अपनी इनकम की जानकारी देनी होती है, उन्हें पैन कार्ड की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा फाइनैंशल लेन-देन में पैन अनिवार्य है। साथ ही GST आदि लेने में भी पैन देना होता है।
इन बातों का ध्यान रखें
- अपना पैन नंबर और आधार नंबर किसी अजनबी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए। साथ ही इनकी फोटो खींचकर भी किसी अजनबी के साथ शेयर न करें। इससे इसके गलत हाथों में जाकर मिसयूज होने की आशंका बनी रहती है।
- लोन या क्रेडिट कार्ड दिलवाने के नाम पर फोन करने वाले शख्स को भी पैन या आधार नंबर न भेजें। इन्हें इन डॉक्यूमेंट्स की फोटो खींचकर भी न भेजें।
- सोशल मीडिया पर पैन या किसी भी दूसरे डॉक्यूमेंट का फोटो कभी भी अपलोड न करें।


Comments

Popular posts from this blog

संपूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा।

कैसा दिखाई देता था शताब्दियों पहले दिल्ली शहर; अनदेखी तस्वीरों में देख लीजिये

पर काया प्रवेश