जीवन

जीवनयात्रीगण
कृपया ध्यान दें, अपने मन की संभाल खुद करें...

एक्सपर्ट
डॉ. समीर पारिख
सीनियर सायकायट्रिस्ट
कहावत तो यह है कि जब तक सांस है, तब तक आस है लेकिन इसके उलट यह भी सच है कि जब तक टेंशन है, तब तक ही जान है। वैसे भी कोरोना जाते हुए इस साल में लाखों लोगों को यह तनाव दिया है। इस धरती पर हर वह शख्स जो जिंदा है और जिसकी मानसिक सेहत ठीक है तो उसे कोई न कोई टेंशन जरूर है। डॉ. समीर पारिख से जानते हैं कि टेंशन को रोक नहीं सकते, लेकिन उसे खुद ही कैसे मैनेज कर सकते हैं?

साल 2021 के कैलेंडर का आखिरी पन्ना पलटने में सिर्फ 5 दिन ही बचे हैं। इस गुजरते हुए साल ने हमें और हमारे कई जानने वालों को कई तरह की चुनौतियां पेश की हैं। इन चुनौतियों की शुरुआत वैसे तो पिछले साल यानी 2020 में ही हो गई थी जब देश में कोरोना ने दस्तक दिया था, लेकिन इसका भयावह रूप इसी बरस अप्रैल से लेकर जून के महीने में आया। कई लोगों ने अपनों को खोया, कई लोगों को बीमारियों ने घेर लिया, कई लोगों के जॉब्स और बिजनेस ठप हुए। सच तो यह है कि लोग अब भी उस दौर को पूरी तरह भूल नहीं पाए हैं। लोग मानसिक रूप से परेशान हैं। अभी उस परेशानी का निदान मिला नहीं कि ओमिक्रॉन ने भी दस्तक दे दिया है।
सीधे कहें तो यह वक्त शारीरिक और मानसिक दोनों तहर की सेहत के लिए चुनौतीपूर्ण है। शारीरिक सेहत को दुरुस्त रखने के जतन हम अमूमन करते भी हैं, लेकिन मानसिक सेहत को भूल जाते हैं। मैंने यहां कोशिश की है इसी भूल को सुधारने की। मैंने यहां चेकलिस्ट बनाई है। यहां हर शख्स को खुद से सवाल करने का मौका दिया है, सवालों के द्वारा समझे कि वह कितना परेशान है? क्या उसकी परेशानी खुद से मैनेज करने के लायक है या फिर उसे डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

क्या होता है खुद से मेंटल हेल्थ मैनेज करना
- खुद से ऐसी ऐक्टिविटी करना जिससे हर दिन हमारी मानसिक सेहत चुस्त और दुरुस्त रहे।
- सेल्फ केअर की मदद से तनाव को कम करना ताकि शरीर और मस्तिष्क को फिर से ऊर्जावन होने के लिए वक्त मिले।
- सेल्फ केअर हमें ज्यादा प्रोडक्टिव बनाता है।

रोज जांचें
आज मुझे कैसा महसूस हो रहा है?

विकल्प
-खुश हूं, अच्छा महसूस कर रहा हूं
- ठीक-ठीक है, काम चल रहा है
- थका हुआ महसूस कर रहा हूं
- मैं निचुड़ा हुआ महसूस कर रहा हूं
-अंदर से टूट गया हूं। कोई भी काम ठीक से नहीं कर पा रहा। 

आपका जवाब किस रंग में है, उपाय उसी पर निर्भर करेगा। अगर... 
गहरा हरा रंग
आप ज़िंदगी सही तरीके से जी रहे हैं। इसी तरह 
जीते रहें।
हल्का हरा रंगअगर आपको कोई भी परेशानी है तो उसका हल 
जरूर खोजें।
 
पीला रंग
खुद का ध्यान रखने की जरूरत है। कुछ दिन छुट्टियों पर जाएं।
नारंगी रंगनजदीकी और दिल के करीब शख्स के पास जाएं और खुलकर बात करें।

लाल रंगकिसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें। इस स्थिति से निकलना जरूरी है।

 मन की अच्छी सेहत के 4 मजबूत आधार 
1. सही दिनचर्या
-अपने लिए वक्त निकालें, आराम करें, मन को शांत करें। इसके लिए किसी लंबी छुट्टी का इंतजार करना जरूरी नहीं। वक्त कम मिले तो ऐसी चीजें कर सकते हैं।
-हेल्दी रुटीन बनाएं। मॉर्निंग वॉक के साथ मेडिटेशन को शामिल करें। साथ ही अपना खानपान भी सही रखें। सेहतमंत खाने की वजह से तनाव से लड़ना मुमकिन है।
- माइंडफुलनेस ऐक्टिविटी में खुद को जरूर शामिल करें। ऐसी ऐक्टिविटीज जिसमें सिर्फ आप हों, आप की मौजूदगी हो। सीधे कहें तो 'मी टाइम' पर ही काम करें। 

