शरीर 03 || निद्रा अर्थात नींद
नींद आएगी तो लाएगी सपने सुहाने
हम सपने देखते हैं और सपनों को पूरा होते हुए देखना चाहते हैं लेकिन नींद... अधूरी नींद रहेगी तो सपने पूरे कैसे होंगे, हम यह नहीं सोचते। एक्सपर्ट कहते हैं कि नींद हमारी सफलता और सेहत से जुड़ी होती है तो इसे नजरअंदाज कैसे कर सकते हैं। पूरा ब्यौरा दे रही हैं रजनी शर्मा
पिछले संडे की बात है। मार्केट के कुछ काम निपटाने के लिए घर से निकले कि कार में एफएम पर एक पुराना गाना बजने लगा, 'लड़कपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया, बुढ़ापा देख कर रोया...' सुनकर मन में सवाल उठा कि अगर आज यह गाना लिखा जाता तो शैलेंद्र ऐसा ही लिखते? ज्यादातर लोग यह कहेंगे कि जवान भी अब नींद भर नहीं सोते हैं। रात को देर तक सोशल मीडिया, टीवी या ओटीटी प्लैटफॉर्म से चिपके रहना या फिर देर तक पढ़ाई ही करना। उनसे बड़ी पीढ़ी की अलग ही दिक्कत है कि नींद आती क्यों नहीं? साहित्यकार हरिशंकर परसाई ने भी लिखा, 'गालिब को भी नींद रात-भर नहीं आती थी। मुझे भी नहीं आती। गालिब परेशान थे कि जब मौत का एक दिन मुअय्यन है तो नींद क्यों रात-भर नहीं आती? मौत की तो चिंता नहीं, फिर कौन-सा डर, कौन-सी चिंता? खैर, गालिब के तो और भी मामले थे- यही इश्क, उधारी वगैरह। मुझे तो यह कुछ नहीं है। फिर भी रात को तय करता हूं कि चैन से सोऊंगा, पर नींद बार-बार खुल जाती है।' एक्सपर्ट मानते हैं कि हमारी सफलता, सेहत और संबंधों से नींद का सीधा रिश्ता है। लेकिन लोग नींद के मामले में भूखे रहेंगे तो उन्हें इसका नुकसान भी भुगतना पड़ता है। अमेरिकी लेखिका अरियाना हफिंगटन ने एक कार्यक्रम में बताया, 'नींद के मामले में महिलाओं की स्थिति पुरुषों से ज्यादा खराब है। वह कहती हैं कि मैंने खुद भुगता है कि नींद की कमी से क्या नुकसान हो सकता है, इसलिए बता सकती हूं कि इसका क्या महत्व है। कुछ साल पहले मैं कम सोने की वजह से इतनी थकी हुई थी कि थकान के मारे मेरा सिर मेज से टकरा गया। मेरी ठुड्डी की हड्डी टूट गई। आंख के पास पांच टांके लगाने पड़े। तब मैंने इस बारे में खूब सोचा कि कम से कम अब तो नींद की अहमियत को समझा जाए। इसी कोशिश में मैंने इस बारे में स्टडी की। कुछ डॉक्टरों से मिली और रिसर्च करनेवालों से भी। अब मैं दावे से बता सकती हूं कि कामयाब, ऊर्जा से भरपूर और खुशहाल ज़िंदगी पाने का रास्ता है अच्छी नींद लेना। भरपूर सोना।' वह आगे कहती हैं कि आज सारी दुनिया तमाम दिक्कतों से गुजर रही है। ऐसे में हम खुद अपने लिए जो उपाय कर पाएं, ऐसा कुछ जो हमारी ज़िंदगी को खुशी, आभार और सार्थकता से भर दे, वह करना चाहिए। जब हम खुश होंगे तो धीरे-धीरे सारी दुनिया खुश होगी। सबसे अच्छा है कि अपनी आंखें बंद करके अनोखे विचारों को खोजने निकल जाएं। कुछ ऐसा जो मन को शांति दे। हां, इससे पहले अपनी मशीनों को खुद को दूर कर दें और नींद की ताकत को पहचानें। अरियाना ने सिर्फ नींद की अहमियत नहीं बताई, इस ओर भी इशारा किया कि नींद आने के लिए जरूरी है कि खुद से बातें करें और मशीनों से दूरी बनाएं। जब अपने दिनभर के साथी मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी को सोने के वक्त से कुछ घंटों पहले गुड नाइट कर देंगे तो नींद की ओर सफर आसानी से तय कर सकेंगे। हमारे लाइफस्टाइल और कामकाज के बदले हुए तरीके ने भी हमें नींद से दूर किया है। मैट वॉकर ब्रेन साइंटिस्ट हैं। नींद के एक्सपर्ट भी। उन्होंने