आवश्यक

शादी की कानूनी रस्म है मैरिज सर्टिफिकेट लेना
लीगल फोरम/राजेश चौधरी

शादी के बाद उसका रजिस्ट्रेशन जरूर कराना चाहिए। रजिस्ट्रेशन कहां और कैसे होता है, यह जानना जरूरी है। स्पेशल मैरिज ऐक्ट, हिंदू मैरिज ऐक्ट और मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक शादी होने पर रजिस्टर कराई जाती है। यह शादी का कानूनी तौर पर पुख्ता दस्तावेज है।

सबसे पहले स्पेशल मैरिज ऐक्ट को जानें 
दिल्ली हाई कोर्ट के वकील नवीन शर्मा के मुताबिक, स्पेशल मैरिज ऐक्ट में शादी करने के लिए लड़का और लड़की व्यस्क (18 या 18 साल से ऊपर) होने चाहिए। दोनों शादी की योग्यता रखते हों। उन्हें शादी करने के लिए अपना धर्म बदलने की जरूरत नहीं। दोनों इलाके के मैरिज रजिस्ट्रार के सामने शादी के लिए आवेदन दे सकते हैं। रजिस्ट्रार एक महीने के लिए पब्लिक नोटिस निकालता है कि क्या किसी को इस शादी से आपत्ति है। फिर दोनों मैरिज रजिस्ट्रार के सामने पेश होते हैं और शादी रजिस्टर होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो
सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट ज्ञानंत सिंह ने बताया कि फरवरी 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था कि शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी किया जाए। अदालत ने व्यवस्था दी थी कि केंद्र और सभी राज्य शादी के रजिस्ट्रेशन को जरूरी करें। शादी चाहे किसी भी धर्म या संप्रदाय में हुई हो, उसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के लिए राज्य नियम बनाए। इसके बाद देश के दर्जनभर राज्यों में शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। ऐसा करने के कई कानूनी फायदे भी होते हैं। 

हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 के तहत होने वाली शादी
ऐडवोकेट राजीव कुमार मलिक बताते हैं कि स्पेशल मैरिज ऐक्ट और हिंदू मैरिज ऐक्ट में होने वाली शादी के प्रावधान अलग-अलग हैं। हिंदू मैरिज ऐक्ट (सिख, जैन और बौद्ध भी इसके तहत आते हैं।) में हिंदुओं की शादी हिंदू रीति रिवाज से होती है और बौद्ध, सिख, जैन आदि भी अपने परंपरागत तरीके से शादी करते हैं। अगर लड़की और लड़के की उम्र 18 साल से कम है और शादी कराई जाती है तो ऐसी स्थिति में शादी अमान्य करार दिए जाने योग्य है। हिंदू मैरिज ऐक्ट की शादी भी बाद में इलाके के मैरिज रजिस्ट्रार के सामने रजिस्टर्ड कराई जाती है। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ की शादी अलग कैसे? 
ऐडवोकेट एमएस खान बताते हैं कि मुस्लिम लड़की जब युवावस्था (प्यूबर्टी) में प्रवेश करती है तो वह शादी कर सकती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ में होने वाली शादी में दोनों लोग मुस्लिम हों। शादी यानी निकाह एक सिविल कॉन्ट्रैक्ट है। लड़के की प्रस्ताव लड़की कबूल कर तो निकाहनामा तैयार होता है। इसकी शर्तों में मेहर (कॉन्ट्रेक्ट की शर्त) की रकम भी होती है। निकाहनामा डॉक्युमेंट में शामिल होता है।

क्रिश्चियन शादी भी धार्मिक परंपरा से होती है। इसे भी दूसरे धर्म की शादी की तरह इलाके के मैजिस्ट्रेट के पास जाकर रजिस्टर करा सकते हैं।

मैरिज सर्टिफिकेट के फायदे
सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट ज्ञानंत सिंह बताते हैं कि पति-पत्नी के बीच कानूनी विवाद होने पर तो मैरिज सर्टिफिकेट बहुत काम आता है। कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि पति-पत्नी में से कोई एक शादी मानने से ही इनकार कर देता है ताकि उसे तलाक की स्थिति में गुजारा भत्ता न देना पड़े। ऐसी स्थिति में शादी का पुख्ता प्रमाण मैरिज सर्टिफिकेट ही होता है। वहीं, पति की मौत के बाद फैमिली पेंशन आदि के मामले में दो दावेदार भी आ जाते हैं तो मैरिज सर्टिफिकेट होने से ऐसे विवाद थम जाते हैं। कई बार एलआईसी पॉलिसी से लेकर बैंक डिपॉजिट में महिला को खुद को पति के कानूनी वारिस के तौर पर साबित करना पड़े तो यह सर्टिफिकेट सहायक होता है। शादी के बाद पति और पत्नी को साथ में विदेश जाना हो तो वीजा आदि के लिए मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत होती है। 

रजिस्ट्रेशन के लिए ये दस्तावेज चाहिए
सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट सलीम ए. खान बताते हैं कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होने वाली शादी पहले ही रजिस्टर्ड होती है। लेकिन हिंदू मैरिज ऐक्ट और मुस्लिम पर्सनल लॉ या क्रिश्चियन लॉ के तहत हुई शादी को मैरिज रजिस्ट्रार के सामने रजिस्टर कराना होता है। कपल को इलाके के मैरिज रजिस्ट्रार के पास जाकर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होता है। इस दौरान लड़की सरनेम बदलना चाहे तो 10 रुपये के स्टैंप पेपर पर हलफनामा देकर शादी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में नया सरनेम लिखवा सकती है। साथ ही शादी से जुड़ी तस्वीरें, लड़का-लड़की के पासपोर्ट साइज के 4-4 फोटो, बर्थ सर्टिफिकेट, पते का सबूत, पहचान पत्र, आधार, पैन कार्ड आदि की कॉपी गैजेटेड ऑफिसर से सत्यापित होने चाहिए। अगर शादी आर्य समाज मंदिर में हुई है तो वहां का सर्टिफिकेट देना होगा। शादी इस्लामिक लॉ या क्रिश्चियन लॉ के तहत हुई है तो निकाहनामा आदि पेश करना होगा। साथ ही शादी में शामिल रहे 3 गवाह साथ होने चाहिए। गवाहों को भी सरकारी पहचान पत्र जैसे आधार, पैन कार्ड साथ रखना चाहिए। उन्हें मैरिज रजिस्ट्रार के सामने पेश होना होता है। तब सर्टिफिकेट जारी होता है।
(विश्व विवाह दिवस पर विशेष)
#WorldMarriageDay #Legal

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