2.  पर्याप्त नींद
-रोज समय पर सोने की कोशिश करें। इसके लिए सही समय 9 से 11 बजे रात के बीच का होना बेहतर है।
-सोने से पहले अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें या दिमाग को शांत करने वाला संगीत सुनें जैसे भारतीय शास्त्रीय संगीत।
-सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप आदि सब कुछ बंद कर दें। सोने से पहले 15 से 20 मिनट स्क्रीन देखने की वजह से कई बार 2 से 3 घंटे तक खराब हो जाते हैं। 
-चाय और काफी (कैफीन) का सेवन कम से कम करें। खासकर शाम के बाद तो बिलकुल न करें। इससे नींद में खलल पड़ता है। 

3. मनोरंजन
कला: खुद को व्यक्त करने का बेहतरीन माध्यम है कला। चाहे वह डांस हो, पेटिंग्स हो या फिर कुछ और। इसलिए कला जरूर अपनाएं।
स्पोर्ट्स: जब भी मुमकिन हो आउटडोर गेम्स खेलें। वहीं इनडोर गेम्स भी मन को रिलैक्स करते हैं। 
गार्डनिंग: हरे-भरे पौधे नई ऊर्जा देते हैं। इनके साथ समय गुजारने से न केवल तनाव कम होता है बल्कि सेहत भी ठीक रहती है। 
म्यूजिक: दिमाग को रिलैक्स करने में म्यूजिक बेहतरीन है। मोबाइल में ऐसे गाने रखें जो आपके मूड को रिलैक्स करते हों।
पेट्स के साथ समय बिताएं: पेट्स के साथ समय बिताएं यानी उसके साथ खेलें या घूमने जाएं। ऐसे करने से तनाव दूर होता है।

4. अपनों के साथ बातें 
खुशी का सही अर्थ तभी मिलता है जब उसे अपनों के बीच बांटा जाए। 
जिनसे बात करने में आपको अच्छा लगे और आपसे बात करके जिन्हें सुकून मिले, उनसे जरूर बात करें। सच तो यह है कि ऐसे लोगों को कभी खोना नहीं चाहिए। इनसे हर दिन मुमकिन न हो तो हर दूसरे या तीसरे दिन बात करें। उनसे अच्छी बातें शेयर करके आप भी खुश हों और उन्हें भी खुश होने का मौका दें। अगर एक छोटी-सी खुशी बारी-बारी से 10 अजीज लोगों के साथ शेयर की जाए तो 10 बार ज्यादा खुश होने और मुस्कुराने का मौका मिलेगा। इसी तरह जब उनकी बातों को सुनेंगे, उनकी पॉजिटिव बातों से खुश होंगे और दुख में साथ दिखेंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा।

खुद जांचें: 
जब आप तनाव में होते हैं तो इनमें से आप क्या करते हैं, टिक लगाएं
 
सही तरीके
-मैं प्राणायाम करता हूं।
-मैं कसरत करता हूं।
-मैं संगीत सुनता हूं।
-मनबहलाव के लिए किताब पढ़ता हूं। 
-मैं अपनी पसंद के लोगों के साथ संपर्क में जरूर रहता हूं। 
-मैं अपनी हॉबीज जैसे संगीत सुनना, पेटिंग्स या कुकिंग आदि में लग जाता हूं।
-मैं बैलंस्ड डाइट ही लेता हूं।
-मैं हालात का सामना करता हूं। 
-जरूरत पड़ने पर मदद लेने से भी पीछे नहीं हटता।
-जरूरत पड़ने पर मदद लेने से भी पीछे नहीं हटता।
-किसी की गलती या भूल को मैं आसानी से माफ कर देता हूं।
-मैं अच्छे अनुभवों को बढ़ाने की कोशिश करता हूं।
-मैं दूर भविष्य की टेंशन न लेकर आज के दिन पर ही फोकस करता हूं।
-जो कुछ मेरे पास है, उसके लिए शुक्रगुजार रहता हूं।
-हंसी-मजाक करता हूं।
-हर वक्त वर्तमान में जीने की कोशिश करता हूं।
-मैं अमूमन योजना बनाकर काम करता हूं।