इस बारे में काफी रिसर्च भी है। एक टेड टॉक में वह बताते हैं कि कुदरत ने हमें नींद के रूप में नायाब तोहफा दिया है। इससे हमारा जीवन लंबा होता है। गहरी नींद हमें बीमारियों से बचाती है। चुस्त-दुरुस्त बनाए रखती है। नींद की वजह से ही हम बहुत-सी चीजें आसानी से कर पाते हैं। उस वक्त हमारा दिमाग और शरीर हमारे लिए काम कर रहे होते हैं। वहीं शरीर और दिमाग को पर्याप्त नींद न मिले तो कई नुकसान हमारे सामने पैदा हो जाते हैं। याददाश्त, सीखने की क्षमता, इम्यून सिस्टम और जेनेटिक कोड तक सब पर बुरा असर पड़ता है। वह कहते हैं कि अगर कोई पुरुष रात को 5 घंटे ही सोता है तो उसका टेस्टोस्टेरोन लेवल अपने से उम्र में 10 साल बड़े पुरुष जितना कम हो सकता है। इतना ही नहीं, महिलाओं की नींद पूरी न हो पाए तो उनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है। सभी हार्मोन सही तरीके से काम नहीं कर पाते। मैट कहते हैं कि जैसे हम कंप्यूटर पर कोई काम करते हैं तो उसे सुरक्षित भी करना होता है तो हमारे मन के सॉफ्टवेयर को सुरक्षित करने की कमांड है हमारी नींद। अगर हम वक्त पर सो जाएं तो जो कुछ हम सीख रहे हैं, वह दिमाग में सुरक्षित रहता है। इससे याददाश्त तेज रहती है। अगर हम किसी स्पॉन्ज को निचोड़ें नहीं तो वह और पानी नहीं सोख सकती। हमारे दिमाग के सर्किट का भी यही हाल है। अगर हम सो लेते हैं तो उनमें जो सीख है या यादें जमा हुई हैं, वे सुरक्षित हो जाती हैं और दिमाग नई यादों को संजोने के लिए तैयार हो जाता है। इसे साबित करने के लिए एक स्टडी भी की गई। दो ग्रुप बनाए गए, एक पूरे 8 घंटे सोने वाले और दूसरे वे जिन्हें कम सोने दिया गया। इसके बाद अगले दिन उन सबका एमआरआई स्कैन किया गया। इस बीच ब्रेन की ऐक्टिविटी के स्नैपशॉट लिए गए। यह देखा गया कि जिन लोगों ठीक से नहीं सोने दिया गया था, उनके दिमाग की गतिविधियां सुस्त थीं और इससे याद रखने की योग्यता में 40 फीसदी तक की कमी आ जाती है। कोई बच्चा अपने एग्जाम में कितना अच्छा प्रदर्शन करेगा, यह उसकी नींद पर भी निर्भर करता है। इसका मतलब है कि नींद हमारे लिए सुपरपावर का काम करती है। लेकिन कुछ लोग कोशिश करके भी नहीं सो पाते। महामारी के दौर में भी कुछ लोगों की नींद में कमी आई है। कई बार लोग देर रात चाय या कॉफी लेते हैं, ड्रिंक करते हैं, जिसकी वजह से ठीक से सो नहीं पाते। हमारे शरीर को अच्छी क्वॉलिटी की नींद चाहिए, भरपूर नींद हो। एक बात पर ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते कि सोने के लिए गर्मी के मौसम में थोड़ी-सी ठंडक और सर्दी के मौसम में गरमाहट हो तो जल्दी नींद आती है। कभी आजमा कर देखें कि जिस कमरे में गर्मी महसूस हो रही हो वहां जल्दी नींद आई या जहां थोड़ी ठंडक थी। कुछ लोगों को हल्के संगीत और हल्की खुशबू के बीच ही अच्छी नींद आती है। वैसे नींद से ही जुड़े होते हैं हमारे सपने। जो लोग बड़े सपने देखते हैं, उन्हें ज़िंदगी में आगे बढ़ना है और सबसे बड़ी बात कि खुश रहना है। बिना सोए तो ऐसा होगा नहीं क्योंकि नींद पूरी होने पर ही हमें अच्छे सपने आते हैं। कुछ सपनों में कामयाबी पाने के इशारे छुपे रहते हैं। ब्राजील के लेखक पाउलो कोएल्हो की किताब 'द अल्केमिस्ट' भी सपनों की कहानी कहती है। घुमक्कड़ चरवाहे सैंटियागो को बार-बार आने वाले अपने सपनों से कुछ संकेत मिलते हैं। वह उनका मतलब खोजता है और कामयाबी के सफर पर निकल जाता है। किताब में सपनों के आधार पर ही साबित किया गया है कि अगर आप किसी चीज को पूरे दिल से हासिल करना चाहते हैं तो पूरी कायनात मदद करती हैं। इसलिए अच्छी नींद लें और खूब सपने देखें।
