बिहारी जी खो गए ?

बिहारी जी खो गए ?

12 दिसंबर 2021 स्थान बिहारी जी का भवन वृंदावन। हम सभी साथ थे परंतु बिटिया हम सबसे आगे थी। लड्डू जी उनके साथ में थे। चलते फिरते, वक्त वह लड्डू जी को टोकरी में रखती है जबकि किसी मंदिर में किसी देव के दर्शन कराने होते हैं तो उन्हें टोकरी से निकाल कर टोकरी के बाहर रख लेती है।

बिहारी जी के मंदिर में प्रवेश करते ही हर बार की तरह लड्डू को दर्शन कराने के लिए टोकरी से बाहर बिठा लिया। 

एक तो मंदिर में भीड़ बहुत अधिक थी और दूसरे मनमोहना बांके बिहारी जी का मनमोहक रूप जो आज उन्होंने धारण किया हुआ था। आज उन्होंने गुलाबी परिधान (पिंक ड्रेस) धारण कर रखा था। गुलाबी परिधान में सखी रूप में उन्हें देख सब कुछ भूल जाना स्वाभाविक ही था। वही हुआ हमारा ध्यान केवल और केवल बिहारी जी पर था। 

उसने बिहारी जी के दर्शन के लिए जैसे ही लड्डू को ऊपर उठाने के लिए हाथ उठाया तो वह चीख पड़ी, " डैडी जी ! लड्डू कहां गए?" 
मैरा माथा ठनका उसके एक हाथ में टोकरी थी तथा दूसरे हाथ से लड्डू को खोज रही थी। "लड्डू कहां है?" 

कहते हुए उसने मेरी तरफ देखा। मैंने टोकरी उनके उसके हाथ से ले ली और उसमें लड्डू को खोजने लगा। 

उसने अपने दोनों हाथ सिर पर रख लिए। मुझे उसके दोनों हाथ खाली दिखाई दिए थे, लेकिन मैंने उसमें ध्यान से देखा और बोली, "डैडी ! लड्डू मिल गए।" 
उसकी आवाज व चेहरे की खुशी देख एक मुस्कराहट मेरे चेहरे पर दौड़ गई और अनायास ही मेरे मुख से निकला, "बिहारी जी ! खेल गए। मिल आए।"

वास्तव में हमारे लड्डू जी बिहारी जी से मिलने गए थे और जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि हमें पता लग गया है कि वे गुम हो गए हैं, तो वे वापस आ गए। लेकिन मैंने महसूस किया कि वास्तव में बिहारी जी कुछ क्षण के लिए खो गए थे।

आपको क्या लगता है ? कि बिहारी जी शायद अपने धाम में घूम कर वापिस आ गए और जैसे ही उन्होंने देखा कि बिटिया परेशान है तो वे लौट आए हैं। 

क्या यह सही है?

राधे राधे जय श्री कृष्णा।

लेखक

ॐ जितेन्द्र सिंह तोमर

11.00/1/20/12/2021
          

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