होली पर रंग और रंग की धार
हो सकता है होली के आसपास आप कहीं जा रहे हों... और अचानक से सनसनाता हुआ गुब्बारा या पानी या रंग की धार आप पर आकर गिरे....
तो गुस्सा न हों, न उन बच्चों को डांटे...
बल्कि खुद को भाग्यशाली समझें... कि आपको उन नादान हाथों ने चुना है, जो हमारी संस्कृति को जिन्दा रखे हुए हैं... जो उत्सव को जिन्दा रखे हुए हैं... ऐसे कम ही नासमझ मिलेंगे..
क्योंकि वैसे भी सारे समझदार बच्चे विडियोगेम, डोरेमोन और एंड्रॉइड के अंदर घुसे होंगे..
तो कृपया इन्हें हतोत्साहित न करें... बल्कि यदि आप उन्हें छुपा देख लें तो जानबूझ कर वहीं से निकलें.. आपकी शर्ट ज़रूर ख़राब हो सकती है,
पर जब उनकी इस शरारत का जबाब आप मुस्कुराहट से देंगे तो उनकी ख़ुशी आपको ख़ुशी रिटर्न करेगी, और...
होली ज़िन्दा रहेगी... रंग ज़िन्दा रहेंगे... उत्सव ज़िन्दा रहेगा.... बचपन ज़िन्दा रहेगा....
आपका अपनापन जिन्दा रहेगा!
🙏🙏🙏🙏
इसके बाद जब भी आप होली खेलने का विचार बना रहे हैं तो निम्न बातों का ध्यान रखें।
अपनाएं 'प्रकृति' में छुपे रंग
रंग प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्रकृति को सुन्दरता से भरते हैं। मनुष्य अपने को खुशनुमा बनाने के लिए रंगों को अनेक प्रकार से उपयोग में लाता है। रंगीन फूल, पत्तियां व फल विभिन्न तरीकों से कीड़ों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कीड़े फूलों के परागण में सहायक बनते हैं, जिससे पौध के बीज तथा फल बनते हैं।
प्राकृतिक रंग की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। फिर भी प्राकृति से प्राकृतिक रुप से प्राप्त होने वाले रंगों को हम प्राकृतिक रंग कहते हैं। प्राकृतिक रंग खाद्य पदार्थों तथा पेय पदार्थों में मिलाने से वांछित रंग देते हैं। प्राकृतिक रंगों को तीन प्रमुख भागों में बांटा गया है।
प्राणियों से प्राप्त रंग:
ये रंग कीड़ों और जीव-जंतुओं से प्राप्त किए जाते हैं क्योंकि इसमें जीव हत्या शामिल होती है इसलिए इन चीजों से प्राप्त रंग को सात्विक रंग नहीं माना जाता। जैसे लेसीफर लाका लाख का लाल रंग, कोकस केक्टी कार्मिनिक अम्ल का नील लोहित रंग।
पौधों से प्राप्त रंग :
इसमें पौधे के विभिन्न भागों जैसे पत्ती, जड़, छाल, फल, बेरी, बीज तथा फूलों से रंग को अलग किया जा सकता है। ये ही प्राकृतिक रंगों के मुख्य स्रोत हैं। क्योंकि इसमें जीव हत्या नहीं होती इसलिए इन चीजों से प्राप्त रंग को सात्विक रंग माना जाता। जैसे पलास के फूल से पीला रंग, बिक्सा के बीज से पीला एवं नारंगी रंग।
खनिज पदार्थों से प्राप्त रंग:
इनमें रंगों को खनिज पदार्थों से प्राप्त किया जाता है। जैसे सफेद रंग को सफेद लेड से, सिंदूरी रंग को लाल लेड से, सफेद रंग चीनी मिट्टी केओलिन से।
कृत्रिम रंगों का प्रभाव विषैला :
नुक्सान होने के कारण संसार भर में विकसित तथा विकासशील देशों ने खाद्य एवं पेय पदार्थों, सौंदर्य सामग्री तथा औषधियों में कृत्रिम रंगों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया तथा कुछ ही कृत्रिम रंगों को व्यावहारिक प्रयोग में लाने की इजाजत दी गई, जिससे प्राकृतिक रंगों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।
प्राकृतिक रंगों के फायदे :
प्राकृतिक रंगों का पूरे तरीके से मिलान हो जाता है। इनसे प्रदूषण नहीं होता है। इनसे बनी रंग की छटा, गहरी एवं मनभावन होती है। यह रंग एक साथ फीका पड़ता है तथा अपनी स्वाभाविक प्रकृति को बनाए रखता है। इन रंगों से एलर्जी नहीं होती। इसकी रंगाई जलाऊ लकड़ी के द्वारा की जाती है। इसके लिए साधारण सामग्री एवं उपकरण प्रयोग में लाए जाते हैं। यह कीट अवरोधक होता है। इनका उपयोग आर्थिक दृष्टि से भी फायदेमंद है। प्राकृतिक रंग खाने के उपयोग में बेहतर सिद्ध हुए हैं।
भारत में पाए जाने वाले रंग देने वाले कुछ खास पौधे :
कीकर (बबूल) भूरा-काला, खैर (कत्था), लाल व भूरा, सफेद कीकर लाल, जंगली अखरोट- भूरा, ढाक/ पलाश पीला, पलाशलता-लाल, केसर-पीला, हल्दी पीला, नील-नीला, मेहंदी लाल, कमला (सिन्दूरी) - गहरा नारंगी, आंवला- भूरा, लाल चंदन- गहरा लाल, जामुन-लाल, बहेरा काला, बादाम काला, बेर-गुलाबी, लाल।
यूं चुनें होली के 'रंग'
• वास्तु शास्त्र के अनुसार रंग सुख, सौभाग्य और खुशहाली के प्रतीक माने जाते हैं। माना जाता है कि होली के हर रंग का प्रभाव अलग होता है और वास्तु के अनुसार रंगों का चयन अगर सोच-समझकर किया जाए तो जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-सौभाग्य में वृद्धि की जा सकती है।
• लाल रंग दक्षिण-पूर्व दिशा का प्रतीक माना जाता है। इसे हर रंग की अपेक्षा अधिक बलशाली माना जाता है। कहते हैं कि इस रंग से होली खेलने से सेहत और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
● नारंगी रंग सामाजिकता का प्रतीक माना जाता है। परिवार के सदस्य जिस कमरे में एक साथ बैठते हैं या समय बिताते हैं, उस कमरे में नारंगी रंग करवाना चाहिए। मान्यता है कि नारंगी रंग मानसिक तौर पर मजबूती प्रदान करता है।
गुलाबी रंग से होली खेलने से प्रेम भाव में बढ़ोत्तरी होती है। होली वाले दिन जीवनसाथी के साथ इस रंग से होली खेलना शुभ माना जाता है क्योंकि यह रंग रिश्तों में मजबूती प्रदान करता है।
• पीले रंग का खास महत्व है। यह उत्साह का प्रतीक है जो हिम्मत प्रदान करता है।
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