नींद करे जब नखरे
19 मार्च (शुक्रवार) को वर्ल्ड स्लीप डे पर विशेष
किसी मोबाइल फोन की बैटरी जब फुल चार्ज हो जाती है तो एक खास समय तक काम कर सकती है। फिर धीरे-धीरे बैटरी डिस्चार्ज होती जाती है। जब वह डिस्चार्ज की तरफ पहुंचने वाली होती है तो हम उसे दोबारा चार्ज करते हैं। इसके बाद वह फिर से काम करने की स्थिति में पहुंचने लगती है। नींद भी हमारे लिए चार्जिंग की तरह ही है। अगर हमने पूरी नींद नहीं ली तो मोबाइल रूपी शरीर की जिंदगी कम हो जाएगी और हर दिन जल्दी डिस्चार्ज होने लगेगी। नींद की इसी अहमियत को समझने के लिए जाने-माने एक्सपर्ट्स से बात की लोकेश के. भारती ने:
रात में सोने से न सिर्फ शरीर रिचार्ज होता है बल्कि शरीर तनाव रहित होने की कोशिश भी करता है। शरीर दिनभर में हुई कमी-बेशी को समझने की कोशिश भी करता है। इसलिए नींद की अहमियत बहुत ही ज्यादा है। हम जितने वक्त तक खाना खाए बिना रह सकते हैं, लगभग उतने ही वक्त तक हम नींद के बिना भी रह सकते हैं। एक दिन की फास्टिंग से हमें कुछ कमजोरी आती है, वहीं एक दिन न सोने से हममें थोड़ा चिड़चिड़ापन आता है। दूसरे दिन भी जब हमें खाना न मिलता तो हमारी कमजोरी बढ़ जाती है। इसी तरह दूसरे दिन भी नहीं सोने पर हमारी स्थिति बहुत बुरी होने लगती है। इसके बाद हम चाहते हैं कि हमें खाना मिल जाए तो दूसरी तरफ हम बैठे-बैठे भी सोने लगते हैं। सीधे कहें तो जितना जरूरी हमारे लिए आहार (खाना) है, उतनी ही अहम नींद भी है। इन दोनों में से किसी के डिस्टर्ब होने पर हमारे लिए परेशानी ही परेशानी है। इसलिए नींद की अहमियत को समझना जरूरी है। लेकिन लोग इस पर कम ध्यान देते हैं।
नींद में खलल क्यों पैदा होता है?
वजहें कई हो सकती हैं। इनमें मोबाइल, लैपटॉप, टीवी के साथ देर रात तक जागने की आदत, डिप्रेशन, तनाव, शरीर कमजोर होना, विटामिन-डी की कमी, सही और तय समय पर खाना न खाना, अल्कोहल और स्मोकिंग की आदत, जंक फूड, खर्राटे, बेड की क्वॉलिटी, मोटे तकिए पर सोना और स्लीप एप्नीया (सोते वक्त सांस लेने में रुकावट) जैसी समस्या को नजरअंदाज करना।
इसलिए जरूरी है पूरी नींद
कम नींद की वजह से क्या होता है, इसे फौरन ही महसूस किया जा सकता है। यह शरीर पर चोट लगने जैसा ही है। इसका असर फौरन ही दिखने लगता है।
-चिड़चिड़ापन
- ध्यान में कमी
- हॉर्मोनल गड़बड़ियां
-याद्दाश्त में कमी
-बेचैनी
- महिलाओं में माहवारी से जुड़ी परेशानी
-शुगर, बीपी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाना
-अगर शुगर, बीपी जैसी बीमारियों पहले से हो तो इन्हें काबू करने में परेशानी होना
- इसकी वजह से रिश्ते खराब होना
उम्र के अनुसार चाहिए इतनी नींद
नींद वैसे तो जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए। यह भी मुमकिन है कि कोई शख्स 5 घंटे की गहरी नींद में अपनी जरूरत पूरी कर ले। वहीं दूसरे शख्स को इसके लिए 7 से 8 घंटे की जरूरत हो। फिर भी एक औसत नींद की जरूरत को हम उम्र के हिसाब से बता सकते हैं:
उम्रनींद के घंटे
0 से 3 महीने 15 से 19 घंटे
4 से 11 महीने 13 से 17 घंटे
1 से 2 साल 11 से 15 घंटे
3 से 5 साल 10 से 14 घंटे
6 से 13 साल 9 से 12 घंटे
14 से 17 साल 8 से 11 घंटे
18 से 25 साल 7 से 9 घंटे
26 से 64 साल 6 से 8 घंटे