गलत तरीके
-मैं तनाव भगाने के लिए शराब का सहारा लेता हूं। 
-सिगरेट पीता हूं।
-मैं गुजरी हुई बातों पर देर तक सोचता रहता हूं। 
-मैं अपने हिसाब से न होने वाली चीजों की शिकायत करता हूं। 
-अपने दोस्तों और रिश्तेदारों, सबसे कट जाता हूं।
-अपनी भावनाएं भीतर ही रखकर अंदर ही अंदर कुढ़ता रहता हूं। 
-मैं ज्यादा बात नहीं करता।
-मैं उल्टा-पुल्टा जंक फूड खाना शुरू कर देता हूं।
-मैं प्रतिकूल स्थिति से बचने की कोशिश करता हूं।
-मैं हमेशा ही दूसरों से खुद की तुलना करता हूं।
-मैं किसी से मदद और सलाह नहीं मांगता।
-मैं दूसरों की गलती को पकड़ कर रखता हूं।
-मैं अक्सर गुस्सा हो जाता हूं और गलत-शलत बोल जाता हूं। बढ़ाता जाता हूं। 
-मैं अक्सर गुस्सा हो जाता हूं और गलत-शलत बोल जाता हूं।
-मैं आसानी से चिढ़ जाता हूं और जल्द ही नाराज भी हो जाता हूं। 
-मैं अक्सर गुस्सा हो जाता हूं और गलत-शलत बोल जाता हूं।
-मैं भविष्य में हो सकने वाली बातों को लेकर अक्सर परेशान रहता हूं।

अब स्कोर गिनें
यह देखें कि जो तनाव से निपटने के हमारे जो गलत तरीके हैं, उन्हें किस तरह सही तरीकों में बदला जाए।

सही का स्कोर

गलत का स्कोर

मानसिक सेहत की ABCD...

Awareness
अपनी इच्छाओं, भावनाओं और बर्ताव पर फोकस करें। सेल्फचेक को रोज करें। इसे हर दिन के रुटीन में शामिल कर लें। ताकि परेशानियों की पहचान सही वक्त पर हो और फिर उसका सही हल खोजा जा सके।   
 
Balance
ज़िंदगी में हर चीज का बैलेंस होना चाहिए। इसे भी समझना जरूरी है कि हर किसी की ज़िंदगी का कोई मतलब होना चाहिए और ज़िंदगी को सिर्फ जिया न जाए, इसे एंजॉय भी किया जाए। जैसे ऑफिस के काम को घर पर और घर के काम को ऑफिस में नहीं ले जाना चाहिए। हालांकि लॉकडाउन के दौरान यह मुश्किल जरूर था, लेकिन ऐसे लोग भी कम नहीं थे, जिन्होंने घर में रहकर ऑफिस भी चलाया और घर व ऑफिस को अलग-अलग रखा।

Connection
अगर सही चीजों से कनेक्शन बना रहेगा, अच्छी आदतों से अपना कनेक्शन नहीं तोड़ेंगे तो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत सही रहेगी। ऐसे लोगों के संपर्क में जरूर रहें जिनसे आप प्यार करते हैं और जो आपसे प्यार करते हों।

Delete
कुछ बातों को अपनी जिंदगी में 
जोड़ने से फायदा होता है। इससे जिंदगी काफी हद तक सकारात्मक हो जाती है। इसी तरह जब हम कुछ बातों को अपनी जिंदगी से हटा देते हैं यानी डिलीट कर देते हैं तो नेगेटिविटी कम हो जाती है और पॉजिटिविटी बढ़ जाती है। मसलन: बुरे ख्याल और बुरी यादों से बाहर निकलना, भविष्य की चिंता को मन में घर नहीं बनाने देना।
आदत बनाएं: हर दिन लिखें, क्या अच्छा हुआएक दिन 24 घंटे का होता है। इन 24 घंटों के 1440 मिनटों में 10 से 12 मिनट ऐसे जरूर रहे होंगे जब आप भीतर से खुश हुए हों। उन लम्हों को अपनी डायरी में जरूर लिखें। पूरे विस्तार से और शिद्दत से लिखें। जब भी इसे दोबारा पढ़ेंगे, खुश होने या मुस्कुराने का मौका फिर से मिलेगा।
 

इसे हफ्ते के सात दिनों में बांट कर भी कर सकते हैं। कुछ इस तरह लिख सकते हैं:
सोमवार: आज वीकेंड के बाद पहले दिन ही मेरी वाइफ ने ऑफिस जाते समय मुझे बहुत शानदार लंच दिया था। बेटे ने बताया कि उसने क्रिकेट में आज 50 रन बनाए। बेटी ने डांस में एक नया स्टेप भी सीखा।

मंगलवार: मैंने आज मां को डॉक्टर के पास जाकर दिखलाया। उनकी रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने कहा कि ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं। यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया।

बुधवार: दफ्तर के एक साथी ने मुझे मजाक में ही कुछ खिलाने के लिए कहा। मैंने उसे वीकेंड पर घर पर खाने का न्योता दे दिया। इसके लिए पहले मैंने पत्नी से भी बात कर ली। वह भी तुरंत तैयार हो गई। बहुत अच्छा लगा।  
 
