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शून्य से अंकों का संवाद

શૂન્ય

संख्या एक दिन शून्य से बोली, 
करते कुछ नहीं तुम हो खाली, 
अजब-गजब सी चाल तुम्हारी, 
चाहना हमसे मिलने वाली।

सत्ता पाने की संख्या हो, 
व्यहोरिजल्ट और तिजोरी, 
शून्य से सबका दिन घबराता, 
यदि पा लिया मन यता

संख्या के बल पर सत्ता है, 
राज-काज की वैभवता है, 
जिस दल को शून्य मिलता है, 
वेवस हो मुंह की खाता है। 
संख्या से ही धन-सम्पत्ति,

और मान-इज्जत है बढ़ती, 
शून्य तिजोरी आहे. भरती, 
मन से केवल संख्या जपती। 
परीक्षा से संख्या का नाता,

हार-जीत का स्वाद चखाता, 
पर अकस्मात शून्य मिलते ही, 
सब विमूह बन जड़ हो जाता।

शून्य अब तुम मान भी जाओ, 
संख्याओं के नियम पर आओ, 
नाम और सम्मान मिलेगा, 
संख्याओं सामान मिलेगा।

शून्य जो चुप था, 
अब वो बोला.....

माना में खाली और रिक्त हूं
पर ऋण-धन से भेद मुक्त हूँ
संख्याओं के पहले लगकर,
माना में कुछ नहीं करता हूँ।

जब संख्या के बाद हूँ लगता, 
सबका दसगुणा मान बढ़ाता, 
धात बन प्रत्येक संख्या की, 
बना इकाई (1) पास बैठाता।

मुझसे जोड़-घटाव तुम करके, 
ना घबराओ ना बदलोगे, 
पर गुणन की भूल न करना, 
वरना शून्य में खो जाओगे।

पूर्ण वर्जित है शून्य दबाना, 
या संख्या के नीचे लाना, 
भाग शून्य से मत देना तुम 
वरना अनंत में गुम हो जाना।

शून्य सरल ओ परम शुद्ध है, 
मुझे रिक्त, खाली रहने दो, 
ऋण-धन के उस आदेशों से, 
स्वच्छंद, उन्मुक्त, खुला रहने दो।

नहीं चाहता पुलना-मिलना, 
या फिर कुलतिलक कहलाना, 
चाह इतनी सी मुझ शून्य को, 
मानव जीवन सरल बनाना

फुटनोट 
शून्य के अपने नियम हैं, 
शून्य संख्याओं के सभी नियम नहीं मानता 
जैसे 1 लेकिन 0/0 अनिर्धारित या शून्य
इसी प्रकार 0 = 1/0 अनंत ()
क ⁰ = 1(क = जहां कोई भी संख्या है)।

डॉ. अनुत गर्म

विभागाध्यक्ष गणित विभाग, राजकीय बांग महाविद्यालय (ग) राजस्थान 341503 ई-मेल: atuljjn@gmail.com

शून्य

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