64 साल से ऊपर 5 से 7 घंटे
ऐसे लाएं अच्छी नींद
डिप्रेशन, तनाव और देर रात तक जागने को कहें बाय-बाय
कोरोना की वजह से जॉब और बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है। लोगों की सैलरी कम हुई है या नौकरी चली गई है। बिजनेस में लॉस हुआ है। इस वजह से डिप्रेशन और तनाव काफी रहता है। इस पर अगर हमने अपनी आदत में ही देर तक जागने को शामिल कर लिया तो यह काफी खतरनाक हो जाता है। इस तरह के डिप्रेशन और तनाव को दूर करने के लिए यह जरूरी है कि इनसे निपटने की खातिर कमर कसें। यह समझें कि यह वक्त किसी खास शख्स के लिए नहीं, सभी के लिए आया है। वक्त के साथ यह दौर भी गुजर जाएगा। अगर इस दौरान हम बीमार पड़ गए तो चुनौती और बड़ी हो जाएगी। वैसे भी तरोताजा दिमाग में ही धांसू आइडियाज आते हैं।
स्क्रीन से दूरी बनाएं
आजकल सबसे बड़ी समस्या स्क्रीन है। अब से 20-25 साल पहले यह समस्या बहुत कम थी, लेकिन मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, इंटरनेट के सस्ता होने की वजह से लोग इनसे चिपके रहते हैं। नींद के समय में से वक्त लेकर इनका उपयोग करते हैं। इनकी वजह से आंखों और दिमाग में मौजूद नर्व सेल्स पर भी बुरा असर पड़ता है और हमारी नींद में जबर्दस्त खलल पड़ता है। बेड पर जाने से आधा घंटा पहले मोबाइल आदि से अलग होने की आदत डालें। साथ ही कमरे में रोशनी न हो या फिर कम हो।
शरीर को कमजोर न होने दें
सलाद, फल और ताजा सब्जियां हमारे खाने में जरूर शामिल हों। शरीर कमजोर होने से इम्यून सिस्टम भी कमजोर होगा। शरीर में सोडियम, पोटैशियम, विटामिन आदि की कमी होगी और इससे नींद प्रभावित होगी। अपनी डाइट में नट्स (बादाम: 10 से 15 या 2 से 3 अखरोट या एक कटोरी भुने हुए चने) को जरूर शामिल करें।
बेड और तकिया सही रखें
अच्छी नींद के लिए बेड और तकिये की क्वॉलिटी का सही होना जरूरी है। इसमें कमी या फर्क पड़ने से नींद में खलल पड़ जाता है। यही वजह है कि जब हम किसी नई जगह पर या नए बेड और तकिये पर सोते हैं तो कई बार नींद में खलल पड़ जाता है। इसलिए बेड इतना सॉफ्ट भी न हो कि मांसपेशियों पर हल्का दबाव भी न पड़े और इतना सख्त भी न हो कि कुछ ज्यादा ही दबाव पड़ जाए। कुल मिलाकर अगर किसी को अच्छी नींद नहीं आ रही हो तो वह अपने बेड को भी बदलकर देख लें है।
कई लोगों को मोटे तकिये लगाकर सोने की आदत होती है। अक्सर ऐसे लोग मोटापे का शिकार होते हैं। उनकी गर्दन में भी चर्बी जमा होती है। मोटे तकिये लगाने से उनकी गर्दन की मांसपेशियों को ज्यादा आराम मिलता है। लेकिन ज्यादा मोटे तकिये पर सोने से खर्राटे भी ज्यादा आते हैं। इसलिए तकिये की ऊंचाई 3 से 4 इंच तक ही ऊपर हो।
स्पाइनल बाथ भी फायदेमंद
अगर किसी को नींद में कमी की शिकायत है तो उसे स्पाइनल बाथ से फायदा हो सकता है। इसके लिए बाथ टब में गुनगुना पानी भरकर जांघ से लेकर गर्दन तक 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखना है। इस स्थिति में हमारे पैर और सिर दोनों पानी से बाहर होते हैं। इससे हमारी स्पाइनल कॉर्ड (मेरुदंड) और नर्व सेल्स को आराम मिलता है। इतना ही नहीं, इससे हमारे दिमाग को भी राहत मिलती है और अच्छी नींद आती है। इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए विडियो की मदद ले सकते हैं। गूगल या यू-ट्यूब पर Spinal bath टाइप करने से कई विडियो मिल जाएंगे। इन्हें देखकर पूरे तरीके को समझ सकते हैं।
अरोमा थेरपी क्या है और नींद में कितना फायदेमंद?