गुरुवार: आज मैं ऑफिस पहुंचने में लेट हो गया। ऐसा लगा था कि बॉस शायद डांटेंगे, लेकिन ट्रैफिक जाम की वजह से वह भी बहुत लेट हो गए। यह जान मुझे तसल्ली हुई।

शुक्रवार: आज मैं सुबह देर से उठा, इस वजह से वॉक के लिए नहीं जा सका। लेकिन शाम को ऑफिस से आने के बाद मैंने 1 घंटा ब्रिस्क वॉक किया। इससे मेरा रुटीन नहीं टूटा। मुझे बहुत अच्छा लगा।

शनिवार: आज मेरा ऑफिस का ऑफ था। मैंने वाइफ से कहा कि आज का खाना मैं बनाऊंगा। मैंने बहुत साधारण ही बनाया, लेकिन मेरी पूरी फैमिली ने इसे एंजॉय किया। यह उनके लिए एक अच्छा अनुभव था। मेरी पत्नी ने कहा कि भले ही तुम अच्छे कुक नहीं हो, लेकिन खाने का टेस्ट अच्छा था। 

रविवार: आज दफ्तर का साथी घर पर आया था। मेरी वाइफ और उनकी वाइफ की काफी अच्छी दोस्ती हो गई। दोनों ने बहुत सारी बातें की। उन्होंने अगले संडे को हमें अपने यहां खाने पर बुलाया है। अब अगले 6 दिन हम इस पर चर्चा करेंगे ताकि एक्साइटमेंट बढ़ जाए।

डॉक्टर के पास तब जाएं, जब...
मेंटल हेल्थ की परेशानी भी शरीर की दूसरी परेशानियों की तरह है, इसलिए इसका इलाज भी जरूरी है। हर दिन 10 से 15 मिनट का योगासन, ध्यान और हर दिन सुबह या शाम को 30 मिनट की एक्सरसाइज से फायदा होता है।
जब तक स्ट्रेस और चिंता आम जिंदगी में परेशानी न पैदा करने लगे तो इसका निदान योग, एक्सरसाइज और मधुर संगीत या टूर आदि से खोज सकते हैं। जब यह रुटीन को खराब करने लगे तो इलाज के लिए डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए।
मेंटल हेल्थ की समस्या आ जाए तो सबसे पहले अपने फैमिली फिजिशन के पास जाना चाहिए। वही बताएंगे कि मरीज को साइकॉलजिस्ट की जरूरत है या साइकाइट्रिस्ट की। अगर सिर्फ लंबी थेरपी चाहिए तो साइकॉलजिस्ट की जरूरत पड़ेगी और अगर थेरपी के साथ दवा की जरूरत होगी तो साइकाइट्रिस्ट के पास जाना होगा।
अगर कोई शख्स किसी दुख या चिंता की वजह से लगातार 2 हफ्ते यानी 14 दिनों तक अपने सामान्य रुटीन पर न लौटे, उसका खाना-पीना सामान्य न हो तो उसे डिप्रेशन का लक्षण समझना चाहिए। डिप्रेशन कितना गंभीर है, यह मरीज की स्थिति, उसके स्वभाव पर निर्भर करता है। अगर वह हिंसक नहीं है और वह खुदकुशी की कोशिश नहीं करता तो उसे कम गंभीर समझा जा सकता है, लेकिन इसका फैसला मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट ही करेंगे।

फाइनल चेकलिस्ट बनाएं...
 हम कितनी पॉजिटिव ऐक्टिविटीज करते हैं? क्या उनमें यह सब शामिल है या नहीं?
अगर नहीं है तो जरूर शामिल करें:

नींद
7 से 8 घंटे की नींद हर दिन लें

एक्सरसाइज
35 से 50 मिनट हर दिन जरूरी है

ध्यान
5 से 10 मिनट का स्थिर मन के लिए

डाइट 
1800 से 2000 कैलरी से ज्यादा नहीं हर दिन

ऑफिस में ब्रेक
 3 से 7 मिनट का गैप हर 1 या 2 घंटे के बीच में

खाली वक्त में पढ़ना
कोई कहानी या पसंद का कुछ भी

हॉबिज को न भूलना
2 से 3 पसंदीदा म्यूजिक या डांस या कुकिंग

इनडोर गेम्स खेलना
1 से 2 गेम्स, जैसे: लूडो, चेस या कैरम का खेलना

अपनों से बात करके 
और करीब होना
1 या 2 नजदीकी लोगों को कॉल लगाकर बात करना, चाहे वह फोन करे या नहीं

दिल की बातों को भी 
जाहिर करना
सिर्फ बात ही नहीं, अपने लोगों से बात करते हुए दिल की बातों को जाहिर करना

#justzindagi

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