इसमें लैवेंडर तेल का इस्तेमाल किया जाता है। अच्छी नींद और सिरदर्द से राहत के लिए अपने तकिये पर लैवेंडर तेल की 2 बूंदें डाल दें। अगर सिरदर्द से फिर भी राहत न मिले और नींद न आए तो 4 चम्मच नारियल या बादाम तेल में 5 बूंदें लैवेंडर तेल मिलाकर सिर की मसाज करने से फायदा होता है। इससे मांसपेशियों को काफी आराम पहुंचता है। इतना ही नहीं। यह सूजन भी घटाता है।
कहां मिलेगा: सभी ई-कॉमर्स साइट्स पर lavender oil सर्च करने पर मिल जाएगा।
कीमत: 15 ml लैवेंडर की कीमत 200 रुपये से शुरू
कमरे का तापमान भी सही हो
अगर कमरा बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ठंडा हो तो भी नींद में खलल पड़ सकता है। इसलिए कमरे का तापमान अगर 22 से 24 डिग्री सेल्सियस तक हो तो यह शरीर को भाता है। कमरे में एसी का तापमान भी इतना ही सेट करें।
मसाज से अच्छी नींद?
वैसे तो शरीर के थकने से अच्छी नींद आती है, लेकिन कई बार ज्यादा थकने से नींद में खलल भी पैदा हो जाता है। यह तब ज्यादा होता है जब थकने की वजह से पैर की मांसपेशियों में सूजन या दर्द हो। ऐसे में पैरों की मालिश की जाए तो नींद आ जाती है। इसके लिए गुनगुने सरसों के तेल से 2 से 3 मिनट तक मालिश करें। पैरों में कुछ खास प्रेशर पॉइंट होते हैं, जैसे अंगूठे के निचले हिस्से को दबाकर रखना चाहिए। नसों को आराम मिलता है।
ऐसा हो सोने का तरीका
पैरों को एक-दूसरे पर चढ़ाकर, घुटनों तक मोड़कर या फिर अपने हाथ को सिर के नीचे दबाकर नहीं सोना चाहिए। इससे भी नींद में खलल पड़ता है।
नींद के दौरान जब सांस लेने में आए रुकावट
हमारे देश में खर्राटे (स्नोरिंग) की समस्या काफी बढ़ चुकी है। शुगर और बीपी के बाद इसे ही सबसे बड़ी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारी माना जाता है। यह सिर्फ खर्राटे तक ही सीमित नहीं है। इसके आगे बढ़ते हुए यह स्लीप एप्नीया (नींद में खर्राटों के साथ सांस में रुकावट आना) है। खर्राटे लेने के दौरान सांस रुकने की परेशानी कम होती है जबकि स्लीप एप्नीया में सांस भी रुकती रहती है। ऐसी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
-स्लीप एप्नीया में नींद के दौरान नाक से जाने वाली हवा किसी रुकावट की वजह से गर्दन तक पूरी नहीं पहुंच पाती।
-यह रुकावट साइनस, गले में ज्यादा चर्बी जमा होने और गले की स्किन बहुत ज्यादा ढीली होने, टॉन्सिल्स बढ़ जाने, चर्बी की वजह से जीभ ज्यादा मोटी होने, मोटा तालू होने, जुकाम की वजह से नाक बंद होने, नीचे वाली ठुड्ढी ज्यादा अंदर की तरफ होने, नाक के अंदर मांस बढ़ जाने और नाक की हड्डी टेढ़ी होने की वजह से हो सकती है। जिन्हें शराब की लत है उनके मामलों में खर्राटे की परेशानी ज्यादा देखी जाती है।
स्लीप एप्नीया की पहचान
- इसमें भी खर्राटे निकलते हैं।
- नींद में जब सांस लेने में रुकावट होती है तो छोटी-छोटी सांसें आती है। इससे शख्स करवटें बदलता रहता है।
-शख्स की नींद बार-बार टूट जाती है।
- नींद पूरी नहीं होती और 7 से 8 घंटे की नींद के बाद भी ऐसा लगता है कि रातभर सोए नहीं हैं।
-इससे दिनभर आलस्य बना रहता है और थकान भी। कोई भी काम पूरी ऊर्जा के साथ नहीं कर पाते।
- गाड़ी चलाते-चलाते भी नींद आने लगती है।
- लगातार तनाव रहता है।
-अगर स्लीप एप्नीया की परेशानी लंबी चलती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। सांस रुक सकती है और मौत भी हो सकती है।
-आजकल बच्चों में भी यह समस्या दिखने लगी है। बच्चों में इसकी वजह जंक फूड का ज्यादा सेवन और फिजिकल ऐक्टिविटी कम होना है।
खर्राटे और स्लीप एप्नीया की जांच और इलाज
जांच : इसमें एक मशीन (C-PAP) से इसकी जांच की जाती है। यह मशीन रातभर लगाई जाती है और इससे स्लीप पैटर्न को समझा जाता है। इससे पता चलता है कि परेशानी कहां है। किस वजह से नींद बार-बार खुल जाती है।
इसे घर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए डॉक्टर की सहायता लेनी होगी कि यह मशीन किस तरह काम करती है।
कीमत: 14 हजार रुपये से। इसमें ऑटोमेटिक और मैनुअल दोनों तरह के विकल्प उपलब्ध हैं।
कुछ अहम कंपनियां: DREAM STATION CPAP, Apex CPAP। इनके अलावा और भी अच्छे ब्रैंड हैं।
इलाज
- नाक की हड्डी टेढ़ी हो, अंदर मांस जमा हो या गर्दन और जीभ पर फालतू चर्बी हो तो उसे सर्जरी द्वारा हटाया जाता है।
- रुटीन और खानपान बदलकर भी इसका इलाज किया जाता है।
- हर दिन 30 से 45 मिनट की एक्सरसाइज और योग
- बाहर का खाना (खासकर जंक फूड) कम और घर में बना हुआ खाना ज्यादा खाना।
- वजन कम करना ताकि गले और जीभ की चर्बी भी कम हो।
- हर दिन 2 ताजे फल और 2 कटोरी ताजा पकाई हुई सब्जियां जरूर खाना। दिनभर में 1 प्लेट सलाद जरूर खाएं।
-चाय और काफी जिनमें कैफीन होती है, न लें या 1 कप से ज्यादा न लें। वह भी सुबह के वक्त ही लें।
-अल्कोहल से दूरी।
जरूरी सवाल और जवाब
क्या होता है दिन में सोने से
पावर नैप क्या है और यह कितनी जरूरी है?
आमतौर पर पावर नैप की जरूरत इसलिए होती है कि रात में हमारी नींद पूरी नहीं हुई या हमने इतना हेवी खाना खा लिया जिस वजह से पेट के पास खून की उपलब्धता बढ़ जाती है। इसलिए दिमाग तक खून पहुंचना कम हो जाता है और हमें सुस्ती आने लगती है।
-आयुर्वेद और नेचरोपैथी में दिन में सोने की मनाही है। कहा गया है कि सोने का काम रात को ही करना चाहिए।
-फिर भी अगर पावर नैप लेने की बात है तो यह किसी भी हालत में 20 मिनट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
-पावर नैप भी कुर्सी पर बैठकर ही लेना बेहतर है, बेड पर लेने से यह पूरी नींद में तब्दील हो जाती है।
-अलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा) में इसके लिए कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। पावर नैप लेने से कोई नुकसान नहीं होता।
दिन में सोने से फायदा या नुकसान? अगर रात में कम सोए हों, तो क्या दिन में सो सकते हैं?
हर शरीर की अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक होती है। इसी के अनुसार हम सोते और जागते हैं। अगर किसी को रात में 11 बजे सोने की आदत है और वह दिन में न सोया हो। नींद में किसी तरह का खलल न हो तो उसे नींद आने लगती है। अगर शख्स को लंबे समय से दिन में सोने की आदत है तो यह भी मुमकिन है कि उसे कब्ज की परेशानी भी रही हो क्योंकि ऐसे लोगों की रात की नींद डिस्टर्ब हो जाती है।
दिन में अगर कम समय के लिए सो रहे हैं यानी पावर नैप ले रहे हैं तो कई बार यह फ्रेश होने के लिए अच्छा तरीका है, लेकिन दिन में लंबी अवधि के लिए सो रहे हैं तो फ्रेशनेस महसूस नहीं होती।
रात में देर से सोने का असर? अगर रात में देर से सोते हैं और नींद पूरी करके ही उठते हैं तो ठीक है?
सीधा जवाब यह है कि जल्दी सोएं और जल्दी उठें। इस बीच में 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। लेकिन अगर किसी का जॉब ही ऐसा हो जिसमें उसे रात में देर तक जागना पड़े तो वह देर से सोकर देर उठने की बजाय, सुबह उठ जाए और फिर फ्रेश होकर ब्रेकफस्ट करके दोबारा सो जाए। सुबह की ताजा हवा और सूरज की पहली किरण सेहत के लिए अच्छी है और ताजगी बनी रहती है।
नींद के लिए जरूरी काम
नींद का फिजिकल ऐक्टिविटी से क्या नाता है?
इन दोनों का आपस में सीधा संबंध है। ऐसा देखा गया है जिन्हें कम नींद की शिकायत है, वे जब फिजिकल ऐक्टिविटी करते हैं तो उन्हें अमूमन अच्छी नींद आती है। यहां इस बात को समझना भी जरूरी है कि सिर्फ फिजिकल ऐक्टिविटी से नींद नहीं आती। इसके अलावा मोबाइल और दूसरी स्क्रीन से सोने से आधा घंटा पहले दूरी भी बनाना भी जरूरी है।
सोते समय म्यूजिक सुनना फायदेमंद है?
कुछ लोगों को धीमी आवाज में अपनी पसंद के गाने या संगीत सुनने से नींद आ जाती है। वहीं ऐसे लोग भी हैं जिन्हें जरा-सी आवाज होने पर भी नींद में खलल पड़ जाता है। यह व्यक्तिगत पसंद या आदत की बात है। एक अनुमान के मुताबिक 20 में से 1 शख्स ऐसा हो सकता है जिसे धीमी आवाज में संगीत सुनने से अच्छी नींद आती है। यह लगभग उसी तरह है जैसे बच्चे को उसके मम्मी, पापा, दादी, नानी आदि लोरी या कहानियां सुनाकर सुलाती हैं। ज्यादातर लोगों में बढ़ती उम्र के साथ यह आदत छूट जाती है।
सोने से पहले गुनगुना दूध पीने से फायदा होता है?
कुछ लोगों में ऐसा देखा गया है कि गुनगुना दूध पीने से उन्हें नींद आती है। पर यह सभी के लिए लागू नहीं हो सकता। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें दूध पचाने में परेशानी होती है। अगर ऐसे लोग दूध पीकर सोने की कोशिश करेंगे तो उन्हें दस्त और लूज मोशन जैसी परेशानी हो जाती है। अगर किसी को दूध पीकर सोने की आदत है तो उन्हें 1 चौथाई चम्मच छोटी हरड़ का पाउडर (पहले इसे घी में भूना गया हो और फिर पाउडर बनाकर) दूध में मिला देना चाहिए। इससे कब्ज की परेशानी भी काफी हद तक दूर हो जाती है और आंतरिक सूजन भी कम करती है।
रात में सोने से पहले नहाना और पैर धोना अच्छा है?
सोने से पहले नहाने से कई लोगों को फायदा होता है। जब कोई शख्स रात में ऑफिस से घर आता है तो शरीर पर धूलकण की मौजूदगी रहती है। नहाने के बाद ये शरीर से हट जाते हैं और ताजगी आ जाती है। ताजगी हर चीज में अच्छी है। हां, इस बात को ध्यान में रख सकते हैं कि गुनगुने पानी से नहाने से यह कुछ ज्यादा फायदेमंद होता है, खासकर जाड़ों में। गर्मियों में तो लोग ठंडे पानी से ही नहाना चाहते हैं। जहां तक पैर धोकर सोने की बात है तो इसे हर शख्स को अपनी रुटीन में शामिल करना चाहिए। चाहे कोई भी मौसम हो, गुनगुने पानी से पैर धोने से पैर तो साफ होता ही, हमारी पैरों की मांसपेशियां भी रिलैक्स करती हैं। मांसपेशियों के तनाव में भी कमी आती है। इससे अगर पैरों में कुछ दर्द हो तो वह भी कम हो जाता है। वैसे कई लोगों को गर्मियों में ठंडे पानी से पैर धोना अच्छा लगता है।
इनमें संतुलन जरूरी
क्या विटामिन-डी की कमी से भी नींद उड़ जाती है?
जाना-माना रिसर्च जनरल 'न्यूट्रिएंट्स' में अक्टूबर 2018 में छपे एक लेख के अनुसार विटामिन-डी की कमी से नींद में खलल पड़ सकता है। इसके अनुसार विटामिन-डी की कमी न सिर्फ नींद के साइकल को बुरी तरह प्रभावित करती है बल्कि नींद के लिए जरूरी समय को भी कम करती है। इसकी वजह यह है कि विटामिन-डी के रिसेप्टरों (जो हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं में पाए जाते हैं।) में कमी होने पर यह सोने और जागने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इसलिए हर दिन सुबह 8 से 11 बजे के बीच धूप में 30 से 35 मिनट जरूर बैठें। यह लगातार न हो तो 10 मिनट के फर्क पर भी बैठें। इससे शरीर को विटामिन-डी मिलता रहेगा।
अल्कोहल लेने से क्या अच्छी नींद आती है?
अल्कोहल लेने से कोशिकाएं ज्यादा ऐक्टिव हो जाती हैं जो नींद को भगाने का कारण बनती हैं। इस वजह से दिल की धड़कन बढ़ जाती है। बीपी भी बढ़ जाता है। इससे दिमाग आराम की स्थिति में नहीं होता। वैसे तो अल्कोहल नींद के साथ-साथ सेहत के लिए भी नुकसानदायक है, लेकिन हफ्ते में 50 से 60 एमएल से ज्यादा लेना तो खतरनाक हो सकता है। इस मात्रा को भी 2 से 3 दिनों में बांटकर लें। इतना ही नहीं, अल्कोहल गले की मांसपेशियों को कुछ ज्यादा ही शिथिल कर देती है। इस वजह से खर्राटे की आवाज भी तेज हो जाती है। कुछ लोग अल्कोहल की वजह से नींद में बोलना भी शुरू कर देते हैं। इसी वजह से यूरिन भी बार-बार जाना पड़ता है। इससे भी नींद में खलल पड़ता है।
चाय और कॉफी का नींद पर असर पड़ता है?
कॉफी लेने और सोने में 8 से 10 घंटे का गैप जरूर हो। इसकी वजह है चाय में मौजूद थियेनाइन। यह अल्कोहल जितना तो नहीं, लेकिन काफी मजबूत नींद अवरोधक है। इसलिए कॉफी को 12 बजे दिन तक ही लें, इसके बाद नहीं। जहां तक चाय की बात है तो यह अल्कोहल और कॉफी की तुलना में नींद की कम अवरोधक है, फिर भी सोने से 3 से 4 घंटे पहले तक चाय ले सकते हैं। अगर कोई शख्स 10 बजे सोता है तो वह आखिरी चाय शाम के 7 बजे से पहले ही ले।
कब्ज का नींद से क्या संबंध है?
जिन्हें कब्ज की परेशानी होती है, उन्हें रात में नींद कम आती है। हां, वे दिन में सोने की कोशिश में जरूर रहते हैं। दिनभर सुस्ती छाई रहती है। ऐसे लोगों को छोटी हरड़ का उपयोग करना चाहिए, जैसा पहले बताया गया है।
इन गैजेट्स से जानें कितना सोते हैं आप
अक्सर लोगों को शिकायत रहती है कि वे रात को ठीक से नहीं सो पाते हैं या उन्हें गहरी नींद नहीं आती। वे कितनी देर सो पाते हैं, उन्हें यह पता नहीं होता। मार्केट में ऐसे बहुत सारे गैजेट्स हैं जिनके जरिए आप अपनी नींद के बारे में जान सकते हैं। बता रहे हैं राजेश भारती
Dozee: Contactless Health Tracker
यह हेल्थ ट्रैकर न केवल आपकी नींद की क्वॉलिटी के बारे में बताता है बल्कि दूसरे तरीकों से भी आपकी हेल्थ की मॉनिटरिंग करता है। इसकी खास बात यह है कि इसे शरीर के किसी भी हिस्से पर बांधने की जरूरत नहीं पड़ती। इस डिवाइस के साथ एक स्ट्रिप आती है जिसमें सेंसर लगे होते हैं। इस स्ट्रिप को बिस्तर के नीचे उस जगह रखा जाता है जहां सोने वाले शख्स का सीना आता है। एक वायर के जरिए यह स्ट्रिप ट्रैकर से जुड़ी होती है। ट्रैकर को अपने बिस्तर के पास रख सकते हैं।
यह डिवाइस इमरजेंसी जैसे- हार्ट रेट बढ़ जाना, सांस लेने की गति धीमी हो जाना आदि में भी रजिस्टर्ड मोबाइल पर अलर्ट भेजती है ताकि समय रहते इलाज किया जा सके। कीमत: 7999 रुपये
Dodow: Sleep Aid Device
यह डिवाइस उन लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होगी जिन्हें बिस्तर पर लेटने के बाद नींद देर से आती है। इस डिवाइस को सोते समय सिर के पास रखा जाता है। इसमें LED लाइट लगी होती है जिसे 8 या 20 मिनट के लिए सेट किया जाता है। मान लीजिए, अगर LED लाइट को 8 मिनट के लिए सेट करते हैं तो यह लाइट 8 मिनट ही जलेगी। इस दौरान सोने वाले शख्स को लेटे-लेटे LED लाइट पर फोकस करते हुए सांस से जुड़ी एक्सरसाइज करनी होगी यानी गहरी सांस लेना और फिर उसे छोड़ना। ऐसा करने से उस शख्स को रिलेक्स महसूस होता है और वह कब सो जाएगा उसे पता भी नहीं चलेगा। कीमत: 5200 रुपये
Smart Watch
स्मार्ट वॉच में एक सेंसर लगा होता है जिसकी मदद से स्मार्ट वॉच पहनने वाले शख्स को न केवल उसकी हेल्थ की बल्कि सोते समय उसकी नींद की जानकारी भी मिल जाती है। ऐसी वॉच का अपना ऐप होता है जिसे स्मार्टफोन में इंस्टॉल किया जाता है। इसके बाद हेल्थ से जुड़ी पूरी जानकारी ऐप पर आती रहती है।
कीमत: 1500 रुपये से शुरू
कंपनी: Samsung, Realme, Boat, Fitbit, Oppo, Apple, Fossil, Garmin आदि।
नोट:
-कीमतों में बदलाव मुमकिन
-ऊपर दी गई कंपनियों के अलावा और भी कंपनियों की डिवाइस मौजूद हैं।
- इन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीद सकते हैं।
नींद से संबंधित विडियो या वेब पेज देखना चाहते हैं तो गूगल, फेसबुक और यू-टयूब पर good sleep या deep sleep सर्च करें।
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